google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical Health care tips: रोज तुलसी के पत्ते खाने से क्या होता हैं?

Ads

Health care tips: रोज तुलसी के पत्ते खाने से क्या होता हैं?


 Health care tips: रोज तुलसी के पत्ते खाने से क्या होता हैं?

तुलसी, जिसे ओसिमियम बेसिलिकम भी कहा जाता है, एक प्रसिद्ध और पवित्र पौधा है जो भारतीय सभ्यता में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसकी पत्तियाँ हरे रंग की, मधुर सुगंध वाली होती हैं। यह धार्मिक और चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसे अक्सर पूजा और आयुर्वेदिक उपचार में उपयोग किया जाता है। तुलसी को लोगों के घरों में पौधे के रूप में उगाया जाता है और इसकी पूजा की जाती है। इसके पत्ते और पौधे की लहराती खुशबू से माना जाता है कि यह आसमान के देवताओं का वास होता है।


सभी रोगों की एक ही दवा "तुलसी ":-

तुलसी शब्द का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि जिस वनस्पति की किसी से भी तुलना न की जाए सके व तुलसी है ऐसी सस्ती सुलभ सुंदर उपयोगी वनस्पति मनुष्य समुदाय के लिए कोई और हो ही नहीं सकती।

कफ विकारो:-


   सभी प्रकार के कफ वाद विकारों में तुलसी उपयोगी है स्थानीय लिप के रूप में वशोथ ,संधि, पीड़ा ,मोच आदिमे इसका लेप करते हैं अवसाद एवं लो ब्लड प्रेशर की स्थिति में इसे त्वचा पर मलने से तुरंत लाभ  होता है। स्नायुतंत्र सक्रिय होता है। शरीर के बाहरी कृमियों में भी इसका लेप करते हैं ।उनके अनुसार यह अग्नि मंदता किसी भी प्रकार के उधर शुल तथा आंतों में कृमियों में उपयोगी है ।बीज प्रवाहीका में देने पर तुरंत लाभ करते हैं ।यह हृदयोतेजक ठीक करता है तथा रक्त विकारों का शोधन करती है। खांसी दमा तथा इस कारण मांसपेशियों व शरीर की हड्डी में जकड़न में इसका स्वरस बहुत उपयोगी है।

पेशाब सम्बन्धित बीमारियो मे:-

     मूत्रदाह वह विसर्जन में कठिनाई तथा गाल ब्लैडर की सूजन व पथरी में इसका बी तुरंत लाभ करता है कुष्ठ रोग की यह सर्वश्रेष्ठ दवाई है यह विषम जोर को मिटाती है किसी भी प्रकार के ज्वार के चक्र को यह तुरंत तोड़ती है जीवन शक्ति बढ़ाकर यह जीवाणुओं को पालने नहीं देती यह मलेरिया निरोधी है इसके पौधे के आसपास लगाने से मच्छर समीप नहीं आते ।इसके रस का लेप करने से मच्छर काटते नहीं ।तथा मुख्य द्वारा ग्रहण किए जाने पर इसके सक्रिय संगठन नष्ट कर देते है बीजरसायन भी है तथा दुर्बलता का नाश करते हैं।


     श्वेत तुलसी पाचक  होती है यह बालकों के प्रति से आए तथा कफ रोगों में प्रयुक्त होती है काली तुलसी कफ निस्तारण एवं ज्वरनाशक होती है सूखे पत्तों का चूर्ण पेनिस के लिए प्रयुक्त होता है तुलसी सिद्ध तेल कान  के दर्द को मिटाता है। 

