google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical Health care tips,शरीर में हो रही है प्रोटीन की कमी, तो करें इन सब्जियों का सेवन, मिल सकते हैं कई फायदे

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Health care tips,शरीर में हो रही है प्रोटीन की कमी, तो करें इन सब्जियों का सेवन, मिल सकते हैं कई फायदे


  Health care tips,शरीर में हो रही है प्रोटीन की कमी, तो करें इन सब्जियों का सेवन, मिल सकते हैं कई फायदे

ताजा हरी सब्जियों को संपूर्ण आहार का 30 परसेंट होना चाहिए । सात सब्जियों को प्रकृति की फार्मेसी मानना चाहिए। सब्जियां झार धर्मी होती हैं। सब्जियों का सूप जूस या कच्ची अवस्था में खाना सर्वोत्तम औषधि है। इनमें रोग के कीटाणुओं को दूर करने वाले तत्व रक्त को शुद्ध करने वाले गुण सूक्ष्म तत्वों को मरम्मत व विकास हेतु प्राकृतिक लवण चार तत्व शर्करा साधारण विटामिन ए विटामिन बी विटामिन सी अधिक मात्रा में श्वेत सार प्रोटीन फुजला कैल्शियम आयोडीन लोहा फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें देह‌ की कार्यक्षमता बढ़ाने, शरीर को पुष्ट करने ,परिपाक शक्ति को सहेज के रखने, रक्त कणिकाओं के उत्पादन ,शरीर शोधन, हड्डी ,,में दांत को बनाने, हृदय व स्नायु तंत्र की रक्षा करने ,वेरी-वेरी, क्षय रोग आदि के निवारण निरोगी व धैर्य जीवन में सहायता मिलती है।

शाक सब्जियों का महत्व (Importance of vegetable vegetables);-

पहले से कटी हुई सब्जियों में विटामिन सी का ऑक्सीकरण हो जाता है। सब्जी के छोटे-छोटे टुकड़े काटने की जगह बड़े-बड़े टुकड़े काट लें उन्हें तभी काटे जब उसे पकाना हो। और तभी पकाएं जब खाना हो क्योंकि पकाने के बाद उसको रख देने से विटामिन नष्ट हो जाते हैं। अकाली के लिए उसमें कम से कम पानी डाली जिससे नाव पानी फेंकना पड़े ना उसे जला ना पड़े। सब्जी को बहुत देर तक ना पकाएं पत्ते ही आंख से उतार दें जिन सब्जियों में छिलका उतारने की आवश्यकता नहीं है उन्हें छिलके सहित बनाएं। चिल्का उतारना आवश्यक हो बहुत मोटा व गहराई में ना उतारे हल्का छीलकर बनाएं छिलके के ठीक नीचे विटामिन होते हैं छिलके सहित या कम छिलका उतारने से कब्ज नहीं होती है। प्राकृतिक रेशा कोलेस्ट्रोल और रक्त गुलकोज को संगत बनाए रखने में सहायक सिद्ध होता है।
  साग सब्जी हमेशा ताजी अवस्था में ही लेनी चाहिए खेतों में जिस समय सब्जी तोड़ी जाती है उसमें विटामिन मूल्य उसी समय से घटने लगता है बासी और सूखी सब्जियां खाने से पेट में वायु पैदा हो जाती है। सब्जी खरीद कर घर में रख देने से विटामिन की कुछ न कुछ बर्बादी होती है। इसीलिए सब्जी प्रतिदिन जितनी आवश्यकता हो उससे अधिक नहीं खरीदनी चाहिए सब्जी घर लाने पर यदि नहीं बनानी हो तो ठंडी जगह पर रखनी चाहिए।

  चेस्ट मात्रा में साग सब्जी खाने से आंतों को मल त्याग करने की उत्तेजना प्राप्त होती है हरी पत्तेदार सब्जियां रासायनिक कर्मशाला है। पत्तों के भीतर जो हर एकड़ है वह सूर्य की किरणों के सहारे उन्हें खाद्य में परिणत करते हैं। पेड़ों के पत्ते एक संपूर्ण खाद्य होते हैं पत्तेदार सब्जियों में क्लोरोफिल जो रक्त कण हीमग्लोबिन का आहार है अधिक पाया जाता है। इनमें लोहा विटामिन ए व सी प्रचुर मात्रा में होता है। गाजर पालक प्याज पत्ता गोभी लौकी खीरा टमाटर लहसुन मूली आंवला ककड़ी चुकंदर अदरक नींबू करेला आदि को कच्चा खाया जा सकता है या रस निकालकर पिया जा सकता है।

  निम्नलिखित साग सब्जियों द्वारा रोगों की चिकित्सा करके  स्वास्थ्य लाभ उठा सकते हैं:-
आलू( Potato);-विश्व भर में सब्जी के रूप में जितना आलू का उपयोग होता है उतना शायद ही किसी अन्य साग का होता है। यह गलत धारणा है कि आलू खाने से मोटापा बढ़ता है तथा मोटे व्यक्तियों को इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। आलू यदि क तेल में तलकर खाया जाए तभी मोटापा बढ़ता है। उबला या भूल हुआ आलू बेहद फायदेमंद और पौष्टिक आहार है। पौष्टिकता की दृश्य आलू लाल वाला सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। हरे आलू का सेवन कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि इनमें सलोनिन नामक हानिकारक तत्व अधिक मात्रा में पाया जाता है यह तत्व पेट में शरीर की नसों के लिए नुकसानदायक होता है।

