google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical त्रिफला चूर्ण का उपयोग कब, कैसे, क्यों और कितनी मात्रा में करना चाहिए?

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त्रिफला चूर्ण का उपयोग कब, कैसे, क्यों और कितनी मात्रा में करना चाहिए?

 त्रिफला चूर्ण का उपयोग कब, कैसे, क्यों और कितनी मात्रा में करना चाहिए?

इसका  प्रचलित नाम त्रिफला है त्रिफला प्रयोग में आने वाला जो भाग है वह उसका फल है।  प्रसिद्ध आयुर्वेदिक रासायनिक फार्मूला है जिसकी आमलकी, आंवला, बहेड़ा, हरण ,को बीज निकालकर  मात्रा में लिया जाता है तृफला शब्द का शाब्दिक अर्थ है तीन फल।

  संयमित आहार-विहार के साथ त्रिफला का सेवन करने वाले व्यक्तियों को हृदय रोग उच्च रक्तचाप मधुमेह नेत्र रोग के प्रकार मोटापा आदि होने की संभावना नहीं होती है। यह कोई भी प्रकार के प्रमेय विविध कुष्ठरोग विषम ज्वर व सूजन को नष्ट करता है। आस्तिक के दांत व पाचन संस्थान को बलवान बनाता है इसका नियमित सेवन शरीर को निरोग सक्षम फुर्तीला बनाता है।

त्रिफला के औषधीय गुण और आयुर्वेदिक चमत्कार;-

त्रिफला पाचन और भूख बढ़ाने लाल रक्त कणिकाओंरक्त कणिकाओं की संख्या में वृद्धि करनी और शरीर में वसा की अवांछनीय अन्य मात्रा को हटाने में सहायता के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मुंह में घुलने पर त्रिफला का उपयोग रक्त के जमा और सिर दर्द को दूर करने के लिए किया जाता है। इसके अन्य फायदों में रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद करना और त्वचा के रंग और टोन में सुधार लाना शामिल है। भारत में एक लोकप्रिय कहावत है "मां नहीं है यदि आपके पास त्रिफला है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है"। इसका सर यह है कि जिस तरह मां अपने बच्चों की देखभाल करती है उसी तरह त्रिफला शरीर के आंतरिक अंगों की देखभाल कर सकता है। त्रिफला की तीनों जड़ी बूटियां आर्थिक सफाई को बढ़ावा देती है जमाव और अधिकता की स्थिति को कम करती है पाचन पोषक तत्वों के सम्मेलन को बेहतर बनाती है।
  आंवला के तरह रसायन में इस गीत विसण के तीन महत्वपूर्ण घटकों (आम लकी हरीतकी और विभितकी) से जुड़े विचारों के साथ आयुर्वेद में इसके उपयोग से बनाई जाने वाली विभिन्न औषधियों और इनके औषधि और चिकित्सा गुणों को की चर्चा की गई है। यह सुझाव दिया है कि त्रिफला में संभावित रूप से कैंसर विरोधी गुट मौजूद है भारत के कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों जैसे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय द्वारा हाल में की गई शोध से पता चला है कि एक महत्वपूर्ण विषय नाशक और कैंसर विरोधी कार्य के रूप में त्रिफला में अत्यंत औषधीय गुण मौजूद है।

  कैंसर लेटर पत्रिका के जनवरी 2006 के अंक में प्रकाशित एक अध्ययन‌ एक कैंसर विरोधी औषधि के रूप में पारंपरिक आयुर्वेदिक मिश्रण त्रिफला की क्षमता में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के विकिरण जीव विज्ञान और स्वास्थ्य विज्ञान के वैज्ञानिकों ने पाया कि त्रिफला में ट्यूमर कोशिकाओं में साइटोटाक्सीसिटी यानी कोशिका मृत्यु प्रेरित करने की क्षमता है लेकिन सामान्य कोशिकाओं को यह वह इस रूप में प्रभावित नहीं करता।

  इसी प्रकार जवाहर विश्वविद्यालय में विकिरण एवं कैंसर जीव विज्ञान प्रयोगशाला की जनरल आफ एक्सपेरिमेंट एंड क्लिनिकल कैंसर रिसर्च में प्रकाशित दिसंबर 2005 की एक रिपोर्ट के अनुसार त्रिफला पशुओं में ट्यूमर के मामलों को कम करने और एंटी ऑक्सीडेंट पढ़ाने की स्थिति में प्रभावी है।

 ‌‌ गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के वनस्पति विज्ञान विभाग की एक रिपोर्ट में पाया कि कैंसर कोशिका रेखाओं पर त्रिफला का साइन तो टॉक्सिक प्रभाव बहुत अच्छा था और इस शोध के उपयोग की गई सभी कोशिका रेखाओं पर एक समान था। 1 फरवरी 2005 में जनरल एथ्नोफार्मोकोलॉजी मैं प्रकाशित प्रमुख का कारण हो सकता है। इन्हीं लेखकों ने पूर्व में बताया था कि त्रिफला में अत्यधिक एंटीम्यूटेजेनिक‌/एंटीकार्सिजोनिक क्षमता थी।

