google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical मेनोपॉज़ क्या होता है?

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मेनोपॉज़ क्या होता है?




मेनोपॉज़ क्या होता है?


एक नया दौर


किशोरावस्था के दौरान हमारे शरीर में कई बदलाव आते हैं।

इसमें से एक बड़ा बदलाव पीरियड या माहवारी का शुरू होना है।

किशोरावस्था के दौरान, हर महीने, तीन से सात दिनों के लिए माहवारी आती है।

माहवारी के दौरान योनि (वेजाइना) से थोड़ी मात्रा में खून आता है।

कुछ लड़कियों को माहवारी के दौरान पेट में मरोड़, दर्द, पिम्पल, पीठ दर्द आदि की समस्या भी होती है।

माहवारी की शुरुवात हर एक के लिए अलग समय पर होती है। यह आठ साल की छोटी उम्र से लेकर किशोरावस्था में काफी देरी से भी आ सकती है।

माहवारी के दौरान कभी-कभी चिड़चिड़ा भी महसूस हो सकता है।

माहवारी 50-55 साल की उम्र में ख़त्म हो जाती है। इसे मेनोपॉज़ कहते हैं।

अब मैं क्या करूँ!


हेलो! मेरा नाम पिया है! मुझे अपने दोस्तों को पीरियड्स के बारे में बता कर मज़ा आया। सारा मेरी बात सुन कर थोड़ा नर्वस हो गई थी। उसने मुझ से बहुत सारे सवाल पूछ डाले। क्या मुझे कोई परेशानी हुई? मैंने क्या किया? मैंने किस से बात करी? स्कूल ख़त्म होने के बाद मैंने उसके सारे सवालों का जवाब आमने सामने बैठकर दिया। उसने मुझे से सैनिटरी नैपकिन के इस्तेमाल तरीका भी पूछा।

माहवारी (पीरियड) किट


योनि (वेजाइना) से मासिक के दौरान आने वाले खून को सोखने के लिए कई तरह के प्रोडक्ट बाज़ार में उपलब्ध हैं।

इसमें सबसे आम सैनिटरी नैपकिन है जो मेडिकल और जेनरल स्टोर पर उपलब्ध हैं।

सैनिटरी पैड अंडरवियर और जननांगों के बीच में इस तरह से रखा जाता है कि योनि (वेजाइना) का मुंह सही से ढक जाये और निकलने वाले खून को सोख सके।

माहवारी के दौरान सैनिटरी नैपकिन को दिन में तीन से चार बार बदलना ज़रूरी है। इस्तेमाल के बाद नैपकिन को उसके रैपर में लपेट कर कूड़ेदान में फेंकना चाहिए।

टैम्पून छोटे चॉक आकार के सोखने वाला एक प्रोडक्ट हैं जो माहवारी के खून को सोख लेता है।

टैम्पून को योनि (वेजाइना) के अंदर डाला जाता है और बाहर एक धागा निकला होता है ताकि उसे इस्तेमाल के बाद बाहर खींचा जा सके।

पैड की तरह टैम्पून को भी दिन में चार से छः बदलना पड़ता है। इन्हें इस्तेमाल करना आसान है और खिलाड़ियों के लिए सुविधाजनक समझा जाता है।

इस्तेमाल के बाद टैम्पून को भी रैपर में लपेट कर कूड़ेदान में डालना चाहिए।

पीरियड के खून को सोखने का एक तरीका मेंसट्रूअल कप है।

मेन्स्ट्रूअल कप रबर (सिलिकन) का बना होता हैं जिसे योनि (वेजाइना) में डाला जाता है।

कप पीरियड के खून को जमा करता है, सोखता नहीं है। मेंसट्रूअल कप इस्तमाल के बाद अच्छे से धो कर रखना चाहिए।

जब मेंसट्रूअल कप भर जाए तो उसे टॉइलट या सिंक में खाली कर साफ़ पानी से धोना चाहिए और फिर से ज़रूरत के अनुसार अंदर डालना चाहिए।

मेंसट्रूअल कप को माहवारी (पीरियड) के शुरू और अंत में अच्छे से धो कर और उबलते पानी में दस से बीस मिनट रखकर संक्रमण रहित करना चाहिए।

मेन्स्ट्रूअल कप 10 साल तक चल सकते हैं और इनसे कोई कूड़ा नहीं जमा होता

उफ़ क्या मुसीबत हैं!