  आलू के साथ-साथ उसका छिलका भी बहुत गुणकारी होता है यह शरीर में चींटी दूषित कोशिकाओं को साफ करके शरीर को बहुत से रोगों से बचाता है। आलू की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह स्वयं छार युक्त होने के कारण शरीर में विद्यमान क्षारों या किसी छार की अधिक मात्रा को नियंत्रित रखने में सक्षम होता है। यह पाचन संस्थान में ऐसे कीटाणुओं की विधि करने में समर्थ होता है जो शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होता है इसके सेवन में किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। आलू खाते रहने से रक्त वाहिनी या दीर्घ काल तक लचकदार बनी रहती है तथा कठोर नहीं होने पाती इसीलिए आलू खाकर लंबी आयु प्राप्त की जा सकती है आलू में बसाया चिकनाई नहीं होती अतः रोटी से जल्दी पचता है तथा शक्ति देने वाला है ।यह संपूर्ण आहार है।

1**  आलू में सल्फर पाया जाता है जो शरीर की त्वचा को दोष रहित रखने के लिए उपयोगी है।
2**  आलू में विटामिन सी तथा विटामिन बी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है इसमें विटामिन ए तथा विटामिन ई की मात्रा भी उचित रूप में होती है।
3** आलू के पत्तों में लोहा कैल्शियम तथा विटामिन ए बी और सी प्रचुर मात्रा में होता है।
4** आलू परिश्रमी परिश्रम के कारण निर्बल बने हुए रक्तपित्त से पीड़ित शराबी और तेज जठराग्नि वाले लोगों के लिए अत्यंत पोषक है
5** आलू बच्चों को हूं तथा उन व्यक्तियों जिनकी आंखें कमजोर हो के लिए बेहतर आहार है क्योंकि इसमें पाए जाने वाला कार्य तथा प्रोटीन शीघ्र पच जाते हैं।
6** आलू का प्रोटीन बड़ों के लिए बहुत ही शक्ति देने वाला और बुढ़ापे की कमजोरी को दूर करने वाला होता है।
7** आलू में छिलके के ठीक नीचे कई प्रकार के विटामिन तथा खनिज होते हैं। इसे छीलकर हम सब लाभदायक तो तत्व खो देते हैं। शेष बचे आलू में स्टार्च की मात्रा ज्यादा होती है आलू को काटकर धोने से इसमें अधिकार विटामिन बी तथा विटामिन सी नष्ट हो जाते हैं।
8** पूरी तरह पका हुआ आलू सबसे श्रेष्ठ होता है सफेद और पीले आलू मध्यम तथा निम्न कोटि के होते हैं जबकि हरे नीले या काले आलू निकृष्ट होते हैं इनका सेवन हानिकारक होता है।
9** आलू में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा मस्तिष्क की उन तंत्रिकाओं को हरकत में लाती है जो स्मरणशक्ती से जुड़ी होती है अतः आलू के नियमित सेवन से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
10** बेरी बेरी रोग में आलू का एक-एक चम्मच रस दिन में चार बार नित्य के पिए।
11** आलू का सेवन उबालकर करना चाहिए तलने से वसा की मात्रा में सोख लेता है तला हुआ आलू मोटापा बढ़ाता है।
12** जबड़े की हड्डियों में सूजन या रक्त आता हो तो बुला आलू या छिलके सहित उसका पतला साग खाने से लाभ होता है।
13** जलने पर फफोले पड़ने से पूर्व आलू को पीसकर लेप करने से जलन शांत हो जाती है फफोले नहीं पढ़ते दिन में तीन बार लेप करने से जला हुआ स्थान शीघ्र ठीक हो जाता है।
14** घुटने में शोथ, सूजन होने पर कच्चे आलू को पीसकर लगाने से शीघ्र लाभ होता है। गठिया में कच्चे आलू के रस का प्रयोग भोजन के पूर्व करने से लाभ होता है। भोभल मे चार आलू भूलकर नित्य खाने चाहिए।
15** आलू का रस त्वचा पर मलते रहने से रंग गोरा होता है।
16**आलू का रस शरीर के रक्त विकार तथा फोड़े फुंसियों को दिन में तीन चार बार एक-एक चम्मच आलू का रस पीने से सही हो जाता है।
17**आलू के रस में नींबू का रस ग्लिसरीन मिलाकर चेहरे और हाथ पर लगाने से झुर्रियां व सूखापन समाप्त हो जाता है।
18** दूध पीते हुए बच्चों को आलू के रस में शहद मिलाकर पिलाने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वे हृस्ट पुष्ट रहेंगे।
19** कीट वेदना हो तो कच्चे आलू की पुल्टिस कमर में लगाएं।
  1. 20** चोट लगने पर नीला जम जाए तो कच्चा आलू पीसकर लगाने से आराम होता है।
21** तेज धूप लू से त्वचा झुलस गई हो तो आलू का रस लगाने से सौंदर्य में निखार आ जाता है।
22**  सीधे में जलन हो तो आलू का रस पीने से तुरंत ठंडक प्रतीत होती है।
23** कच्चे आलू का रस सुबह-शाम काजल की तरह आंखों में लगाने से 500 वर्ष पुराना जाला 4 वर्ष पुराना फूला 3 महीने में साफ हो जाता है।
24** कच्चे आलू काटकर आलू के वजन के डेढ़ गुना पानी में उबालें जब 1 गुना पानी रह जाए तब उस पानी से सूजन वाले अंग का सेक करें।
25** आलू में मैग्नीशियम पाया जाता है जो उच्च रक्तचाप को कम करता है आलू डालते समय नमक डाल दें आलू के छिलके सहित खाए लाभ होगा।
26** आलू में पोटेशियम की मात्रा अधिक पाई जाती है गुर्दे के रोगी को भोजन में आलू खाना चाहिए इसमें मौजूद पोटैशियम गुर्दे से अधिक नमक की मात्रा निकाल देते हैं इससे गुर्दे के रोगी को लाभ होता है।
27**  चर्म रोग जिसमें लाल सूजन युक्त छोटी-छोटी फुंसियां होती है साथ में बुखार रहता है आलू को पीसकर लेप लगाने से इससे लाभ होता है।
28** दोनों जिम में लगातार 1  -1 छोटा आलू रखने से आमवात में बहुत लाभ होता है।
29** आलू के पत्तों की सब्जी खाने से पुरानी से पुरानी खांसी ठीक हो जाती है।
30** गलती से नुकीली चीज जैसे कि 3:00 आज निकल जाए तो बुला आलू या केले खाने से वह मल के साथ बाहर आ जाती है।
31** आलू में आधा कप रस में आधा कप पानी मिलाकर सवेरे निरहाले ताजा ही बनाकर पिए इस पानी से जोड़ों में
काफी लचक आती है और जकड़न दूर होती है।

