google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical यूरिन इन्फेक्शन को ठीक करने का सबसे तेज़ तरीका आपके किचन में

Ads

यूरिन इन्फेक्शन को ठीक करने का सबसे तेज़ तरीका आपके किचन में

यूरिन इन्फेक्शन को ठीक करने का सबसे तेज़ तरीका आपके किचन में 

UTI विकार के कारण;-

मुत्राशय में  मूत्र इकट्ठा होकर यदि रुकावट के कारण बाहर निकल सके तो उसे मूत्र विकार कहते हैं। नव युवतियों के मूत्र मार्ग अथवा मुत्राशय से वाह्य  पदार्थ की उपस्थिति नव युवकों में सो जा क्या उसके विकार अधेड़ आयु वाली स्त्रियों में गर्भाशय की गड़बड़ी या अन्य किसी कारण से मुत्राशय से या मूत्र मार्ग पर दबाव पड़ना और वृद्धों में प्रोटेस्ट ग्रंथि की विधि की वजह से मूत्राशय में मुत्र रुक जाता है।

मूत्र विकार के लक्षण;-

मुद्र के अभाव के कारण मूत्राशय का द्वार फूल जाता है। इसमें रोगी को बेचैनी होती है कभी-कभी मूत्र की विषैली चीजें खून के साथ मिलकर मस्तिष्क में विकार उत्पन्न कर देता है। मूत्र कष्ट के साथ बूंद बूंद करके उतरता है।

मूत्र विकार के उपचार;-

एनिमा, पेट लपेट, रूपलाल रात को सोने से पहले मैं स्नान। कभी-कभी मुत्राशय से पर गर्म ठंडा से करें। 300 मिनट के बाद स्नान के बाद ठंडे जल से स्नान व प्राणायाम करें।
  1. लौग के सेवन से मूत्र में होने वाली रुकावट दूर होकर मूत्र खुलकर आता है।
  2. आधा-आधा चम्मच अजवाइन दिन में 5 बार चबा चबा कर खाने से बार बार पेशाब आना बंद हो जाएगा।
  3. काली तिल व पुराना गुड बराबर मिलाकर कूट कर दो 2 ग्राम की गोलियां बना लें दो-दो गोली सुबह-शाम पानी के साथ लेने से बहुमूत्र ठीक हो जाएगा।
  4. जीरा धनिया और मिश्री तीनों समान मात्रा में लेकर बाड़ी की छोड़ कर ले एक दो चम्मच चूर्ण पानी के साथ लेने से पेशाब की रुकावट दूर हो जाती है।
  5. सतावर के आधा कब गाड़ी में एक-एक चम्मच मिश्री और शहद मिलाकर रोज सुबह पीने से पेशाब की रुकावट दूर हो जाती है।
  6. सतावर के रस में बराबर दूध मिलाकर पीने से मूत्र की रुकावट दूर होकर मूत्र खुलकर आता है।
  7. दिल के ताजे कच्चे फल का गोदा पीसकर दूध के साथ खूब छान कर शीतल चीनी आधा चम्मच मिलाकर आधा आधा कब सुबह-शाम पीने से पेशाब की रुकावट दूर हो जाती है।
  8. मूली के 5 ग्राम बीज वहीं पीसकर एक गिलास पानी में घोटकर छाले इसमें 2 ग्राम मूली का ताजा रस डालकर पीने से पेशाब की जलन और रुकावट दूर हो जाती है।
  9. गुर्दे की खराबी के कारण पेशाब बनना कम या बंद हो जाए तो प्रतिदिन रोली का आधा कब रस पीने से कुछ दिनों में व्याधि दूर हो जाती है।
  10. राई 25 ग्राम पिसी हुई मिश्री 50 ग्राम कलमी शोरा 25 ग्राम इन सब को मिलाकर रख लें आधा ठंडा दूध आदि ठंडे पानी में मिलाकर लस्सी बनाएं आधा चम्मच चूर्ण में तीन इलायची के दाने पीसकर डालें यह एक खुराक है इसे पाकर लस्सी पी ले सुबह ऐसा तीन चार बार आधा-आधा घंटे के अंदर से करना चाहिए मुत्रावरोध व दाह होता दूर हो जाती है
  11. छिलका सहित कौंच के बीज का महीन चूर्ण एक एक चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ लेने से पेशाब की रूकावट दूर जाती है।
  12. खास को मिश्री के साथ लेने से पेशाब की रुकावट दूर हो जाती है।
  13. पेशाब में जलन हो तो हरे धनिए का शरबत पीने से भी पेशाब की जलन दूर हो जाती है।

