Health care:आहार: हमारा मित्र और शत्रु भी
आहार का उद्देश्य:-
आहार का मुख्य उद्देश्य शरीर की क्षीणता पूर्ति करना और इसकी वृद्धि करना भी है. छोटा सा शिशु जिसका भार जन्म के समय तीन या चार किलोग्राम होता है धीरे-धीरे बढ़कर आधे कुंटल का युवक बन जाता है. तो यह आहार के द्वारा ही संभव होता है .मनुष्य का शरीर प्रतिक्षण कुछ ना कुछ कार्य करता रहता है .गहरी नींद में सो जाने पर भी फेफड़े और हृदय अपना काम करते रहते हैं .इस कार्य के फल स्वरुप शरीर के कोषानु निरंतर टूटे रहते हैं जिसकी मरम्मत अथवा बदलने का भार हमारी जीवनी शक्ति पर रहता है. यह कार्य आहार के माध्यम से ही किया जा सकता है. यदि किसी कारणवश शरीर को समय पर उपयुक्त आहार न मिले तो थकावट और कमजोरी मालूम पड़ने लगती है और यदि निरंतर कितने ही दिन तक ऐसा ही कम चले तो शरीर दुर्बल छीन हो जाता है और अंत में प्राणों का धारण कर रखना भी कठिन हो जाता ह
आहार से हमारे शरीर में गर्मी अथवा तप की भी उत्पत्ति होती है. जिसका मापन कैलोरी के रूप में किया जाता है .ताप हमारे जीवन का लक्षण माना जाता है .मनुष्य के मृत्यु काल में तप की परीक्षा की जाती है. जब तक शरीर के किसी अंग में गर्मी जान पड़ती है तब तक जीवन की आशा की जाती है पर जब शरीर सर्वथा ठंडा पड़ जाता है .भीतर बाहर कहीं भी जरा सी गर्माहट प्रतीत नहीं होती तो उसे मुर्दा कह दिया जाता है यह शरीर तप हमारी जसरा अग्नि में खाद्य पदार्थों के ईंधन की तरह जलने से ही पैदा होता है और इसी से हम कार्य सक्षम बने रहते हैं.
भोजन के पांच मुख्य उपादान:-
खाद्य वस्तुओं का वैज्ञानिक प्रणाली से विश्लेषण करने पर जो मुख्य पदार्थ पाए गए हैं उनको 6 भागों में विभाजित किया गया है -1:प्रोटीन 2:वास या चर्बी 3:कार्बोहाइड्रेट्स या शर्करा अथवा4: विभिन्न खनिज लवण जल जो अनेक हड्डियों के आधे या पवन भाग से भी अधिक होता है और अंत में5: विटामिन स्वास्थ्य की दृष्टि से इन सब पदार्थ का हमारे शरीर में एक नियत परिणाम में रहना आवश्यक है .इनमें घटा बड़ी होने से भी विभिन्न प्रकार के रोगों का सूत्र होता है .इसलिए हमको अपने आहार को निश्चित करते समय ऐसी वस्तुओं को चुनना चाहिए जिससे वह सभी तत्व हमारे शरीर की विशेष परिस्थिति हमारे काम धंधे और हमारी जन्मजात प्रकृति की दृष्टि से उत्पत्ति पर उचित परिणाम में प्राप्त हो सके.
प्राकृतिक संतुलित भोजन की आवश्यकता:-
जो व्यक्ति अपने भोजन में बहुत अधिक परिवर्तन नहीं कर सकते वह यदि अपने वर्तमान भोजन में आवश्यक सुधार कर ले और आहार का परिमाण घटकर उतना ही रखे जीतने की शरीर को वास्तव में आवश्यकता है. तब भी वे सदैव स्वस्थ और रोगों से बचे रह सकते हैं. भारतीय भोजन की प्रशंसा करने वाले एक विद्वान ने लिखा है कि भारतवासियों के दांत बड़ी उम्र तक मजबूत रहते हैं पर अंग्रेजों के दांत पराया जल्दी गिर जाते हैं इसका कारण दोनों के खाने का अंतर ही है भारतवासी प्राय मोटा सदा और अपने हाथों से तैयार किया भोजन खाते हैं जबकि अंग्रेज अक्सर होटल में कृत्रिम ढंग से प्रस्तुत खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं जो ऊपर से तो चमक दमक वाले होते हैं पर कई तरह के जीवन तत्वों की दृष्टि से स्वास्थ्य के विरुद्ध ही सिद्ध होते हैं.
