google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical Personal healthcare tips in hindi: महिलाओं के लिए विशेष लाभदायक है ऐ उपाय।

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Personal healthcare tips in hindi: महिलाओं के लिए विशेष लाभदायक है ऐ उपाय।

 Personal health care tips in hindi: महिलाओं के लिए विशेष लाभदायक है ऐ उपाय।


एनीमिया में रक्त की ऑक्सीजन कारण किस करने की क्षमता कमजोर हो जाती है। हमारे देश में पोषणहीनताजन्य रक्ताल्पता रक्ताल्पता  न्यूट्रिशनल एनीमिया के रोगी काफी संख्या में पाए जाते हैं। विश्व में सर्वाधिक न्यूट्रिशन रक्ताल्पता के शिकार लोग भारतवर्ष में ही है। भारत में प्रतिवर्ष प्रसव काल में 85000 महिलाएं न्यूट्रीशनल एनीमिया के कारण मर जाती है। संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की एक रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में 52% पाकिस्तान में 59 प्रतिशत श्रीलंका में 62 प्रतिशत नेपाल में 74 प्रतिशत तथा सबसे अधिक भारत में 88% गर्भवती महिला न्यूट्रीशनल एनीमिया से ग्रस्त है। सहारा अफ्रीका तथा अन्य देश जहां प्रति व्यक्ति आय सबसे कम है वहां भी रक्ताल्पता के मामले में भारत जैसी  भयावह स्थिति नहीं है। जन्म के समय जन्मजात शिशु का वजन ढाई किलोग्राम से कम होने का एक मुख्य कारण एनीमिया भी है। हमारे देश में करीब 50 करोड़ से भी ज्यादा लोग म्यूटेशनल एनीमा से ग्रस्त है। कुल आबादी का आधा हिस्सा यानी हर दूसरा भारतीय रक्त हीनता का शिकार है। रक्ताल्पता में लाल रक्त कणिकाओं का आकार प्रकार छोटा तो होता ही है साथ ही साथ हीमोग्लोबिन की संख्या लेवल एवं कंसंट्रेशन भी कम हो जाता है।
  मुख्य रूप से आयरन ,प्रोटीन ,कोबालामिन, विटामिन b12 फॉलिक एसिड विटामिन सी विटामिन पी कॉपर कोबाल्ट मैग्नीशियम मिनिस्टर था ऑक्सीजन आदि पोषक तत्व मिलकर खून का निर्माण करते हैं। खून के निर्माण में यह भी पोषक राम मटेरियल के रुप में काम आते हैं। इनमें से एक या एक से अधिक पोषक तत्वों की कमी में रक्ताल्पता होती है। राया खून में मुख्य रूप से लाल रक्त कणिकाएं तथा श्वेत रक्त कणिकाएं जलीय पदार्थ पाया जाता है। रक्ताल्पता की स्थिति में तरल पदार्थ सीरम और अधिक जली एवं तरल होकर लाल रक्त कणिकाओं को कम कर देता है। सामान्यता एक स्वस्थ व्यक्ति में साड़ी 5:00 से 6:30 लाख प्रति धन मिलीमीटर खून में लाल रक्त कोशिकाएं होती है। महिलाओं में एक लाख से कम यानी 4:30 से 5:30 लाख लाल रक्त कणिकाएं होती है। और बता की स्थिति में 25 से 75% तक लाल रक्त कणिकाएं नष्ट हो जाती है या कम हो जाती है। पुरुषों में समानता साडे 13 से 15 ग्राम तथा महिलाओं में 11:30 से 14 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर खून में हीमोग्लोबिन पाया जाता है। फूल में लाल रक्त कोशिकाएं 4:30 लाख प्रति घन मिलीमीटर तथा हिमोग्लोबिन 11 से कम हो जाए तो व्यक्ति को रक्ताल्पता का शिकार माना जाता है।

लाल रक्त कोशिकाएं कम होने पर हिमोग्लोबिन भी कम हो जाता है। लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन एवं निर्माण अस्थि मज्जा यानी बोन मैरो प्लीहा तथा लसीका ग्रंथियों आदि दरा होता है। यकृत भी एक ट्रक निर्माण में सहयोग करता है लाल रक्त कोशिकाओं में स्ट्रोमा नामक खास पदार्थ पाया जाता है जिसमें हीमोग्लोबिन मिश्रित होने से खून का रंग लाल हो जाता है। हीमोग्लोबिन पर्याप्त एवं समान मात्रा में होने से खून का रंग खूब लाल तथा कम होने पर रंग फीका हो जाता है।