मुझे यह सुनकर अच्छा लगा कि पिया अपनी पहली माहवारी में इतनी शांत और समझदार थी। मैं तो इतना घबरा गयी थी और स्ट्रेस में आ गई थी कि कई दिनों तक घर से बाहर नहीं आई। मुझे इस बात का डर था की कही मेरे कपड़ो पर दाग लग गया या स्कूल के दौरान बहुत दर्द हुआ तो मैं क्या करुँगी। और सबसे परेशान करने वाली बात तो यह थी की मेरी दादी मुझे लगातार कहे जा रही थी कि रसोई में नहीं जाना है, अचार और पानी का बर्तन नहीं छूना है। सच में! यह किस तरह की पाबंदियां है!

आप कुछ भी कर सकते हो!


माहवारी महिला के शरीर की एक स्वस्थ और सामान्य प्रक्रिया है।

इस दौरान स्कूल जाने, खेलने या दोस्तों से मिलने जैसी रोजमर्रा की गतिविधियों में भाग लेने कोई परेशानी नहीं होती।

यह एक मिथक है कि लड़कियों/महिलाएं को माहवारी के दौरान कुछ कार्यों को नहीं करना चाहिए या अचार या पीने के पानी को नहीं छूना चाहिए।

इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

यदि आपके पास माहवारी के बारे में कोई सवाल, उलझन या किसी बात को लेकर शर्मिंदगी या डर है तो आप अपने माता-पिता, शिक्षकों या अन्य विश्वसनीय वयस्कों से बात करें।

आपको माहवारी के दौरान सिर्फ अपने स्वास्थ्य और स्वच्छता की देखभाल करना ज़रूरी है।

स्वस्थ रहने के कुछ तरीके हैं जैसे नियमित रूप से स्नान करना, पैड या टैम्पून बदलना, मेंस्ट्रुअल कप खाली करना, साबुन से अच्छे से हाथ धोना, स्वस्थ भोजन खाना, हल्का व्यायाम करना और साफ कपड़े पहनना।

लेकिन तर्क क्या है?

तो माहवारी बिलकुल सामान्य और स्वस्थ शारीरिक प्रक्रिया है। लेकिन हम में से किसी को भी यह नहीं पता की आखिर यह क्यों होता है! और वह भी हर महीने! और यह सिर्फ़ लड़कियों को ही क्यों होता है? यह तो सही नहीं है। काश कोई यह बात भी समझाए।

माहवारी क्यों होती है?


माहवारी का उद्देश्य एक महिला के शरीर को गर्भ धारण के लिए तैयार करना होता है।

किशोरावस्था के दौरान, महिला प्रजनन अंग इस क्षमता को विकसित करना शुरू करते हैं।

इस दौरान महिला प्रजनन प्रणाली (विशेष रूप से अंडाशय) छोटे अंडाणुओं का उत्पादन शुरू करती है।

ठीक उसी तरह पुरुषों में शुक्राणु बनना शुरू होते हैं।

जब एक अंडा शुक्राणु से मिलता है, तो भ्रूण बनता हैं जो फिर नौ महीने तक विकसित होकर एक बच्चे में बदलता है। (प्रजनन पृष्ठ पर अधिक जानकारी के लिए पढ़ें)।

जैसे ही किशोरावस्था आती है, शरीर के हार्मोन अंडाशय में अंडे बनाना शुरू कर देते है।

इस प्रक्रिया को ओव्यूलेशन कहा जाता है और जो महीने में एक बार होता है।

जब ओव्यूलेशन होता है, तो शरीर इसे एक संकेत के रूप में लेता है और स्त्री प्रजनन अंगों में रक्त की आपूर्ति बढ़ाकर भ्रूण के निर्माण के लिए तैयारी करता हैं।

मगर जब अंडा शुक्राणु से नहीं मिलता, तो रक्त की इस अतिरिक्त परत की आवश्यकता गर्भाशय में नहीं होती है और यह योनि से बाहर निकल जाती है।

इसे हम पीरियड या माहवारी कहते हैं। यह पूरी प्रक्रिया हर महीने शरीर द्वारा दोहराई जाती है और इसे मासिक चक्र भी कहा जाता है। हालाँकि तारीखें हर महीने भिन्न हो सकती हैं।

कैलेंडर तय करें!