खाद्य पदार्थों में गेहूं सर्वश्रेष्ठ है गेहूं में पाए जाने वाला श्वेत सर और लसदर आता गर्मी और फुर्ती पैदा करने में बहुत बढ़िया होते हैं लसदर आटे से बाहर चोकर की कई तरह होती है जिनमें फास्फोरस और अन्य खाद्य ,लवण काफी परिणाम में पाए जाते हैं इनमें से फास्फेट हड्डियों और दांतों के निर्माण तथा मजबूती में बहुत सहायक होते हैं गेहूं में विटामिन बी भी पाया जाता है जो स्नायु को ठीक दशा में रखने के लिए आवश्यक माना गया है .गेहूं के बाहरी भाग में बिल्कुल खुरदुरा चोकर रहता है. जो यद्यपि हमारे शरीर का पोषण तो नहीं करता पर अन्य पदार्थों को हजम करने में सहायक होता है और माल को बाहर निकलने में काम आता है पर यह सब लाभ तभी प्राप्त हो सकते हैं जब हम गेहूं का मोटा आटा पीसकर बिना छना हुआ व्यवहार में लाएं.
यही बात दूध के संबंध में भी है यही यह भी शरीर को बनाने वाला सर्वोत्तम पदार्थ है और इसमें कैल्शियम ,फास्फेट ,मैग्नीशियम ,लोहा और विटामिन सभी स्वास्थ्य के लिए उपयोगी तत्व पर्याप्त रूप में प्राप्त होते हैं .दूध से लाभ उठाने का तरीका उसे कच्चा पीना या मंदी आंच पर उबालकर पका कर काम में लाना ही है .दूध का दही और माथा बनाकर काम में लाना और भी अधिक लाभदायक होता है क्योंकि यह शीघ्र पाचन हैं. और इनमें ऐसा एसिड पैदा हो जाता है जो हाथों के तंतुओं को पोस्ट करके वृद्धावस्था को दूर रखता है दही और माथा दीर्घ जीवन प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम पदार्थ में से एक है.
प्राकृतिक भोजन की तीसरी आवश्यक चीज हरितरकारियां है. सब्जियां विटामिन के सबसे बड़े स्रोत है .अनाज और घी तेल के खाने से हमारे शरीर परिश्रम करने लायक बने रहते हैं पर हमारे चेहरे और अंगों की ताजगी और रौनक विटामिन से ही आती है. प्राकृतिक चिकित्सा आजकल सलाद का प्रयोग करने पर बहुत अधिक जोर देते रहते हैं. इसका आशय यही है कि भोजन के साथ हमको काम से कम आधा या एक पाव हरी सब्जियां अवश्य खानी चाहिए जो पके ना गई हो. ऐसे ही काटकर पड़ोसी गई हो जिसे सलाद कहते हैं ऐसी चीजों में मूली गाजर टमाटर खीरा ककड़ी धनिया पुदीना आदि का नाम लिया जा सकता है .अगर इनमें सलाद कर्मकल या पालक की पत्तियां मिला दी जाए तब भी स्वाद में कोई अंतर नहीं पड़ता और यह तीनों चीज विटामिन की दिशा से सर्वश्रेष्ठ होती है..
पौष्टिक किंतु सर्व सुलभ आहार:-
स्वस्थ और शक्तिशाली शरीर के लिए आधुनिक वैज्ञानिकों ने जिन पोषक तत्वों को आवश्यक बताया है वह है प्रोटीन, लवण ,कार्बोहाइड्रेट, चर्बी और विटामिन भोजन में यह तत्व पर्याप्त मात्रा में रहे तो शरीर की आवृत्ति और उसकी अद्भुत मशीन में होने वाली टूट फूट का कार्य भली प्रकार चलता रहता है.
समझा जाता है कि जिन पोषक तत्वों के लिए उच्च कोटि का आहार चाहिए जैसे विटामिन के लिए सूखे मेवे दाल और सुखी फलियां वाले सांग चर्बी के लिए बादाम अखरोट पिस्ता काजू घी विटामिन के लिए सब्जी फल दूध दही आदि जिन खाद्य पदार्थों में यह तत्व पर्याप्त मात्रा में है उनकी एक लंबी सूची है और जब भी कभी पौष्टिक भोजन की बात चलती है .तो औसत स्तर के व्यक्ति इसे महंगा होने के कारण अपने लिए दुर्लभ ही बताते हैं परंतु बात ऐसी नहीं है साधारण भोजन भी ठीक प्रकार से खाया जाए तो उसमें भी पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक तत्व मिलते हैं. अधिकांशत सामान्य खाद्य पदार्थों में भी पर्याप्त मात्रा में विटामिन और पोषक तत्व मिल जाते हैं जीतने की महंगे और सुख में हुए फलों में गेहूं ,ज्वार, बाजरा, मक्का आदि अनाज तथा साग सब्जीयां भी पोशाक तत्वों से भरपुर है फिर क्या करण है की इन पोशक तत्वों में परिपाटी मात्र में विटामिनस होते हुऎ भी अधिकअंश व्यक्तियों का भोजन पोषण रहित या पोषण देने वाला होता है किसी स्वास्थ्य वैज्ञानिक ने इसका करण बताते हुऎ लिखा है की अधिकअंश लोग इसीलिये बीमार नहीं पढ़ते की उन्हें पोशक आहर जैसे महंगे बताया जाते हैं ,नहीं मिलती ब्लकि इसलिए बीमार रहने लगते हैं की उनके खनपान का तारिका अवैधानिक होता है यदी बुद्धि मानी से भोजन का चुनाव किया जाए तो हम काफी सस्ते मूल्य में परिवार के लिए अच्छा और पोषण पूर्ण भोजन जुटा सकते हैं.
