health and wellness दमा की बीमारी को सही करने के घरेलू उपचार क्या हैं?
पहले यह माना जाता था कि दमा अधिक आयु वाले लोगों को होता है किंतु आज स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है अनेक ऐसे बालक देखे जा सकते हैं जो दमा रोग के शिकार हैं और जिसके कारण उनका जीना मुश्किल हो जाता है। फेफड़ों को वायु वहन करके वाली नलिका ओं की छोटी-छोटी पेशियों में जकड़न भरा संकोचन उत्पन्न होता है उस वक्त सांस लेने में तकलीफ होने लगती है इससे ही दमा या स्वासकाल कहते हैं। इससे मुख्यतः वंशानुगत बाप दादाओ से प्राप्त माना जाता है।
इसका आक्रमण ज्यादातर रात्रि के समय में होता है तब रोगी सो नहीं पाता है लेटा भी नहीं रह सकता बल्कि उसे उठ कर बैठना पड़ जाता है। रोगी खुली हवा प्राप्त करने को बेचैन हो जाता है खाते-खाते कष्ट के साथ थोड़ा सा कफ निकलता है। सांस के साथ-साथ साए साए की आवाज आती है। कुछ चिकित्सकों का कहना है कि दमा दम के साथ जाता है। नियम पूर्वक और समय अनुसार खान-पान का ध्यान रखते हुए स्वदेशी चिकित्सा के द्वारा इस रोग से मुक्ति पाई जा सकती है।
बहुत से डॉक्टर इस रूप को वंशानुगत भी नहीं मानते उनके मत में धूल तंबाकू चूना सन्या घास के कणों का स्वास्थ्य में जाना रात में अधिक भोजन करना शारीरिक या मानसिक उत्तेजना सर्दी लगना आदि कारणों से यह रोग हो जाता है। खांसी का भी घूमने और स्वास्थ्य नली में कब जमा होने पर तकलीफ बढ़ ज्यादा बढ़ जाती है। रोगी बुरी तरह आपन लगता है एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ या यातायात के संपर्क में आने से बीड़ी सिगरेट धूम्रपान करने से ज्यादा सर्दी या ज्यादा गर्म मौसम सुगंधित पदार्थ आदि हवा ज्यादा कसरत करने और मानसिक तनाव से दमा का रोग उग्र हो जाता है।
ऐसे घरेलू नुस्खों का उल्लेख किया जा रहा है जो रोज को ठीक करने तथा दौरे को नियंत्रित करने और श्वास की कठिनाई में राहत देने के लिए लाभदायक है;-
- मुलेठी और सुहागी के फूल को अलग-अलग खरल कर या पीसकर किसी कपड़े से छान लें। फिर इन दोनों को अलग-अलग दो कांच की शीशी में रख दें दोनों बराबर होनी चाहिए तथा सीसी अभी एक जैसी हो तो अच्छा है। यह दमा की सर्वोत्तम औषधि है और इसकी मात्रा आधा ग्राम से 1 ग्राम तक की ही होनी चाहिए। यदि इस औषधि को आधा ग्राम की मात्रा में लेनी हो तो दोनों को आधा-आधा ग्राम ले उनमें आवश्यकतानुसार शहद मिलाकर चाट जाए अथवा गर्म पानी के साथ इनका सेवन करें यह मात्रा बड़ों के लिए है। बच्चों को एक रत्ती की मात्रा अथवा आयु के अनुसार दे। इसके प्रयोग में केला दही चावल और किसी भी तरह के ठंडे पदार्थों का प्रयोग ना करें। यह आशकी दमे के रोगियों के लाभकारी है साथी उनके लिए भी लाभकारी है जिनके गाढ़ा गाढ़ा बलगम बनने की समस्या होती है तो उनके कफ को बाहर निकाल कर उन्हें भी लाभ पहुंचाती है। उन रोगियों के औषधि शहद मिश्री अथवा कट्ठा लगे लंका पान के साथ लेनी चाहिए। रात में सोते समय साधारण से दुबली मात्रा से सांस रोगी को रात्रि कष्ट में काफी कमी हो जाती है। आवश्यकता के साथ तीन चार हफ्ते लेने से साधारण दिमाग ठीक हो जाता है कफ मल के साथ निकल जाता है।
