google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical Health and fitness संक्रमण, लीवर सिरोसिस व खराब खानपान से होती है तिल्ली बढ़ने की तकलीफ

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Health and fitness संक्रमण, लीवर सिरोसिस व खराब खानपान से होती है तिल्ली बढ़ने की तकलीफ

 Health and fitness संक्रमण, लीवर सिरोसिस व खराब खानपान से होती है तिल्ली बढ़ने की तकलीफ

जिगर या यकृत पसलियों के दाहिनी ओर होता है। इस रोग का जब प्रारंभिक काल शुरू होता है तो पहले शरीर में कंपन होता और फिर बुखार आ जाता  है । उसके बाद वो तो उतर जाता है परंतु प्रीत का रोग रह जाता है यह रोग जब धीरे-धीरे पुराना हो जाता है तब यकृत कठोर और पहले से बड़ा हो जाता है। जिगर के स्थान को दबाने से हल्का सा दर्द महसूस होता है। श्रम करने से भी जिगर ब्याज देता है शरीर में बुखार जैसी गरमाई सदैव बनी रहती है।

सिरोसिस आफ लिवर के लक्षण

  जिगर रोग में जीभ सफेद ,सिरदर्द, दुर्बलता, रक्ताल्पता, अपचन ,दाहिने कंधे में पीछे दर्द ,आंवयुक्त मलऔर कीचड़ जैसा मल आंखों में पीलापन और मुंह का स्वाद बिगड़ा हुआ जैसे लक्षण सामने आते हैं। श्रम करने से भी जिगर किया जाता है। कब्ज और पेट में गैस जमा होना इसके मुख्य लक्षणों में से एक है। जैसे जैसे रोग बढ़ता जाता है यकृत का संकुचन भी होता जाता है। पुराना मलेरिया बुखार पुरानी पेचिश कुनैन या पारे का दुर्व्यवहार अधिक शराब पीना गर्म स्थान में रहना तथा अधिक मिठाई आदि के सेवन से इस रोग की उत्पत्ति होती है। 8 वर्ष तक के बच्चों का एक कृत खराब हो जाता है जिससे बच्चे पुष्ट नहीं होते।

  प्रीत के दूसरे रोग को " सिरोसिस आफ लिवर कहते हैं"। इसमें अकृत कठोर तथा आकार में छोटा हो जाता है। ज्वर, कामला, यकृत प्रदेश का दर्द, अन्न आरुषि वमन आदि के लक्षण जिगर के कार्यों के मंद पड़ जाने के कारण उजागर होता है। रोग से पीड़ित रोगी दुर्बल पीला का दिखाई पड़ता है। जिगर के रोगों में जिगर का सो जाना थोड़ा संकुचन हो जाना या फैल जाना पीलिया रोग समस शरीर की दुर्बलता आदि प्रमुख लक्षण है।

  भूख खुलकर लगे भोजन का पाचन ठीक और भलीभांति से हो और शरीर का रक्त शुद्ध बने इसके लिए जरूरी है कि हमारा एक अपना कार्य स्वभाविक ढंग से करें जिससे शरीर में पित्त की उत्पत्ति अधिक मात्रा में होती रहे। जिस व्यक्ति का एक्ट्रेसेस अथवा खराब हो जाता है उसे भूख तो लगती ही नहीं ऐसे व्यक्ति को कब्ज की शिकायत सदा बनी रहती है उसका शरीर विजातीय द्रव्य के भार से सदैव लगा रहता है और वह अपनी आयु से अधिक लगने लगता है। की उपचार विधि नीचे है-

   यकृत रोग के उपचार की विधि

इस रोग के उपचार हेतु सप्ताह में कम से कम 1 दिन का व्रत रखें। एनिमा लेना भी लाभप्रद रहता है। एनिमा के पानी में चौथाई कागजी नींबू का रस जरूर नहीं छोड़ देना चाहिए और मर्यादित हाथों में कड़ा हो गया है तो एनिमा के पानी को हल्का गुनगुना कर लेना चाहिए।

  यकृत के रोगियों के लिए कागजी नींबू का रस बड़ा ही लाभकारी सिद्ध होता है अतः दिन में दो-तीन बार ताजे और ठंडे या गर्म पानी में नींबू का रस निचोड़ कर जरूर पीना चाहिए। भोजन में ताजे फल सलाद खाद्य पदार्थों का अत्यधिक मात्रा में लेना चाहिए।