आंवला;-

आल्हा में सर्वाधिक विटामिन सी होता है आंवला शरीर की थकान दूर करता है। यह बल कांति स्फूर्ति शक्ति तथा स्वास्थ्यवर्धक है। सूखा आंवला धातु वर्धक में वृद्धि नाशक जहर के प्रभाव को दूर करता है इसके सेवन से वीर्य की निर्बलता दूर होती है दांतों में चमक आती है मस्तिष्क के तंतुओं में गिरावट आती है हृदय की बेचैनी धड़कन में दिल्ली रक्तचाप से दाद में लाभदायक है। आंवला शरीर में आरोग्य शक्ति बढ़ाता है।

  1. आंवले के रस में शहद मिलाकर लेने से पित्त ज्वर दूर हो जाता है।
  2. आंवले का चूर्ण और मिश्री मिलाकर प्रतिदिन प्रातः का लेने से सिर दर्द दूर हो जाता है।
  3. आंवले के रस में शहद या छोटी पीपल मिलाकर लेने से उल्टियां बंद हो जाती है।
  4. आंवले के रस में अनार का रस मिलाकर लेने से रक्तस्राव बंद हो जाता है।
  5. आंवले के रस में मिश्री मिलाकर पीने से गर्मी से उत्पन्न हिचकी उनका इतिहास अति शीघ्र शांत हो जाती है। आंवला;-
  6. आंवला में सर्वाधिक विटामिन सी होता है आंवला शरीर की थकान दूर करता है। यह बल कांति स्फूर्ति शक्ति तथा स्वास्थ्यवर्धक है। 
  7. सूखा आंवला धातु वर्धक में वृद्धि नाशक जहर के प्रभाव को दूर करता है इसके सेवन से वीर्य की निर्बलता दूर होती है दांतों में चमक आती है मस्तिष्क के तंतुओं में गिरावट आती है हृदय की बेचैनी धड़कन में तिल्ली रक्तचाप से दाद में लाभदायक है। आंवला शरीर में आरोग्य शक्ति बढ़ाता है।
  8. होली के 3 ग्राम बीज को पानी में पीसकर छानकर शहद या मिश्री मिलाकर कुछ दिन सुबह-शाम सेवन करने से श्वेत प्रदर् में लाभ होता है।
  9. हॉलीवुड नीम के पत्ते समान मात्रा में लेकर महीन चूर्ण करें 2 से 4 ग्राम प्रातः शहद के साथ लेने से गलित कुष्ठ में लाभ होता है।
  10. आंवले का 24 ग्राम चूर्ण संभाग गुड 1:30 ग्राम पानी में आधा शेष रहने तक उबालें छानकर सुबह-शाम पीने से गठिया बाद में शीघ्र लाभ होता है इस दौरान नमक बंद रखें।
  11. आंवले के चूर्ण में बराबर सोठ का चूर्ण मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से मलेरिया नहीं होता।
  12. आंवले की गुठली को जलाकर उसे नारियल के तेल में मिलाकर खुजली व फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है।
  13. यदि ताजा रक्त स्राव हो रहा हो उस पर आंवले का रस लगाने से रक्तस्राव बंद हो जाता है।
  14. होली को पीसकर उसे मिट्टी के बर्तन में लेप कर उसमें छाछ भरकर पीने से अर्श रोग में विशेष लाभ होता है।
  15. आंवला टूटी हड्डियों को जोड़ने में सक्षम है अतः हड्डी टूट जाने पर इसका सेवन करना श्रेष्ठ कर है।
  16. आंवले का चूर्ण मूली के साथ खाने से मूत्राशय की पथरी में लाभ होता है।
  17. ताजे आंवले के रस में शहद मिलाकर लेने से मधुमेह रोग ठीक हो जाता है।
  18. पिसा हुआ एक चम्मच आंवले का चूर्ण रात में पानी या दूध के साथ लेने से दस्त साफ आता है कब्ज नहीं रहता तथा आंते व पेट साफ रहता है।
  19. स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए नित्य प्रातः आंवले का मुरब्बा खाएं।
  20. बच्चों का हकलाना तुतलाना आंवला जवानी से जी पतली होकर बोली साफ आने लगती है।
  21. इसे हुए आंवले की एक चम्मच पानी से फंकी लेने से गला खुलकर आवाज साफ आने लगती है।

