google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical माघ चौथ कब है 2025 म

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माघ चौथ कब है 2025 म

माघ चौथ कब है 2025 में?

ईशा माता सकट चौथ के बारे में!
सकट चौथ, जिसे माघ शुक्ल चतुर्थी, तिलकुटा चतुर्थी और तिल चौथ के नाम से भी जाना जाता है, मुख्य रूप से उत्तर भारतीय राज्यों में मनाया जाता है। यह दिन माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है। इस दिन महिलाएं अपने पुत्रों के सुख और कल्याण के लिए व्रत रखती हैं और माता सकट की पूजा करती हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, माता सकट बहुत ही दयालु हैं। राजस्थान के सकाट गांव में माता सकट को समर्पित एक मंदिर है। यह मंदिर अलवर से लगभग 60 किलोमीटर और जयपुर, राजस्थान की राजधानी से 150 किलोमीटर दूर है। आप माता सकट के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए साकत माता मंदिर जा सकते हैं।
सकट चौथ के दिन भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।

संकट चौथ हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है जो माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत को मुख्यतः महिलाएं अपने परिवार की सुख-शांति और संतान की लंबी उम्र के लिए रखती हैं।

क्यों मनाया जाता है?

  गणेश जी की पूजा: इस दिन भगवान गणेश की पूजा विशेष रूप से की जाती है। मान्यता है कि गणेश जी संकटों को दूर करने वाले देवता हैं।
  संतान की सुरक्षा: माना जाता है कि यह व्रत संतान की रक्षा के लिए किया जाता है और इससे बच्चे स्वस्थ और खुशहाल रहते हैं।
  सुख-शांति: इस व्रत को रखने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।




सकट चौथ 2025, 17 जनवरी को मनाया जाएगा।

पूजा विधि
  व्रत रखना: महिलाएं दिन भर निर्जला व्रत रखती हैं।
 पूजा सामग्री: गणेश जी की मूर्ति या चित्र, धूप, दीप, फल, मिठाई, रोली, चंदन आदि
सकट चौथ व्रत कथा
संकट चौथ की कई कथाएं प्रचलित हैं, इनमें से कुछ प्रमुख कथाएं इस प्रकार हैं:

कथा 1: कुम्हार और उसकी पत्नी

एक कुम्हार और उसकी पत्नी गणेश जी के भक्त थे। वे हर साल सकट चौथ का व्रत रखते थे। एक बार कुम्हार ने मिट्टी के बर्तन बनाकर भट्ठी में जलाए। लेकिन बर्तन नहीं पके। वह बहुत दुखी हुआ और गणेश जी से प्रार्थना करने लगा। गणेश जी प्रसन्न हुए और उन्होंने कुम्हार को बताया कि अगर वह सकट चौथ का व्रत पूरी श्रद्धा से रखेगा तो उसकी मनोकामना पूरी होगी। कुम्हार ने व्रत रखा और गणेश जी की कृपा से उसके बर्तन पक गए।

कथा 2: साहूकार और साहूकारनी

एक साहूकार और साहूकारनी थे। साहूकारनी सकट चौथ का व्रत बहुत श्रद्धा से रखती थी। एक बार उसके बेटे का विवाह हुआ। विवाह के बाद साहूकारनी ने तिलकुट नहीं बनाया। इससे चौथ माता नाराज हो गईं और उन्होंने साहूकार के बेटे को उठाकर ले गईं। साहूकारनी ने बहुत पश्चाताप किया और चौथ माता से प्रार्थना की। चौथ माता प्रसन्न हुईं और उन्होंने साहूकार के बेटे को वापस दे दिया।

कथा 3: बुढ़िया का बेटा

एक बुढ़िया का एक ही बेटा था। वह सकट चौथ का व्रत बहुत श्रद्धा से रखती थी। एक बार राजा ने आदेश दिया कि हर घर से एक बच्चे को बलि देनी होगी। बुढ़िया बहुत दुखी हुई। उसने गणेश जी से प्रार्थना की। गणेश जी प्रसन्न हुए और उन्होंने बुढ़िया के बेटे को बचा लिया।
संकट चौथ की कथाओं का सार:
  सकट चौथ का व्रत रखने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं।
 गणेश जी संकटों से मुक्ति दिलाते हैं।
  सकट चौथ का व्रत रखने से परिवार में सुख-शांति रहती है।
  संकट चौथ का व्रत रखने से संतान की रक्षा होती हैं।
संकष्टी चतुर्थी: मंत्र और विशेष उपाय
संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने से सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन विशेष मंत्रों का जाप और कुछ उपाय करने से और अधिक लाभ मिलता है।
मंत्र:

  श्री गणेशाय नमः:

 यह सबसे सरल और प्रभावी मंत्र है। आप इसे दिन में कई बार जाप कर सकते हैं।

 ॐ गण गणपतये नमः: 

यह मंत्र भी बहुत प्रभावशाली है। इसे ध्यान लगाकर जाप करने से मन शांत होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

  एकदंताय विघ्ननाशाय श्रीसिद्धिविनायकाय नमः: यह मंत्र विशेष रूप से विघ्न दूर करने के लिए प्रभावी है।

  वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभा। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।: यह मंत्र सभी कार्यों में सफलता दिलाता है।

विशेष उपाय:

 मोदक का भोग: संकष्टी चतुर्थी पर मोदक का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है।
 गणेश जी की मूर्ति या चित्र की पूजा: आप गणेश जी की मूर्ति या चित्र की पूजा कर सकते हैं।
  व्रत रखना: इस दिन व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
  गरीबों को भोजन दान: दान पुण्य का काम है। इस दिन दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
  हरी मिर्च और उड़द की दाल का सेवन न करें: मान्यता है कि इनका सेवन करने से व्रत का फल नहीं मिलता।
  चंद्रदर्शन: चंद्रदर्शन के बाद ही व्रत खोलें।
  शुद्ध मन से पूजा करें: पूजा करते समय मन को शुद्ध रखें और भगवान गणेश पर विश्वास रखें।

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