मुत्राशय में रोग जीवाणु का संक्रमण होने से मूत्राशय प्रदाह रोग उत्पन्न होता है। मूत्र पथ में अन्य अंगों में किडनी ,यूरेटर, और प्रोस्टेट ग्रंथि और योनि में भी संक्रमण का असर देखने में आता है। इस रूप के कई कष्ट दाई लक्षण होते हैं जैसे तीव्र गंध वाला पेशाब होना, पेशाब का रंग बदल जाना, मुत्र त्यागने में जलन और दर्द का अनुभव होना, कमजोरी महसूस होना, पेट में पीड़ा और शरीर में बुखार की हरारत से रहना, हर समय मित्र टैगने की इच्छा बनी रहती है मूत्र पथ में जलन बनी रहती है मूत्राशय में सूजन आ जाती है।

यह रोग पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज्यादा देखने में मिलता है इसका कारण है कि स्त्रियों की पेशाब की नली 2 इंच की बजाय पुरुषों की मूत्र नलिका 7 इंच लंबाई की होती है। छोटी नलिका से होकर संक्रमण सरलता से मुत्राशय को जकड़  लेता है। स्त्रियां और सेक्स सक्रिय औरतो में  मूत्राशय में प्रदाह रोग  अधिक पाया जाता है। रितु निवृत्त महिलाओं में यह रोग अधिक पाया जाता है।

इस रोग में मूत्र खोलकर नहीं होता और जलन की वजह से रोगी खुलकर पेशाब नहीं कर पाता और मूत्राशय में पेशाब बाकी रह जाता है। शेष रह गए मूत्र में जीवाणु का संचार होकर रोगी की स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है। आयनिक चिकित्सक एंटीबायोटिक दवाओं से इस रोग को काबू में करते हैं लेकिन कुदरती पदार्थों से भी इसका उपचार करना हितकारी साबित होता है।

मूत्राशय की जलन;-दानेदार धनिया मोटा पीसकर इसका छिलका अलग कर ले। फिर बीजों के अंदर की गिरी निकालकर 300 ग्राम धनिया की गिरी 300 ग्राम मिश्री या चीनी लेने दोनों को अलग-अलग पीसकर आपस में मिलाने और सभी तैयार हैं मूत्राशय की जलन के अलावा वीर्य की उत्तेजना को दूर करने में भी यह औषधि अचूक है वजन खुराक 5 ग्राम एक गिलास ठंडे पानी से दिन में 2 बार सेवन करें केवल 3 दिन तक।

पेशाब का बार बार आना;-बार-बार पेशाब आने पर 7 ग्राम भुने चने खाकर ऊपर से थोड़ा सा गुण खाली 10 दिन तक लगातार सेवन करने से बहुमूत्र आना ठीक हो जाता है। बूढ़ों को ज्यादा दिन तक या खुराक लेनी चाहिए पाचन शक्ति आदि बिगड़ी हुई हो तो भी यह प्रयोग बहुत ही लाभकारी होता है। सवेरे संध्या गुड़ के से बना तिल का एक लड्डू खाने से बार-बार पेशाब आना बंद हो जाता है। आवश्यकतानुसार चार-पांच दिन खाए सर्दियों में तो अति उत्तम रहता है। रोजाना मेथी का साग खाने से भी पेशाब का ज्यादा आना बंद हो जाता है। पेशाब बार बार और अधिक मात्रा में आए तो दो पके केले का सेवन दोपहर को भोजन के बाद कुछ दिन तक करें लाभ अवश्य होगा अंगूर खाने से भी यह रोग दूर हो जाता है। शाम को पालक की सब्जी खाने से रात को बार बार पेशाब के लिए नहीं उठना पड़ता।