  फरवरी 2006 में डॉक्टर मुदलियार पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ बेसिक मेडिकल साइंस मद्रास विश्वविद्यालय तारमणि कैंपस के वैज्ञानिकों ने बताया कि त्रिफला की पूरक खुराक देने से एंटी ऑक्सीडेंट में शोर जनित तनाव में होने वाले परिवर्तनों और साथी चूहों में कोशिका प्रेरित प्रतिरोधकता को रोकथाम होती है। इसका अर्थ यह है कि त्रिफला एक तनाव विरोधी कारक है इस अध्ययन का निष्कर्ष आया था कि अपनी एंटी ऑक्सीडेंट गुणों के कारण त्रिफला चूर्ण जनित तनाव में होने वाली परिवर्तनों को वापस ज्यो का‌ त्यो  करते देता है।

   ट्रांबे स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में विज्ञान रसायन विज्ञान और रासायनिक डायनामिक्स प्रभाव में संचालित अध्ययन में यह पता चला कि त्रिफला में तीनों घटक सक्रिय हैं और वे अलग-अलग परिस्थितियों में कुछ भी कट विधियों का प्रदर्शन करते हैं और इन अलग-अलग घटकों की संयोजित गतिविधि के कारण त्रिफला मिश्रण के और अधिक कार्य कौशल होने की अपेक्षा की जाती है। इन अध्ययन के परिणाम फाइटोथेरेपी रिसर्च के जुलाई 2005 के अंक में प्रकाशित किए गए थे। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने त्रिफला के एक घटक की रेडियो रक्षात्मक क्षमता की जानकारी दी। इसी तरह से परिणाम कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज की ओर से जनरल आफ अल्टरनेटिव एंड कंप्लीमेंट्री मेडिसिन में प्रकाशित किए गए जहां वैज्ञानिकों ने दावा किया कि"है आयुर्वेदिक रसायन त्रिफला की मदद से विकिरण टॉलरेंस में 1.4 ग्रेड गामा विकिरण की वृद्धि हुई।"उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि जहां त्रिफला में गैस्ट्रोटेस्टीनल और हीमोंप्वायटिक मृत्यु से सुरक्षा प्रदान की जा सकी वहीं पशु 11 GY  से अधिक  किरणों के संपर्क में आने के बाद 30 दिनों से अधिक नहीं जीत पाए।

  त्रिफला प्रेमेह वीर्य  विकार कफ पित्त तथा कुष्ठ को ठीक करता है। यदस्त लाकर पेट को साफ करने वाला होता है आंखों के रोग को ठीक करने में अलाव कारी होता है यह भूख रुचि को बढ़ाने वाला और विषम बुखार को नष्ट करने वाला होता है।


त्रिफला आंखों के रोग के लिए औषधि के रूप में

त्रिफला को शाम को पानी में भिगो दें सुबह उठकर इसे छाले तथा इससे आंखों को धोएं इससे हर प्रकार की आंखों की बीमारियां ठीक हो जाती है। शुक्ला के चूर्ण को कुछ घंटे तक पानी में भिगोकर छानकर उसका पानी पीने से भी गैस की शिकायत भी नहीं रहती है। त्रिफला के पानी से आंखों को धोने से आंखों के अंदर की सूजन दूर हो जाती है लगभग 5 से 10 ग्राम त्रिफला तथा मिश्री को घी में मिलाकर सेवन करने से आंखों का दर्द आंखों का जलन आंखों का लाल होना आंखों की सूजन आदि दूर हो जाती है।

  चार चम्मच त्रिफला चूर्ण एक गिलास पानी में मिलाकर अच्छी तरह छाले इस पानी से आंखों पर छींटे मारकर दिन में 4 बार धोएं इससे लाभ मिलता है आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं।
त्रिफला के पानी से रोजाना दो से तीन बार आंखों को धोने से कनिका की जलन दूर हो जाती है आंखों के रोगों को ठीक करने के लिए 30 ग्राम त्रिफला चूर्ण को रात में 100 ग्राम पानी में मिलाकर रखें सुबह से कपड़े से छानकर आंखों को धोएं। ग्राम त्रिफला 5-5 ग्राम सेंधा नमक फिटकरी और 100 ग्राम नीम के पत्ते सबको लेकर 300 ग्राम पानी में उबालें तथा इसे कपड़े से छानकर आंखों को धोने से आंखों की सूजन ठीक हो जाती है।

मोतियाबिंद होने पर त्रिफला का प्रयोग

ठंडे पानी या त्रिफला के काढ़े से आंखों को धोने से मोतियाबिंद का रोग दूर हो जाता है। त्रिफला चूर्ण यष्टि मूल चूर्ण को 3-6 ग्राम शहद या घी के साथ दिन में 2 बार लेने से मोतियाबिंद रोग ठीक हो जाता है। मोतियाबिंद को ठीक करने के लिए 6 से 12 ग्राम त्रिफला चूर्ण को 12 से 24 ग्राम घी के साथ दिन में 3 बार लेना चाहिए।

दिनौधी (दिन में दिखाई ना देना)

त्रिफला के काढ़े में 12 से 24 ग्राम शुद्ध घी मिलाकर इसे डेढ़ सौ मिलीलीटर गुनगुने पानी के साथ दिन में 3 से 5 ग्राम खाने से दिन में न दखाई देने वालीदृष्टिबाधित समस्या से निजात मिलती है। दिनौधी को ठीक करने के लिए रोजाना सुबह और शाम 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण को ताजे पानी के साथ सेवन करें और त्रिफला के पानी से आंखों और सिर को धोएं।


