google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical मादक द्रव्य का सेवन करने से स्वास्थ पर क्या असर होता है?

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मादक द्रव्य का सेवन करने से स्वास्थ पर क्या असर होता है?

 मादक द्रव्य का सेवन करने से स्वास्थ पर क्या असर होता है?

मादक द्रव्य का कुप्रभाव;-

चाय कॉफी तंबाकू बीड़ी सिगरेट शराब बीयर अफीम गांजा भांग चरस को को आदि नशीले द्रव्यों का प्रयोग किसी ज हर से कम नहीं। उत्तेजक और तामसिक द्रव्य है। व्यक्ति जब अवसाद व चिंता से घिरा रहता है तब ऐसी चीजें चाहने लगता है जिससे हारी हुई शक्त का पुनरुद्धार हो सके। किंतु इन विषैले ट्रक के प्रयोग से धन लूटा कर इसके बदले में परिवारिक अशांति व रोग ही प्राप्त होता है।

शराब;-

शराब सहमत नहीं बल्कि एक स्नायविक उद्दीपक है जो जवान और औरतों को आसलस्य पैदा कर देती है अपने प्रभाव से अचेतन कर देती है और मस्तिष्क को सुला देती है। शराब मस्तिष्क के उस भाग को प्रभावित करती है जो स्वैच्छिक पे शिया का नियंत्रण करता है। जिससे चाल लड़खड़ा आ जाती है। इसके प्रभाव से हार्ड फेल लीवर किडनी खराब हो जाती है ज्यादा पीने से स्मरण शक्ति का ह्रास हो जाता है उन्नीदापन ठीक से बोलना पढ़ना आंखों का उचित दिशा में ना देख पाना अंत में अस्थाई मानसिक बौद्धिक अपंगता और कभी-कभी पक्षाघात मन असहयोग विचार बुद्धि और युक्ति की क्षमता नष्ट हो जाती है,। विभिन्न स्नायविक रोग उत्पन्न हो जाते हैं। शराब में अल्कोहल होता है जो मानसिक उत्तेजना तनाव चिड़चिड़ापन और मानसिक दबाव कुछ देर के लिए कम कर देता है किंतु नशा उतरने के बाद पहले से भी अधिक और साथ दें और मन के ऊपर आकर पड़ जाता है। वास्तव में इसके प्रभाव में शारीरिक मानसिक या बौद्धिक कार्य क्षमता कम हो जाती है। बढ़ती नहीं है। अल्कोहल शामक व उन्नीदापन और आलस लाता है।

‌‌ उपयोग की हुई शराब का 90% जहर जिगर को मुक्त करना पड़ता है। सिर्फ 10 % पसीना, मूत्र, और स्वास् द्वारा निकाला जाता है। यूरिक एसिड से मुक्त होने पर शरीर की क्षमता भी कम हो जाती है जिससे जिगर खराब होने का खतरा वह गठिया के दौरे जल्दी पड़ने लगते हैं। शराब संतृप्त वसा मैं तुरंत बदल जाती है और रक्त वसा की मात्रा को काफी बढ़ा देती। जब वर्षा की बड़ी मात्रा हृदय में इकट्ठा होने लगती है तब यह सामान्य चयापचय में बाधा डालती है। रात विटामिंस को नष्ट कर देती है हड्डियां भुरभुरी होकर टूट जाती है। अधिक शराब पीने से अमाशय की भीतरी भाग पर सूजन होने लगती है और बाद में पेप्टिक अल्सर हो जाता है। विटामिन बी की कमी से बेरी बेरी रोग हो जाता है ना इस सिम की कमी से होने से पेलाग्रा  रोग हो जाता है।

शेक्सपियर के अनुसार" मदिरा का सेवन इच्छा या भावनाओं को भड़काता है लेकिन उन्हें पूरा करने की क्षमता को कम कर देता है। पेट में अल्कोहल की मात्रा 20% या उससे अधिक हो तो गैस्ट्राइटिस रोग हो जाता है."