करेला के गुणकारी और आयुर्वेदिक लाभ;-

करेले में अनेक रोगों को सहन करने की शक्ति है करेले में विटामिन ए बी सी खनिज लवण प्रोटीन आयरन और स्वास्थ्यवर्धक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। करेले की जड़ व पत्तियों का प्रयोग कब्ज दूर करने शरीर को ठंडा रखने भूख बढ़ाने पीलिया रोग आदमी किया जाता है इसे घी में छौककर खाना अधिक लाभप्रद होता है।
  1. मधुमेह रोग में 15 ग्राम करेले का रस 100 ग्राम पानी में मिलाकर नित्य तीन बार 3 महीने तक पीने से लाभ होता है।
  2. पैरों में जलन होने पर करेले के पत्तों की मालिश करने से लाभ होता है।
  3. करेले का 7 ग्राम रश्मित कुछ दिनों तक सेवन करने से शरीर का दूषित रक्त साफ हो जाता है।
  4. करेले के रस में शक्कर मिलाकर पीने से खूनी बवासीर में लाभ होता है करेले के रस में पानी मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से पीलिया बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।
  5. करेले के टुकड़ों को छाया में सुखाकर पीसकर महीन चूर्ण बना लें 6 ग्राम पानी छोड़ के साथ सेवन करना मधुमेह के रोगी के लिए लाभप्रद है।
  6. करेले का भर्ता बनाकर खाने से गठिया की सूजन कम हो जाती है।
  7. केले के छिलके वह पत्तों को पीसकर जले तवे पर मलने से तभ की जलन दूर हो जाती है।
  8. करेले के पत्तों के 50 मिली रस्म थोड़ी सी हींग मिलाकर पीने से पेशाब बहुतायत में होती है।
  9. करेले के रस में शहद मिलाकर लेने से गठिया में लाभ होता है इसे जले कटे स्थान पर लगाने से भी राहत मिलती है।
  10. करेले के पत्तों के रस से बचकर थोड़ा सा छोड़ता शहद मिलाकर लेने से उल्टी दस्त बंद हो जाती है।
  11. सब्जी दमा लकवा गैस पाचन शक्ति ठीक करने में लाभदायक है सब्जी या दो करेले का रस नित्य पीने से वृक् या मूत्राशय की पथरी पेशाब के साथ बाहर आ जाती है।
  12. करेले के पत्तों का रस गुनगुने पानी के साथ देने से कृमि मर जाते हैं।
  13. करेले के मूल को पीसकर खुजली और फुंसियों पर लेप करने से लाभ होता है।
  14. करेले के पत्तों को पीसकर मालिश करने से जुड़े त्वचा रोग में लाभ होता है।
  15. करेले के पत्तों के रस में हल्दी मिलाकर पीने से चेचक रोग में लाभ होता है।
  16. चौथाई कब करेले के रस और उतना ही पानी स्वादानुसार नमक बार बार पीने से हैजा में लाभ होता है उल्टी और दस्त ठीक हो जाते हैं।
  17. यकृत बढ़ने और जलोदर होने पर 50 ग्राम करेले का रस पानी मिलाकर पीने से लाभ होता है।
  18. कच्ची कैरी के रस में अनार का रस मिश्री मिलाकर पानी से पीने से व्यक्ति अपने शरीर में शांति महसूस करता है।
  19. अधिक मोटापे में नींबू के रस में अनार का रस और शहद मिलाकर सुबह खाली पेट लेना चाहिए।

खीरा और ककड़ी आयुर्वेदिक लाभ;-

यह दोनों एक ही जाति के हैं उनके रासायनिक तत्व 20 लगभग समान है यह 4 प्रधान है यह कच्चे खाए जा सकते हैं यह सब्जियां फल दोनों ही कहे जा सकते हैं।

  1. ककड़ी और नींबू के रस में सीका जीरा तथा शक्कर डालकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती है।
  2. ककड़ी के बीज मुलेठी और हल्दी का चूर्ण चावल के मार के साथ पीने से मूत्र समस्या और मूत्र घात दूर होता है।
  3. ककड़ी के बीजों को मिश्री के साथ पीने से पथरी नष्ट हो जाती है।
  4. ककड़ी के रस में चीनी मिलाकर पीने से अम्ल पित्त, पित्त संबंधी समस्त रोग ठीक हो जाते हैं,।
  5. ककड़ी का रस त्वचा पर लगाने से रंग साफ होता है त्वचा स्वस्थ होती है या चेहरे की चिकनाई चेहरे के दाग धब्बों को दूर करता है नित्य ककड़ी का रस पीने से मुंहासे ठीक हो जाते हैं।
  6. ककड़ी के रस को तेल में पकाकर सिर में लगाने से बाल बढ़ते हैं चमकीले और लंबे होते हैं।
  7. ककड़ी खाने से शराब का नशा उतर जाता है।
  8. ककड़ी में पोटेशियम तत्व अधिक मात्रा में होने से निम्न व उच्च रक्तचाप में इसका रस पीना लाभदायक है।
  9. ककड़ी छिलके सहित कच्ची बिना नमक के खानी चाहिए ककड़ी खाने से पाचन क्रिया अच्छी लगती है नाखून टूटना बंद हो जाता है इसे खाने का रस पीने से पायरिया में लाभ होता है।
  10. यूरिक अम्ल शरीर में अधिक होने पर बाथरूम हो तो ककड़ी का रस या इसमें गाजर का रस समान मात्रा में मिलाकर पीना लाभदायक है।
  11. घुटने के दर्द दूर करने के लिए खीरा अधिक खाएं एक पोतिया लहसुन खाएं।
  12. ढाई सौ ग्राम खीरे का रस दिन में तीन चार बार नित्य पीने से पथरी पेशाब में जलन पेशाब में रुकावट मधुमेह पीलिया प्यास जो शरीर की जलन गर्मी के सारे दोष चर्म रोग आदि में विशेष लाभ होता है।
  13. खीरे के बीज की ठंडाई बनाकर पीने से शरीर में इकट्ठा विजातीय द्रव्य गुर्दे बाहर निकाल देते हैं।
  14. उपवास काल में खीरे का रस पीने से सूखा हुआ मल ढीला होकर आते साफ हो जाती हैं।
  15. खीरा भूख बढ़ाता है आप तो की गति को तेज करने के लिए यह रेशा प्रदान करता है। खाद्य तथा उदर रोगों में नित्य दो खीरे खाने चाहिए।
  16. मोटापे से परेशान लोगों को प्रातः इसका सेवन करना चाहिए इससे दिनभर ताजगी व हल्का पर महसूस होता है छाती की जलन, अजीर्ण, गैस एसिडिटी में नियमित सेवन करने से लाभ होता है गुर्दे के दर्द में खीरे का रस गर्म करके दें।
  17. सर्दी जुकाम नजला में इसका प्रयोग ना करें इसे खाने से आधा 1 घंटे तक पानी न पीएं।

