google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical Health and fitness,गर्मियों में ऐसा क्या खाएं, जिससे हम अपने आप को फिट रख सकें और ठंडा महसूस करें?

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Health and fitness,गर्मियों में ऐसा क्या खाएं, जिससे हम अपने आप को फिट रख सकें और ठंडा महसूस करें?

  Health and fitness,गर्मियों में ऐसा क्या खाएं, जिससे हम अपने आप को फिट रख सकें और ठंडा महसूस करें

महर्षि चरक ने चरक संहिता में मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए तीन तरह का भोजन करने के लिए लिखा है ।

हितभुक्

मितभुक्

ऋतु भुक्

चरक मुनि ने लिखा है — तच्च नित्यं प्रयुन्जीत स्वास्थ्यं येनानुवर्तते ।अजातानां विकाराणामनुत्पत्तिकरं च यत् । अर्थात् जिसके सेवन से स्वास्थ्य की रक्षा होती है और जो उत्पन्न हुए दोषों को उत्पन्न करने वाला है वह भोजन नित्य करना चाहिए ।

फलों का सेवन स्वास्थ्य के लिए हितकर है ।

आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर में खानपान के अतिरिक्त मौसम एवं जलवायु का सबसे ज्यादा प्रभाव होता है। ऋतुचर्या के अनुसार हर मौसम में एक दोष की वृद्धि होती है तो दूसरा दोष स्वतः ही शांत हो जाता है। आयुर्वेद में ऋतुचर्या का विशेष महत्व बताया गया है और ऋतु के अनुसार ही भोजन करना स्वास्थ्यप्रद होता है।आयुर्वेद शास्त्र कहता है कि स्वास्थ्य पर मौसम में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है और यदि वयक्ति मौसम के अनुसार अपने खानपान में बदलाव करके स्वय को फिट और एक्टिव रख सकता है।आइये तो हम यहां पर बात करते है ग्रीष्म ऋतु की जो मई माह से शुरु होती है और जुलाई तक चलती है। इस दौरान कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ है जिनका सेवन यदि आप करते है तो खुद को फिट और ठंडा रख सकते है।ग्रीष्म ऋतु में वातावरण का तापमान अधिक बढ़ जाता है जिसके कारण खानपान में विशेष ध्यान देने की जरुरत होती है। ग्रीष्म ऋतु में हमारे शरीर से पसीना बहुत ज्यादा निकलता है जिसके कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इस मौसम में उल्टी दस्त और पेचिस जैसी स्वास्थ्य समस्याएं अधिक होने की संभावना होती है। ग्रीष्म ऋतु में इन सभी परेशानियों से निजात पाने के लिए आयुर्वेद शास्त्र में आहार एवं जीवनशैली से जुड़े विशेष नियम दिए जाये है जिनका पालन करके आप खुगर्मियों में स्नेह युक्त , जल्द से पाचन योग्य, हल्का , एवं ठंडे तरल खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

इस मौसम में चीनी दूध, शर्बत, ठंडाई, लस्सी, छाछ इत्यादि का सेवन करना चाहिए।

छाछ में जीरे और काला नमक का मिश्रण मिलाकर पीना चाहिए।

ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियां जैसे करेला, बथुवा, मेथी, परवल, टमाटर, कच्चे केले की सब्जी, प्याज, पुदीना, नीबू , सफेद पेठा , सहजन की फली इत्यादि का खूब सेवन करें।

फलों में सबसे ज्यादा खरबूज, तरबूज, मीठा आम, संतरा, हरी ककड़ी, शहतूत, आंवला, अनार इत्यादि खाना चाहिए।

इन खाद्य पदार्थों में सबसे ज्यादा पानी की मात्रा होती है जो आपके शरीर में कमी के कमी नही होने देते है जिससे शरीर में ठंडक का अहसास होता रहता है और आप खुद में पूरा दिन ताद को स्वास्थ्य रख सकते है।

