रक्ताल्पता क्या है ?इसके उपचार और सुझाव
सामान्य अवस्था में हमारा खून ऑक्सीजन से भरपूर ऑक्सिजनेटेड चमक के लिए हुए लाल होता है। चमकीला लाल रक्त कोशिकाओं के कारण त्वचा वित्तीय युक्त आभा मंडित लावणी से परिपूर्ण एवं ओजस्वी होती है। जब हमारा शरीर भी जाती तत्वों से भर जाता है आक्रांत होता है तो उसका दुष्प्रभाव ख़ून पर भी होता है। शरीर में हीमोग्लोबिन या रक्त कण की कमी हो जाने को एनीमिया अर्थात रक्ताल्पता का रोग कहा जाता है। हमारे शरीर की शिरा और धमनियों में जो खून प्रभावित होता है उसमें करीब आधा भाग रक्त कणों का होता है। यह रक्त कण ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न उसको तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। इन रक्त कणों के निर्माण में आयरन प्रोटीन और विटामिन खासकर फोलिक एसिड और विटामिन बी12 की अहम भूमिका रहती है। इन रक्त कणों का जीवन का लगभग 4 माह तक होता है। फिर नष्ट हो जाते हैं और इनकी जगह नए रक्त करा जाते हैं। इंसान के शरीर में के 100 ग्राम खून के करीब 15 ग्राम हीमोग्लोबिन बनना चाहिए। प्रति लीटर खून में 5 लीटर रक्त कण मौजूद रहना जरूरी है। यदि पता होना चाहिए कि हमारी मज्जा अर्थात बोन मैरो में रक्त कण बनाने की फैक्ट्री है जो रोजाना तकरीबन 100 मिलियन में रक्त कण बनाकर शरीर को सप्लाई करती रहती है।
रक्ताल्पता के रोगी की त्वचा एवं फेफड़े भी निष्क्रिय हो जाते हैं उनकी प्वाइजन निष्कासन की क्षमता कमजोर हो जाती है। पाचन संस्थान भी अपना कार्य सही ढंग से नहीं करते। आंतों को मल निकालने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसी रक्त हिंसा से ग्रस्त कमजोर रोगी को ठंड लगने की वजह से उन्हें कमरे से बाहर नहीं निकलने दिया जाता। शुद्ध वायु से उनका संपर्क तोड़ दिया जाता है। आधुनिक चिकित्सक रक्त हीनता को दूर करने के लिए शरीर के बाहरी लक्षणों को दबाने या हटाने का निरंतर प्रयास करते रहते हैं। इस प्रयास से उन्हें प्रतीत होता है कि वह कुछ सफल हो रहा है किंतु वह सफलता वास्तविक नहीं होती है। दवाओं से स्वस्थ होने का भ्रम मात्र होता है ऊपरी एवं बाहरी स्वास्थ्य रोगी को धोखे में रखकर रोग और कठिन जटिल एवं दु साध्य बना देता है।
रक्ताल्पता के लक्षण (symptoms of anemia);-
शरीर में खून की कमी हो जाने पर रोगी कमजोरी, थकावट, शक्ति हीनता, और चक्कर आने जैसा लक्षण बताता है। अन्य लक्षण गिनाए तो चामुंडा पर समय से पूर्व झुर्रियां पड़ जाती है याददाश्त की कमी हो जाती है मामूली काम करने या चलने पर सांस फूल जाती है घाव हो जाने पर उसके ठीक होने या भरने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगता है सिर दर्द होता रहता है और दिल की धड़कन बढ़ जाती है यह लक्षण भी रक्त की कमी की रोगी में अक्सर देखने को मिलती है। खून की कमी वाली रोगी को दवाइयां दे देकर उसकी आतों एवं पेट को और कमजोर कर दिया जाता है। प्रायः रक्ताल्पता के रोगी को लव वाली दवाइयां दी जाती है इससे किडनी आते और कमजोर हो जाती हैं। खाने की इच्छा नहीं होती खाने की इच्छा जगाने के लिए अनेक प्रकार की औषधियां मसालेदार चटपटी तले भुने आहार दिए जाते हैं। रोगी को स्वाभाविक बुक खत्म हो जाती है जिसके कारण चटपटे तालीम गुनी मसालेदार आहार में रुचि होने लगती है। इस तरह का गरिष्ठ आहार अच्छी तरह पता भी नहीं