टमाटर का प्रयोग आयुर्वेद के अनुसार;-

टमाटर पौष्टिक बलवर्धक रख पैदा करने वाला सर्व सुलभ व संस्ता फल है। यह अनेक रोगों में औषधि का काम करता है ऐ सेब ल संतरा के गुणों से युक्त है। इसमें लोहा, चुना ,प्रोटीन, गंधक, क्लोरीन ,पोटाश ,फास्फोरस, तथा विटामिन ए बी सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
  1. बच्चों को सूखा रोग होने से टमाटर का आधा गिलास रस का सेवन कराने से लाभ होता है।
  2. दो या तीन पके हुए टमाटर का नियमित सेवन करने से बच्चों का विकास शीघ्र होता है।
  3. शरीर का भार घटाने के लिए दोनों समय एक एक गिलास टमाटर का रस पीना लाभप्रद है।
  4. टमाटर के नियमित सेवन से पेट साफ होता है।
  5. कफ होने पर टमाटर का सेवन अत्यंत लाभदायक है।
  6. प्रातः बिना कुल्ला कीए पका टमाटर खाना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है।
  7. क्लास टमाटर के रस में एक चम्मच अजवाइन का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीने से गठिया रोग में लाभ होता है।
  8. गर्भवती स्त्री के लिए सुबह क्लास टमाटर के रस का सेवन करना लाभप्रद होता है।
  9. भोजन से पहले दो-तीन पके टमाटर काटकर उसमें पिसी काली मिर्च सेंधा नमक वह हरा धनिया मिलाकर खाएं इससे चेहरे पर लाली तथा पावर शक्ति बढ़ती है ‌।
  10. टमाटर की गोदी में कच्चा दूध और नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरा चमकदार बनता है।
  11. मटन के रस में पानी मिलाकर गरारे करने से मुंह के छाले हुए दांतो के खून आना बंद हो जाता है।
  12. बच्चों को एक चम्मच टमाटर का रस दिन में 2-3 बार पिलाने से दांत आसानी से निकलते हैं।
  13. दूध पिलाने से पहले टमाटर के एक दो चम्मच रस पिलाने से बच्चे दूध नहीं उलटते है।
  14. वायु विकार भूख कम लगने पर टमाटर का रस अत्यंत लाभदायक है।
  15. टमाटर के नियमित सेवन से मधुमेह रोगियों के पेशाब में शुगर आना बंद हो जाता है।
  16. दांतो व हड्डियों की कमजोरी दूर करने के लिए टमाटर का रस उपयोगी ‌‌‌‌‌है
  17. उच्च रक्तचाप के रोगियों को टमाटर देने से अधिक मात्रा में लोन मिलता है।
  18. टमाटर का रस दिमागी कमजोरी बच्चे चिड़ा पन दूर करने स्मरण शक्ति को बढ़ाने में लाभदायक है।
  19. टमाटर का सूप भूख बढ़ाता है रक्ताल्पता दूर करता थकावट कमजोरी दूर करता है।
  20. 100 ग्राम लाल टमाटर का रस सेंधा नमक डालकर खाने से जीभ का मेला पन दूर हो जाता है।
  21. टमाटर का एक गिलास रस नित्य पीने से पीलिया ठीक हो जाता है।
  22. सुबह के नाश्ते में एक गिलास टमाटर के रस में थोड़ा-सा शहद मिलाकर पीने से चेहरा टमाटर की तरह लाल हो जाएगा।
  23. टमाटर चर्म रोग रोकता है मोटापा व रक्तचाप कटता है दस्त साफ लाता है फेफड़ों को शक्ति देता है।
  24. टमाटर के एक चम्मच रस में नारियल का दो चम्मच तेल मिलाकर मालिश करें गर्म पानी से स्नान करें खुजली मिट जाएगी।

प्याज का आयुर्वेदिक महत्व;-

प्याज एक पौष्टिक सस्ता लोकप्रिय तथा सर्व सुलभ कंद है। खूब प्याज खाने से व्यक्तियों में खून के थक्के नहीं बनते। प्याज खाने से नींद अच्छी आती है प्याज गरीबों के लिए कस्तूरी है प्याज का रस क्षय‌ के कीटाणुओं को शरीर में बढ़ने से रोकता है।
  1. प्याज को गर्म रात में दबाकर पकाने या इसका रस 4 चम्मच किए नींद अच्छी आएगी।
  2.  आंखों के रोगों में अंगूर और प्याज का रस बराबर मिलाकर दोनों समय दो-दो बूंद डालना लाभ करता है।
  3.  कलौंजी जी एवं प्याज का रस धातु के नीचे दबाए रखने से दांत का दर्द ठीक हो जाता है।
  4. कर्ण शूल होने पर प्याज का रस गर्म करके कान में डालने पर दर्द दूर हो जाता है ।
  5. प्याज में इमली का बराबर रस आवश्यकतानुसार प्रयोग करने से लू का असर खत्म हो जाता है।

 

 