ग्रीष्म ऋतु के फल:-

फलों में सबसे ज्यादा खरबूज, तरबूज, मीठा आम, संतरा, हरी ककड़ी, शहतूत, आंवला, अनार इत्यादि खाना चाहिए।

तरबूज:-

फल ऋतु के अनुसार आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं। यह शरीर में स्फूर्ति शक्ति उत्साह प्रदायक है। वैज्ञानिकों का मानना है कि फलों सब्जियों में जो फाइटोकेमिकल, ऑक्सीडेंट, विटामिन ,लवण फाइबर पाए जाते हैं वह स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं ।तरबूज ऐसा ही फल है।
  कहा जाता है कि सिंधु घाटी की सभ्यता के समय से तरबूज का प्रचलन है। यह गर्म जलवायु का फल है इसकी फसल भले ही मिट्टी में होती है। यह राजस्थान हरियाणा उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से पैदा होता है। उत्तर प्रदेश के मैदानी भागों में नदियों के रेतीले भाग में तरबूज की फसल उगाई जाती है। उत्तर प्रदेश में स्कीम शाहजहांपुरी फर्रुखाबाद ,फैजाबाद, इलाहाबाद ,बरेली प्रजातियां प्रचलित है। आजकल नई किस्में शुगर ,बेनवी, हेमिशीयर, अनारकली उपलब्ध है।
  इसके हरियाणा के कुछ भागों में हलवाना तथा राजस्थान के कुछ भागों में मतीरा नाम से भी प्रचलित है। तरबूज का वैज्ञानिक नाम साईटाल्लस लानाटुस है। यह पृथ्वी पादप है। इसका वानस्पतिक नाम कुकुरविटालस है। भारतीय कृषि संस्थान नई दिल्ली में नई किस्म बेबी शुगर विकसित की है। इसका भार 2 से 3 किलोग्राम के मध्य होता है।

  यह गोल अंडाकार होता है इसका भार से 10 किलोग्राम का होता है। कुछ तरबूज छोटे होते हैं इनका भार 2 से 4 किलोग्राम तक होता है। तरबूज बाहर से गहरा हरे रंग का तथा अंदर से लाल रंग का गुदा होता है। बीज काले रंग के होते हैं। हरे, लाल रंग के मध्य सफेद रंग की पतली सत्ता होती है। तरबूज का गोदा लाल रंग का मीठा रसीला होता है तरबूज में 90% पानी होता है। गर्मी में शीतलता प्रदान करता है शरीर में जल की मात्रा को संतुलित बनाए रखता है। इसके गूदे पर काला नमक कालीमिर्च डालकर खाने से या स्वादिष्ट और पाचक हो जाता है यश सौंदर्य के लिए लाभकारी है।

  रासायनिक विश्लेषण के अनुसार तरबूज में कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन फाइबर जल लवण पोटैशियम मैग्निशियम कैलशियम फास्फोरस लोहा अमीनो अम्ल सिटृयूलीन, beta-carotene लाइकोपिन फलोनाइडस, विटामिंस एबीसी पाए जाते हैं इसके 100 ग्राम गोद में 16 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।

  औषधी गुणो की दृष्टि से यह शरीर की कोशिकाओं को निरोगी रखने की क्षमता रखता है। गुर्दे में पेक्टिन की मात्रा पाई जाती है। आयुर्वेद के अनुसार तरबूज शीतलता प्रदान करने के साथ रोगो से सुरक्षा करने की क्षमता के कारण औषधि भी है।

  तरबूज के सेवन से लू के प्रभाव से बचा जा सकता है। ग्रीष्म ऋतु में यह बेचैनी घबराहट को दूर करता है। गर्मी के कारण सिरदर्द होने पर तरबूज के गूदे से रस निकालकर इस में मिश्री मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।