इसके पीछे तो बड़ा भारी विज्ञान है। लेकिन अगर माहवारी हर महीने अलग अलग तारीख पर आएगी तो बड़ी मुश्किल होगी! अगर उस समय मेरे पास पैड ना हो या मेरी तैराकी प्रतियोगिता हो, तो मैं क्या करुँगी? अगर हर महीने पहले से ही कोई सूचना दे दें तो बड़ी मदद मिलेगी ताकि मैं तैयारी कर लूँ!

माहवारी की गिनती


आप अपनी माहवारी के चक्र (पीरियड साइकिल) को समझ सकते हो।


मान लें कि आपके पीरियड का पहला दिन 1 मई है।

लगभग 5 दिनों तक आपको मासिक धर्म होता है।

मानिये अगली बार माहवारी (पीरियड) 29 मई को हुई।अब पहली माहवारी (पीरियड) की तारीख से दूसरे माहवारी (पीरियड) की तारीख की संख्या की गिनती करें। गिनती 1 मई से शुरू करें।गिनती 29 दिनों की हुई।तो, इसका मतलब है कि आपका माहवारी (पीरियड) चक्र 29 दिन लंबा है।अन्य लोगों के लिए यह 21 दिन या 36 दिनों तक हो सकता है।


अब मुझे पता हैं

माहवारी (पीरियड) के बारे में यह सारी जानकारी बहुत काम आएगी। अब मैं अपने माहवारी (पीरियड) के चक्र को लेकर ज़्यादा तैयार रहूंगी। सच कहूं तो अब मुझे घबराहट भी नहीं महसूस हो रही है।

माहवारी (पीरियड) के बारे में बात करना बहुत अच्छा रहा। इस बारे में बातें साझा करने से मेरा तनाव थोड़ा कम हुआ है।

माहवारी (पीरियड) – नज़र ज़रूरी बातों पर


हमारे शरीर में किशोरावस्था के दौरान कई बदलाव आते हैं। बड़े बदलावों में से एक है – माहवारी (पीरियड) की शुरुआत।

माहवारी की शुरुवात हर एक के लिए अलग समय पर होती है।

यह आठ साल की उम्र से लेकर किशोरावस्था में काफी देर से भी आ सकती हैं।

इस अवधि के दौरान योनि (वजाइना) से निकलने वाले रक्त को सोखने के लिए या इकट्ठा करने के लिए विभिन्न प्रकार के उत्पादों का उपयोग किया जा सकता है।

माहवारी (पीरियड) एक महिला के जीवन में एक स्वस्थ और सामान्य प्रक्रिया है और इसकी वजह से हमें स्कूल जाने, खेलने या दोस्तों से मिलने जैसी रोजमर्रा की गतिविधियों में भाग लेने से नहीं रुकना चाहिए।

आपको माहवारी (पीरियड) के दौरान अपने स्वास्थ्य और स्वच्छता की देखभाल करने की आवश्यकता है।

स्वस्थ रहने के कुछ तरीके हैं नियमित रूप से स्नान करना, पैड/टैम्पून बदलना, मेंस्ट्रुअल कप खाली करना, साबुन से हाथ धोना, स्वस्थ भोजन खाना, हल्का व्यायाम करना और साफ कपड़े पहनना।
मेनोपॉज़ क्या होता है?