  1.  मधुमक्खी बाबरे के काटने के स्थान पर प्याज का रस लगाने से दर्द व सूजन ठीक हो जाती।
  2. मस्सों पर प्याज का रस लगाने से मस्से नष्ट हो जाते हैं।
  3. कुत्ते सियार के काटने पर प्याज पीसकर शहद मिलाकर काटे स्थान पर लगाएं वह प्याज का रस पिलाने से ज़हर दूर हो जाता है।
  4. नित्य प्याज खाने वॉइस क रस को आंखों में डालने से नेत्र ज्योति बढ़ती है धुंध जाला मोतियाबिंद गुबार तक दूर हो जाते हैं यह अत्यंत अदभुत  है।
  5. 3 औंस प्याज का रस प्रात थोड़ा सा पानी मिलाकर पीने से मिर्गी आना बंद हो जाता है यह प्रयोग कम से कम 40 दिन तक करें। प्याज का रस सुहानी से दौरे में शीघ्र होश जाता है।
  6. प्याज का रस कनपटीओ व छाती पर मालिश करने से दो बार प्याज खाने से प्याज हमेशा अपने पास रखने से लोग नहीं लगती।
  7. प्याज के रस की नस्य लेने से हिचकी दूर हो जाती है।
  8. प्याज को पीसकर नाभि पर लेप करने से पतले दस्त आना बंद हो जाता है।
  9. प्याज और अदरक के रस को बराबर लेने से खांसी होती दूर हो जाती है।
  10. चार प्याज को पीसकर गेहूं का आटा मिलाकर हलवा बनाया हलवा गर्म रहने पर पेट पर इसका लेप लगाकर लेट जाए बंद पेशाब आने लगता है।
  11. प्याज के रस में चीनी डालकर शरबत बनाकर पीने से पथरी कट-कट कर बाहर आ जाती है।
  12. 50 ग्राम प्याज का रस पाता भूखे मित्र पीने से वृक्क व मूत्राशय की पथरी टुकड़े-टुकड़े होकर निकल जाती है।
  13. 100 ग्राम प्याज के रस में 50 ग्राम शक्कर मिलाकर पीने से रक्त सारी बवासीर में लाभ होता।
  14. आंव खून के दस्त आने पर एक प्याज गाय के दही में काटकर खाने से लाभ होता है।
  15. कच्चा प्याज पीसकर विवाइयों पर बांधने से लाभ होता है।
  16. सरसों का तेल और प्याज का रस मिलाकर मालिश करने से गठिया के रोगी को लाभ होता है।
  17. एक चम्मच प्याज का रस दो चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से शक्तिवर्धक होता है।
  18. नशे में धुत व्यक्ति को एक प्याज का रस पिलाने से नशा बहुत कम हो जाएगा।

पालक के आयुर्वेदिक गुण;-

पालक हल्का और सुपाच्य होता है। इसके सेवन से दस्त साफ होता है भूख बढ़ती है। पालक का साग पेट की विभिन्न बीमारियों में उपयोगी है। साधारण बुखार खांसी गैस अम्लपित्त आंतों की सूजन तथा कब्ज में विशेष उपयोगी है। किंतु शरीर में दर्द सूजन पतले दस्त आंतों के घांव आदि हानिकारक है। यह रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है।
  1. पालक के पत्तों का स्वरस अथवा क्वाथ देने से पथरी निकल जाती है और मूत्र वृद्धि होकर इसके कण बाहर निकल जाते हैं।
  2. पालक के पत्तों या बीजों को पीसकर पुलिस्टस बनाकर अपक्व घाट पर बांधने से गार्ड जल्दी पक जाती है यदि बुखार हो तो कम हो जाता है।
  3. रात को बार बार पेशाब जाना शाम को पालक की सब्जी खाने से कम हो जाता है रक्त विकार और शरीर की खुश्की पालक के सेवन से दूर हो जाती है।
  4. पालक को उबालकर गर्म गर्म पानी से खुले या गरारे करने से खांसी गले का दर्द गले की जलन फेफड़ों की सूजन में लाभ होता है पालक का रस पीने से नेत्र ज्योति बढ़ती है।
  5. पालक का रास्ता तो और मसूड़ों को मजबूत बनाता है। पायरिया हो तो प्रातः भूखे पेट पालक का रस या कच्चा पालक दातों से चबाकर खाना चाहिए इसमें गाजर का रस मिलाकर लेने से मसूड़ों से रक्तस्राव होना बंद हो जाता है।
  6. रक्त विकार, रक्तछीड़ता पालक के सेवन से दूर हो जाती है। आधे गिलास पालक के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर एक माह तक पीने से शरीर में रक्त की वृद्धि होती है।
  7. बुखार आने पर पालक का सूप लेकर ओढ़ कर सो जाना चाहिए इससे पसीना आ कर बुखार उतर जाता है।
  8. पालक में विटामिन ए कैल्शियम प्रोटीन एवं लोहा तत्व अधिक मात्रा में होते हैं और तरह बच्चों की शारीरिक वृद्धि व पोषण में बहुत उपयोगी है।
  9. बच्चों में सूखा रोग हो जाने पर नियमित पालक का रस पिलाना श्रेयस्कर होता है।
  10. उदर संबंधी बीमारियों में पालक रामबाण औषधि है पालक अदरक पुदीना प्याज सबका समान मात्रा में रस निकालकर सेंधा नमक मिलाकर भोजन के पूर्व लेने से पेट के समस्त रोगों में लाभ होता है।
  11. गर्भवती प्रसव निकालनी पालक के रस का सेवन करने से गर्भ संबंधी रोग रक्त हीनता तथा अन्य अभाव जन्य रोग दूर हो जाते हैं।
  12. प्रोस्टेट ग्रंथि के रोग तथा गुर्दे की पथरी होने पर पालक के रस में नींबू मिलाकर पीने से लाभ होता है।
  13. पालक पीलिया उन्माद हिस्टीरिया प्यास जलन और पित्त ज्वरो में लाभ करता है।
  14. यह मधुमेह फेफड़ों के रोग मोटापा रतौंधी फोड़े फुंसी आमवात गठिया रक्तचाप आधासीसी का दर्द पैरों में सूजन अमाशय आंतों के लिए हितकारी है।