पोषक तत्वों की पर्याप्त प्राप्ति के लिए कोई जरूरी नहीं की महंगे फल ही खा जाए सभी क्षेत्रों में होने वाली मौसमी फल मिल जाते हैं जो काफी सस्ते भी रहते हैं जैसे खीरा,ककड़ी,अमरुद ,जामुन, आम, चीकू, पपीता आदि.
इतना खर्च भी अपनी शक्ति से बाहर लगे तो 1 किलो गाजर भी काफी है कच्ची गाजर मैं पर्याप्त मात्रा में विटामिन ई ए खनिज लवण होते हैं गाजर के अलावा शलजम, मूली ,टमाटर आदि सब्जियां भी पर्याप्त पोषक तत्वों से पर पूर्ण रहती हैं.
इसी प्रकार आवला भी पर्याप्त पोषण पूर्ण खाद्य है इनमें विटामिन सी की बहुत अधिक मात्रा होता है जो कि दांतों और रक्त के लिए बहुत आवश्यक है जिन दिनों ताजा अवल मिलते हैं उन दिनों कच्चे अवल खाने चाहिए यदि अच्छे ना लगे तो उनकी चटनी बनाई जा सकती है जब अवल की फसल उत्तम हो जाए तो सूखा आंवला इस्तेमाल किया जा सकता है रात को वाला भिगोकर उसे सील भट्टे पर पीसकर चटनी बनाई जा सकती है इस प्रकार कितने ही तरीकों से आलू का उपयोग किया जा सकता है विटामिन सी और खनिज लवण के अतिरिक्त अवलों में और भी कई पोषक तत्व होते हैं आयुर्वेद में तो उसे वृद्ध व्यक्तियों को भी सेवन करने से उनका यौवन प्रदान करने वाला बताया गया है.
दूध की आवश्यकता भी सभी घरों में पड़ती है और प्राय सभी लोग थोड़ी बहुत मात्रा में दूध खरीदने हैं यह बात और है कि महंगा होने के कारण दूध पर्याप्त मात्रा में नहीं खरीदा जा सकता ऐसी दशा में दूध का विकल्प सेपरेटर दूध खरीद जा सकता है सेपरेटर दूध शुद्ध दूध की अपेक्षा सस्ता होता है शुद्ध दूध उसमें एक ही गुण कम है वह है घी मक्खन शुद्ध दूध में घी या मक्खन निकालकर ही सफलता तैयार किया जाता है उसमें घी भले ही नहीं रहता परंतु उसके अलावा सभी पोषक तत्व प्रोटीन कैल्शियम खनिज लवण और विटामिन उतनी ही मात्रा में रहते हैं जितने की शुद्ध दूध में.
आहार में पोषक तत्वों की रक्षा के लिए सब्जियों को अधिक देर तक नहीं पकाया जाना चाहिए और ना ही उसमें बेहद मसाले वगैरा डालकर उसकी पौष्टिकता को नष्ट करना चाहिए इस प्रकार साधारण आदमी वाला परिवार भी अपने लिए पोषण पूर्ण आहार अपनी शक्ति सामर्थ के भीतर रहकर भी प्राप्त कर सकता है.
प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में अंकुरित आहार सबसे अधिक महत्वपूर्ण है अंकुरित होते समय बीजों में पाई जाने वाली प्रोटीन विटामिन एंजाइम एवं मिनरल की वृद्धि आसान रूप से होती है उसे स्थिति में एंजाइम की मात्रा बीजों में अत्यधिक बढ़ जाती है जो शारीरिक चयापचय क्रिया को अधिक अच्छी तरह संपन्न कर रक्त संचार व पाचन तंत्र को विशेष शक्ति प्रदान करते हैं.