रजोनिवृत्ति और स्वस्थ्य


किसी भी महिला में एक साल तक माहवारी के न होने की स्थिति को रजोनिवृत्ति कहा जाता है।

रजोनिवृत्ति किसी भी महिला के जीवन का वह समय होता है जब महिला की ओवरी गतिविधियाँ समाप्त होने लगती है।

यह मुख्यता 45 से 55 साल के उम्र में शुरु होता है, लेकिन रजोनिवृत्ति इस समयसीमा से पूर्व पहले या बाद में हो सकता है।

रजोनिवृत्ति एक महिला की प्रजनन क्षमता के अंत का प्रतीक होता है।रजोनिवृत्ति होने पर महिला में शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के परिवर्तन होते हैं, इसके कारण महिला में कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं और कई बार ये समस्याएं बहुत ही कष्टदायक होती है।

रजोनिवृत्ति क्यों होती है

रजोनिवृत्ति होने पर महिला के शरीर में शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के परिवर्तन होते हैं। इसका मुख्य कारण होता है हार्मोन में बदलाव होना है।

रजोनिवृत्ति एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो महिला के अंडाशय की आयु और कम प्रजनन हार्मोन के प्रोडक्शन की प्रक्रिया को उजागर करती है।

इस स्थिति में महिला के शरीर में कई प्रकार के परिवर्तन होते हैं और कभी हार्मोन का स्तर कम होता जाता है, जो इस प्रकार है:

प्रोजेस्‍टेरोन
टेस्‍टोस्‍टेरोन
एस्‍ट्रोजन
कूप-उत्‍तेजक हार्मोन
ल्‍यूटिनिजिंग हार्मोन
एक्टिव ओवेरियन फॉलिकल्स का लॉस
सबसे उल्लेखनीय परिवर्तनों में से एक सक्रिय परिवर्तन ओवेरियन फॉलिकल्स का नुकसान है। ओवेरियन फॉलिकल्स वे संरचनाएं हैं, जो ओवरी वॉल से अंडे को प्रोड्यूस और रिलीज़ करती है।

महिला की ओवरीज़ 45 साल की उम्र के बाद अंडे का उत्पादन बंद कर देती है, लेकिन ऐसा पहले भी हो सकता है। जिसे प्रीमैच्योर मेनोपॉज़ के नाम से जाना जाता है।

कुछ परिस्थिति में, रजोनिवृत्ति प्रेरित होती है, या किसी चोट या फिर ओवरीज़ रिमूवल सर्जरी या पेल्विक स्ट्रक्चर से संबंधित होती है।

मेनोपॉज़ के कुछ और सामान्य कारणों में शामिल हैं:

बाईलैटरल औफ्रेक्टमी , या ओवरीज़ का सर्जिकल रिमूवल
ओवेरियन एब्लेशन , या ओवरी फंक्शन का बंद होना
पेल्विक रेडिएशन
पेल्विक की चोट,
यह अंडाशय को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाती हैं या फिर नष्ट कर देती है।
रजोनिवृत्ति के लक्षण

रजोनिवृत्ति के समय महिलाओं में किस-किस तरह के लक्षण देखते हैं:-

महिला को बहुत अधिक पसीना आना।
घबराहटमहसुस करना ।
महिला के सिर में दर्द और चक्कर आना।
स्वभाव में चिड़चिड़ापन होना।
महिला को शारीरिक कमजोरी अधिक होना।
पेट से संबंधित समस्या उत्पन्न होना।
महिला का पाचनशक्ति कमजोर हो जाना।
महिला का जी मिचलानाऔर उल्टियां आना।
लगातार कब्ज़ की समस्या बनी रहना ।
कुछ महिलाओं को तो इस समय के पश्चात् शरीर पर झुर्रियां पड़ने लगना।
कैल्शियम की कमी की एक बड़ी वजह है डाइट हिंदुस्तान में बात जब लड़कियों के खाने की आती है तो उसमें काफ़ी लाहपरवाही होती है। कई लड़कियों को बचपन में दूध नहीं पिलाया जाता सही पोषण नहीं दिया जाता इसकी वजह से कैल्शियम की कमी रहती है। मेनोपॉज़ के दौरान तो ख़ासतौर पर औरतों को ज़्यादा कैल्शियम खाना चाहिए। क्योंकि मनोपॉज़ के दौरान एस्ट्रोजेन नाम का हॉर्मोन शरीर में कम हो जाता है। इससे हड्डियां पतली होने लगती हैं। आख़री बात आमतौर पर लड़कियों को वजाइनल डिस्चार्ज होता है ये नॉर्मल है पर इसमें कैल्शियम भी निकलता है। इस डिस्चार्ज में कैल्शियम के साथ सोडियम, पोटेशियम, और मैग्नीशियम भी होता है.’