बुखार में:-

      तुलसी से मलेरिया ज्वर के कारण प्रोटोजोआ परजीवी को तथा मच्छरों को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता है पहले बार सन 1907 में इंग्लैंड में इंपीरियल मेडिकल कांफ्रेंस में इस बात का रहस्य उद्घाटन किया गया था की काली तुलसी से मलेरिया का उपद्र बहुत कम हो जाता है इसके बाद बहुत से अनुसंधान इस क्षेत्र में हुए वह बड़े सफल रहे सभी ने पाया गया है कि तुलसी के पत्तो के स्पर्श की हुई वायु से ऐसे गुण होते हैं कि मच्छर पूरे परिसर में आसपास भटकते भी नहीं। वैज्ञानिकों ने तुलसी के अंदर एक ऐसा उडनशील तेल पाया है ।जो हवा में मिलकर जोर उत्पन्न करने वाले सब कीटाणुओं को नष्ट कर देता है। सर्दी से चढ़ने वाले ज्वार में विशेष कर ट्रॉपिकल क्षेत्र में ज्वार में यह पाया गया है कि इसके सेवन से सर्दी छाती में उतरने नहीं पाती और छाती में बैठा का स्वास्थ्य मार्ग से बाहर निकल जाता है। इसके रस में इतनी तीव्र समर्थ है कि इससे क्रीमी तुरंत मर जाते हैं और दस्त साफ होता है उल्टी का तुरंत समन होता है।

शरीर में बाल बढ़ाने के लिए:-


     डॉक्टर  के अनुसार तुलसी में कुछ ऐसे गुण होते हैं जिनके कारण यह भी शरीर की विद्युतीय संरचना को सीधे प्रभावित करती है तुलसी की लकड़ी से बने दोनों की माला गले में पहनने से शरीर में विद्युत शक्ति का प्रभाव बढ़ता है तथा जीव कौशल द्वारा उनको धारण करने की सामर्थ में वृद्धि होती है ।बहुत से रोग इस प्रभाव से आक्रमण करने से पूर्व ही समाप्त हो जाते हैं तथा व्यक्ति की जीवन अवधि बढ़ती है डॉक्टर के अनुसार कमजोर व्यक्ति अल्प मात्रा में तुलसी की जड़ को प्रातः सायं घी के साथ ले तो उसका ओजस व बाल बढ़ता है।


    वेल्थ आफ इंडिया के अनुसार तुलसी का रस तथा अन्य जीवाणुओं के विरुद्ध भी सक्रिय पाया जाता है इसमें प्रमुख है स्टेफिलोकोक्कस और आरिया, सालमोनेला, टाइम्स, एक्यूरेशिया कोलाय। इसकी जीवाणु नाशक क्षमता कार्बोलिक अम्ल से 6 गुना अधिक होती है।

खांसी जुकाम में तुलसी का प्रयोग

     खांसी अथवा गला बैठने पर तुलसी की जड़ सुपारी की तरह चूसी जाती है काली तुलसी का रस लगभग डेढ़ चम्मच काली मिर्च के साथ देने से खांसी का वेज एकदम शांत होता है। फेफड़ों में खरखराहट की आवाज आने व खांसी होने पर तुलसी की सूखी पत्तियां 4 ग्राम मिश्री के साथ देते हैं हिचकी एवं सांस रोग में तुलसी पत्र रस 10 ग्राम शहद के साथ 5 ग्राम देते हैं।

    ज्वर विषम प्रकार का हो तो तुलसी पत्र का क्वाथ तीन-तीन घंटे प्रसाद सेवन करने का विधान है अथवा 3 ग्राम रस मधु के साथ तीन-तीन घंटे से ले हल्के ज्वार में कब्ज भी हो तो काली तुलसी का रस दोनों को एक कटोरी में गुनगुना करके पूरी मात्रा को दिन में दो या तीन बार लेने से कब्ज भी मिटता है जो भी शांत होता है तुलसी की जड़ का काढा भी आधे औश की मात्रा में दो बार लेने से ज्वर  मे लाभ पहुंचता है। एक सामान्य नियम सभी प्रकार के जड़ों के लिए यह की 20 तुलसी एवं 10 काली मिर्च डालकर काढ़ा पिलाने से जोड़ तुरंत उतर जाता है मोतीझरा में 10 तुलसी पत्र एक मसाज जावित्री के साथ पानी में पीसकर शहद के साथ दिन में चार बार देते हैं।