पत्ता गोभी का आयुर्वेदिक प्रयोग;-

पत्ता गोभी के हर पत्तों में बेशुमार गुड़ भरे होते हैं इसके सेवन से शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्तियों का विकास होता है। पत्ता गोभी वजन घटाने में वरदान साबित होता है पत्ता गोभी का सलाद खाने से स्लिम बने रह सकते हैं आप। 200 ग्राम कच्ची पत्ता गोभी में 1 दिन की व्यस्क में विटामिन 'सी' की आवश्यकता पूरी हो जाती है। कफ, कुष्ठ, तो रक्त विकार में पत्ता गोभी उपयोगी है।
  1. बंद गोभी के पत्तों का रस नित्य सुबह निराहार कैंसर रोग में दिया जाए तो काफी लाभ होता है।
  2. ताजा पत्ता गोभी का रस पेट व संग्रहणी के उपचार में सहायक होता है।
  3. पत्ता गोभी के पत्तों के रस में शहद मिलाकर चेहरे व गर्दन पर 15 मिनट तक लगाएं 1 सप्ताह में त्वचा की खुश्की कालापन झुरियां की झाइयां कम हो जाएगी।u
  4. मोदी के 50 ग्राम पत्तों का रस सुबह-शाम पीने से मूत्र रोग में काफी लाभ होता है।
  5. पत्ता गोभी के पत्ते निमिया रोगी के लिए विशेष गुणकारी है क्योंकि इसमें विटामिन की मात्रा प्रचुर पाई जाती है इसमें रक्त शुद्ध हो जाता है।
  6. भालू की वृद्धि के लिए वरुचि बाल झड़ने पर इसके रस की सिर में मालिश करें।
  7. सिर दर्द अनिद्रा चोट के रक्त प्रवाह रोकना प्रसव के समय पीड़ा में राहत पहुंचाना कब्ज दांतों में पायरिया आदि में पत्ता गोभी की ताजे रस को विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है।
  8. गले की खुजली व सूजन में इनके पत्तों को मोटा कूटकर गले पर बाधना चाहिए।
  9. फोड़े फुंसियों पर इसकी पुल्टिस बांधने से लाभ होता है।
  10. पत्ता गोभी गाजर मूली तीनों रसों का 50-50 ग्राम रस नियमित पीने से रतौंधी व अन्य नेत्र रोग ठीक हो जाते हैं।
  11. इसके पत्तों के रस में बराबर पानी मिलाकर गरारे करने से ट्रांसिल ठीक हो जाता है।
  12. इस में पाए जाने वाले तत्व बच्चों के शारीरिक विकास और वृद्धि में सहायक होते हैं कम तेल मसाले में बनाई गई सब्जी घटिया उच्च रक्तचाप गुर्दे संबंधी रोग अल्सर मूत्र रोग आदि के निर्माण में सहायक है इसकी सब्जी जी में छौककर बनाना चाहिए।
  13. पत्ता गोभी का दर्शन इतरा व समस्त मानसिक रोगों को दूर करने में सक्षम है या जठराग्नि को बढ़ाता है मंदाकिनी व अजीर्ण को ठीक करता है।
  14. पत्ता गोभी के रस में अदरक हुआ थोड़ी सी हींग डालकर लेने से गैस अफारा दूर हो जाता है।
  15. हड्डियों की मजबूती में इसका सक्रिय योगदान है बच्चों में सूखा रोग हो जाने पर 30 ग्राम रस पिलाते रहना चाहिए इससे शारीरिक वृद्धि के साथ-साथ खून भी बनता है।
  16. पेप्टिक अल्सर में पत्ता गोभी का रस पीने से ठीक हो जाता है। 1 -1 कप दिन में तीन बार के पत्ते भी खा सकते हैं। इसका ताजा रस लाभ करता है यह कम से कम 2 सप्ताह पीएं।
  17. पत्ता गोभी के पत्ते खाने से पुरानी कब्ज दूर हो जाती है शरीर में व्याप्त विजातीय द्रव्य दोषपूर्ण पदार्थ बाहर निकलते हैं।
  18. पत्ता गोभी का रस बैक्टीरिया विरोधी पदार्थ होने से घाव को भरने में सहायक होता है इसके रस का आधा गिलास दिन में 5 बार पानी मिलाकर पीना चाहिए घाव पर इसके रस की पट्टी बांधे।
  19. छाती में जलन उल्टी खट्टी डकार यादी होने पर पत्ता गोभी के रस में गुलाब पुष्प का रस मिलाकर पीना चाहिए।

