google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical ayurvedic health tips in hindi

Ads

ayurvedic health tips in hindi

ayurvedic health tips in hindi

 जुकाम आमतौर पर कब्ज होने पर सर्दी लग जाने से होता है। कब्ज की हालत में, नंगे पैर ठंडे पानी में चलने फिरने, गर्म जगह से उठकर एकदम ठंडी जगह जाने, आग के  पास काम करते-करते ठंडा पानी पी लेने, बारिश में भीगने ,ऋतु परिवर्तन होने पर ,चाय पी के ठंडा शरबत पीने, सोकर उठते ही नहा लेने, व्यायाम के तुरंत बाद स्नान करने आदि लक्षणों के कारण हो जाता है यह एक आम संक्रामक रोग है इसमें रोगी की नाक किस क्लास में कला में शोथ हो जाता है।

  जुकाम जब शुरुआत में होता है तब नाक से पानी गिरता है छींके आती है और सिर्फ और शरीर भारी भारी या गिरा पड़ा रहता है। नाक में जलन सी रहती है आंखें लाल हो जाती है गला भारी हो जाता है। एक-दो दिन तो लग से पतला पानी बहता है फिर बलगम गाढ़ा होने लगता है कई बार नाक बंद हो जाती है पराया तीन-चार दिन से जुकान के लक्षण यही रहते हैं।

कान के रोग 

कान का बहना:-

जब रोगी जुकाम खांसी तथा साइनोसाइरिस या पुराने जुकाम से पीड़ित होता है तो किन्हीं जीवाणुओं के कारण यह रोग हो जाता है। इसमें रोगी के कांड से मवाद बहती है जिसमें से बहुत दुर्गंध आती है तथा कार्ड में तीव्र पीड़ा होती है।
  • लहसुन के साथ नीम की 10- 15 को प्ले या 5-7 पत्तियां पानी में उबालकर उसके बाद दो बूंद रात को सोने से पहले कुछ दिन तक डालते रहने से कान का जख्म और कान का बहना बंद हो जाता है।
  • इस रोग के उपचार में" लक्ष्मी विलास रस"नामक औषधि बहुत अच्छी होती है। व्सयक रोगी को इसकी एक एक गोली शहद में मिलाकर दिन में तीन बार देनी चाहिए। बच्चों को भी औषधि देनी चाहिए किंतु आधी मात्रा में।
  • 250 मिलीग्राम सरसों का तेल, 10 ग्राम आंवला, 10 ग्राम सोंठ, 3-3 ग्राम कबीला, काली मिर्च और नीला थोथा ले। तेल गर्म करके कबीला को छोड़कर सभी दवाएं उसमें डाल दें। इसके बाद कबीला मिलाकर उसे छान लें। इसे कान में टकराए कान का बहना बंद हो जाएगा।
  • कान में थोड़ी सी स्प्रिट डालने से कान का बहना बंद हो जाता है।
  • हल्दी और फुलाई भी फिटकरी का चूर्ण बनाकर उसे कान में डालने से कान का बहना बंद हो जाता है।
  • 200 मिलीलीटर सरसों के तेल में 100 ग्राम रतनजोत मिला ले फिर उसे गर्म करें रतनजोत जलने को हो जाए तो तेल को उतार कर लीजिए इस तेल की दो-दो बूंद प्रतिदिन कान में डालने से कान का बहना बंद हो जाता है।
  • साल वृक्ष की छाल और बनकयास का रस शहद में मिलाकर दो से पांच बूंद रोगी के काल में डालें कान का बहना बंद हो जाएगा।
  • कान की बहने पर गाय का दूध लेकर उसमें मेथी का रस गर्म तेल मिलाकर डालना लाभकारी होता है मेथी को तेल में पकाकर मेथी का तेल बनाया जा सकता है।
  • स्त्री के दूध में रसौत शहद मिलाकर काल में डालने से कान बहना बंद हो जाता है।  यह रोगी के लिए उत्तम नुस्खा है।
  • कान बहने पर कान में प्याज का रस हल्का गर्म करके डाला जा सकता है।
  • इस रोग को ठीक करने में लहसुन अदरक प्याज का सेवन बहुत उपयोगी है ऐसे खाद्य पदार्थ जो कब बढ़ाते हो रोगी को नहीं देनी चाहिए।
  • दही केला अमरूद और खट्टे फलों के सेवन से परहेज रखना आवश्यक है।