रतौंधी ( दूषित जख्म)

त्रिफला के पानी से घाव को धोने से घाव ठीक होने लगते हैं त्रिफला के चूर्ण में मुंगरी का रस मिलाकर बारीक पीस लें और बड़े बेर के बराबर की गोलियां बना लें एक एक गोली रोजाना सेवन करने से कितना भी पुराना घाव हो ठीक हो जाता है। त्रिफला के काढ़े से उपदंश के घाव को धोकर ऊपर से त्रिफला की राख को शहद में मिलाकर लगाने से उपदंश के घाव जल्दी भर जाते हैं और ठीक हो जाते हैं। त्रिफला और उड़द इन दोनों को बराबर लेकर कड़ाही में जलाकर राख बना ले और रात में शहद मिलाकर लेप बना लें इस लेप को उपदंश के घाव पर लगाने से लाभ मिलता है। त्रिफला के काढ़े में शहद मिलाकर लेप बना लें इस लेप को गर्मी के कारण उत्पन्न होने वाले घाव पर लगाएं इससे लाभ मिलेगा। त्रिफला के काढ़े से उपदंश के घाव को धोने से घाव ठीक होने लगते हैं 3 ग्राम त्रिफला का चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह-शाम चाटने से लाभ होता है तथा उपदंश के घाव ठीक हो जाते हैं।

उच्च रक्तचाप या हाई ब्लड प्रेशर

एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को पानी गुनगुना पानी के साथ रात में सोते समय लेने से उच्च रक्तचाप में आराम मिलता है और रक्तचाप सामान्य रहता है। 10 ग्राम त्रिफला का चूर्ण पानी में मिलाकर रात को किसी बर्तन में रख दें सुबह इस मिश्रण को छानकर इसमें थोड़ी सी मिश्री मिला दे और इससे पी लें इससे उच्च रक्तचाप हाई ब्लड प्रेशर कम होता है।


बालों को झड़ने से रोकने के लिए त्रिफला का प्रयोग

त्रिफला का चूर्ण लगभग 2 से 6 ग्राम तथा लव की भस्म लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग को मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है।


कृमि नाशक;-

त्रिफला हल्दी और नींबू को मिलाकर सेवन करने से पेट के सारे कीड़े मर जाते हैं।


कामला या पीलिया;-

त्रिफला वासा गिलोय कुटकी नीम की छाल और चिरायता को मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण की 20 ग्राम मात्रा की लगभग 160 ग्राम पानी में पका लें जब पानी चौथाई बज जाए तो इस गाड़ी में शहद मिलाकर सुबह और शाम के सेवन करने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
त्रिफला पलाश और कुटज को मिलाकर सेवन करने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है। पीलिया का उपचार करने के लिए 40 ग्राम त्रिफला के काढ़े में 5 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है। त्रिफला का रस एक तिहाई एक कप इतना ही गन्ने का रस मिलाकर दिन में 3 बार पीने से पीलिया की बीमारी दूर हो जाती है। हल्दी त्रिफला बाय बीडिग‌ त्रिकुटा मंडोर को बराबर बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर रख लें फिर इस चूर्ण को घी और शहद के साथ मिलाकर खाने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है। आधा चम्मच त्रिफला का चूर्ण आधा चम्मच गिलोय का रस आधा चम्मच नींबू का रस यह सब को मिलाकर शहद के साथ चाटे लगभग 12 से 15 दिन तक इसका सेवन करने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।

मूत्र रोग में त्रिफला का प्रयोग:-त्रिफला बांस के पत्ते मोटा तथा पाठा आदि को मिलाकर चूर्ण बना लें इसमें से 3000 ग्राम चूर्ण को शहद कथा के के साथ सेवन करने से पेशाब का बार बार आना बंद हो जाता है। त्रिफला सेंधा नमक गोखरू तथा खीरा के बीज को पीसकर चूर्ण बना लें इसे ठंडे पानी के साथ लेने से पेशाब का रोग ठीक हो जाता है। 3 से 5 ग्राम त्रिफला का चूर्ण सुबह और शाम गर्म पानी के साथ मूत्र रोग में देने से पेशाब काला का हार आना बंद हो जाता है। 40 ग्राम त्रिफला का काढ़ा सुबह-शाम भोजन के बाद पीने से पेशाब के साथ रक्त आना बंद हो जाता है।

मूत्र घात पेशाब में धातु का आना:-रोग का उपचार करने के लिए त्रिफला के काढ़े में गुड़ और दूध मिलाकर पीने से लाभ मिलता है. लगभग 2 चम्मच त्रिफला के चूर्ण में थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर प्रयोग करने से पेशाब अधिक आना बंद हो जाता है।
 
प्रेमेय या वीर्य विकार :-त्रिफला देवदारू दारूहल्दी तथा नगर मोथा को समान भाग में लेकर काढ़ा बना लें इस काढ़े का सुबह और शाम सेवन करने से रोग ठीक हो जाता है।

आयुस्थापन ;-त्रिफला का सेवन करने से बुढ़ापा जल्दी नहीं आता है।

रक्त पित्त या खुन पित्त:-हरड़ बहेड़ा आंवला तथा अमलतास के 20 मिलीलीटर काढ़े में शहद और खान को मिलाकर पीने से रक्त पित्त जलन तथा दर्द दूर हो जाता है।