अधिक अल्कोहल लेने से सिरदर्द चक्कर आना मन बुझा बुझा रहना निकली उल्टी होना आदि रोग हो जाते हैं। अल्कोहल दिल की मांसपेशियों के कार्य में रुकावट डालता है जिससे हार्ड फिल्म दिल की बीमारियां घेर लेती है

धूम्रपान;-

तंबाकू का सेवन करने से होने वाले नुकसान;-

बीड़ी सिगरेट हुक्का या चिलम चुरूर आदि द्वारा तंबाकू के धुएं को पीना धूम्रपान कहलाता है। यह मात्र पीने वालों के लिए ही हानिकारक नहीं है बल्कि आसपास बैठे रहने वालों के लिए भी उतनी ही हानिकारक है। तंबाकू में जो निकोटिन होता है वह मारात्मक विष है। यह जहर शब्द हुए के साथ फेफड़ों में संग्रहित होता है तथा समूचे फेफड़े विषाक्त हो जाते हैं। इसी कारण तंबाकू के सेवन से स्वास्थ्य यंत्र के विभिन्न रोग उत्पन्न होते हैं। फेफड़ा द्वारा विषाक्त ऑक्सीजन से रक्त विषैला हो जाता है। इससे मंदाकिनी अजीर्ण हृदय की दुर्बलता ह्रदय शूल द्रुत ह्रदय स्पंदन, लकवा स्नायविक अलता तथा फेफड़े व श्वास नली का कैंसर आदि हो जाता है। तंबाकू के अत्यधिक सेवन से पेट में घाव या क्ष मूत्र यंत्र के रोग मानसिक दुर्बलता व मस्तिष्क और स्नायु के विभिन्न रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
सुरती जर्दा खैनी आधी कच्चे रूप में तंबाकू खाई जाती है। आजकल पाउच में जर्दा व चूना खाने का अत्यधिक प्रचलन है। कच्चे तंबाकू का सेवन तो धूम्रपान से भी खराब है भारतवर्ष में तंबाकू से होने वाली बीमारियों से लगभग 600000 लोगों की मृत्यु हर वर्ष हो रही है। तंबाकू के धुए से 4000 से लगभग रासायनिक तत्व होते हैं जिसमें निकोटीन मोनोऑक्साइड स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक है। इससे अतिरिक्त इसमें हाइड्रोजन, सायनाइड ,अमोनिया ,यूरिथेन ,आर्सेनिक, फिनोल ,नेप्थलीन, कैडमियम इत्यादि विद्वान होते हैं।

***निकोटीन;-

यह हृदय और रक्त वाहिनी को प्रभावित करता है यह बहुत तेज जहर है जो हाइड्रो सैनिक एसिड के समान अचानक शीघ्र ही जीवन नष्ट कर देता है। यह नशीला पदार्थ जिसके कारण व्यक्ति तंबाकू पीने का आदी हो जाता है। निकोटीन सदा के लिए हानिकारक है इससे रक्त नालियों सिकुडकर सख्त हो जाती है और उनमें बुढ़ापा आ जाता है। यह लफ्ज़ की गति को बढ़ाता है फेफड़ों में खाओ तथा फेफड़ों को झुलसा देता है। दिल दिमाग की दुर्बलता तथा स्नायु की शक्ति घटती है।

****कोलिडिन;-

इस पदार्थ से तंबाकू में दर्द पैदा होती है इसको कुछ सैंकड सुनने से स्नायु दुर्बलता, सिर चकराना ,आदि रोग हो जाता है।

****कार्बन मोनोऑक्साइड ;-

यह जहरीली गैस रक्त के लिए विषैला है , यह रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को कम कर लालकण में प्रवेश करती है। इसकी अधिक मात्रा पुतलियों को फैला देती है तथा नेत्र ज्योति को घटा देती हैं। इस प्रभाव सिरदर्द, चक्कर ,आना, ठंडा पसीना, ठंडा बदन,  मुर्छा , तथा पक्षाघात उत्पन्न होते हैं।