सावधानी:-

वैसे कान बहने पर एक दो दिनों तक कुछ भी नहीं डालना चाहिए और कानों को किसी भी चीज से कुरेदना भी नहीं चाहिए स्वच्छ रूई  से सफाई करते रहना चाहिए।

कान में दर्द:-

कान में मैल अधिक जम जाना, पिन या अन्य वस्तु से कान खुजलाना, कान पर चोट लगना, कान में चींटी या अन्य कीट का घुस जाना आदि कारणों से कान में दर्द होता है।
  • अरंडी के पत्तों को गर्म करके तिल के तेल में डुबोकर उससे कानों के आसपास हल्का सेक करें।
  • एक चम्मच तिल के तेल में लहसुन की आधी कली डालकर गुनगुना गर्म करके दर्द वाले कान में चार-चार बूंद टपका कर दूसरी करवट 10 मिनट लेत रहे।
  • मुलेठी को घी में मिलाकर हल्का गर्म करके कान के आसपास लेप लगाए दर्द से राहत मिलेगी।
  • कान में दर्द होने पर अजवाइन के तेल में सरसों का तेल मिलाकर मंदाग्नि पर गुनगुना करके कान में डालने फायदेमंद होता है। अजवाइन का तेल एक भाग और सरसों का तेल 3 भाग लिया जा सकता है।
  • अगर रोगी के कान में मवाद आता हो तो गूगल का धुआ कान से लें।
  • तुलसी के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें इस रस को हल्की आंच पर रखकर थोड़ा सा गर्म कर ले सहने लायक होने पर 4-5 बूंदे कान में डालनी चाहिए इससे कान का दर्द ठीक हो जाता है।
  • कान में दर्द होने पर लहसुन की 4-5 कलिय को मीठे तेल (अलसी के तेल) मैं अग्नि पर रखकर जला ले। बाद में तेल को छानकर एक शीशी में भरकर रख लें। सुबह शाम इस लहसुन के तेल को कान में डाले कुछ ही दिनों में फायदा हो जाता है।
  • आम के ताजे हरे पत्तों का रस गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।
  • मूली को बारीक बारीक टुकड़ों में काट लीजिए इसे सरसों के तेल में डालकर खूब गर्म करके निकाल लीजिए अब इस तेल को एक वॉटल में सुरक्षित रख लीजिए दर्द के समय कान में इस तेल को डालने से कान के दर्द में आराम मिलता है।
  • अदरक का रस गुनगुना करके कान में डालने से दर्द जल्दी मिटता है।
  • कान में दर्द होने पर घिया कूटकर रस निकालें। सी के बराबर स्त्री का दूध मिलाकर हल्का सा गर्म करके डाले कान के दर्द में राहत मिलेगी।
  • कान का दर्द होने पर प्याज का रस गुनगुना करके डालने से तुरंत राहत मिलती है।
  • तेल मेथी के दाने डालकर गर्म कर ले फिर उसे छानकर कान में डालें दर्द बंद हो जाएगा।

बहरापन:-

कान के मध्य या भीतरी भाग में सूजन या फोड़े के कारण कान में  कीट चले जाने के कारण बहरापन आ सकता है।
  • बारीक पिसा हुआ सुहागा कान में डाल कर उसके ऊपर 5 बूंद नींबू का रस डालने से कान के भीतर गैस उत्पन्न होगी और मैल फुल कर बाहर आ जाएगी इससे कान का पर्दा साफ हो जाएगा और रोगी को सुनाई भी देने लगेगा।
  • बहरेपन की स्थिति में नियमित रूप से दालचीनी का तेल रात को सोते समय काल में डालना चाहिए बहरापन दूर हो जाएगा।
  • बहरापन की स्थिति में नियमित रूप से कुछ दिनों तक तुलसी के पत्तों का रस निकालकर हल्का गर्म करके ताल में डालना चाहिए।
  • सप्ताह में एक बार कानों में सरसों का तेल हल्का गुरु ना करके डालना गुणकारी होता है इससे बहरापन दूर होता है।

