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superfoods that will nourish your skin this winter in hindi

 superfoods that will nourish your skin this winter in hindi 



भोजन के समय दाल ,साग, सब्जी में मिलाने जाने वाले मसाले में से अधिकांश ऐसे मसले होते हैं जिनमें किसी न किसी रोग के निवारण की क्षमता होती है ।कई मसाले को एक साथ मिला देने पर उसके बहुत ही ज्यादा रुचिकर स्वाद बनता हैपर औषधि के दृष्टि से उसे सम्मिश्रण का प्रभाव गनहीन हो जाता है ऐसी स्थिति में औषधि के स्थान पर प्रयोग करने योग्य नहीं रह जाते।

  घरेलू मसाला वाटिका:-

हर मसाले में कितने ही विटामिन ,खनिज तथा दूसरे उपयोगी रासायनिक तत्व होते हैं ।इसलिए उनमें से जो रुचिकर है उनका चयन कर चटनी बनाई जा सकती है। उसे भोजन के साथ खाया जा सकता है ।यह तो हुई भोजन को स्वादिष्ट या गुणकारी बनाने की विधि पर समय कुछ समय यदि कोई रोग विकार उठ खड़ा हो तो उसकी प्राथमिक चिकित्सा हेतु इन मसाले में से जो उपयुक्त हो उन्हें चुनकर प्रयोग में लाया जा सकता है। इस प्रकार एक ही कार्य से कई प्रयोजन सजाते हैं भोजन का स्वादिष्ट होना उसमें कुपोषण निवारण गुदकारी तत्वों का समावेश होना घर में सुगंधित वातावरण रहने से चित्र प्रसन्न रहना और कृषि कितकों का सहज प्लान होते रहना इन गुना को देखते हुए इस निष्कर्ष पर सहज ही पहुंचा जा सकता है कि घरेलू सह वाटिका मसाला वादियां भी घरों में उगाई जानी चाहिए साथी यह अनुभव भी होना चाहिए कि कौन सा मसाला वनस्पति किस रोग के काम में आता है।


   जिस प्रकार हर खाद्य पदार्थ की शुद्धता आवश्यक है उसी प्रकार यह भी आवश्यक की मसाले और भी अधिक कड़ी नजर रखी जाए क्योंकि भी अधिक प्रभावी तथा अधिक संवेदनशील होते हैं ।मसाले अपनी देखरेख में उगाई जाने पर ही उनकी शुद्धता प्रामाणिकता पर विश्वास किया जा सकता है ।नित्य प्रति मसाले का प्रयोग करने से वह औषधि की भारतीय उपयोग नहीं होते अतः मसाले का प्रयोग आवश्यकता होने पर ही किया जाना चाहिए।


मसाले से चिकित्सा:-

राई या काली सरसों:

राई का प्रमुख गुण पंचक है पेट में नन्हे कीड़े पड़ जाने पर इसके पानी से कीड़े मर जाते हैं ऐसे में  राई पीसकर पेट पर लेप करने से उधर शु वह मरोड़ में आराम मिलता है।

हल्दी 

हल्दी का उबटन बहुत उपयोगी होता है खाज ,खुजली ,फुंसी आदमी  का सेवन उपयोगी रहता है। गहरी चोट लग जाने पर हल्दी का चूर्ण दूध के साथ पिलाते हैं।असली तेल नमक और हल्दी को पुल्टिस बनाकर सूजन दर्द और चोट वाले स्थान पर सिकाई की जाती हल्दी रक्त शोधक भी है ।सर्दी लगने एवं खांसी में पीसी हल्दी गर्म दूध के साथ सेवन करने से लाभ होता है। 

अदरक 

अदरक पंचक है पेट में कब्ज गैस बनना वामन खांसी कफ जुकाम आदमी से काम में लाया जाता है अदरक का रस और शहद मिलाकर चाटने से दमा सांस खांसी से लेकर छय रोग तक में सुधार होता है।


सौफ

जिन लोगों में गर्मी की अधिकता का प्रभाव दृष्टिगोचर होता है उसमें सौफ का प्रयोग भी खासकर किया जाता है यह पेशाब की जलन काम करती है या तो की मेहरून शांत करती है एवं श्रेष्ठ अमल कीटनाशक है।


मेथी

मेथी गठिया जैसे रोग में विशेष रूप से कम आती है। जकड़न सूजन में भी उससे लाभ होता है ।जुकाम सर्दी के अतिरिक्त बहुमूत्र जैसे रोगों पर भी इसे अंकुश लगता है ।भूख खुलती है आपको जरूर होता है। मेथी आयुर्वेदिक मतानुसार मूलतः बात नाशक है नाडियो की दुर्बलता में विश्व का प्रयोग करते हैं ।प्रसव के बाद स्तनपान से दूध आने व हारमोंस की अनियमितता के लिए मेथी मोदक खिलाने का प्रावधान भारतीय परिवारों में है दुर्बलता शरीर में पीड़ा थकान में यह टॉनिक का काम करती है ।


जीरा

जीरा पाचक और सुगंधित होता है अरुचि पेट फूलना अपच आदि को दूर करने में इसका अच्छा प्रभाव देखा गया डिलीवरी के उपरांत सेवन करने से गर्भाशय का कचरा साफ हो जाता है साथ-साथ स्थानों में दूध भी बड़ी मात्रा में उतरता है।