- गुलबंद फंसा 3 ग्राम, सौंफ 3 ग्राम, लसोड़े 11 नग, उन्नाव 5 गने, गाज वन 3 ग्राम, जाफागुल 3 ग्राम, अंजीर का एक दाना, खत्मीकला 3 ग्राम, काले मुनक्के सात दाने, मकोई डूडी 3 ग्राम, अडुसा पत्ते 3 ग्राम, डोड़े पोस्त के छिलके 3 ग्राम और थोड़ी सी डोरे वाली मिश्री। इस सामग्री को 1 किलो पानी में भिगो दें और रात को खूब मसलकर उबाल लें।जब पानी केवल एक कप रह जाए तो मिश्री डालकर घोल लेयर छानकर पी जाए।इसी सामग्री को फिर से पानी भरकर रखें और दिन रात में सेवन करें। एक बार की औषधि मात्र 2 दिन काम आएगी। इस तरह 40 दिनों तक इस औषधि का सेवन करते रहने से दमा समाप्त हो जाता है। गुड़ तेल औश्र खटाई से परहेज अवश्य रखें।
- किसी भी स्टील अथवा कलीदार बर्तन में 3 अंजीर 24 घंटे तक पानी में भिगोकर रख दें। दूसरे दिन प्रातः अंजीर को उस पानी में उबालें और सूर्योदय से पहले उठकर सोचना नाडी के बाद उत्तर सूर्य के सामने बैठकर जोर से सांस लेकर फेफड़ों में भरे। जितना स्वास भर सके उतना ही अच्छा है या 8-10 बार करने के बाद उबले हुए जीवों को खूब चबा चबा कर खा जाए और ऊपर से उन्हीं का पानी पी ले कुछ ही दिनों में दमा समाप्त हो जाएगा।
- अश्वगंधा नागोरी अलसी विधारा काबुली हरण की बकली बहेड़ा की बकली आंवला की बकली बायविडिंग, सफेद पुनर्नवा चित्रक जड़ की छाल, सत गिलोय सोंठ काली मिर्च और सफेद पीपल इन सब को दो 200 ग्राम लेकर पीसकर कपड़े में छानकर, अब आधा किलो पुराना और साहब गुड लेकर उसकी एक तार की चाशनी तैयार करें और उपयुक्त सामग्री के चूर्ण को गुड़ में अच्छी तरह मिला दें। इसके बाद चार-पांच ग्राम की गोलियां बनाकर धूप में रखें और सूख जाने पर कांच के किसी बर्तन में भरकर रख दें। प्रातः काले गोली गाय के ताजा गर्म दूध के साथ ले और ठंडी तथा खट्टी चीजों के सेवन से बचते हुए रोज इन गोलियों का सेवन करते रहे। जिन लोगों के चलने फिरने पर दम फुल कर स्वास दमा उखड़ जाता है और थोड़ा सा पैदल चलना भी जिनके लिए मुश्किल होता है उनके लिए यह औषधि सर्वश्रेष्ठ है।
- दमे के रोगी को प्रातः एक नींबू दो चम्मच शहद और एक चम्मच अदरक का रस एक कप पानी गर्म करके पीते रहने से बहुत ज्यादा लाभ होता है इसे दमे के आक्रमण के समय भी दिया जा सकता है।
- दो चम्मच लहसुन के रस को गर्म पानी के साथ लेने से दमा के रोगी को लाभ पहुंचता इसे सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है।
- धतूरे के पत्तों को सिगरेट के आकार में लपेटकर अथवा चिलम या पाइप में रखकर दुआ पीने से दमे का दौरा थम जाता है और रोगी को तुरंत फायदा हो जाता है।
- रोज एक गिलास सुबह और एक गिलास दोपहर में गाजर का रस पीते रहने से दमा से जल्द ही लाभ होता है।
- पीपल के पत्ते हुए फलों को छाया में सुखाकर महीन पीस लें सुबह-शाम 3 ग्राम की मात्रा में स्टोन को ताजा पानी के साथ सेवन करने से कुछ ही दिनों में दमे का रोग समाप्त हो जाता है।
- करेले की सब्जी खाने से भी दमा में लाभ होता है।
- चार चंबल मेथी दाने को एक गिलास पानी में उबालें जब पानी एक तिहाई रह जाए तो उसे छानकर घूमना पीले इससे भी दमा में अत्यधिक लाभ होता है।
- दमा रोग में अंगूर खाना बहुत लाभदायक है यदि बलगम थूकने मेरा काटा हो तब भी अंगूर लाभ करते हैं इन रोगियों को केले का सेवन कभी नहीं करना चाहिए।
- डेढ़ सौ ग्राम कड़वी तोरई को दूध में उबालकर और मत कर छान लें चीन व्यक्ति को दमा हो और कफ बाहर न निकल पाने के कारण बेचैनी हो रही हो यह दूध पिलाने से कफ बाहर निकल कर उसे राहत मिलती है