वजन बढ़ाने के लिए त्रिफला का प्रयोग;-एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को रात में लगभग 200 ग्राम पानी में मिलाकर रख लें सुबह के समय इस पानी को उबालने जब पानी आधा बज जाए तो उसक छानकर रख लें इसके बाद दो चम्मच शहद मिलाकर गुनगुना पीने से कुछ ही दिनों में कई किलो वजन में बढ़ोतरी होती है।

दांतो के दर्द के लिए त्रिफला का प्रयोग;-दांत के दर्द में रहने वाला रोग त्रिफला की जड़ की छाल चबाने से दूर हो जाता है। तूतिया पांचों नमक पतंगा माजूफल त्रिफला तथा त्रिकुटा इन सब को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसकर मंजन बना लें। इस मंजन को प्रतिदिन दांतों पर मलने से दांतों का हिलना दातों का दर्द तथा दांतों के कीड़े नष्ट हो जाते हैं। इससे दांतों की जड़ें मजबूत हो जाती है त्रिफला और गूगल चार से 8 ग्राम की मात्रा में लेकर गर्म जल के साथ रोजाना दो बार सेवन करने से दांतों के रोग तथा दांत का दर्द ठीक हो जाता है।

मलेरिया ज्वर में त्रिफला का प्रयोग;-मलेरिया का जोर को ठीक करने के लिए त्रिफला और पीपल को बराबर भाग में लेकर चूर्ण बना लें इसमें शहद मिलाकर चाटने से लाभ मिलता है। त्रिफला 3 ग्राम, नागरमोथा 3 ग्राम, निशोथ 3 ग्राम, त्रिकुटा 3 ग्राम, इंद्रौजी 3 ग्राम, कुटकी 3 ग्राम, पटोल के पत्ते 3 ग्राम, चित्रक‌ 3 ग्राम और अमलतास को 3 ग्राम की मात्रा में कूटकर चूर्ण बना लें जब का ठंडा हो जाए तब सहद मिलाकर रोगी को पिलाएं इससे मलेरिया बुखार ठीक हो जाता है।

अंजनहारी या गुहेरी;-गुहेरी को ठीक करने के लिए 5 ग्राम त्रिफला का चूर्ण और 2 ग्राम मुलेठी को सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करना चाहिए। शुक्ला को रात के समय पानी में डालकर रख दे सुबह उठकर उस पानी को कपड़े से छानकर आंखों को धोने से अंजनहारी ठीक हो जाती है। रोजाना सुबह और शाम 3:00 3 ग्राम त्रिफला चूर्ण को हैवी करुं पानी के साथ सेवन करने से अंजनहारी ठीक हो जाती है।

चतुर्थक ज्वर;-ज्वर को ठीक करने के लिए त्रिफला के काढ़े में बराबर मात्रा में दूध या गुड़ मिलाकर सुबह दोपहर और शाम को सेवन करने से लाभ मिलता है। त्रिफला गुडुची तथा वासा के पत्तों का काढ़ा बनाकर 14 से 28 मिलीलीटर की मात्रा में दिन में तीन बार लेने से चतुर्थक ज्वर ठीक हो जाता है।

एलर्जी बुखार;-3 से 6 ग्राम त्रिफला चूर्ण सुबह-शाम सेवन करने से एलर्जी बुखार ठीक हो जाता है अधिक लाभ पाने के लिए इसके साथ शहद का प्रयोग कर सकते हैं।

फेफड़ों में पानी भर जाने पर त्रिफला का प्रयोग;-1 ग्राम त्रिफला का चूर्ण और 1 ग्राम शिलाजीत को 7 से 14 मिलीलीटर गाय के मूत्र में मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करने से फेफड़ों में पानी का रोग ठीक हो जाता है।

जीभ की प्रदाह और सूजन;-त्रिफला को जल में भूलकर गराई करने से जीभ की जलन और सूजन दूर हो जाती है।

जीभ‌ और त्वचा की शून्यता ;-त्रिफला के जड़ की छाल को चढ़ाएं इससे लकवा के कारण जीभ में उत्पन्न सुनता ठीक हो जाती है।

रोशनी से डर लगना:-6 ग्राम त्रिफला के चूर्ण को मिश्री के साथ रोजाना रात को खाकर ऊपर से त्रिफला का काढ़ा पीने से रोशनी से होने वाला दर्द दूर हो जाता है त्रिफला के काढ़े से आंखों को रोजाना सुबह और शाम साफ करने से आंखों के रोग में लाभ मिलता है और तेज रोशनी के कारण उत्पन्न दर्द दूर हो जाता है।

