1. स्वस्थ विचार के लिए स्वस्थ आहार का होना बहुत जरूरी हैं
2 .कहते हैं जैसा होगा अन्य वैसा होगा मन इसलिए अन्य भी वैसा खाएं जो आपकी मन को शुद्ध और सरल बनाएं।
3 . आपके दूषित विचार आपकी मानसिक परेशानी को जन्म देंगे।
4 . सभी प्रकार के को विचारों से दूर रहना प्रसन्न रहने का सबसे उत्तम उपाय है।
5. प्रसन्न रहना सब रोगों की दवा है और प्रसन्न रहने के लिए आवश्यक है अपना जीवन निष्कलंक बनाया जाए
6 . निष्पाप निर्दोष पवित्र और हल्का जीवन व्यतीत करने वाला व्यक्ति ही सभी परेशानियों में प्रसन्न रह सकता है
7. प्रसन्न मन स्थिति ही वह न्यू है जिस पर शरीर रूपी भवन का निर्माण होता है।
8 . रोगों की जड़ शरीर में नहीं मन में होती है यह मानकर अपनी मानसिक संतुलन को स्वस्थ रखा जाए तो कोई शारीरिक रोग होने पर भी जीवन क्रम सामान्य ढंग से चलाया जा सकता है
10 .व्यायाम केवल शारीरिक श्रम ही नहीं यह मां और शरीर का सम्मिलित श्रम है
11.व्यायाम में श्रम होता है पर थकावट नहीं व्यायाम एक प्रकार का सुखद श्रम है जिससे संगठन एकता अनुशासन ब्रह्मचर्य की भावनाएं जागृत होती है और कामुकता की प्रवृत्ति दूर होती है
12.हंसने हंसने से व्यक्ति तरोताजा रहता है कोलेस्ट्रॉल कम होता है
13.शांत और प्रसन्न मन से किया गया सुपाच्य भोजन अमृत तुल्य है
14.औषधि सिर्फ रोगी ही कहते हैं स्वस्थ व्यक्ति नहीं
15.जिसका शरीर विकार रहित मां एवं इंद्रियां शांत हो तथा आत्मा प्रसन्न हो वही स्वस्थ है।
16.80% बच्चे भारत में दांत एवं अन्य तकलीफ के शिकार चॉकलेट एंड फास्ट फूड जंक फूड शीतल पर पान मसाला आदि के सेवन से हो रहे हैं
17.हरी तेरी औषधि है बिना बीचारे अन्य सेवन भी जहर है।
18.मानव जीवन की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अच्छा स्वास्थ्य एकमात्र विकल्प है।
19.स्वास्थ्य से तात्पर्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं है बल्कि मानसिक शारीरिक आध्यात्मिक तीनों प्रकार के स्वस्थ मनुष्य ही मानव जीवन सार्थक कर सकता है।
20.इंद्रिय नियंत्रण का मूल मंत्र है आत्म संयम
21.शरीर की शक्तियां जीव की विकास यात्रा के लिए उपयोगी ही नहीं आवश्यक भी है
22.आहार शरीर की बहुत बड़ी आवश्यकता है इससे सभी जानते हैं आहार न मिले तो जीवित रहना मुश्किल हो जाए परंतु आहार हमारा कैसा होना चाहिए इस पर विचार हम नहीं करते
23.हमें अपने जीवन में एक संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मेरा मन पर पूर्ण अधिकार है ।मैं अपने मन का स्वामी हूं ।यह मेरी आज्ञा से कार्यकर्ता है ।प्रचंड अग्नि और भयंकर तूफान भी मुझे नहीं नष्ट कर सकते ।मैं अमर हूं ।शाश्वत हूं। शरीर का सम्राट हूं ।मैं असंख्य के सूर्य की शक्ति रखता हूं ।मैं विश्व को प्रेम में देखता हूं। मेरा मन से कोई विरोध नहीं है। मैं जो कुछ करता हूं ।वह सब आत्म कल्याण की भावना से होता है।
24.अयोगी को नियंत्रण काबू में रखने की सहनशक्ति का ही पर्याय संयम है।
25.मानसिक संयम शारीरिक संयम की बुनियाद है
26.संयम न रखने का प्रभाव सदा ही व्यक्ति के ऊपर नकारात्मक पड़ता है।
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