   तरबूज में पोटेशियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है। इसमें उपस्थित सिटृलीन और rg9 रक्त धमनियों में रक्त प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करते हैं इन सब से हृदय की कार्य कुशलता बनी रहती है। तरबूज में उपस्थित पोटैशियम मैग्निशियम विटामिन बी और सी ऊर्जा स्तर को बनाए रखते हैं।

  तरबूज में उपस्थित प्रभावी एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो शरीर को रोग मुक्त रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। तरबूज का सेवन आरटीओ आर्थराइटिस रूमेटाइड आर्थराइटिस अस्थमा स्ट्रोक से बचाता है। विटामिन ए और सी की उपस्थिति के कारण त्वचा को धुप के प्रभाव से बचाता है। इसका सेवन बाबासीर रूप के प्रयोग को कम करता है।

  तरबूज का सेवन प्रोस्टेट, ब्रेस्ट गर्भाशय फेफड़े के कैंसर होने की संभावना को कम करता है। तरबूज में उपस्थित विटामिन सी के कारण चिड़चिड़ापन डिप्रेशन दूर हो जाता है। तरबूज में उपस्थित बीच के कारण मन शांत होता है। तरबूज में उपस्थित beta-carotene आंखों को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। यह रेटीना में पिगमेंटेशन उत्पन्न करने में सहायक है।

  तरबूज प्राकृतिक मुत्र वर्धक है जो शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायता करता है। बुड्ढे के कार्य को उत्तेजित कर रक्त से यूरिक अम्ल की मात्रा को कम करते हुए पथरी को निकालने में भी सहायता करता है। तरबूज मल शोधक भी है। तरबूज के बीजों की गिरी को मसूर की दाल के साथ गाय के दूध में घोटकर पेस्ट बना लें इस पेस्ट को चेहरे पर लगाने से दाग धब्बे समाप्त हो जाते हैं।

खरबूजा:-

खरबूजा भी गर्मियों का फल है यह सामान्य लोगों की पहुंच में रहने वाला स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है। ऐसी मान्यता है कि जितनी अधिक गर्मी पड़ेगी उतना ही मीठा खरबूजा होगा खरबूजा रसीला मीठा पौष्टिकता से भरपूर फल है।
  खरबूजा का वनस्पतिक नाम कुकू मीरा मिलो है। यह क्युकी  विटेशिया कुल  से संबंध है। इसका फल बेल पर लगता है खलबली मिट्टी में उत्पन्न किया जाता है। यह कई प्रकार का होता है इसकी एक किस्म खुरदरी होती है दूसरे प्रकार में बाहरी सतह चिकनी पीले या कत्थई रंग की होती है। तीसरे प्रकार की बाहरी सतह चिकनी और सत्ता पर धारियां होती है। बाहरी सतह के नीचे गुर्दा होता है या रसीला मीठा होता है या सफेद या हल्की हरिया हल्की कत्थई रंग की होती है।
  खरबूजा जून माह में बहुतायत में मिलता है इसका सेवन गर्मी से बचाता है साथ ही साथ कुछ रोगों को दूर करने में सहायक है या खरबूजा औषधीय गुणों से युक्त है।

  खरबूजे की रासायनिक विश्लेषण से पता चलता है कि खरबूजे में कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन जल ,रेशे, लावण सोडियम पोटैशियम कैल्शियम मैग्नीशियम beta-carotene विटामिंस ए बी सी फोलिक अम्ल पाए जाते हैं।

  गर्मी में पसीना आता है पसीने के साथ नमक भी निकल जाता है इससे थकान अनुभव होने लगती है खरबूजे का सेवन गर्मी की तीव्रता को कम करता है साथ ही साथ थकान को भी दूर करता है। उदर शूल होने पर खरबूजे के छिलकों को जलाए जब राख बन जाए तो उसे चम्मच में शहद मिलाकर खाने से लाभ मिलता है।