  • एक कागजी नींबू लेकर उसके दो टुकड़े कर ले फिर उसके बीज निकालकर आधे नींबू के चार भाग करें पर टुकड़े अलग अलग ना हो जाए। फिर एक भाग में पिसी कालीमिर्च दूसरे में ईशा काला या सेंधा नमक तीसरे में सोंठ का चूर्ण और चौथे में मिश्री का चूर्ण भर दें। पूरी रात प्लेट में रखकर ढक कर रख दे प्रातः भोजन करने से एक घंटा पहले नींबू की इन चारों को को मंदी आज या तवे पर गर्म करके चूस ले।
  • 100 ग्राम पानी में आधा नींबू निचोड़ कर केवल नमक डालें और की जाए रोज यह तीन बार करें इससे अकृत के विकार दूर हो जाएंगे।
  • यकृत के रोगों में छाछ हींग का बघार दे कर जीरा काली मिर्च और नमक मिलाकर दोपहर के भोजन के पश्चात लेना लाभप्रद होता है।
  • भली-भांति नींबू का सेवन दो 4 सप्ताह तक करना चाहिए जिससे जिगर का विकास ठीक होगा ही साथ ही पेट दर्द व मुंह का जायका भी ठीक हो जाएगा। भूपेश लगने लगेगी कब्ज और मन हमेशा रहने वाला सिर का दर्द भी समाप्त हो जाएगा जिगर के कटोरा संकुचन होने के रोग के लिए भी अवश्य भी लाभप्रद सिद्ध होती है।
  • जिनके जिगर में विकार हो उन्हें रोज कम से कम एक गिलास मीठे अनार का रस जरूर पीना चाहिए।
  • आलू का रस 25 ग्राम में सूखे आंवले का चूर्ण 50 ग्राम ताजे पानी में 7 दिन में दो तीन बार लेने से दो-तीन सप्ताह में ही जिगर के सभी विकार समाप्त हो जाते हैं।
  • यकृत के संकुचन में दिन में दो बार गाजर खाते रहने से भी लाभ देता है गाजर केवल कच्ची खानी चाहिए।
  • वितरित के संकुचन में जामुन का हो मौसम तो एक पका जामुन भूखे पेट रोज खाने से यकृत का रोग समाप्त होता है।
  • नींबू का सेवन हर एक मौसम में किया जा सकता है यह बदलते मौसम के अनुरूप ही अपने गुणों को समायोजित कर मौसमी 200 से भी बचाता है वैसे नींबू का रस कार्य शरीर के विषो को समाप्त करके उन्हें बाहर निकालता है।
  • छोटे बच्चे जिनका जिगर खराब रहता है उन्हें पपीता खिलाना चाहिए पपीता पेट साफ रहता है तथा  यकृति को भी शक्ति देता है।
  • गाजर भी जिगर के लिए लाभकारी है विदेशी डॉक्टर जिगर के रोगियों को गाजर का रस पीने की सलाह देते हैं।
  • 3 से 8 साल तक के बच्चों को आधा चम्मच करेले का रस रोज पिलाने से यकृत सुरक्षित रहता है। यह पेट के अंदर से अच्छी तरह सफाई कर देता है बड़ा हुआ यकृत पहले की तरह ही सामान्य हो जाता है।
  • यकृत पीड़ा में पान पर तेल लगाकर गर्म करके सीने पर बांधने से लाभ होता है।
  • पपीते की तरह लीची ही उत्तम है या अधिक स्वास्थ्यवर्धक है प्यास को कम करती है तथा हृदय मस्तिष्क और जिगर को शक्ति देती है इसका प्रयोग करने वालों का जिगर कभी भी खराब नहीं होता है।
  • आधा चम्मच सेंधा नमक और चार चम्मच राई में पानी डालकर और पीसकर एक तीर्थ स्थान पर मनी फिर 5 मिनट बाद होकर भी लगा ले इससे यकृत पीड़ा समाप्त हो जाती है।
  • बड़ा मीठा खरबूजा जिगर की सूजन को समाप्त करने में अद्वितीय है।
  • बच्चे को साफ करके धोकर गर्म पानी में अच्छी तरह से उबाल लें और फिर किसी कपड़े में बांधकर निचोड़ लें इस पानी को पीने से जिगर का रोग ठीक हो जाता है।
  • सूर्य उदय होने से पूर्व उठकर मुंह साफ करके एक चुटकी कच्चे चावल मुंह में रखकर पानी से निकल जाए।यह क्रिया यकृत को शक्तिशाली  बनाने के लिए उचित है। 
  • एक गिलास पानी में 12 ग्राम तुलसी के पत्ते उबालें और चौथाई पानी रह जाने पर उसे छानकर पीने से यकृत का बढ़ना एवं इक्रित के सभी रोग भी दूर हो जाते हैं।
  • पीपल का चूर्ण आधा चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से भी बहुत अधिक लाभ होता है

विशेष उपचार

2 सप्ताह तक चीनी या मीठे की जरा सी भी मात्रा भूलकर भी ना खाएं। चीनी के स्थान पर दूध में चार-पांच मुनक्का डालकर पीने से शरीर को स्वस्थ और मजबूत होती हैं जब तक यकृत विकार का उपचार चलता रहे अन्न तो नाम मात्र के लिए ही ग्रहण करें। टमाटर, गाजर, पालक, बथुआ, करेला, और लौकी, की याद शाकऔर सब्जियां पपीता ,आंवला, जामुन से आलू बुखारा और लीची आदि फल तथा छाछ आदि का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें। घी और तेल से तली हुई वस्तुओं का प्रयोग ना के बराबर करें। यदि परहेज और उपचार उचित ढंग से किया जाए तो निस्संदेह ही 2 सप्ताह में ही यकृत का रोग समाप्त हो जाएगा।