- दमा का दौरा पड़ने पर काफी पीने से राहत मिलती है।
- दमा में सरसों का तेल और गुड़ मिलाकर चाटने से लाभ पहुंचता है और रोगी को आराम प्रतीत होता है और कफ निकल जाता है।
- तुलसी का रस शहद अदरक का रस और प्याज का रस बराबर लेकर सेवन करते रहने से दमा शांत हो जाता है तुलसी का रस कब को पतला कर बाहर निकाल देता है।
- 1 वर्ष से अधिक आयु वाले बच्चों के दम आरोप में रोज तुलसी की पांच पत्तियां खूब बारीक पीसकर थोड़े शहद के साथ प्रातः सायं 3:00 4 हफ्ते तक चढ़ाएं इससे बच्चों में दमा के साथ-साथ उनके स्वसन संस्थान के अनेक लोग भी जड़ से समाप्त हो जाते हैं।
- श्लेषमिक दुर्बल व्यक्ति जिनके फेफड़े स्लेष्मा से भरे रहते हैं और सांस लेने में भी उनके लिए कठिन होने लगता उनको दो चम्मच प्याज का रस दो चम्मच शुद्ध शहद की मिलाकर लेने से लाभ होता है।
- तुलसा के 15-20 पत्तों पानी में साफ कर ले फिर उन पर काली मिर्च का पाउडर बनाकर खाने से दमा में राहत मिलती।
- दमा के दौरे को नियंत्रित करने के लिए एक चम्मच हल्दी दो चम्मच शहद में मिलाकर चाटे।
- एक अकेला छिलका सहित भोभल या हल्की आंच पर भून लें छिलका उतारने के बाद काली मिर्च का पाउडर उस पर बुरा कर खाने से श्वास की कठिनाई दूर हो जाती है।
- तुलसी के पत्ते पानी के साथ पीस लें उसमें दो चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से दमा रोग में लाभ नहीं है।
- पहाड़ी नमक सरसों के तेल में मिलाकर छाती पर मालिश करने से दमा के दौरे में फॉरेन शांति मिलती है
- मेथी के बीज 10 ग्राम पानी में उबालें तीसरा हिस्सा रह जाने पर ठंडा करने और पी जाएं इस उपाय से दमे के अलावा शरीर के अन्य अनेकों रोगों में भी फायदेमंद है।
- एक चम्मच हल्दी एक गिलास दूध में मिलाकर पीने से दमा रोग काबू में रहता है एलर्जी नियंत्रित होती है।
- सूखे अंजीर चार नग रात भर पानी में मिलाएं खाली पेट सुबह खा ले इससे स्वास्थ्य ली में जमा बलगम ढीला होकर बाहर निकल जाता है।
- सहजन की पत्तियां उबाले और छान लें इसमें चुटकी भर नमक एक चौथाई नींबू का रस और काली मिर्च का पाउडर मिलाकर पीने से दमा रोग में बहुत आराम मिलता है।
- शहद दमा की अच्छी औषधि है शहद भरा बर्तन रोगी की नाक के नीचे रखें और शहद की गंध स्वास्थ्य के साथ लेने से दमा में राहत मिलती है।
- दमा में नींबू का उपयोग हितकारी है एक नींबू का रस एक गिलास जल के साथ भोजन के साथ पीना चाहिए।।
- लहसुन की पांच कली चाकू से बारीक काटकर 50 मिलीलीटर दूध में उबाल लें यह मिक्चर सुबह शाम लेना स्वास्थ्य के लिए और दमे के लिए लाभकारी है।
- आंवला दमा रोग में अमृत समान गुणकारी एक चम्मच आंवला रस में दो चम्मच शहद मिलाकर लेने से फेफड़े ताकतवर हो जाते हैं।
- दमे के मरीज को बढ़ते हुए पानी में अजवाइन डालकर उड़ती हुई भाग सांस में खींचे इससे स्वास्थ्य कष्ट में तुरंत राहत मिलती है।
- लौग 4 - 5 नग लेकर 100 मिलीलीटर पानी में उबालें जब पानी आधा रह जाए उसे छानकर उसमें शहद मिलाकर गरम-गरम कि ऐसा कड़ा बनाकर 3 दिन 3 बार पीने से रोग नियंत्रित होकर दमे में आशातीत लाभ होता है।
- चाय बनाते वक्त तू कली लहसुन की पीस का डाल दिया दमे में राहत पहुंचाता है सुबह शाम किए।
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