कान में कीड़ा चले जाने पर:-

कभी-कभी चींटी, मक्खी ,पतंगे ,कान में चले जाते हैं। फल स्वरुप बेचैनी व्याकुलता और वेदना होती है । भीषण  दर्द भी होता है।
  • प्याज का रस कान में डालने से कान में गया कीड़ा बाहर आ जाता है।
  • जैसे ही कीड़ा कान में घुसता है वैसे ही स्वाभाविक प्रक्रिया ही होती है कि कान की कनपटी को उंगली से हिला हिला कर कीड़ा बाहर निकालने की चेष्टा करते हैं। पर ऐसा कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि इस तरह से तो कीड़ा और भी अंदर चले चला जाएगा या उंगली की पहुंच से बाहर हो जाएगा और आपकी तकलीफ पड़ जाएगी।
  • चूने का पानी निथारकर कर उसे साफ कपड़े से छान कर दो तीन बूंदे कान  में डालने से कीड़े या अन्य चीजें काम से बाहर आ जाती है।
  • कमरे की बत्तियां फौरन बुझाकर कान के पास कार जलाकर रख दे और शांत बैठ जाए। कीड़ा रौशनी के पास पहुंचने के लिए अपने आप बाहर निकल आएगा। बशर्ते आपने पहले ही काम में उंगली डालकर उस कीड़े को अंदर ना धकेल दिया हो।
  • अगर इन सब तरीकों से पीड़ा ना निकले तो सरसों का तेल गर्म करके कुछ बूंदे कान में डाल दें। कीड़ा तेल में व  कान जो मोमिया तत्व है उसमें लिपट कर मर जाएगा। उसे पिन या तिनके  से कुरेद कर बाहर निकालने की कोशिश ना करें। कीड़ा तेल के साथ अपने आप ही बाहर निकल जाएगा।

कान में आवाज आना:-

कान की शिराओं में दूषित वायु अपना स्थान बनाकर विभिन्न प्रकार की दुनिया उत्पन्न करती है। जोर से आघात लगना मलेरिया, टाइफाइड जैसे तेज बुखार आदि अन्य कारणों से यह आवाजें उत्पन्न होती है।
  • अपामार्ग क्षार तेल की 4 से 5 बूंद रात में सोते समय कान में डालें।
  • हिंगवादी तेल भी कानों में डाला जा सकता है बाहर से कान के आसपास से मालिश करने से भी होगी को काफी लाभ होता है।
  • तिल के तेल या फिर नारियल के तेल से सिर पर धारा करें।
  • एक कप दूध में एक चम्मच घी डालकर प्रतिदिन सुबह-शाम पिए।

सर्दी में कानों में कुलबुलाहट:-

   कभी-कभी ठंड के मौसम में कानों में भनभनाहट और सीटी बजने लगती है। कानों में उत्पन्न होने वाली कुल बुला हट को दूर करने के लिए बहुत सारे घरेलू उपाय किए जा सकते।

  • सरसों के तेल में लहसुन की एक कली भूनकर उस तेल को 2-3 बूंदे कानों में टपकाएं।
  • प्याज के रस को थोड़ा गर्म करके भोजन के साथ लेने से फायदा होगा।
  • सरसों के तेल में लौंग जलाकर व तेल रूई के फाए से कानों में डालें।
  • यदि कान में किसी कीड़े के चले जाने से सुरसुरा ह हो रही हो तो कानों में फिटकरी का पानी घोलकर कानों में डालें।
  • तुलसी के पत्तों का रस गर्म करके 23 दूध निरंतर तीन-चार दिनों तक कानों में डालें।

नाक के रोग

नकसीर फूटना:-

आग की गर्मी, उच्च रक्तचाप, धूप लगने ,और नाक में कोई संक्रमण पाया जाना इस रोग का मुख्य कारण होता है। इस रोग में रोगी की नाक से रक्तस्राव होता है।
  • नकसीर फूटने पर रोगी के चेहरे और सिर पर ठंडा पानी डालना चाहिए और धोना चाहिए।
  • तीन ग्राम सुहागे को थोड़े से पानी में घोलकर दोनों नाथुनों पर लेप करें नकसीर तत्काल बंद हो जाएगी।
  • 20 ग्राम मुल्तानी मिट्टी को जरा कूटकर रात में मिट्टी के बर्तन में एक गिलास पानी में डालकर भिगो दें। सुबह पानी को निकालने इस साल पानी को पिलाने से दो-तीन दिन में ही वर्षों का पुराना रोग सदा के लिए समूल नष्ट हो जाता है। बच्चों को इस पानी में बताशा या मिश्री मिलाकर पिलाएं रोग में राहत महसूस होगी।