  गर्भावस्था में शिशु के विकास एवं रक्त निर्माण के लिए अतिरिक्त लौह एवं अन्य तत्वों की आवश्यकता होती है। उस समय मूल तत्व की कमी होने से मारता गर्भस्थ शिशु रक्त हीनता के शिकार हो जाते हैं दुर्घटना पेट तथा आंतों का असर अल्सरेटिव कोलाइटिस उधर कैंसर आंतों का कैंसर पेट का ट्यूमर गुर्दे के रूप यकृत के रूप बवासीर के कारण निरंतर रक्तस्राव होने से रक्ताल्पता की स्थिति पैदा हो जाती है। मलेरिया स्ट्रेप्टोकल इंफेक्शन के कारण भी खून की कमी होती है कभी-कभी शरीर में मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया गड़बड़ होने से हमारी अटरिया भोजन में मौजूद पोषक तत्वों का अवशोषण एवं समीकरण अच्छी तरह नहीं कर पाती हैं। परिणाम स्वरूप आयरन तथा खून बनाने वाले अन्य सहयोगी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इस प्रकार रोगी की  खून की कमी का शिकार हो जाता है शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारने के लिए प्राकृतिक एवं योग चिकित्सा ही एक सशक्त प्रयोग है। रक्तस्राव रुकने के बाद रक्त निर्माण करने वाले पोषक तत्वों का भरपुर सेवन जरूरी है रक्त साल की अवस्था में विश्राम करना चाहिए विश्राम की स्थिति में शरीर के समस्त भागो जैसे पाचन संस्थान एवम खून बनाने वाले संस्थान प्लीहा एक त्रित अस्थि मज्जा तथा लसिका ग्रंथियों को भरपूर आराम मिल जाता है। अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में अचानक उठने खड़े हो लिया चलने में हार्ड प्ले हार्ड अटैक ओं करोगी की अकाल मौत हो जाती है। रक्त स्राव वाले रोगी को कभी भी गरम उपचार नहीं देना चाहिए। क्लोरोमायसेटिन रेडियोथैरेपी एंटी कैंसर दवाई वायरल इनफेक्शन एसटी राइट दवाओं के प्रयोग से बोन मैरो में बनने वाले स्टेम कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है। स्टेम कोशिकाओं के द्वारा खून के विभिन्न घटकों लाल रक्त कणिकाओं श्वेत रक्त कणिकाओं प्लेटलेट्स आदि का निर्माण होता है। स्टेम कोशिकाओं के कम होने से रक्त घटकों की संख्या यहां तक कि हीमोग्लोबिन भी कम होने लगता है। प्राय देखा गया है कि कुछ एक लोगों में 30 साल की उम्र के बाद बेवजह स्टेम कोशिकाओं की संख्या कम होने लगती है। अभी तक इसका वैज्ञानिक कारण नहीं समझा जा सकता है। कॉल्स डिजीज सिलियक डिजीज कालिक डिजीज से ग्रस्त रोगियों के अंगों में एक खास प्रकार के फैक्टर "एंट्रीन्सिक फैक्टर "की कमी हो जाती है. ऑटो की अंदरूनी स्थल में एंट्री एलसीक फैक्टर का रिसाव होता है। जो गृहित आहार में मौजूद विटामिन b12 को अवशोषित कर लेता है उपर्युक्त रोगों में तथा पेट की अंदरूनी गड़बड़ियों के कारण इंट्रिसिक फैक्टर का रिसाव होने से विटामिन बी अवचूसित नहीं हो पाता। अधिक मात्रा में अल्कोहल लेने तथा उपयुक्त रोगों के चलते  फोलिक एसिड का भी और शोषण नहीं होता है। इस प्रकार विटामिन b12 तथा फोलिक एसिड का शरीर के अभाव होने के कारण मेगाब्लोस्टिक एनीमिया होता है। सामान्य अवस्था में विटामिन b12 हमारे अतीत में वर्ष तक जमा रहता है जो इमरजेंसी में काम आता है। फोलक एसिड प्रतिदिन खाए जाने वाले आहार में पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है। इसीलिए लीवर में संग्रहित नहीं होता है। बहु प्रचारित एवं प्रचलित न्यूट्रोफ्युरोजन, स्ट्रोप्टोमाइसिन, क्लोरोम्फेनिकाल, आदि एंटीबायोटिक दवाओं तथा मलेरिया परजीवी नाशक दवाओं के कारण लाल रक्त कोशिकाओं की विनाश लीला प्रारंभ हो जाती है। फलत: रक्ताल्पता की स्थिति पैदा होने लगती है।
  इसके विकास काल तथा बाल्यावस्था एवं किशोरावस्था गर्भावस्था तथा स्तनपान काल में अतिरिक्त लोहा एवं खून निर्माण करने वाले अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है इन विशेष अवस्था में खानपान का खास ख्याल रखा जाना चाहिए।