****फर फूला;-

यह मस्तिष्क की नाड़ियों को हानि पहुंचाता है इसके प्रभाव से मानसिक रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं।

****एक्रोलीन;-

यह मानव शरीर पर अपना प्रभाव फैलाने में सबसे भयानक द्रव्य है इससे मानव के अंदर चिड़चिड़ापन आ जाता है।

***तंबाकू तार;-

यह गरीब उरी रंग का पदार्थ होता है जो कि फेफड़ों में जमा हो जाता है यह तंबाकू के धुएं का विषैला तत्व है जिससे फेफड़ों का कैंसर हो जाता है।

***मार्स गैस:-

इससे ब्रह्मचर्य नष्ट होकर नपुसंकता आ जाती है।

धूम्रपान स्वास्थ्य को दीमक की तरह चाट  जाता है। इससे रक्त की रोग प्रतिरोधक शक्ति एकाग्रता व सहनशक्ति चीर जाती है। गुर्दे खराब हो जाते हैं स्त्री धूम्रपान करती है तो बाझ हो जाती है। यदि बच्चे इसका सेवन करते हैं तो उनका विकास रुक जाता है। गर्भावस्था में धूम्रपान से शिशु जन्मजात हृदय रोगी होता है तंबाकू का दूरबीन पेड़ पौधों पर लगता है वह मुरझा जाते हैं उनकी वृद्धि रुक जाती है। "एक जलती सिगरेट उतनी ही जीवनदायिनी ऑक्सीजन पी जाती है जितनी चार व्यक्तियों को उतने ही समय के लिए पर्याप्त हो।"इसे स्वच्छ वायु प्रदूषित होती है धूम्रपान करने वालों के पास बैठने वालों तथा घर में रहने वाले सभी के लिए हानिकारक है। अतः धूम्रपान का सार्वजनिक विज्ञापन बंद करना चाहिए सिनेमाघर अखबार बच्चों की पाठ्य पुस्तकों में धूम्रपान से होने वाली हानियों से संबंधित लेख व कहानियां देनी चाहिए।

चाय पीने के नुकसान;-

माताएं शिशु को लाड में जन्म से ही चाय चटाती है फिर वह थोड़े बड़े होकर चाय पीने लग जाते हैं। इसके सेवन से बच्चों का विकासशील हो जाता है लंबे समय तक अत्यधिक सेवन करने से भूख में कमी मंदाग्नि अपच हृदय की धड़कन सिर दर्द उल्टी निकली मुद्रा से की कमजोरी पेशाब का बार बार आना स्नायु दुर्बलता हिस्टीरिया का हृदय में दर्द तथा उच्च रक्तचाप और मधुमेह आदि रोग हो जाते हैं। अमाशय में अधिक विलासराव होने से व्रण हो जाता है तथा श्वेत सार की पाचन क्रिया अमाशय में रुक जाती। नवयुवकों  के पुरुषार्थ और विटामिन के अति आवश्यक अंश नष्ट हो जाते हैं चाय पीने से व्यक्ति अधिक विवादी हो जाता है। चाय में तीन 20%  ट्रेनिंन 15% उड़नशील 40 % होता है

थीन;-

यह एक प्रकार का तीक्ष्ण द्रव्य है ।इसके रासायनिक अंश कैफीन के समान होते हैं। ज्ञान तंतु का इसका बहुत विषैला प्रभाव पड़ता है । इसीलिए मस्तिक सबसे कम पर अधिक बोझ पड़ता है।

ट्रेनिंन :-

यह कब्ज करने वाला तेज पदार्थ। यह पाचन प्रणाली में विकार उत्पन्न करके भूख न लगना अजीर्ण गैस पैदा करता है। इसीलिए मस्तिष्क को फेफड़ों पर अधिक बोझ पड़ता है। खाली पेट अत्यधिक चाय पीने से पेट में घाव हो जाते हैं जिसको अल्सर कहते हैं यह रसायन चमड़ा रंगने हुआ कड़ा करने के काम आता है। हाथों की सतह को सख्त कर देता है। चाय में उड़न सील तेल से सुगंध आती है। इसे पीने से जागने की इच्छा बनी रहती है रात में चाय पीने से अनिद्रा हो जाती है।