बथुआ एक जड़ी बूटी के रूप में;-

बथुआ जड़ी बूटियों की तरह अनेक रोगों का विनाश करता है। बटुए में लोहा पारा फॉस्फोरस कैल्शियम आदि लवण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं इसे अमाशय की झाड़ू फारसी भाषा में कहा जाता है। इसके सेवन से भोजन में रुचि पैदा होती है कब्ज पेट के कीड़े बवासीर दूर कर के बल व शुक्र की वृद्धि करता है। बुखार जिगर ,तिल्ली की गर्मी, मेष का प्रयोग अत्यंत लाभकारी रहता है।
  1. बथुए के पत्तों का रस दिन में चार पांच बार सफेद दागों पर लगाएं या पत्तों को ही दागों पर रगड़ दे बसों की सब्जी बनाकर रोटी के साथ खाने से दो-तीन महीने के प्रयोग से सफेद दाग दूर हो जाते हैं।
  2. बथुआ के साग को देसी घी में छौककर तथा नमक डालकर खाएं। यदि नमक डालना है तो सीधा नमक कथा कम से कम मसाले डाले इसकी अधिक से अधिक सेवन करने से निरोग रह सकते हैं।
  3. बथुआ का साग नित्य सप्ताह खाने से सदा रहने वाली कब्ज दूर हो जाती है यह अमाशय को ताकत देता है शरीर में स्फूर्ति ब बल लाता है।
  4. बथुआ का कच्चे एक गिलास रस निकालकर शक्कर मिलाकर  रोज पीने से पथरी टूटकर बाहर निकल जाती है।
  5. बथुए को उबालकर इसके पानी से सिर धोने से जुड़े लिखें मर जाएंगी तथा बाल साफ हो जाएंगे।
  6. बथुए के दो चम्मच बीजे गिलास पानी में आधा रहने तक उबालें छानकर पीने से मासिक धर्म खुलकर साफ आएगा सब्जी भी खाएं।
  7. आंखों में सूजन खुजली लाली हो तो प्रतिदिन बथुए की सब्जी खानी चाहिए पेशाब रुक रुक कर आता हूं कतरा कतरा आता हो मुद्रा से गुर्दा पेशाब के रोगों में बथुआ का रस पीना तथा साग खाने से पेशाब खुलकर आता है।
  8. बथुए के एक चम्मच बीज के चूर्ण में शहद मिलाकर चाटने से कीड़े मर जाते हैं तथा रक्तपित्त ठीक हो जाता है।
  9. आग से जले अंग पर या कट जाने पर कच्चे बथुए का रस बार-बार लगाएं।
  10. दो कप कच्चे बथुए के रस में आधा कब तिल का तेल मिलाकर पूरा रस जल जाने पर आधा पर गर्म करें छानकर शीशी में भर लें दाद खाज खुजली फोड़े फुंसी सफेद दाग आदि पर लगाने से छुटकारा मिल जाता है।
  11. बथुआ ग्रीष्म ज्वर मलेरिया तथा काला ज्वर आदि में लाभदायक है।
  12. रक्त का निर्माण करता है तथा त्वचा को शुद्ध करके स्नायविक व सामान्य दुर्बलता को दूर करता है।
  13. यह बलवर्धक है, प्रमेह, यक्ष्मा कुष्ठ,सुजाक, मोटापा अजीर्ण  , उदर रोग आदि रोगों में बथुआ का प्रयोग गुणकारी है।
  14. को बढ़ाता है तथा मूत्र की वृद्धि करता है गुर्दे के रोगों में बहुत लाभकारी है इसको पानी में उबालकर छानकर इसमें स्वादानुसार नींबू जीरा या काली मिर्च सेंधा नमक मिलाकर पेशाब की जलन पेशाब करते समय दर्द 30 उत्पन्न उठना ठीक हो जाएगा पेट में गैस अपच दूर हो जाएगी।
  15. बथुआ को थोड़ी पानी में उबालकर पट्टी मसलकर पानी सहित दही में रयता बनाए स्वादिष्ट और गुणकारी होता है।
लौकी का आयुर्वेदिक उपचार ;-
लौकी में विटामिन ए बी सी मिलता है। हल्की सुपाच्य कब्ज दूर करने वाली और बल प्रद होती है। अशक्त और रोगियों के लिए लौकी अत्यंत लाभदायक है। गर्म प्रकृति वालों के लिए इसका सेवन ठंडा को पोषण देने वाला है। लव-कुश ह्रदय के लिए हितकारी है लौकी स्त्रियों के लिए पुष्टि दायक है। पित्त व कफ को नष्ट करती है इसके छिलके सहित खानी चाहिए लोकी का रस मां के दूध के समान पौष्टिक होता है। औषधीय गुणों से भरपूर लोकी मनुष्य को रोग रूपी जंजाल से मुक्त करती है। नाड़ी मंडल को स्वस्थ रखती है और शक्ति प्रदान करती है लड़की में चिकनाई बहुत कम होती है इसमें पाया जाने वाला कार्बोहाइड्रेट सरलता से बच जाता है इसीलिए रोग को किसी भी स्थिति में प्रायः सभी रोगों में लौकी की सब्जी सूप अथवा रस देना चाहिए।

  1. लौकी के पत्तों का रस निकालकर  मस्से पर लगाने से मस्सा दूर हो जाता है।
  2. लौकी के रस में थोड़ा शहद या चीनी मिलाकर सेवन करने से शरीर की गर्मी गले की जलन रक्त विकार थोड़ा शीतपित्त रक्त की गर्मी बढ़ने ,गले व नाक से रक्त आने तथा क्षय रग आदमी लाभ होता है।
  3. लौकी को काट कर दो टुकड़े करके सिर पर बांधने से दिमाग में चढ़ी गर्मी उतर जाती है।
  4. लौकी को कद्दूकस करके सिर और माथे पर बांधने से बुखार की गर्मी दूर हो जाती है।
  5.  लौकी वीर्य वर्धक रुचि उत्पन्न करने वाली और धातु पुष्ट को बढ़ाती है।
  6. लौकी 75 ग्राम, लहसुन 20 ग्राम दोनों को पीसकर 1 किलो पानी में आधा पानी रहने तक वाले जानकर कुल्ला करने से दांत का दर्द ठीक हो जाता है।
  7. बिच्छू काटे स्थान पर लोकी पीसकर लेप करें तथा इसका रस पिलाया बिच्छू काटे का जहर उतर जाएगा।
  8. लौकी का रायता दस्त में लाभप्रद होता है।
  9. लौकी के गुर्दों पैरों के तलवे पर मलने से गर्मी जलन भभका का दूर हो जाता है।
  10. लौकी को धीमी आंच पर दबाकर भरता बना ले इसका रस निकालकर थोड़ी सी मिश्री मिलाकर पीने से यकृत की बीमारी और पीलिया में लाभ होता है।
  11. लौकी के कच्चे गुर्दे पर पिसी मिश्री डालकर खाने से यक्ष्मा ठीक हो जाता है।
  12. लौकी के पत्तों को पीसकर बवासीर पर लेप करने से कुछ दिनों में बवासीर नष्ट हो जाता है।
  13. लौकी के टुकड़े गर्म करके रस निकालने रस की मालिश गुर्दे पर करने से या इसका लेप लगाने से दर्द तुरंत आराम हो जाता है।
  14. लौकी के बीज मस्तिष्क की गर्मी को दूर करते हैं और मस्तिष्क को पुष्ट करते हैं।
  15. लौकी का रस प्रातः खाली पेट पीने से मोटापा दूर होता।
  16. लौकी के बीज में पाया जाने वाला तेल रक्त कोलेस्ट्रॉल को कम करने की क्षमता रखता है। हृदय की मांसपेशियों को बल देता है तथा रक्त वाहिनी यों को स्वस्थ व लचीला बनाता है।
  17. हैजा के रोगी को लौकी के 30 मिलीलीटर रस में एक नींबू का रस मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।
  18. गर्भावस्था के प्रारंभिक एवं अंतिम माह में 100 भाग 100 ग्राम कच्ची लड़की को 70 ग्राम मिश्री के साथ नित्य खाने से गर्भस्थ शिशु का रंग गोरा होगा।

 


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