  चेहरे पर काले धब्बे होने पर खरबूजे के बीजों को पीसकर चेहरे पर नियमित रूप से लेप करने से लाभ मिलता है। वहां नवीन आवाज आती है खरबूजे में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट में पेट्रोल पाया जाता है यह प्राकृतिक शर्करा है इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। आता है या मधुमेह के रोगी कम मात्रा में सेवन कर सकते हैं। खरबूजे के अर्क को ऑक्स चिकन नाम से जानते हैं। यह गुरुदेव की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को सही करता है।

  खरबूजा फेफड़े के लिए भी लाभदायक फल है धूम्रपान के कारण शरीर में हुई विटामिन ए की कमी को पूरा करता है। महिलाओं में मासिक धर्म चक्र के समय पेट में दर्द या एठन होती है खरबूजा का सेवन पेट दर्द या एठन को कॉल करत है। साथ ही मासिक धर्म प्रभाव को विनियमित करने में प्रभावी होता है। खरबूजा गर्भवती महिलाओं के लिए अमृत होता है इसमें उपस्थित होली कमले नई कोशिकाओं के उत्पादन और संरक्षण में सहायता करता है।
  इसके नियमित सेवन से गठिया के दर्द को कम करने में सहायता मिलती है यह हड्डियों और जोड़ों में आक्सी डेटिव तलाव रोकता है। जिससे सूजन कम हो जाती है खरबूजे में उपस्थित रेशा  पाचन क्रिया को सुचारू रूप से चलाते हैं।

  खरबूजे में उपस्थित पोटैशियम उच्च रक्तचाप को नियंत्रित कर ह्रदय की धड़कन को सामान्य रखता है। खरबूजे में उपस्थित एडिनोसिन रक्त वाहिकाएं में रक्त जमने की क्रिया को रोकता है। पोटेशियम मस्तिष्क को ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है। खरबूजा उपस्थित सुपर ऑक्साइड डिस्टैंसेस तंत्रिकाओं को आराम दिलाने के लिए तनाव से लड़ता है।

  खरबूजे में उपस्थित beta-carotene विटामिन ए की मात्रा को बनाए रखता है जिससे आंखें सही रहते हैं। खरबूजे में पानी होता है जो त्वचा के लिए लाभकारी है। इससे त्वचा में नई चमक और नमी बनी रहती है। खरबूजे में उपस्थित विटामिन ई और के त्वचा को कोमल आकर्षक और स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होते हैं। खरबूजा आंतों के कार्यों को नियंत्रित करता है खरबूजे के बीज औरतों के कीड़े निकालने में सहायक होते खरबूजे की जड़ मुत्रा वर्धक होती है।
  खरबूजे में एनओसीटाउल पाया जाता है यह विटामिन बी का रूप है जो बालों को झड़ने से रोकता है बालों का विकास भी करता है गर्मियों में खरबूजा आदर्श हेयर केयर कंडीशनर का काम करता है।

बेल;-

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र का उपयोग किया जाता है बेल पत्ती आपस में जुड़ी रहती हैं इनकी संख्या तीन होती है तीन पत्ती आए इस प्रकार की जाती है कि देखने में शिव के त्रिशूल का आकार प्रदर्शित करती है। एक अन्य धारणात एहसान तीनों पत्र ब्रह्मा विष्णु महेश के प्रतीक है।
  बेल के वृक्ष पूरे भारत में पाए जाते हैं यह 25 से 30 फुट ऊंचे होते हैं। तनाव और शाखाएं काष्ट्रीय प्रवृत्ति के होते हैं। पत्तियां संयुक्त त्रिपत्रक होती है तिपत्रक ही बेलपत्र कहलाते हैं। पत्तियों को सुरक्षा के लिए लंबे कटीले कठोर कांटे पत्तियों पर होते हैं इसकी बाहरी सतह कड़ी होती है अंदर गुदा और बीज होता है। कच्चा फल हरा होता है पकने पर पीले रंग में परिवर्तित हो जाता है।
  