एनीमिया के रोगी के लिए खून के निर्माण में सहायक निम्नलिखित आहार तत्व को अत्यंत आवश्यकता होती है।

प्रोटीन (CHN)

खून के निर्माण में प्रोटीन का खास महत्व होता है। दृश्य बादाम काजू अखरोट मूंगफली में वे सभी प्रकार की अंकुरित दालें बीज अंकुरित सोयाबीन मूंग मोठ ‌‌‌मसूर, मटर चना इत्यादि दूध पनीर छेना दही मछली अंडा इत्यादि प्रोटीन के भंडार है। मांसाहार के बदले अंकुरित अनाज, सोयाबीन , पालक गाजर तथा फल सब्जी आदि में संपूर्ण प्रोटीन पाया जाता है।

लोहा, आयरन(fe);-

दुर्वा, गेहूं ,तथा जौ, हरी पत्ते वाली सब्जियां, जामुन ,ब्लैकबेरी, पीएं, खुर्बानी ,सेब, केला, चना, चौराई ,मेथी, मूली ,चुकंदर तथा पालक की पत्तियों का साग, कोमल नीम के पत्ते, राब 
 या मोलासेस, ब्लैक चेरी आलू बुखारा आलू साबूदाना सफेद प्याज ढेकी , तथा हाथ कुटा चावल, राई नाच पाटी अमरूद आंवला अनार संतरा नींबू भीगी मूंगफली गुड अंकुरित अनाज नींबू तेल मूंगफली या गुड़ गुड़ का लड्डू या चिट्ठी खजूर अंजीर काला मुनक्का अरहर दाल नींबू पालक टमाटर का रस सेब का रस अनार के रस में पर्याप्त मात्रा में आयरन होता है मांसाहार में लीवर कुर्ते मस्तिष्क में आयरन तथा विटामिन b12 होता है। साबुत अनाज तथा फलियों में आयरन सर्वाधिक मात्रा में होता है परंतु इनमें मौजूद फआयटएट्स तथा फास्फेट की मात्रा लोहे की सूखने में बाधा डालती है। साबुत अनाजों को भिगोकर एवं अंकुरित करके खाने से फायटे्टस तथा फास्फेट से घुलकर बाहर निकल जाते हैं साथ ही अंकुरण के दौरान विटामिन सी तथा अन्य एंजाइम्स की सक्रियता बढ़ने से लोहे का अवचूषण भी बढ़ जाता है। हरी पत्तियों के रस में टमाटर आंवला या नींबू का रस मिलाकर लेने से शरीर द्वारा लोहा शीघ्र सोख लिया जाता है। लोहा सूखने के लिए अम्लीय एवं विटामिन सी माध्यम चाहिए। जो आंवला टमाटर का नींबू रस एवं अन्य साइटलेस फ्रूट्स तथा सब्जियों में खूब पाए जाते हैं।
  सब्जियों को लोहे की कढ़ाई में बनाने से पर्याप्त मात्रा में लोहा मिल जाता है दूर तथा छैला भी लोहे के पात्र में ही उबालें एवं बनाए। कोला चाय या ट्रेनिंग तथा चाय और कॉफी का कैफीन लोहे को सूखने में बाधा डालते हैं। अतः इनका उपयोग एनीमिया के रोगी को नहीं ही करना चाहिए।