कब्ज से होने वाली परेशानी से त्रिफला का प्रयोग;-कब्ज को दूर करने के लिए त्रिफला का चूर्ण 5 ग्राम रात में हल्की गर्म दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है। एक चम्मच त्रिफला के चूर्ण को गर्म पानी के साथ सोने से पहले सेवन करने से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है। त्रिफला का चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में लेकर हल्का गर्म पानी के साथ रात को सोते समय लेने से कब्ज दूर हो जाती है। त्रिफला का चूर्ण 6 ग्राम शहद में मिलाकर आदमी खा ले फिर ऊपर से गर्म दूध पीने ऐसा कुछ दिन तक करने से कब्ज की समस्या समाप्त हो जाती है। शुक्ला 25 ग्राम सराय 25 ग्राम काली हरड़ 25 ग्राम गुलाब के फूल 25 ग्राम बादाम की गिरी 25 ग्राम बीज रहित मुनक्का 25 ग्राम काला दाना 25 ग्राम और वन फसा 25 ग्राम‌ इन सब को पीसकर चूर्ण बना लें इस मिश्रण को गर्म दूध के साथ लेने से कब्ज समाप्त हो जाती।

  50 ग्राम त्रिफला 50 ग्राम सौंफ 50 ग्राम बादाम की गिरी 10 ग्राम सोंठ 38 ग्राम मिश्री को अलग-अलग को अलग अलग कुटी ले । इन सब को मिलाकर इसमें 6 ग्राम रात को सोने से पहले कब्ज दूर करने के लिए सेवन करना चाहिए। त्रिफला गुग्गुल की दो द गोलियां दिन में तीन बार गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है।

मुंह में छाले होने पर त्रिफला का प्रयोग;-बहेड़ा और आंवला दारू हल्दी और सौंफ 15 ग्राम की मात्रा में लेकर गर्म पानी में उबाल लें इसके बाद इसमें थोड़ा स शहद मिलाकर कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं। पेट में कब्ज होने पर त्रिफला का चूर्ण गर्म दूध या गर्म पानी के साथ प्रतिदिन रात को लगातार तीन से चार दिन तक सेवन से होने वाले मुंह के छाले व दाने खत्म हो जाते हैं।

 मुंह की दुर्गंध आने पर ;-त्रिफला की जड़ या छाल को मुंह में रखकर दिन में दो से तीन बार चबाने से मुंह की दुर्गंध खत्म हो जाती है और मुंह सुगंधित रहता है,। त्रिफला का जूस 20 से 40 ग्राम रोजाना 4 बार पीने से मुंह की दुर्गंध मिट जाती है। जपला की जोड़ियां छावनी में रखकर चलाते रहने से मुंह की दुर्गंध का समाप्त होकर  सुगंधित बना रहता है।

पेट की गैस बनना!-त्रिफला राय को पीसकर चूर्ण बना लें इसे थोड़ी सी मात्रा में गर्म पानी के साथ लेने से पेट की गैस में आराम मिलता है।

गुल्म (पेट में वायु का गोला बन्ना);-गर्मी के कारण पेट में वायु का गोला बनने का उपचार करने के लिए मुनक्का और हरण का 1 से 2 ग्राम गुड़ की चाशनी में मिलाकर पीने के साथ त्रिफला चूर्ण लगभग 4 से 5 ग्राम कार्ड में मिलाकर दिन में तीन बार लेने से पेट में वायु का गोला बनना बंद हो जाता है।

पेट में दर्द;-त्रिफला का चूर्ण 3 ग्राम तथा मिश्री 3 ग्राम को मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है। त्रिफला को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें इस चूर्ण को गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है।

पेट फूलना;-त्रिफला 10 ग्राम 20 ग्राम सलाह और 50 ग्राम चूक को कुट छानकर नींबू के रस में मिलाकर छोटी-छोटी बराबर मात्रा में गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें रात को सोते समय एक से दो गोली लेने से पेट हल्का हो जाता है पेट का फूलना बंद हो जाता है।

पेट के सभी प्रकार के रोगों के लिए;-200 ग्राम त्रिफला चूर्ण में लगभग 120 ग्राम खांड मिला ले इसमें से 5 ग्राम की मात्रा दिन में सुबह और शाम पानी के साथ लेने से पेट के सभी लोग सही हो जाते हैं ऐसे रोगी जिनका पेट बाहर क्यों निकल आया है उन्हें 100 ग्राम त्रिफला के रस को 300 ग्राम पानी में मिलाकर खाना खाने के बाद सेवन करना चाहिए इससे यह रोग ठीक हो जाता है।

हिचकी आने पर त्रीफला का प्रयोग;-3 ग्राम त्रिफला के चूर्ण को गोमूत्र के साथ सेवन करने से हिचकी आना बंद हो जाता है।

बार बार दस्त होने पर;-त्रिफला को पीसकर चूर्ण बनाकर आधा-आधा चम्मच की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम लेने से बार बार दस्त का आना बंद हो जाता है।

बवासीर में त्रिफला का प्रयोग;-भगंदर को या बवासीर को त्रिफला का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में रोजाना रात को हल्के गर्म दूध में मिलाकर पीने से कब्ज और बवासीर नष्ट हो जाता है भगंदर को ठीक करने के लिए त्रिफला को पानी में उबाल कर छान लें और इस पानी से भगंदर को धोने से इसके जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और लाभ मिलता है।

