27 दिसंबर: कुछ प्रमुख घटनाएं और त्योहार हैं:
दिसंबर माह में बहुत ही महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण घटनाएं हुई है जिसमें एक हमारे पूर्व प्रधानमंत्री कवि पंडित अटल बिहारी वाजपेई की जन्म शताब्दी वर्ष शुरू हुआ उसके बाद दिसंबर मास में ही उनका जन्म हुआ है ।
दिसंबर माह में पंडित मदन मोहन मालवीय जो कि भारत रत्न से सम्मानित किए गए थे उनका भी जन्म हुआ थ
पंडित मदन मोहन मालवीय भी एक शिक्षाविद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और समाज सुधार में अपना बहुत ही मत महत्वपूर्ण योगदान दिया था पंडित मदन मोहन मालवीय भी एक विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे ।
पडित मदन मोहन मालवीय: भारत के महामना
पंडित मदन मोहन मालवीय एक महान भारतीय शिक्षाविद्, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक थे। उन्हें भारत की शिक्षा प्रणाली में उनके अतुलनीय योगदान और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका के लिए जाना जाता है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
जन्म: 25 दिसंबर, 1861 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था।
शिक्षा: उन्होंने कानून की पढ़ाई की और एक सफल वकील बने।
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना: उनका सबसे बड़ा योगदान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की स्थापना थी। इस विश्वविद्यालय ने भारतीय संस्कृति और शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिक्षा सुधार: उन्होंने भारतीय शिक्षा प्रणाली में कई सुधार किए और शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाने का प्रयास किया।
स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका
कांग्रेस में सक्रियता: वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक प्रमुख सदस्य थे और कई बार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
स्वदेशी आंदोलन: उन्होंने स्वदेशी आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दिया।
समाज सेवा
समाज सुधार: उन्होंने कई सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अस्पतालों और आश्रमों की स्थापना: उन्होंने कई अस्पतालों और आश्रमों की स्थापना की।
सम्मान और पुरस्कार
भारत रत्न: भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2014 में भारत रत्न से सम्मानित किया।
विरासत
पंडित मदन मोहन मालवीय की विरासत आज भी जीवंत है। उन्होंने भारत को एक महान शिक्षाविद् और नेता दिया। बीएचयू आज भी देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में से एक है।
महामना के रूप में जाने जाने वाले पंडित मदन मोहन मालवीय का जीवन और कार्य हमेशा देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत रहे हैं।
जनगण मन का पहला गायन: 1911 में आज ही के दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता (अब कोलकाता) अधिवेशन के दौरान पहली बार 'जन गण मन' गाया गया था।जन गण मन भारत का राष्ट्रगान है। यह मूलतः बंगाली में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित था। 24 जनवरी 1950 को भारत के संविधान सभा द्वारा इसके हिंदी संस्करण को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था।
इतिहास:
रचना: रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 11 दिसंबर 1911 को बंगाली में "भारत भाग्य विधाता" नामक गीत की रचना की थी।
पहला गायन: 27 दिसंबर 1911 को कोलकाता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार "भारत भाग्य विधाता" गाया गया था।
राष्ट्रगान के रूप में अपनाना: 24 जनवरी 1950 को भारत के संविधान सभा द्वारा "जन गण मन" को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था।
राष्ट्रगान का महत्व:
राष्ट्रीय एकता और गौरव का प्रतीक
देशभक्ति की भावना को जागृत करता है
राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक
राष्ट्रगान का सम्मान:
राष्ट्रगान का सम्मान करना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है।
राष्ट्रगान गाते समय खड़े होना चाहिए और ध्यान देना चाहिए।
राष्ट्रगान के दौरान किसी भी प्रकार का अपमान या अपशब्द नहीं बोलना चाहिए।
अन्य जानकारी:
राष्ट्रगान का पूरा संस्करण 52 सेकंड का होता है।
एक संक्षिप्त संस्करण भी है जो 20 सेकंड का होता है।
राष्ट्रगान का संगीत भी रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा ही रचित
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की स्थापना: 1945 में आज ही के दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने के लिए विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना की गई थी।
सफला एकादशी: हिंदू धर्म में, सफला एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।
इसके अलावा, 27 दिसंबर को कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं भी हुई हैं, जैसे:
1907 में आज ही के दिन पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो का जन्म हुआ था।
2007 में आज ही के दिन बेनजीर भुट्टो की हत्या कर दी गई थीं।
दिसंबर महीने में कई महत्वपूर्ण तिथियां हमारे सामने आती है साल के अंत में हमार सामने पंडित अटल बिहारी वाजपेई और पंडित मदन मोहन मलवीय दोनोंहैकी जन्मजयंती पड़ती है। दोनों महान विभूतियां ही भारत रत्न से सम्मानित व्यक्तित्व है।
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