पेशाब का कम आना;-दो छोटी इलायची पीस कर भाग कर दूध पीने से पेशाब खुलकर आता है और मूत्र दाह भी बंद हो जाता है। जौ का पानी नारियल का पानी गन्ने का रस और कुल्थी का पानी विशेष सहायक है। रात में तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी प्रातः पीने से भी लाभ होता है भोजन उपरांत छाछ में हरा धनिया मिलाकर पीना भी लाभदायक।

पेशाब का रुकना ;-पेशाब किसी भी कारण बंद हो तो अरंड का तेल 20 ग्राम तक गर्म पानी में मिलाकर पीने से कुछ ही देर में पेशाब खुलकर आती है
जब हर तरह से हार जाए तो यह प्रयोग जरूर आजमाएं। 2 ग्राम जीरा 2 ग्राम मिश्री दोनों को पीसकर फंकी लेने से रुका हुआ पेशाब खुल जाता है। दिन में तीन बार ले गुर्दे की खराबी से यदि पेशाब बनना बंद हो जाए तो मूली के पत्तों का रस 60 ग्राम की मात्रा पीने से फिर बनने लगता है इससे पेशाब की जलन और वेदना शांत हो जाती है।

पेशाब की जलन की आयुर्वेदिक उपचार;-
** खीरा ककड़ी का रस इस रोग में अति लाभदायक है। 200 मिली ककड़ी के रस में एक बड़ा चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर हर 3 घंटे में पीते रहने से पेशाब की जलन में तुरंत आराम मिलता है।
**पानी और अन्य तरल पदार्थ प्रचुर मात्रा में प्रयोग करें प्रतीक 10:15 मिनट के अंतर पर एक गिलास पानी या फलों का रस दिए सिस्टाइटिस नियंत्रण का यह रामबाण उपचार है।
**नींबू का रस इस रोग में उपयोगी है वैसे तो नींबू स्वाद में खट्टा होता है लेकिन गुड़ छारीय है। नींबू का रस मूत्राशय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट करने में सहायक होता है मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ होता है।
**पालक 10125 मिली में नारियल का पानी मिलाकर पिए तुरंत फायदा होगा पेशाब में जलन मिटेगी।
**पानी में मीठा सोडा यानी सोडा बाय कार्ब मिलाकर पीने से तुरंत लाभ होता है लेकिन इससे रोग नष्ट नहीं होता लगातार लेने से स्थिति ज्यादा बिगड़ सकती।
**गर्म पानी से स्नान करना चाहिए पेट और नीचे के हिस्से में गर्म पानी की बोतल से से करना चाहिए गर्म पानी के टब में बैठना लाभदायक होता है।
**मुद्रा से प्रधानों की शुरुआत में तमाम गाढे भोजन बंद कर देना चाहिए दो दिवस उपवास करें। उपवास के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पानी दूध लेते रहे।
**विटामिन सी एस्कोरबिक एसिड 500mg दिन में तीन बार लेते रहे मुत्राशय से प्रदाह के निवारण में उपयोगी होता है।
**ताजा भिंडी ले बारीक कटे दोगुने जल में उबालें छानकर याकड़ा दिन में दो बार पीने से मूत्राशय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिल जाती है।
**आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जाओ का माल मिला है इसमें नींबू का रस 5 मिलीलीटर मिलाएं और पी जाए इससे मूत्र पथ के रोग नष्ट होते हैं।
**आधा गिलास गाजर का रस में इतना ही पानी मिलाकर पीने से मूत्र की जलन दूर होती है दिन में दो बार प्रयोग कर सकते हैं।
**मूली के के कोमल पत्तों को सुखाकर सेवन करना लाभकारी बताया गया है मूत्र रोगों  में मूली के सभी अंगो का प्रयोग लाभकारी कहा गया है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