बहती हुई नकसीर इससे तुरंत बंद होगी:-

रोगी को मुल्तानी मिट्टी का पानी पिलाएं। नीचे बैठी मुल्तानी मिट्टी का रोगी के मस्तिष्क तथा नाक पर 5 मिनट के लिए लेप करने से रोग ठीक हो जाएगा।
  • नाक से खून आने क उपचार के लिए दुर्वा बहुत अच्छी औषधि है। यह एक प्रकार की घास होती है। दुर्गा का रस निकालकर दोनों नाक में 10-10 डालकर ऊपर की ओर जोर से खींचना चाहिए।
  • अंगूर  , सफेद पेठा, मूंग की दाल का सूप, पुराने चावल, अनार ,मक्खन, गाय का दूध, और मांस का सूप रोगी को दिया जा सकता है। परंतु कोई भी गर्म और मसालेदार पदार्थ रोगी को खाने के लिए नहीं देनी चाहिए।
  • नाक से खून निकलने की अवस्था में सबसे पहले रोगी को तुरंत ठंडे स्थान पर ले जाना चाहिए। पैर से जूते मोजे उतार देनी चाहिए जिससे शरीर की गर्मी तलवों द्वारा बाहर निकल जाए।
  • नाक से ब्लड निकलने की अवस्था में पुराने चावल जौ का सत्तू ,मूंग ,मसूर की दाल ,परवल ,पेठे का मुरब्बा, पेठे की सब्जी ,कद्दू, नारियल का पानी ,एवं इसकी कोमल गिरी, आनार , आंवला ,अंगूर ,फालसा, तरबूज, मिश्री आदि का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए।
  • अंगूठे और तर्जनी अंगुलियों की मदद से नाक की जड़ को थोड़ी देर तक दबाए रखें ताकि खून का प्रवाह रुक जाए।
  • मरीज की नाक और माथे पर बर्फ रखना या ठंडे पानी की पट्टी रखना बहुत लाभदायक होता है। रोगी की शीतल चीजें सुघानी चाहिए। गुलाब का फूल या खश को शीतल पानी में भिगोकर सूंघने से नाक के अंदर ऊष्मा में कमी आ जाती है। रोगी तकलीफ में कमी महसूस करता है।
  • कमल की राख शहद के साथ मिलाकर चाटने से नकसीर में फायदा होता है।
  • जिन्हें बार बार नकसीर होती है उनके अंदर विटामिन सी की कमी रहती है इसलिए ऐसे लोगों को रसदार मीठे फल जैसे अनार आम अंगूर आदि का सेवन निरंतर करते रहना चाहिए।
  • नाक से खून बहने पर व्यक्ति को लिटा कर प्याज का रस या प्याज कुचलकर नाक में रखें कुछ समय बाद ही खून बहना बंद हो जाएगा।
  • खैर कचनार सेमल या प्रियागु इन चारों फूलों को एक साथ पीसकर शहद के साथ मिलाकर चाटने से नकसीर में लाभ होता है।
  • शरीर की गर्मी बढ़ाने वाले आहार का सेवन ऐसे लोगों के लिए हितकारी नहीं है अतः निम्न चीजों से परहेज करना चाहिए, मिर्च मसालेदार चीजें गुड फूड लहसुन बैगन शराब तथा अन्य मादक पदार्थों का सेवन आदि।

बार बार छींक आना:-

नाक में वायु दूषित होकर छींक आती है। कभी कभी उसके साथ कफ भी रहता है।
  • सोठ ,कुठ, पिपरी ,बेलगिरी ,तथा अंगूर की चटनी बनाकर ज को सिद्ध कर नाक से सुंघने से छींक आने पर तुरंत राहत मिलती है।
  • घी, गूगल तथा मोम को एक साथ मिलाकर आग में डालकर उसका दूध पीने से बार बार छींक आना बंद हो जाता है।