 मिर्च

औषधि वर्ग में मध्यवर्ती हरी मिर्च ही काम में लाई जाती है खाज खुजली के लिए मिर्च को तेल में जलाकर उसकी मालिश की जाती है ।जोड़ों के दर्द में भी उसकी मालिश की जातीहै। कुत्ते के काट लेने या भर रहे तो तैयार आदि के डंक मार देने अथवा मकड़ी कुचल जाने पर भी जब चंडी का मवाद वाले छोटे-छोटे दाने उड़ जाते हैं उन पर मिर्च पीसकर लगाने से लाभ होता है।




पुदीना

पुदीने का गुण शीतल है उसे लू लगने सर दर्द होने जैसी परिस्थितियों में ठंडाई की तरह बनाकर पिया जा सकता को देना लूज मोशन होने की बहुत अच्छी दवाई है।


पिप्पली 



पिपली पौष्टिक है और पाचक भी पर्याप्त दूध और शहद के साथ ले लो तो बलदायक है बच्चों को पसली चलने पर भूजी पीपली का जरा सा चूर्ण शहद में मिलाकर खिलाया और लगाया भी जा सकता है यकृत बढ़ाना, तिल्ली बढ़ना ,अफरा अपच ,वमन ,अजिणस्वास्थ्य खांसी में भी लाभदायक है।



गिलोय

गिलोय को रामबाण स्तर की संजीवनी बूटी माना जाता है। इसके गुण प्राय तुलसी से भी मिलते-जुलते हैं ।यह पुराने बुखार को तोड़ती है ।राज्य यक्ष को जड़ से खत्म करती है ।रक्तचाप हृदय रोग और मधुमेह के लिए असाधारण सिद्ध होती है। गिलोय बलवर्धक एवं जीवाणु नाशक है ।गिलोय एक मेधावर्धक औषधि है मस्तिष्क विकारों में बड़ी उपयोगी एवं रसायन है।


तुलसी

तुलसी सर्व रोग नाशक संजीवनी बूटी है जिसका विस्तृत वर्णन पहले ही हमने कर दिया



अजवाइन 



अजवाइन कफ ,बात नाशक ,एवं पित्त वर्धन है अजवाइन का लेप या उससे तेल की मालिश सूजन और दर्द वाली विकारों में करते हैं। सत अजवाइन को गर्म जल में मिलाकर घाव को साफ करना एंटीसेप्टिक घौल से साफ करने से भी बढ़कर है ।पेट में दर्द होने की स्थिति में पेट पर उसकी पोटली बनाकर सेकते हैं ।अजवाइन और लहसुन तेल मेंभुनकर छान लिया जाए इस तेल को शरीर की पीड़ा में ,चोट में कान के दर्द में ,प्रयोग किया जाता है। अजवाइन मंदागनी प्रतीत करती है, भूख बढ़ती है,अपच, एवं उधर शुल मिटती है। जीवाणु वृद्धि को रोककर एंटीबायोटिक का काम करती है। कष्ट से होने वाले मासिक धर्म एवं प्रसूति के बाद अजवाइन देने का महत्व घर-घर में प्रचलित है गरबा उत्सव को शोध करती है एवं ज्वार मिटती है।




धनिया 

हरा धनिया की पत्ती पीसकर सिर दर्द तथा अन्य सुजान पर इसका लेप करते हैं मुंह में चले या गले में रोग होने पर हरे धनिया के रस से कुल्ला करते हैं पत्तों का स्वरस नाक से नकसीर फूटने पर डालने से रक्त आना बंद हो जाता है धनिया का छिलका उतार कर उसका बी को दूध में उबालकर उसे दूध का सेवन मोर्चा मति भ्रम में करते हैं यह प्रयास अरुचि वूमेन अग्निबंधकता अधिनियम उधर शुल्क होता है।



उपर्युक्त मसाले ऐसे हैं जिन्हें घर की वाटिका में नही उगाया जा सकता है ना ही किसी अन्य विधि से बनाया जा सकता है इनमें औषधि प्रयोजन की दृष्टि से घरेलू नुस्खे के रूप में प्रयुक्त होने वाले तीन मुख्य सुहागा, काला नमक, हींग पानी या घी के साथ पेट पर लगाने से पेट दर्द में लाभ होता है। हीग भूख बढ़ती है तथा वायु का आंदोलन करती है यह केमिकल समूह में आती है तीन और औषधीय जो विशिष्ट जलवायु में ही पैदा होती है पर बड़े व्यापक पैमाने पर जिनका प्रयोग मसाले के रूप में होता है बड़े सम रूप से मसाला उपचार में प्रयुक्त की जाती है यह है लौग तेज पत्ता, दालचीनी ,छोटी फुंसी पर लौग पानी में घिसकर लगाने से शीघ्र ठीक हो जाता लौग मुख शुद्धि और तथा खांसी में भी लाभकारी होती है ।


नोट:-

ऊपर दी गई जानकारी आयुर्वेद के हिसाब से है आप सभी को किसी चीज से इसमें एलर्जी हो तो आप डॉक्टर से परामर्श करने के ही उपरांत ले क्योंकि किसी भी चीज का किसी भी व्यक्ति को साइड इफेक्ट हो सकता है इसलिए जिस चीज से एलर्जी हो इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य ले।






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