अम्ल पित्त या एसिडिटी;-त्रिफला का चूर्ण आधा चम्मच दिन में दो-तीन बार पानी के साथ लेने से एसिडिटी दूर होती है त्रिपुरा पीपल काली मिर्च को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें फिर इस चूर्ण में एक से आधा चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम चाटने से शहद के साथ लाभ मिलता है।
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त्रिफला को अच्छी तरह पीसकर गर्म लोहे के किसी बर्तन में लेप करके रातभर सूखने दें इसी मिश्रण में सहदेव चीनी मिलाकर सेवन करें इससे अम्ल पित्त दूर होता है बच्चों के पेट में होने वाले अम्ल पित्त का उपचार करने के लिए त्रिफला के चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ बच्चों को सेवन कराएं । त्रिफला कुटकी और परवल को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर छानकर थोड़ी सी मात्रा में मिश्री मिलाकर पीने से अम्ल पित्त में लाभ मिलता है।

पथरी होने पर त्रिफला का प्रयोग;-पाषाणभेद, साठी की जड़, गोखरू पाच 5 ग्राम त्रिफला 14 ग्राम तथा अमलतास का गूदा 10 ग्राम इन सब को 500 ग्राम पानी में डालकर उबालें जब 100 ग्राम पानी शेष रहे तब से छानकर प्रतिदिन सुबह-शाम पियें इससे पथरी घुलकर निकल जाती है।

गर्भाशय की शुद्धता के लिए;-एक्स एक्स एक्स गाड़ी को कपड़े से छानकर इससे योनि में पिचकारी मारे इससे गर्भाशय का मल निकलकर शुद्ध हो जाता है।

यकृत या जिगर का बढ़ना;-20 ग्राम त्रिफला को 120 ग्राम पानी में पकाएं जब पानी चौथाई रह जाए तो उसे उतारकर छान लें इसके ठंडा हो जाने पर इसमें 6 ग्राम शहद मिलाकर पीने से यकृत बढ़ने की शिकायत दूर हो जाती है। यकृत पड़ने पर उपचार करने के लिए 5 ग्राम त्रिफला का चूर्ण एक कप पानी के साथ पकाएं जब चौथाई का पानी शेष रह जाए तो उसे उतारकर छान लें ठंडा हो जाने पर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।

बच्चों के यकृत दोष;-बच्चों के यकृत दोष को दूर करने के लिए त्रिफला को हल्के गर्म पानी में शहद मिलाकर रोजाना सुबह-शाम 10 ग्राम से 20 ग्राम तक बच्चों को सेवन कराएं।

बौनापन;-कद लंबा करने के लिए ढाई सौ ग्राम त्रिफला पीसकर चूर्ण बना लें और इसे छानकर रख लें इसमें 5 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन सुबह-शाम लेने से बौनापन दूर होता है।

बच्चों के मधुमेह रोग के लिए;-बच्चों के मधुमेह रोग को ठीक करने के लिए त्रिफला का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा में लेकर इसमें शहद मिलाकर बच्चों को चटाए।

मधुमेह रोग के नियंत्रण के लिए;-मधुमेह का उपचार करने के लिए त्रिफला का काढ़ा प्रतिदिन पीना चाहिए इससे मधुमेह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

शीतपित्त;-त्रिफला पीसा 5 ग्राम शहद के साथ सुबह-शाम लेने से शीतपित्त में आराम मिलता है शीतपित्त को दूर करने के लिए 120 ग्राम त्रिफला को कूटकर छान लें इसमें से 6 ग्राम पानी के साथ रात के समय सोते समय लें इससे लाभ मिलेगा। 6 ग्राम त्रिफला को ढाई सौ ग्राम पानी में डालकर रात को रख दें सुबह से मसलकर छान लें इसके बाद इस में शहद मिलाकर पी लें इससे सीत पित्त रोग ठीक हो जाता है।

मोटापा को दूर करने के लिए त्रिफला का प्रयोग,;-त्रिफला का चूर्ण लगभग 12 से 14 ग्राम की मात्रा में सोने से पहले रात को हल्के गर्म पानी में डालकर रख दें। सुबह पानी को छानकर इसमें शहद मिलाकर सेवन करें ऐसा कुछ दिनों तक लगातार लेने से मोटापा कम होने लगता है। त्रिफला चित्र त्रिकुटा नागर मोथा और वायविडिंग कुल मिलाकर काढ़ा बना लें और इसे गूगल मिलाकर सेवन करें इससे कुछ दिनों तक करने से मोटापा कम होने लगता है। मोटापा कम करने के लिए त्रिफला का चूर्ण शहद के साथ 10 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार लेने से लाभ मिलता है। दो चम्मच त्रिफला को 1 गिलास पानी में उबालकर इच्छानुसार मिश्री मिला लें और इसका सेवन करें इसे रोज लेने से मोटापा दूर होता है।
ना का चूर्ण और गिलोय का चूर्ण 1 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ चाटने से मोटापा कम होता है। त्रिफला और गिलोय को मिलाकर काढ़ा बनाकर शहद के साथ सेवन करने से मोटापा कम होने लगता है।

जुकाम होने पर त्रिफला का प्रयोग;-करने के लिए 3 ग्राम त्रिफला के चूर्ण को शहद में मिलाकर चाटने से खांसी और जुकाम भी ठीक हो जाता है।
स्तनों के दूध का विकार;-त्रिफला, चिरायता, पंचांग कुटकी, प्रकंद ,मुस्तकमूल, बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें फिर इस कार्य को 1 दिन में 14 मिलीलीटर से लेकर 28 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम पीने से स्तनों के दूध के विकारों में लाभ मिलता है।