उल्टी आने के समय:-


    वह वोमटिग की स्थिति में तुलसी पत्र मधु के साथ प्रातः काल व जब आवश्यकता हो पिलाते हैं। पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए अनेक रोगों के लिए तथा बालकों के यकृत लिया संबंधी रोगों के लिए तुलसी के पात्रों का फोंट पिलाते हैं। छोटी इलायची अदरक का रस और तुलसी पत्र का रस मिलाकर देने पर उल्टी की स्थिति शांत करते हैं ।दस्त  लगने पर भुने जीरे के साथ मिलकर 10 ग्राम तुलसी पत्र व एक माशा जीरा शहद के साथ दिन में तीन बार चाटने से लाभ होता है अपच में मंजरी को काले नमक के साथ देते हैं बवासीर रोग में तुलसी पत्र स्वरस मुंह में लेने पर तथा स्थानीय लिप रूप से तुरंत लाभ मिलता है।

बच्चों में संक्रमण अतिसार के समय


     बच्चों में संक्रामक अतिसार रोग में तुलसी के बीज पीसकर गाय के दूध में मिलाकर पीने से लाभ होता है प्रवाही का में पत्र सरस 10 ग्राम प्रातः लेने पर रोग आदि नहीं बढ़ता कृषि रोगों में तुलसी के पात्रों का फांट सेवन करने से कृमिजन सभी उपद्रव शांत हो जाते हैं उधर सोल में तुलसी दलों को मिश्री के साथ देते हैं तथा संग्रहणीमें 20 जून 3 ग्राम सुबह शाम मिश्री के साथ दिया जाता है।

कुष्ठ रोग में तुलसी

     कुष्ठ रोग में तुलसी पत्र स्वरस प्रतिदिन प्रयास पीने से लाभ होता है दाद खाज खुजली में तुलसी का पंचांग नींबू के रस में मिलाकर लेप करते हैं फोटो में तुलसी का पंचांग नींबू के रस में मिलाकर लेप करते हैं तथा तुलसी के बीज 1 ग्राम तथा दो गुलाब के फूल एक साथ पीसकर ठंडाई बनाकर पीते हैं। मस्से निकालने पर मंजरी व पुनर्नवा की पत्ती समान भाग लेकर क्वाथ बना कर पिए चेहरे के मुंहासे में तुलसी पत्र एवं सेंटर का रस मिलाकर रात्रि को चेहरा धोकर अच्छी तरह लिप करते हैं पर रक्त विकारों में तुलसी व गिलोय का तीन-तीन मनसे की मात्रा में काढ़ा बनाकर दो बार मिश्री के साथ लेते हैं।

आधा सिर के दर्द में तुलसी

      आधा सिर के दर्द में तुलसी की छाया में सुखी मंजरी शहर के साथ दी जाती है मेधा वर्धन हेतु तुलसी के पांच पत्ते जल के साथ प्रतिदिन प्रातः लेना चाहिए असद सिरोसूल में तुलसी पत्र रस कपूर मिलाकर सिर पर लेप करते हैं तुरंत आराम मिलता है।

नपुंसकता में तुलसी

    
    धातु की दुर्बलता में तुलसी के बीज गाय के दूध के साथ प्रातः एवं रात्रि में देते हैं ऐसा अनुभव है की नपुंसकता में तुलसी बीज चूर्ण अथवा मूल संभाग में पुराने गुण के साथ खिलाने पर तथा नृत्य डेट से 3 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ 500 सप्ताह लेने से लाभ होता है ब्रदर रोग में अशोक पत्र के रस के साथ तथा मासिक धर्म की पीड़ा में काढा को दो बार देने से लाभ होता है।

सरवन रोग नाशक है तुलसी


      तुलसी एक सर्व रोग नाशक औषधि है यहां तुलसी के प्रचार-प्रसार की कार्य योजना प्रस्तुत कर रहे हैं इसी आधार पर अन्य वन औषधीय से संबंधित योजना भी बनाई जा सकती है।

नोट:-

आजकल के भौतिक युग में बहुत सारी चीजों के लोगों को साइड इफेक्ट होते हैं ऐसे में कोई भी दवा का प्रयोग करते समय या प्राकृतिक चीजों का प्रयोग करते समय डॉक्टर का परामर्श अवश्य लें उसके उपरांत ही किसी चीज का प्रयोग करें।
   


   


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