तेज आग पर उबाल देने या भून देने से बीजों की अंकुरण क्षमता पारायण नष्ट हो जाती है और जीवन शक्ति भी बहुत मात्रा में काम हो जाती है अंकुरित आहार कम मात्रा में ग्रहण किए जाने पर भी पोषण की आवश्यकता पूरी हो जाती अंकुरित करने के लिए कोई भी अनाज या बीज का प्रयोग किया जा सकते हैं इसमें परिवर्तन भी करते रहना चाहिए सामान्यतः अंकुरण के लिए गेहूं, चना ,मूंगफली ,मटर ,सोयाबीन आदि प्रयोग किए जाते हैं दानेदार अन्य को अंकुरित कर खाना लाभप्रद होता है इसमें पोषक तत्व की मात्रा बढ़ जाती है गेहूं चना मटर मूंग आदि को अंकुरित करने के लिए 12 से 14 घंटे तक भी खोले बाद में पानी अलग कर मोटे कपड़े में पोटली बांधकर 24 घंटे तक लटका दें अंकुरण अंकुरित होने पर चबा चबाकर खाएं तो बहुत लाभ होगा दांतों के व्यायाम के साथ ही पाचक रस भी अधिक मिल जाता है.
कच्ची हरी साग सब्जियां एवं अंकुरित अनु के क्लोरोफिल युक्त रस को ग्रीन ब्लड के नाम से भी संबोधित किया जाता है इसमें पोशाक प्रदान करने एवं स्वास्थ्यवर्धक करने वाले सभी प्रकार के तत्वों का समावेश होता है खून को शुद्ध करके रक्त कार्य की अभिवृद्धि करने में उसे रक्त की भूमिका महत्वपूर्ण होती है चिकित्सा विज्ञान डॉक्टर विशाल इसे सूर्य शक्ति केंद्रित मानते हैं और कहते हैं कि क्लोरोफिल के अनु मानव रक्त में पाए जाने वाले हीमोग्लोबिन करो से बहुत कुछ सामान्य रखते हैं यही कारण है कि इसके सेवन से रक्त कणों की संख्या में आधारण रूप से अभिवृत्ति देखी जाती है हर रस का नियमित सेवन रक्त अभी संरक्षण की प्रक्रिया को संतुलित तथा हृदय तंत्र को सशक्त बनाता है स्वसन तंत्र गर्भाशय एवं आंतों के लिए इसे विशेष लाभकारी पाया गया है कैक निर्माण में काम आने वाले अमीनो एसिड की प्रक्रिया को तीव्रता प्रदान कर पुष्टिवर्धन का कार्य भी ग्रीन ब्लड से शहर संभव बन पड़ता है इन्हीं गुना के कारण इसे एक उत्तम टॉनिक माना गया है.
आहार के संबंध में क्या-क्या सावधानियां हमें लानी चाहिए:-
आहार के संबंध में हमें कुछ स्वर्ण सूत्र स्मृति में ही नहीं वरन आस्था में भी प्रतिस्थापित करने चाहिए तभी हम आरोग्य पूर्ण जीवन का भरपूर आनंद प्रदान कर सकते हैं इस सूत्र निम्नलिखित है:-
# याद रखिए जीवन खाने के लिए नहीं खाना जीवन के लिए है
# जायके लिए हमारे पेट मत खराब करिए वर्णन औषधि की तरह आहार को प्रयोग में लाइए जो जीवन की कसौटी पर कसकर ही अंगीकार करिए.
# भूख लगे बिन कुछ मत खाइए आधा नहीं तो तीन चौथाई से ज्यादा पेट कभी ना भरा जाए इसका ध्यान रखें.
# मसाले का तली हुई चीजों का मिठाइयों का पूरी तरह बहिष्कार कीजिए
# अपनी प्रकृति के अनुरूप वह आहार लीजिए जो जल्दी गजब होता हो आहार में सांप भाजी का प्रयोग अधिक से अधिक राखी
# दो बार से अधिक भोजन मत कीजिए बीच-बीच में कुछ खाते रहने की आदत बिल्कुल छोड़ दीजिए.
# प्रातः काल के जलपान में केवल दूध छाछ जैसा हल्का पर ही लीजिए
# खूब चबाकर और प्रसन्नता की मां स्थिति में ईमानदारी की कमाई का भजन करिए
अंत में हम कह सकते हैं कि निरोग रहने के लिए आपको मित् भूख. हित भूख तथा रितु भूख होना चाहिए. मित् भूख अर्थ है हमें भूख से कम खाना चाहिए. हित बुक से तात्पर्य है कि खाने योग्य और न खाने योग्य अच्छी प्रकार से समझते हुए केवल सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए. रितु भूख का प्रयोजन है कि हम पर उसे धन अथवा अन्य के उपार्जन के ढंग का प्रभाव पड़ता है जिस भजन हमारा तैयार किया गया है. कृष्ण ने दुर्योधन के अधर्म के धन के व्यंजन त्याग पर विदुर के घर का साक खाना स्वीकार किया था. अनीति से कमाए धन से बना अन्य आपके लिए हितकर ही होगा यदि इन बातों का ध्यान रखेंगे तो बीमार पड़ने का अवसर आएगा ही नहीं.
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