  1. सूखे अंजीर को सिरके में डालकर एक हफ्ते तक रखा रहने दें फिर रोज भोजन के बाद सुबह और शाम उस सिरके में पड़े हुए दो तीन चीजों को खाएं इससे तिल्ली की सूजन भूल जाती है कुछ दिनों की नियमित प्रयोग से रोग समाप्त हो जाता है। 
  2. पुराना गुर्जर ग्राम और बड़ी पीली हरण के छिलके का चूर्ण बराबर लेकर सब को मिलाकर एक गोली बनाएं इस प्रकार की गोली दिन में दो बार सुबह शाम हल्के गुनगुने पानी के साथ सेवन करना। केवल 4 हफ्ते में ही तिल्ली अपने स्वाभाविक रूप म आ जाएगी।
  3. मूली की जड़ को काटकर उसके टुकड़े सिरके में डाल दें 2 सप्ताह तक उसे सिरके में अच्छी तरह से डूबे रहने दे फिर रोज भोजन के बाद या भोजन के साथ उनका सेवन करें कुछ दिनों में तील्ली का रोग ठीक हो जाता है।
  4. अजवाइन का चूर्ण 2 ग्राम सेंधा नमक आधा ग्राम मिलाकर दोनों समय भोजन के पश्चात गर्म पानी के साथ लेने से दिल्ली की खराबी समाप्त हो जाती है यदि सीधा नमक पास में ना हो तो केवल अजवाइन से भी काम चल सकता है।
  5. जिगर तिल्ली तथा मेदे की बीमारियों में जामुन के सिरके का सेवन करना लाभदायक रहता है। जामुन का सिरका कुछ ही दिनों में रोग  को खत्म कर देता है।
  6. मेहंदी की छाल महीन पिसी हुई 3 ग्राम तथा नौसादर पिसा हुआ 1 ग्राम दोनों को किसी शीशी में भर लें। विष्णु को सुबह-शाम पानी से 3 ग्राम की मात्रा में पानी गर्म होना चाहिए सेवन करने से तील्ली की समस्या ठीक हो सकती है।
  7. कच्चे पपीते को छीलकर उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर के सिरके में डाल दें इस सप्ताह बाद रोजाना खाना खाने के बाद एक दो टुकड़े का सेवन करने से जिगर तथा तिल्ली की खराबी ठीक हो जाती है।
  8. एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़ कर पीने इस प्रकार रोज तीन बार पीने से तिल्ली की सूजन समाप्त हो जाती है।
  9. ग्वारपाठे का रस साडे 700 ग्राम अजवायन 50 ग्राम नौसादर 2 ग्राम इन तीनों वस्तुओं को किसी कांच के बर्तन में भरकर चार-पांच दिन तक धूप में रखा रहने दें। इससे सब वस्तुएं द्रव हो जाएंगी इस तरह कोरोसुधा साल 6 ग्राम से 10 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार लें। 10-15 दिनों तक लगातार लेने से तिल्ली सभी प्रकार के उधर रूप समाप्त हो जाते हैं।
  10. नींबू को बीच में से काट कर उसे गर्म करके थोड़ा-सा नमक मिलाकर कुछ दिन तक भोजन के पूर्व चूसने से बढ़ी हुई तिल्ली अपने प्राकृतिक आकार में वापस आ जाती है।
  11. 70 ग्राम आम का रस 15 ग्राम शहद में मिलाकर नित्य प्रातः 3 सप्ताह पीने से तिल्ली की सूजन में लाभ मिलता है। रोगी को इस अवधि में खटाई का प्रयोग नहीं करना चाहिए गाजर का अचार खाने से भी तिल्ली का रोग ठीक हो जाता है।
  12. 10 घंटे भीगी अजवाइन के पानी को छानकर पीने से दिल्ली रोग में आराम होता है। यदि रोज 2 सप्ताह तक इसका सेवन करें तो तिल्ली का रूप तुरंत ठीक हो जाता है।
  13. करेले का रस 20 ग्राम पानी में मिलाकर पीने से दिन में तीन बार लेने से तिल्ली का रोग समाप्त हो जाता है।
    हमें अपनी प्रकृति व परिवेश को समझ लेना चाहिए प्राकृतिक आहार लेने से धन, श्रम ,समय व खाद की बचत होगी। बाहरी रासायनिक तत्वों की मिलावट का भय भी नहीं रहेगा। प्राकृतिक आहार को चबाने से दांत, दांढ स्वस्थ रहेंगे। साथी हम भी निरोगी फुर्तीले और सबल और पुष्ट रहेंगे। विटामिन और समस्त पोषक तत्वों से भरपूर कच्चे भोजन को प्रतिदिन कम से कम एक बार तो अवश्य ही लेना चाहिए। वर्ष वर्ष से पक्व  भोजन लेते रहने वाले मनुष्य के लिए पूर्ण रूप से अपक्व भोजन लेना असंभव सा लगता है।पक्व भोजन में जो जीवित तत्व नष्ट हो जाते हैं वह इस अल्प अपक्व को भोजन से मिल जा सकेंगे।






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