कैफीन:-

इससे पेट में तेजाब बढ़ जाने से अनिद्रा सिरदर्द के विटामिन का अभाव बालों का असमय सफेद होना स्मरण शक्ति का कम होना लीवर व उच्च रक्तचाप आदि रोग हो जाते हैं।

  अत्यधिक गर्म चाय पीने से पाक स्थली कुपित हो जाती है। फिर धीरे-धीरे शिथिल हो जाती है मुंह की रस निकालने वाली ग्रंथियां अकमर्रण्य जाती है लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में चाय पीने से छूटा मंद अर्जीन कब्ज गैस एसिडिटी आदि रोग हो जाते हैं। लोग सुबह उठते ही जब गर्म चाय नहीं पी लेते तब तक उन्हें मल त्याग का वेग नहीं होता ऐसे ही थक जाने पर एक प्याला चाय बिना नहीं रह सकते। चाय एक हल्का नशीला पेय पदार्थ है जिनको इसकी लत पड़ जाती है वह सुबह शाम ना मिलने पर बेचैन हो जाते हैं सिर दर्द व तलब लगने लगती है। पीकर भी चैन पड़ता है चाय कैसा मीठा चोर है जो पीने वाले को पता भी ना चले कब प्यार से धीरे-धीरे शरीर का सबसे अच्छा अंशु लेती है चाय के स्थान पर सुबह दूध नींबू पानी शहद नींबू पानी उपयुक्त है।


कॉफी पीने के नुकसान;-

काफी चाय से भी अधिक हानिकारक है इसमें कोई पोषक तत्व नहीं होता इसमें एक प्रकार का अम्ल कठिन होता है जो रक्तचाप बढ़ाता है कैफीन 75 प्रतिशत‌ 5% टैनिन उड़न सील तेल 15%।

कैसे यह एक प्रकार का कड़वा विष है यह हृदय गति को धीमा करता है। काफी द्वारा रक्त में हीमोग्लोबिन नष्ट होने से पीलिया तथा रक्ता भाव हो जाता है। चाय के उड़न सिल तेल से इसमें तीन गुण तेल अधिक होता है।एक औंस काफी में 3 से 9 ग्रेन कैफीन होता है। निम्न रक्तचाप होने पर काफ पिलाई जाती है जिससे रक्तचाप सामान्य हो जाता है। यह रक्तचाप को बढ़ाता है यह हृदय और रक्त वाहिनी के लिए जहर के समान है। इसे पीने से पाचन शक्ति घटती है उत्तेजना वह वादी पड़ती है काफी पीने से बच्चों में मस्तिष्क उत्तेजना भय अनिद्रा पाचन संबंधी गड़बड़ी हो जाती है। अत्यधिक सेवन से बेचैनी गर्मी में सुस्ती कंपन का अनुभव होता है। हाथ पैर में झनझनाहट आंखों के सामने पतंगे उड़ते मालूम होते हैं। हृदय की धड़कन बढ़ती और कैफीन द्वारा चूल्लिका ग्रंथि उत्तेजित होने से घेंघा रोग भी हो जाता है। इसे पीने से कुछ समय के लिए शरीर में उत्तेजना और स्फूर्ति का अनुभव होता है किंतु वास्तव में यह जीवनी शक्ति का ह्रास करती है। उसकी पूर्ति नहीं करती। कॉफी में कैफीन के अतिरिक्त सिगरेट में पाया जाने वाला कैंसर पैदा करने वाला जहर भी होता है। कॉफी में कैफीन, यूरिक एसिड , टैनिन,  पैराडाइज ,फरफ्यूटइल ,फिनो लिक, फरफरालडीहाइड, किया, जाट ,टाट, रासायनिक पाए जाते हैं।

