Health care tips:मानसून के मौसम में हमें क्या करना चाहिए?
बरसात का मौसम जैसे ही शुरू होता है वैसे ही एक बहुत ही रोमांचक मौसम बनने लगता है जिससे गर्मी से तो राहत मिलती ही है साथ में बारिश की बूंदों का बार बार गिरना हमें एक अलग ही सुकून का अहसास दिलाता है। बारिश होने पर हमें जो सुखद अहसास मिलता है वह तो हमारे लिए ठीक है लेकिन जब यही बारिश बहुत ज्यादा हो सकती है जैसी की बारिश के सीजन में अक्सर होता ही है तो यह हमारे लिए मुसीबत भी बन जाता है।
बारिश के मौसम में एन्जॉय करना तो ठीक है लेकिन खुद की हेल्थ का ध्यान रखना और इम्पोर्टेन्ट हो जाता है। इस मौसम में वायरस का हमला बहुत ज्यादा होता है और वातावरण में चारो ओर संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है जिससे इस वर्षत के मौसम में हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक सावधानी और सावधान रहना पड़ता है जिससे हमें इस मौसम में बीमारियों से बचना और इस सुहावन को प्रभावित करना पड़ता है।
तो चलिए दोस्तों, हमें इस आर्टिकल में नीचे बारिश के मौसम में खुद की हेल्थ का ध्यान रखने के लिए कुछ बेसिक टिप्स शेयर किए गए हैं जिन्हें अगर आप फॉलो करेंगे तो आपको निश्चित रूप से फायदा होगा
बारिश में भीगने से बचे:
कई लोग इस मानसून में बारिश का लुफ्त लेने के लिए हमेशा बारिश में नहाने जाते हैं, जो उन्हें गर्मी से राहत दिलाता है लेकिन यही बारिश में स्नान का मजा कई बार दुखद अहसास में भी बदल जाता है। अक्सर कई बार तेज धूप के बाद एक दम से बारिश हो जाती है, ऐसे में उस बारिश में नाना नुकसान कर सकते हैं। बारिश में स्नान का सबसे बड़ा नुकसान सर्दी - जुकाम होने का है।
बारिश होने पर इसी तरह वायरस वातावरण में अधिक सक्रिय होते हैं जिससे अगर आप थोड़ी सी भी ढील दे दी तो आप इन वायरस की चपेट में आ जाते हैं जो आपको बीमार कर देता है। इसलिए बारिश में स्नान से बचे और अगर आपको गर्मी से राहत पाने के लिए नहाना ही है तो आप अपने बाथरूम में नहाये जो की आपके लिए बेहतर विकल्प है।
पानी हमेशा उबला हुआ पीये:
मानसून में हमेशा आपको पानी उबाल कर पीना चाहिए। अगर आपके पास पानी फिल्टर है तो आपका ठीक है लेकिन अगर पानी फ़िल्टर नहीं है तो पानी को पहले उबाल ली जाए और फिर ठंडा होने पर पानी पीने के लिए इस्तेमाल करें। इस उबले हुए पानी का इस्तेमाल 24 घंटे के अंदर ही कर ले क्योंकि उसके बाद उसे इस्तेमाल करने से आपको यार्डसम से घेर सकता है।
मानसून में पानी के गंदे होने के चांसेस बढ़ जाते हैं जिसका इस्तेमाल करने पर हमें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ज्यादातर बारिश के मौसम में बीमारियाँ गंदे पानी को पीने से ही होते हैं। इसलिए साफ और उबला हुआ पानी ही पीये। इसके अलावा आप जर्म से बचने के लिए अदरक की चाय या गरमा गर्म सूप पी सकते हैं।
सब्जियों के सेवन पर ध्यान दे:
बारिश के मौसम में एक बात का आपको हमेशा ध्यान रखना है की हमेशा जब आप भी सब्जी बनाये तो पहले वो सब्जी को खरीदे उस सब्जी की क्वालिटी जरुर चेक कर ले। बारिश के मौसम में ज्यादातर सतर्कता हमेशा गन्दी और कीड़े ही आती है। इन सब्जियों में कई बार कीड़ा आ जाता है जो आपके इस्तेमाल करने पर आपके शरीर में प्रवेश कर जाता है जो आपको काफी नुकसान जकर सकता है।
सब्जी अगर साफ लग रही है तो उसे इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह से धो ली जाए और फिर अच्छी आंच के साथ उस पकाए जिससे अगर कोई कीड़ा उस सब्जी में भी होगा तो वह सब्जी के उबाल में मर जाएगी। इस तरह से सब्जी का इस्तेमाल सही तरह से करते हैं और वायरस से बच जाते हैं।
सही चीजे खाए:
मानसून में आपको हमेशा अपने खान पान का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। खाने पीने के बारे में आपको वैसे भी बहुत सजग होना चहिए लेकिन बरसाती मौसम में आपको अवेयर हो ही जाना चहिए। इस मौसम में आप फास्ट फूड यानी जंक फूड खाने से बच जाते हैं। चाउमीन, बर्गर, पिज्जा या कुछ और ये चीजे खाने में टेस्टी जरूर लगती है लेकिन स्वास्थ्य क्ले इनका नुकसान के अनुसार ही होता है।