जिन औरतों में कैल्शियम की कमी होती है, उनकी हड्डियां काफ़ी कमज़ोर होती हैं।

जिन औरतों की उम्र 40 से ऊपर होती है उन्हें या तो मेनोपॉज़ हो चुका होता है या होने वाला होता है। उनका शरीर कम कैल्शियम बनाता है।
30 साल के बाद उम्र की वजह से महिलाओं की हड्डियां कमज़ोर होने लगती हैं।
जो औरतें केवल शाकाहारी खाना खाती हैं उनको कैल्शियम वैसे भी कम ही मिलता है।
16 से 30 साल की लड़कियां जो डाइटिंग करती हैं या ज़्यादा वेट लूज़ करती हैं, उनमें कैल्शियम की कमी होने की संभावना रहती है।
अगर शरीर में विटामिन डी की कमी होती है तो कैल्शियम भी कम हो जाता है क्योंकि विटामिन डी ही शरीर में कैल्शियम बनाने में मदद करता है।
कैल्शियम की कमी से क्या-क्या दिक्कतें हो सकती हैं


ऑस्टियोपोरोसिस

ये हड्डियों की बीमारी होती है। हड्डियों का अंदरूनी हिस्सा एक शहद के छत्ते की तरह होता है। उनमें छोटे-छोटे छेद होते हैं. ऑस्टियोपोरोसिस की वजह से इन छेदों का साइज़ बढ़ता रहता है। इस वजह से हड्डियां पतली होने लगती हैं और कमज़ोर हो जाती हैं।

ऑस्टियोपीनिया

ये एक तरह की कंडीशन होती है. इसमें हड्डियां अंदर से कमज़ोर होने लगती है। ये औरतों में आदमियों के मुक़ाबले ज्यादा होता है। वजह? मेनोपॉज़ के दौरान हॉर्मोन में बदलाव।

हाईपोकैल्शिमिया

ये ज़्यादातर उन औरतों में होता है जिन्हें मेनोपॉज़ होने वाला होता है. उस उम्र में एस्ट्रोजेन नाम के हॉर्मोन में गिरावट आ जाती है. इस वजह से हड्डियां और पतली होने लगती हैं।

कैल्शियम की कमी से कैसे निपटें

कैल्शियम की कमी पूरी करने के लिए आप कई चीज़ें कर सकती हैं। जैसे कैल्शियम की टेबलेट्स खा सकती हैं। पर अगर कैल्शियम की गोलियां असर नहीं करती हैं तो आपके किचन में कई ऐसी चीज़ें पड़ी होती हैं, जिनसे आपको भरपूर कैल्शियम मिल सकता है. इसके अलावा कुछ और हाई कैल्शियम चीजें हैं।

रागी में भरपूर कैल्शियम होता है. आप अपने खाने में वो शामिल कर सकती हैं 100 ग्राम रागी में 370 ग्राम कैल्शियम होता है।
आप सोया भी खा सकती हैं 100 ग्राम सोयाबीन्स में 175 ग्राम कैल्शियम होता है।
पालक तो है ही नहीं पसंद तो भी खाइए। क्योंकि इसमें 90 मिलीग्राम कैल्शियम होता है. पर पालक पकाने से पहले उसे कम से कम एक मिनट तक उबालिए।
आप अपना खाना नारियल के तेल में भी बना सकती हैं। ये आपके शरीर को कैल्शियम और मैग्नीशियम रीटेन करने मदद करता है।
आखिरी बात थोड़ी देर धूप में भी बैठा करिए। बस 20 मिनट बैठना है। विटामिन डी अगर शरीर में हो तो कैल्शियम आसानी से सोक हो जाता है। ये खासकर उन महिलाओं के लिए, जो पूरे दिन एसी दफ्तर में नौकरी करती हैं और धूप से उनका बिलकुल सामना नहीं होता।

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