कोबाल्ट(co);-

खून के निर्माण में विटामिन b12 की खास उपयोगिता है विटामिन b12 के निर्माण में कोबाल्ट अति महत्वपूर्ण आहार है। यही वजह है कि विटामिन b12 का नाम ही कोबाल्ट ऐमिन है। छोटी आंत में विटामिन b12 पैदा करने वाले व्यक्ति रिया कोबाल्ट को खाकर ही बैक्टीरियल प्रक्रिया द्वारा कोबाल्ट एमिध पैदा करते हैं। कोबाल्ट लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण में भी विशेष योगदान देता है उनकी संख्या में वृद्धि करता है एवं खून द्वारा अक्सीजन और अवचूषण में सहभागिता निभाता है। हरे पत्ते वाली सब्जियां खूब पके फल दूध तथा जिस जमीन में कोबाल्ट की मात्रा अधिक होती है उससे प्राप्त फल साग सब्जी अनाज आदमी कोबाल्ट खूब पाया जाता है।

कॉपर (तांबा cu),;-

लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण में तांबे का खास महत्व है। चुकंदर तथा चुकंदर के पत्ते की सब्जी पालक तथा सभी प्रकार के पत्ते वाली सब्जियां गाजर मूली तथा मूली का पत्ता छोटी गोभी हरी मिर्च अनानास आलूबुखारा तरबूज खरबूजा ताम्रपत्र खरबूजा ताम्रपत्र के प्रमुख स्रोत है तांबे का अधिक प्रयोग भी हानिकारक होता है तांबे के अधिक प्रयोग से लीवर का डिजनरेटिव रोग हो सिरोसिस हो जाता है।