सर्दी में नाक बंद होने पर:-

  • 50 ग्राम गुड़ और 10-12 दाने काली मिर्च पीसकर उबालकर चाय की तरह पीने से जुकाम में फौरन राहत मिलती है और नाक का दर्द भी ठीक हो जाता है।
  • जायफल के छिलके को पीसकर चूर्ण बनाकर उसे नस्ल के समान सुंघने  से छींके  आएंगी जिससे जुकाम दूर होगा और नाग दर्द भी ठीक हो जाएगा।
  • जुखाम की परेशानी से कभी-कभी नाक दर्द होने लगती है उस हालत में हरी चाय की पत्ती पुदीना और गरम मसाला इन तीनों को पानी में उबालकर उसकी भाप ले।
  • दो-तीन चम्मच अजवाइन साफ कपड़े में बांधकर उसकी पोटली को तवे पर रखकर बार-बार गर्म करके सोने से जुकाम के साथ नाक दर्द भी ठीक हो जाता है।
  • अदरक और पुदीना का रस समान मात्रा में लेकर पीए।

जुकाम 

जुकाम मुख्य रूप से अनियमित खानपान की वजह से हो जाता है। मानव शरीर में रक्त में अम्लीय और क्षारीय दोनों पदार्थों की मात्रा बराबर होनी चाहिए। इसके अलावा मौसम का बदलना ठंड लगना ठंडी चीजों का सेवन गर्म सर्द आदि भी जुकाम का कारण बनता है।
  • नागर बेल  या पान के दो-चार कोरे पत्ते चढ़ा लेने से सर्दी जुकाम में आराम मिलता है।
  • शहद और अदरक का रस एक-एक चम्मच मिलाकर सुबह-शाम पीने से जुकाम ठीक हो जाता है।।
  • हल्दी और दूध गर्म कर उसमें गुड़ मिलाकर पीने से जुकाम में राहत मिलती है।
  • काली मिर्च का चूर्ण दही व गुड़ के साथ रोज सुबह-शाम खाने से दीर्घकालीन जुकाम ठीक हो जाता है। गर्म दूध में काली मिर्च का चूर्ण डालकर पीने से भी जुकाम व खांसी दूर हो जाती है।
  • गुनगुने पानी में 4 -5 चम्मच नमक मिलाकर उसमें कुछ देर पैर रखकर बैठे ऐसा करते समय सिर को तौलिए से ढक कर रखें इस प्रयोग से दो-चार दिन में जुकाम में आराम मिल जाएगा।
  • सोंठ के चूर्ण में गुड़ और थोड़ा घी डालकर उसमें 30 से 40 ग्राम भर के लड्डू बनाकर यह लड्डू सुबह-शाम खाने से जुकाम ठीक हो जाता है।
  • अजवाइन को पीसकर उसमें प्याज का रस मिलाकर शरीर पर मलने से जुकाम में पसीना आता है जिससे शरीर में स्फूर्ति चेतना आती है और जो काम में आराम मिलता है। सुबह-शम अजवाइन की फंकी लेने से फायदा होता है।
  • कुछ लोगों को 12 माह जुकाम होता रहता है ऐसे व्यक्तियों को 1 मिलीलीटर तुलसी का रस 1 मिलीलीटर रस उनका रस और 1 ग्राम कालीमिर्च के चूर्ण को पानी में मिलाकर सुबह-शाम पिए। 2 माह तक इस दवा का सेवन करने से जुकाम से पूरी तरह छुटकारा मिलेगा।
  • सेंधा नमक और तीन-चार काली मिर्च पीसकर गुनगुने पानी में फांकें ।
  • हींग का घोल बनाकर बार-बार सुनने से नाक में जमी बलगम बहने लगेगी और कुछ दिनों में रोगी स्वस्थ हो जाएगा।
  • गुड़ की एक छोटी दिल्ली के बीच जरास पिसी हुई हींग और दो चार काली मिर्च‌ डालकर गोली बना लें इस गोली को सुबह-शाम सेवन करने से जुकाम में आराम मिलता है।
  • रात को सोते समय दोनों कानों में राई के हल्के गर्म तेल की 2-3 बूंद डालकर रुई का फाहा लगा दे।
  • राई के तेल में दो-तीन लोग मिलाकर उसे गर्म करके छाती पर मले राहत मिलेगी।

गले के रोग 

 गले में होने वाले रोग के लिए पढ़ें पोस्ट


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