  बेल ग्रीष्म ऋतु में मई माह में आता है बेल का फल बहुत ही उपयोगी है फल खाने में स्वादिष्ट होता है साथ ही विभिन्न रोगों को दूर करने में मै भी लाभदायक है। अतः यह औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। फल की बाहरी सतह कठोर होती है इसके अंदर पीले रंग का गुर्दा और बीज होते हैं। गुदा मुलायम रेस वाला चिपचिपा होता है। गुदा स्वाद में मीठा होता है।
  बेल के गूदे के रासायनिक विश्लेषण से प्राप्त होता है कि इसके गूदे में कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन पेक्टिन टैनिंग म्यूसईलएज,उड़नशील,तेल, मार्ग लेसीन क्रियाशील द्रव्य लवण फाइबर विटामिन ए बी पाए जाते हैं।
  ताजी पत्तियों में की ईगोलिन मेलिनियन कॉमेडी नाइट्स पाए जाते हैं। ईगोलिन को एक बीटा हाइड्रोक्सी- पेरा _मीथोक्सी- फिनायल-इथाइल सिनवाइड कहते हैं।

  बेल के पत्ते वात नाशक और संग्राहक होते हैं। बेल का पुष्प अतिसार प्यास वमन को शांत करता है। बेल का गूदा रसप्रधान लघु पाती संग्राहक होता है। यह असूल अमावत संग्रहणी कफ को नष्ट करता है। कच्चे बेल का फल कटु रंस प्रधान, पाचक कब वायु नाशक होता है। पका फल मधुरस प्रधान रस युक्त दाह कारक पाचक बलवर्धक अग्निमांद्य कारक होता है। इनका सेवन खूनी दस्त
 खूनी बवासीर में अत्यंत लाभप्रद होता है। ओम व्यास संग्रहणी होने पर सूखे बेल का गूदा सौंफ और सोठ कोट के साथ पीने पर लाभ मिलता है।
  बेल का गूदा ठंडा होता है गर्मियों में इसका शरबत पीने से गर्मी शांत होती है पेट के कीड़े होने पर पत्तों का रस पीने से कीड़े नष्ट हो जाते हैं। विषम ज्वर की स्थिति में बेल के पत्ते गुड़ के साथ गोली बनाकर खाने से लाभ मिलता है। बेल की जड़ मधुर पान तीनों दोषों के प्रकोप को शांत करती है। बेल की कोपल को काली मिर्च के साथ पीसकर सुबह-शाम लेने से मधुमेह में लाभ मिलता है। दिल में मारमेलो सीन नामक तत्व होता है। जो आंत चिकनाहट लाकर आत की गति को नियमित करता है।

खीरा, ककड़ी, और स्वास्थ्य :-

वर्ष में मुख्यतः तीन मौसम होते हैं सर्द गर्म वर्षा तीनों मौसम की आवश्यकताएं भिन्न-भिन्न होती है इन आवश्यकताओं की पूर्ति प्रकृति द्वारा ही की जाती है। प्रकृति के विभिन्न पदार्थ पाए जाते हैं जो दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती है जिससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है कुछ पदार्थ औषधि के रूप में भी जाने जाते हैं कीड़ा ऐसा ही फल है खरा गर्मी में अधिक होता है वैसे खीरा पूरे वर्ष आता है।

  खीरा को अंग्रेजी में कुकुंबर कहते हैं खीरा कुकुर वैसी कुल से संबंधित है। खीरा सलाद का मुख्य भाग होता है खीरा में 65% पानी होता है शरीर को निर्जलीकरण से बचाता है। खीरा शरीर के तापमान को सामान्य बनाए रखता है गर्मी से राहत देता कीड़ा प्राकृतिक कुलैन्ट है।