पित्त शूल (पित्त के कारण उत्पन्न दर्द);-त्रिफला और अमलतास 20 ग्राम को अच्छी तरह से पकाकर काढ़ा बना लें फिर इस कार्य में देसी घी और चीनी मिलाकर पीने से पित्त सूर्या नीति के कारण होने वाले दर्द में लाभ मिलता है। त्रिफला को पीसकर बारीक चूर्ण में मिश्री का चूर्ण मिलाकर पीने से हर प्रकार के दर्द में लाभ होता है तथा इससे कित्सुन में भी आराम मिलता है।

अंरुषिका (वाराही);-लगभग ब्लू 5 ग्राम त्रिफला के चूर्ण गूगल की एक गोली को पानी के साथ लेने से और उसी का रोग या छोटी-छोटी फुंसियां ठीक हो जाती।

 स्त्रीयो सभी प्रकार के रोग के लिए;-त्रिफला त्रि सुगंधी 30 ग्राम त्रिकूट भूनी हुई बच और हींग‌ सज्जी, पाठ जवाखार, दारूहल्दी, चव्य, भूनी हुई हल्दी, कुटकी, कूड़े की छाल, इंद्र जौ, पांच प्रकार के नमक, नीलगिरी पीपल मूल अजमोद 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से मिश्रण को 5-5 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ सेवन करने से स्त्रियों को होने वाले अनेक रोग जैसे बवासीर ,दमा ,बेचैनी, मसान, सूचियां ,दिल का दर्द ,भगंदर ,पसली का दर्द, पेट की बीमारी ,हिचकी ,गुल्म खांसी पीलिया प्रमेय अनुवाद बुखार और पेचिश ठीक हो जाते हैं।

छोटी उम्र में रक्तस्राव;-छोटी उम्र में रक्त साफ होने पर उपचार करने के लिए 30 ग्राम त्रिफला को मोटा-मोटा कूटकर 500 ग्राम पानी में डालकर पकाएं। जब यह लगभग ढाई सौ ग्राम पंचायत तो इस पानी को ठंडा करके इसमें योनि को धो लें इसका प्रयोग चर पास करने के बाद ही करना चाहिए।

गठिया रोग में जोड़ों का दर्द;-जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए गिलोय का रस और त्रिफला का रस आधा कब पीने से कुछ दिनों में गठिया का रोग जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

योनि में जलन के लिए;-लगभग 20 से 25 ग्राम त्रिफला के चूर्ण को 500 ग्राम पानी में डालकर पका लें फिर इस पानी से साफ कपड़ा भिगोकर से योनि को साफ करें ऐसा करने से योनि की खुजली और जलन दूर हो जाती है।

एग्जिमा के रोग के लिए;-त्रिफला, बच, कुटकी दारू मजीद नींबू की छाल तथा गिलोय इन सब को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें इसे पानी में डालकर उबालकर काढ़ा बना लें इस काढ़े को दिन में तीन से चार बार पीने से एक्जिमा कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। त्रिफला नीम की छाल और परवल के पत्तों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं इस कार्य से एक्जिमा के भाग को साफ करने से एक्जिमा जल्दी ठीक हो जाता है।

दिमाग के कीड़े;-दिमाग की कीड़ी को खत्म करने के लिए लगभग 200 ग्राम त्रिफला के चूर्ण को 100 ग्राम खाक में मिला दें और इसमें से 10 ग्राम चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से दिमाग के कीड़े नष्ट हो जाते हैं तथा इसके साथ दिल भी मजबूत होता है ।

सिर का फोड़ा;-फोड़े फुंसियों को ठीक करने के लिए दूध या पानी के साथ त्रिफला के चूर्ण रात को सोते समय सेवन करने से लाभ मिलता है खाली में नमक का इस्तेमाल और केवल दूध रोटी या दूध से बने पदार्थों का सेवन करने से लंबे समय तक फोड़े फुंसी या नहीं निकलते।

दाद खाज खुजली;-लगभग 50 से 100 ग्राम त्रिफला का रस रोजाना सुबह-शाम पीने से खून साफ हो जाता है और दाद खाज खुजली से त्वचा के रूप नहीं होते।

उरुस्तम्भ या जांघ का सुन्न होना;-मोटा छोटी पीपल त्रिफला कुटकी और चव्य‌ एक समान भाग में लेकर अच्छी तरह से पीसकर छानकर बारीक चूर्ण बना लें 6 ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से जांघ का सुन्नपन हो जाता है।

इच्छा अनिच्छा;-कुछ भी खाने की इच्छा ना हो कब्ज रहना शरीर में आलस और थकावट हो तो 6 ग्राम त्रिफला और 3 ग्राम ईसबगोल की भूसी रात में पीने के साथ लेने से कब्ज दूर हो जाती है और शरीर स्वस्थ रहता है।

खसरा;-त्रिफला, नींबू पत्र ,पटोल का पंचांग, गुडीचीकांड, तथा वासा पत्र के थोड़ी सी भाग का काढ़ा बनाकर इसमें 5 से 16 मिलीलीटर खदिर मिला ले। इसे दिन में दो बार पीने से खसरा ठीक हो जाता है। त्रिफला और पीपल के चूर्ण को घी और शहद में मिलाकर बच्चों को चटाने से बच्चे रोना बंद कर देते हैं और उन्हें डर लगना भी बंद हो जाता है ध्यान रहे कि घी और शहद बराबर मात्रा में नहीं  होने चाहिए।