मैग्नीज (mn):-
खून के निर्माण में मैग्नीज एक महत्वपूर्ण राम मटेरियल है। मैग्नीज आयरन तथा फास्फोरस के कार्य अंतर संबंधित है तथा एक दूसरे पर आश्रित भी है। यह फोन के साथ-साथ उतको को भी ताकत प्रदान कर शरीर को सुंदर सुडौल बनाता है। मैग्नीज थायराइड से निकलने वाले हार्मोन थायरोक्सिन तथा लाल रक्त कणों के निर्माण में खास भूमिका निभाता है। रक्त निर्माण में सहायक विटामिन कोलीन तथा प्रोटीन के मोटाबेलेजिम को उन्नत करने के लिए कुछ विशेष प्रकार के एंजाइमों को क्रियाशील करता है । नीच का सर्वोत्तम स्रोत पुदीना प्याज बादाम वाटर के पालक टमाटर केला मुनक्का तथा चुकंदर है। सभी प्रकार के अंकुरित अनाज दलहन तथा तिलहन में पर्याप्त मात्रा में मैग्नीज पाया जाता है।
मैग्नीशियम  (mg):-मैग्नीशियम रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायता करता है हरी साग सब्जियां का मुख्य घटक है। क्लोरोफिल इसे ग्रीन ब्लड भी कहते। ग्रीन ब्लड का न्यूक्लियस मैग्नीशियम भी होता है। न्यूक्लियस मैग्नीशियम होने के कारण ही पौधे की ग्रीन ब्लड क्लोरोफिल का रंग हरा है तथा मानव रक्त हिमोग्लोबिन का न्यूक्लियस आयरन होने के लाल रंग लाल है। मैं म्यूजियम रक्त कोशिकाओं को पुनर्निर्माण एवं पुनर्जीवन देने के कारण संजीवनी का काम करता है। पालक गेहूं तथा जॉब के पौधे का रस सभी प्रकार के पत्ते वाली सब्जियां नारंगी अंजीर बकरी का दूध फ्रूट केला, एवोकाडो, जाओ जी पीली मक्का कुर्बानी से आलूबुखारा नाशपाती जामुन आम तथा सभी प्रकार के सूखे मेवे एवं अंकुरित अनाज में पर्याप्त मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है।
विटामिन सी:-विटामिन सी सीधे रक्त निर्माण में भाग तो नहीं लेता लेकिन विटामिन सी के अभाव में रक्त निर्माण करने वाले मुख्य घटक लोहे का अवशोषण भली भाति नहीं हो पाता है। विटामिन सी युक्त आहार की विशेषता है कि यह रिड्यूजिंग एजेंट का काम करता है। अर्थात लव यू बहारों में मौजूद तेरी लोहे को फेरस लोहे में परिवर्तित कर देता है। फेरस लोहा शरीर द्वारा शीघ्र सोख लिया जाता है तथा खून के निर्माण हेतु भेज दिया जाता है। इस दृष्टि से विटामिन सी युक्त भोजन रक्ताल्पता के रोगियों के लिए वरदान सिद्ध होता है। विटामिन सी लोहे के मेटाबॉलिज्म का उल्लेख करता है। विटामिन सी का महानतम स्रोत आंवला, अमरूद ,अनार , अंगूर, अंकुरित अनाज, संतरा ,नींबू, चकोतरा, फ्रूट ,मुसम्मी ,जामुन खट्टे फल है। सभी प्रकार के ताजे फल एवं ताजी हरी सब्जियों में विटामिन सी खूब पाया जाता है। पत्ता गोभी मटर की फली हरी मिर्च ,खुर्बानी, ब्लूबेरिज तरबूज खरबूजा आदि मेंलांस में विटामिन सी खूब पाया जाता है। विटामिन सी खून की नलिया,टएण्डन्स, लिगोमेल्ट्ज, कर्रटिलेस, अस्थि मज्जा के निर्माण में सहायता करता है। कपड़ो की दीवारों को भी मजबूत बनाता है‌।
विटामिन -पी:-विटामिन पीटता विटामिन से मिलकर खून की नदियों को कठोर होने से बचाते हैं। विटामिन बी की कमी से त्वचा के अंदरूनी हिस्से में रक्तस्राव होने से जगह-जगह लाल निशान हो जाते हैं। परप्युरा संबंधी रक्ताल्पता हो जाती है खून की नदियां कमजोर हो जाती है। उनमें अनेक बीमारियां पनपने लगती हैं। विटामिन बी का रासायनिक नाम एरिओडिक्टओल(3,4,5,7 टेट्रा हाइड्रॉप्स फ्लेवेनोन) तथा विटामिन सी का रासायनिक नाम एवं ए (स्कोरबिक एसिड एल एस्कोरबिक एसिड एल्डिहाइड एस्कोरबिक एसिड) है विटामिन पी तथा विटामिन के प्रसाद से उत्पन्न रक्ताल्पता के लिए अति आवश्यक विटामिन है। विटामिन बी विटामिन सी के साथ ही आंवला नींबू आदि खट्टे फलों में पाया जाता है।
विटामिन -के:-विटामिन के कोगुलेट  विटामिन या रक्तस्राव अवरोधक विटामिन बी कहते हैं। सर्जरी के समाचार रक्तस्राव जने रक्ताल्पता के रोगी के लिए विटामिन सी विटामिन पी तथा विटामिन के युक्त आहार अवश्य देना चाहिए। विटामिन के भी दो प्रकार का होता है के 1 तथा के 2 जीवन को सर्वप्रथम अल्फा अल्फा यानी रिजका से तैयार किया गया। k2 को मछलियों से प्राप्त किया गया। विटामिन के का तीसरा रूप मनोडियोन भी है। रक्त का प्रमुख घटक प्रोथोम्बिक विटामिन के से ही बनता है। विटामिन के के प्रधान स्पॉट ताजी हरी सब्जियां फल अल्फाल्फा के अंकुरण जौ तथा गेहूं के घास रस है। अंकुरित अनाज में एक विशेष प्रकार के पीले रंग के तेल से विटामिन कि पाया जाता है। हमारी आंखों में उपस्थित कुछ उपयोगी बैक्टीरिया द्वारा भी विटामिन के का निर्माण होता है। अल्सर अतिसार तथा लिवर की खराबी में शरीर में विटामिन के की कमी हो जाती है विटामिन के का रासायनिक नाम फाइलोक्इनोन है।