  खीरा के रासायनिक विश्लेषण से ज्ञात हुआ है कि खीरा में कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन फाइबर फैटी एसिड अमीनो अम्ल लवण सोडियम पोटैशियम मैग्निशियम मैग्नीज कॉपर सिलिका फास्फोरस फाइटोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। इन सभी के कारण खेल कॉस्टिका खीरा में विटामिन ए बी सी के फोलिक एसिड पाया जाता है। शरीर से विषाक्त हानिकारक पदार्थों को बाहर करने में खीरा की महत्वपूर्ण भूमिका है।

  खीरा सौंदर्य निखारने में भी सहायता करता आखो के चारों और काले धब्बे त्वचा में एक रंग लाने में सहायक होता है। स्वास्थ्य को अच्छा बनाने में खीरा का महत्वपूर्ण योगदान है।

  खीरे में उपस्थित पानी और फाइबर पाचन क्रिया को सुचारू रूप से चलाते हैं जिससे शरीर को आवश्यक पोषक पदार्थ प्राप्त होते हैं। यह विषाक्त हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकाल देते हैं खीरे में उपस्थिति रेप सीन एंजाइम प्रोटीन के पाचन और अवशोषण को सुचारू रूप से संपन्न करता है। स्वास्थ्य अच्छा रहता है खीरे का सेवन कब अम्लता गैस्ट्रोटेस्टीनल, जलन का अल्सर में लाभ पहुंचाता है।

  हीरो को चबाकर खाने से सलाइवा अधिक उत्पन्न होता है जो भोजन को लुग्दी बनाने में सहायक होता है। पाचन क्रिया सुचारू रूप से संपन्न होती है। मुंह से बदबू फैलाने वाले कीटाणुओं को खीरा समाप्त करता। दांत और मसूड़ों का लगी पट्टिका खीरा खाने से समाप्त हो जाती है।

  खीरा में उपस्थित पोटैशियम और फाइबर रक्तचाप को नियंत्रित रखने में सहायक होता है। खीरा शरीर को नमी से परिपूर्ण रखता है। खीरा शरीर की धमनियों में दबाव कम करने में सहायक होता है खीरा प्राकृतिक मुक्त वर्धक है।

  खीरा अग्नाशय को उत्तेजित करता है इससे इंसुलिन का उत्पादन बढ़ता है जो रक्त में शर्करा के स्तर को बढ़ने नहीं देता है। मधुमेह रोग नहीं हो पाता खीरा रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में योगदान देता है।

  खीरा स्वभाव से शीतल है सरवन से खीरा बचाता है। खीरा में उपस्थित पोटैशियम मैग्निशियम सिलिकॉन धूप की कालिमा को कम करने में सहायक होते हैं। खीरा त्वचा पर घाव के निशान रंजकता को कम करने में सहायक होता है। खीरा का स्वर्ण त्वचा में निखार लाता है कि रे में उपस्थित एस्कोरबिक अम्ल और एंजाइम आंखों के नीचे काले घेरे झुर्रियों को कम करता है खीरा खूब खाना चाहिए।

  खीरा में कुकरविटासिन्स ,फिस्टिंग ,केपिक पदार्थ पाए जाते हैं। यह पदार्थ कैंसर से बचाओ और कैंसर से लड़ने की क्षमता रखते हैं। विटामिन सी कैंसर से होने वाली क्षति को बचाता है खीरा के सेवन से स्तन और प्रोटेस्ट कैंसर से बचाव होता है। खीरा का कड़वा स्वाद कुकुर विटामिंस पदार्थ के कारण होता है या पदार्थ anti-cancer के रूप में पहचाना जाता है।
 उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि खीरा बहुत ही गुणकारी है खीरा निर्जलीकरण से रक्षा करता है। सौंदर्य और त्वचा में निखार लाता है खीरा अच्छा स्वास्थ्य रखता है अच्छा स्वास्थ्य जीवन की उमंग उत्साह उल्लास स्कूटी प्रदान करता है।

  

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