अफीम पीने के नुकसान;-

नशीली वस्तुओं का प्रयोग शहर से कम नहीं अफीम विषैला द्रव्य है अत्यधिक तनाव तथा परेशानी असहनीय पीड़ा की अनुभूति के दमन करने के लिए दी जाती है। यह दर्द के कारण को दूर नहीं कर सकती केवल संवेदनशीलता को कुंठित कर देती है और ज्ञान तंतुओं को प्रभाव पड़ने के लिए असमर्थ बनाती हैं। मस्तिष्क जब चेतना हीरो जाता है तो श्रवण शक्ति स्वाद ग्रंथिया और दृष्टि पर प्रभाव पड़ता है।

  अफीम में मोरफिन, कोडीन, नॉस् केपाइन, इत्यादि रासायनिक पदार्थ होते हैं । इन को गोली के रूप में या सिगरेट में भरकर किया जाता है पहले बाजरे के दाने के बराबर सेवन शुरू करते हैं इसके बाद इसके सेवन की मात्रा बढ़ाते जाते जाते हैं। क्योंकि बार-बार प्रयोग में लाने से कम मात्रा में सेवन करने से अपेक्षाकृत आराम नहीं पहुंचता अतः लोग इसके आदि हो जाते हैं।

 अफीम के पौधे की ऊपरी पत्तों से भंग तैयार की जाती है जो कि एक सस्ता नशा है। फैंसी स्नायु तंत्र की क्रियाशीलता दब जाती है इसके सेवन के बाद पर्याप्त राहर न लेने से कुपोषण टीवी मिर्गी के दौरे आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं। पाचन संस्थान में गड़बड़ी कब्ज बुद्धि कुंठित नींद आना भूख न लगना अजीत ज्ञान तंतु कमजोर डरपोक आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं। लगातार सेवन से शारीरिक व मानसिक शक्ति का पतन हो जाता है तथा नपुसंकता व स्वास्थ्य अधिकाशत हो जाते हैं। पहले की माताएं बच्चे अधिक होने उन्हें संभालने का काम की झंझट की वजह से बच्चों को अफीम दे देती थी परिणाम स्वरूप बच्चे मंदबुद्धि आलसी वह चुपचाप या सोए पड़े रहने से कमजोर व रोगी बने रहते थे।


अन्य मादक पदार्थ ;-

उपर्युक्त नशीले धर्मों के अलावा भांग गांजा चरस को का पान सुपारी आदि सभी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पदार्थ है। सेवन से आनंद युक्त सुस्ती पैदा होती है परंतु इससे मस्तिष्क शरीर और आत्मा का ह्रास होता है। नशा उतर जाने पर मनुष्य घोर नरक में पड़ा अनुभव करता है नींद ना आना भूख न लगना पेट दर्द अजीर्णता हृदय की धड़कन आदि रोगों से ग्रसित हो जाता है। भय, भूल भ्रम का शिकार हो जाता है। कौन से व्यक्ति सनकी हो जाता है। पागल खाने के लिए सब बताते हैं कि बहुत से व्यक्ति इन पदार्थों के कारण अपनी विचार शक्ति खो देते हैं। आयुर्वेद के अनुसार पान काम शक्ति को उत्तेजित करता है तथा पान की अधिक मात्रा के सेवन से शारीरिक बल कम होता है। बाल असमय सफेद हो जाते हैं दांत खराब हो जाते हैं। श्रवण शक्ति सुधा व आयु कम हो जाती है। अजीर्ण पेचिश और संग्रहणी रोगों से ग्रसित हो जाते हैं। सुपारी में मादक पदार्थ होता है पान के चुन से मुंह और पेट की पतली झिल्ली में जलन होती है। कथा बहुत तेज संकुचन वाला रसायन है या मुंह पर तथा आंतों की श्लैष्मिक झिल्ली को सुखा देता है। पान खाने वाले स्वाद खो देते हैं तथा पान के साथ लाल थूक देते हैं भोजन पचाने में लार का क्षय होने से पाचन क्रिया कमजोर हो जाती।

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