Vitamin b9_ folic acid:-विटामिन b9 जिस का रासायनिक नाम फॉलिक एसिड खून के मुख्य घटक लाल रक्त कोशिकाओं सफेद रक्त कोशिकाओं तथा एंटीबॉडीज के निर्माण में भरपूर सहायता करता है। विटामिन b9 हृदय की पंपिंग रिया को भी सही सलामत रखकर शरीर के अंग प्रत्यंग में खून का संचार करता है। विटामिन b9 की कमी से रक्ताल्पता रोग तेजी से पकड़ता है। गर्भावस्था में इसकी कमी होने से नवजात शिशु में भी खून की कमी और दिमागी विकृतियां पैदा हो जाती है अस्थि मज्जा में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में कैटालिस्ट का कार्य करता है। चल फ्री हरी पत्तियों में प्रचुरता से मिलने के कारण विटामिन b9 को फोलिक एसिड कहा जाता है। पाली कैसेट चमकीला पीला पदार्थ होता जो सूर्य की किरणों में नष्ट हो जाता है। फालिक एसिड गर्भ निरोध भी रोकता है। साबुत अनाज के आटे की रोटी फूलगोभी हाथ कुटा चावल, अंकुरित जौ तथा गेहूं का दलिया। सुखी मेवे, तथा ताजी सब्जियां में फोलिक एसिड पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। फोलिक एसिड खतरनाक प्रोटीन उत्पाद होमस्टेंसिटीन से मुक्ति दिलाता है।
विटामिन b12;-विटामिन b12 का रासायनिक नाम कोबालामिन है। विटामिन b12 के प्रमुख घटक लाल रक्त कोशिकाओं तथा हीमोग्लोबिन के बढ़ाने तथा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्भावस्था में इसके प्रभाव घातक प्रभाव गर्भस्थ एवं जन्मजात शिशु पर होता है। या न्यूक्लिक एसिड तथा न्यूक्लिक प्रोटीन संश्लेषण भी करता है इसके अभाव में कुप्रभाव से अस्थि मज्जा में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण का कार्य थप्पड़ जाता है। परिणाम स्वरूप परनीसीय रक्ताल्पता  होती है। इसके प्राप्ति के स्रोत हैं जैसे दूध दही पनीर छाछ अंडा यकृत दिमाग गुर्दे झरना कुओ झीलों का पानी और सभी प्रकार के अंकुरित अनाज अल्फा अल्फा आज विटामिन b12 के मुख्य स्रोत है।
विटामिन बी सिक्स;-विटामिन बी सिक्स की कमी से भी एनीमिया रोग होता है विटामिन बी सिक्स लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण में खास भूमिका निभाता है या एंजाइम का कार्य करता है. विटामिन बी सिक्स की उपस्थिति में टिप्टोफिन नायसिन  में रूपांतरित होता है। इसीलिए से प्रोटीन विटामिन भी कहते हैं विटामिन बी सिक्स का रासायनिक नाम पायरीडाक्सीन है। विटामिन बी सिक्स का मुख्य स्रोत गेहूं का अंकुल आना चोकरदार आटा अनाज की रोटी, बादाम काजू पिस्ता नारियल मूंगफली आदि में वे तथा कड़े छिलके वाले खाद्य पदार्थ है।
विटामिन एच:-विटामिन एच का रासायनिक नाम बायोटीन है या खून के निर्माण में भाग लेता है अंडे के सफेद भाग के दुष्प्रभाव को विटामिन एच दूर करता है इसीलिए से एंटी एगवाइट फैक्टर भी कहते हैं। किसकी कमी से रखते हीनता नर्वसनेस त्वचा का पीला पड़ना बाल झड़ना तथा मांसपेशियों में दर्द के लक्षण दिखते हैं। इसके मुख्य स्रोत है ब्रेवर्सयीस्ट, मोलासेस, गेहूं का अंकुरण फूल गोभी प्याज टमाटर गेहूं मूंगफली दूध दही पनीर तथा खट्टे फल आदि है। आंतों में स्थित मित्र जीवाणु की विटामिन नियत का निर्माण कर लेते हैं ।
कोलीन:-कोलीन मेथीऑनइन विटामिन b12 तथा एसिड एक दूसरे का सहयोग कर रक्ताल्पता से रक्षा करते हैं। कॉलिंग के द्वारा विटामिन b12 तथा दिमाग में विद्युत चुंबकीय न्यूट्रान्समीटर्स, ऐसी टाइल कोलीन का निर्माण भी करता है। हल सोयाबीन काजू बादाम अखरोट आदि में भी साबुत अनाज दलहन तथा तिलहन का अंकुरण दूध फल साग सब्जियों में कोलीन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
पैरा एमिनो बेंजोइक एसिड;-इसे प ए बी ए एन इ पाबा भी कहते हैं । पाबा शरीर में फोलिक एसिड के निर्माण में सहायता करता है। जो अस्थि मज्जा में लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में सहायता करता है। हाथ कुटा चावल, अंकुरित अनाज खमीर मोसेस में पाबा खूब पाया जाता है।

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