साइटिका रोग में;-साठिका के रोगी को त्रिफला के काढ़े में 10 से 30 ग्राम अरंडी के तेल मिलाकर पीने से साइटिका रोग दूर हो जाता है।

खून की कमी या एनीमिया रोग में;-धुला हुआ खवस al-harith 20 ग्राम और 60 ग्राम त्रिफला को छानकर दोनों को लोहे की कढ़ाई में फैला कर उसके ऊपर लगभग 300 ग्राम दही डालकर 7 दिन तक सुखाए और दिन में तीन से चार बार अच्छी तरह से उलटते-पुलटते  रहे। सूख जाने के बाद कूट छानकर इसमें अच्छा-अच्छा ग्राम पीपल काली मिर्च तथा सोठ पीसकर मिला दें। इसके बाद इसमें से 3 ग्राम मिश्रण प्रतिदिन सुबह-शाम एक गिलास छाछ के साथ खाली पेट सेवन करें इसका सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर हो जाती है ।

चर्म रोगों में;-रात को सोते समय एक चम्मच त्रिफला का चूर्ण पानी के साथ लेने से खून की खराबी दूर हो जाती है और चर्म रोग ठीक हो जाता है। लगभग 50 से 100 ग्राम त्रिफला के रस को रोजाना सुबह-शाम पीने से खून साफ हो जाता है और त्वचा के सारे रोग ठीक हो जाते हैं।

सिर दर्द में त्रिफला का प्रयोग;-मिश्री और त्रिफला को घी में मिलाकर खाने से सिर के सभी रोग खत्म हो जाते हैं और सिर का दर्द ठीक हो जाता है। बराबर मात्रा में त्रिफला का चूर्ण धनिया सूट और वायविंडिंग को लेकर एक कप पानी में उबालें जब पानी आधा कपड़ा जाए तो उसे उतारकर गाड़ी की तरह सुबह और शाम पीने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।

बाल रोग के लिए त्रिफला का प्रयोग;-बाल रोग को ठीक करने के लिए त्रिफला का काढ़ा बनाकर दिन में 1 से 2 बार सेवन करने से लाभ मिलता है।

ज्यादा पसीना आने पर त्रिफला का प्रयोग;-त्रिफला का रस पानी में मिलाकर दिन में 3 बार पीने से पसीना ज्यादा आना बंद हो जाता है।

गले  की सूजन में त्रिफला का प्रयोग;-गली की सीजन को ठीक करने के लिए चमेली के पत्ते गिलोय जवासा दाख अपना और दारू हल्दी को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें इस काढ़े से गरारे करने पर गले के घाव और छाले दूर हो जाते हैं और सूजन भी ठीक हो जाती है।

उपर्युक्त आयुर्वेदिक प्रयोग आयुर्वेद के आधार पर बताया गया है। औषधियों में त्रिफला एक उत्तम औषधि है जिसका प्रयोग हर प्रकार की व्याधियों में किया जाता है त्रिफला के प्रयोग का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। सब औषधियों में त्रिफला का कोई जोड़ नहीं है ।


त्रिफला के जोखिम और दुष्प्रभाव

त्रिफला की प्रभावकारिता का अध्ययन हर स्वास्थ्य स्थिति के लिए नहीं किया गया है जिसका वह इलाज करता है। उस कारण से, लेने से पहले अपने डॉक्टर के साथ इसके उपयोग पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है। इस जड़ी बूटी को शिशुओं और बच्चों, बुजुर्गों और उन महिलाओं में उपयोग करने के लिए असुरक्षित माना जाता है जो गर्भवती या स्तनपान कर रही हैं।

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइड इफेक्ट्स, जैसे कि ढीली मल, त्रिफला का उपयोग करने वाले लोगों में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।

जो लोग साइटोक्रोम P450 (CYP) सब्सट्रेट ड्रग्स लेते हैं, उन्हें त्रिफला नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह उनकी दवाओं से साइड इफेक्ट की संभावना को बढ़ाता है।

त्रिफला की खुराक में विष संदूषण का एक बहुत उच्च जोखिम भी है। एक स्रोत का कहना है कि परीक्षण किए गए 5 में से 1 पूरक दूषित थे। यदि आप इस जड़ी बूटी या पूरक को चुनना चुनते हैं, तो केवल विश्वसनीय स्रोत से त्रिफला खरीदना सुनिश्चित करें।

पता लगाएँ कि क्या निर्माता ने प्रदूषकों के लिए त्रिफला के प्रत्येक बैच का परीक्षण किया है, जैसे सीसा, पारा और आर्सेनिक। निर्माताओं से आप शुद्धता का प्रमाणपत्र मांग सकते हैं जो किसी स्वतंत्र लैब द्वारा जारी किया गया हो। यह प्रमाण पत्र लिखने पर ही मिलेगा।

यह जड़ी बूटी, कई अन्य प्राकृतिक दवाओं की तरह, कई दवाओं के साथ हस्तक्षेप कर सकती है जैसे कि नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स, ब्लड क्लॉटिंग ड्रग्स और एंटी-चिंता दवाएं। मधुमेह वाले लोगों के लिए, इससे रक्त शर्करा में वृद्धि हो सकती है।










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