इसलिए जरुरी हो जाता है की आप फास्ट फूड की जगह पर अच्छे फ्रूट्स खाइए और जूस पीते रहें। मुंह के टेस्ट के बजाय हेल्थी खाने को अधिक तव्वजो दे। कुछ भी बासी न खाए। बासी खाने में जर्मन पैदा हो जाते हैं। हमेशा फ्रेश खाना खाएं। इस तरह से आपको मानसून में मौसम के साथ साथ खुद को एडजस्ट करने के लिए सही खाना पीना बहुत जरूरी है।
बुखार आने पर दवाई ले ले:
अंत में मैं आपको यह कहूँगा की कई बार हम अपना बहुत अच्छी तरह से ध्यान रखते है लेकिन थोड़ी सी लापरवाही के कारण हम बुखार की चपेट में आ जाते है जिससे हमें सर्दी जुकाम, सिर दर्द, पेट ख़राब या हल्का बुखार हो जाता है। इस तरह के मौके पर कभी-कभी अपने बारे में बुखार या सर्दी जुकाम को हलके में न ले। मानसून की बारिश में वायरस चारो ओर अधिक संख्या में होते हैं जिससे कोई भी बीमारी बढ़ी हो सकती है।
आयुर्वेदानुसार, वर्षा ऋतु या मानसून में बारिश से हवा में नमी, पानी और वातावरण की अम्लता बढ़ती है। नदियाँ दूषित होती हैं। बढ़ती अम्लता, मौसम की ठंडक से वर्षा ऋतू में वात प्रकोप और पित्त संचय होता है।
भूख, पाचन शक्ति, शारीरिक ताकत और इम्युनिटी इन सभी में इस मौसम में स्वाभाविक रूप से कमी आती हैं। पाचन से संबंधित समस्याओं जैसे कि गैस, अपचन, दस्त से बचने के लिए, आयुर्वेद में वर्णित विशिष्ट आहार और जीवन शैली का पालन करना चाहिए। पचने में आसान, प्रकुपित वातशामक और पित्त को न बढ़ानेवाला आहार लेना चाहिए।
आयुर्वेदद्वारा मानसून में स्वास्थ्यरक्षा के लिए बताए दिशानिर्देश हैं:
-साफ, गुनगुना पानी पिए I पाचन ठीक होने के लिए खान पकाने में अदरक, काली मिर्च का उपयोग करें।
-गेहूं, जौ, मूंग, मसूर, गाय का घी उचित मात्रा में लें। खट्टा, नमकीन सब्जी सूप या करी लें।
-तिल तेल से मालिश करें। स्नान के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें।
- कच्चा, भारी, तला हुआ और जंक फूड ना खाए।
-अधिक भारी बारिश, अधिक व्यायाम, दिन में सोना, रात्री में जागरण इनसे बचे।
मानसून के आते ही हमें अपने स्वास्थ्य का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। इस मौसम में हमारी पाचन प्रणाली भी कमजोर हो जाती है। बीमारियां तो जैसे इस मौसम में अपना घर बना लेती हैं। बच्चों व बूढ़ों को तो इस मौसम में अपने स्वास्थ्य का बहुत अधिक ध्यान रखना पड़ता है।अगर हम चाहते हैं, कि इस मौसम में हम अपने स्वास्थ्य को बनाए रखें तो इसके लिए हमें कुछ बातों की ओर विशेष ध्यान रखना होगा। हम इस मौसम में हमेशा उबला हुआ ही पानी पीए ,दूध वाली चाय की बजाय, हर्बल टी ,अदरक की चाय व नींबू की चाय ही अधिक पीए।
खाना खाने से पहले व बाद में हाथों को अच्छी तरह से धोएं। अधिक तला व भूना हुआ खाना ना खाएं। हल्का व सुपाच्य भोजन ही खाएं इस मौसम में बासी खाना न खाएं। इस मौसम में बारिश के कारण कीट - पतंगे अधिक हो जाते हैं। इसलिए कीटाणु नाशक दवा का घर में छिड़काव करें। बच्चों को बारिश के पानी में ज्यादा ना खेलने दे। इससे बच्चों को फंगल इनफेक्शन व बुखार होने का अधिक खतरा बना रहता है। घर का बना हुआ ताजा खाना ही खाएं ।
बाहर के खाने से परहेज करें व नियमित अभ्यास करें। इस मौसम में मलेरिया बुखार होने का अधिक खतरा रहता है । अगर आप चाहते हैं कि इस मौसम में मलेरिया बुखार से बचे रहें तो बारिश का मौसम आने से एक या दो महीने पहले सप्ताह में एक या दो बार नीम के दो तीन पत्ते खा ले।
अगर आपको नीम खाना अच्छा नहीं लगता है, तो नीम का दातुन ही कर ले। इससे कुछ न कुछ अंश हमारे पेट में चला जाता है और हम इस मौसम में होने वाली बीमारियों से बचे रहते हैं। इस तरह से अगर हम छोटी-छोटी बातों का इस मौसम में ध्यान रखते हैं तो हम अपने आप को मानसून के मौसम में स्वस्थ रख सकते हैं।
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