है पाचन संस्थान पर अतिरिक्त बोझ के कारण आंतों की पेरीस्टाल्टिक मूवमेंट इतनी मंदिर मुश्किल हो जाती है कि भयंकर कब्ज जाती है। दस्त तथा कब्ज के पेंडुलम में डोलते रोगी की हालत और नाजुक हो जाती है। डॉक्टरों को इतना सब करने के बावजूद भी रोगी की हालत नहीं सुधरती तो उसे मांस अंडे के साथ और अधिक तेज खतरनाक दवाइयां खिलाते हैं। कई डॉक्टर यूं तो शराब के रूप में आसव तथा मध भी दे देते हैं। उनका मानना है कि इस प्रकार के आहार से पाचन में सुधार होगा कर रोगी को पर्याप्त मात्रा में विटामिन b12 मिलेगा एवं रोगी की स्थिति में सुधार होगा। इस प्रकार से रोगी चिकित्सक के ऐसे चंगुल में फंस जाता है कि एक डॉक्टर से दूसरा डॉक्टर एक दवा से दूसरी दवा डॉक्टर से वैद्य वैद्य हकीम एवं होम्योपैथी आजमा आजमा कर अपने जीवन को ही नष्ट कर देता है। "ज्यों-ज्यो दवा की मर्ज बढ़ता गया" वाली कहावत को चरितार्थ करता है और होगी अंत में प्राकृतिक चिकित्सा के लिए स्वयं को प्रस्तुत करता है।
प्राकृतिक चिकित्सा में रोगी के आते हैं उसका पूरा रोग इतिहास, बर्तमान, रोग लक्षण ,ली गई दवाइयों का विवरण, उसकी जीवन शैली ,वजन ,रक्तचाप ,नाणी गति, सांस तथा दिल फेफड़े पेट दिमाग गति तापमान रक्त स्नायु आदि अंगों की विस्तृत जांच एवं जानकारी ली जाती है इस आधार पर रोगी का उपचार प्रारंभ होता है
रोगी को हर हालात एवं परिस्थिति में आशावादीता अपना नहीं है मुस्कुराने की बात बताई सिखाई एवम कराई जाती है। रोगी को हमेशा प्रसन्न चित्त रहने तथा मुस्कुराने के लाभों से साक्षात्कार कराया जाता है। मुस्कुराने हंसने से शरीर की भाषा परिभाषा तथा रक्त रसायनों में आमूलचूल परिवर्तन आता है। मुस्कुराते ही रोगी में स्वास्थ्य के बीज पड़ जाते हैं। जब भी मौका मिले जब भी याद आए बात बेबाक रोगी को मुस्कुराना चाहिए। मुस्कुराने से हीमोग्लोबिन द्वारा ऑक्सीजन सूखने की क्षमता में वृद्धि होती है। प्रस्तुत लाल रक्त कणिकाएं जागृत होने लगते हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण कांच के सामने खड़े होकर हंसी एवं मुस्कुराया और देखेंगे इस प्रकार पीला एवं निश्त चेहरा भी रक्ताभ एवम तेजोमय दिखने लगता है। हर दिन का स्वागत मुस्कुराहट के साथ करें और दिन में भी कम से कम 700 बार मुस्कुराए। रात को जब भी नींद खुले मुस्कुराए कितनी भी दुखियों निराशा के छड क्यों ना हो उस अवस्था में भी मुस्कुराए। दुःख निराशा के बादल छठ जाएंगे। मुस्कुराने से शरीर की भाषा परिभाषा ब्रेन केमिस्ट्री बॉडी केमिस्ट्री सभी कुछ बदलने लगता है। मुस्कुराने से दिमाग में रोग प्रतिरोधक एवं सहनशक्ति को बढ़ावा देने वाला चमत्कारिक रसायन बीटा एंडोफिर्रन सेरोटोनिन, डोपामिन आदि हैप्पी न्यूरो हार्मोन का फवारा सूखने लगता है। विषाद योग उदासी के पहाड़ हट जाएंगे। सुबह नींद खुलते ही मुस्कुराए फिर शाम पत्र में रखे रात्रि की जल पीए।
ताम्रपत्र के बर्तन में जल पीने का लाभ;-
खाली पेट ताम्रपत काजल पीना रक्ताल्पता के रोगी के लिए अमृत का काम करता है। निद्रा भंग की बात खाली पेट का त्रामपात्र का जल पीने से खून की वृद्धि में सहायक होता है। ताम्रपत्र किचन में तांबे का कुछ अंश भी आ जाता है और काम भी से अभीष्ट जल भी खून के निर्माण में भाग लेता है। खून का 10% से ज्यादा हिस्सा जल ही होता है शरीर को प्रतिदिन जल की आपूर्ति होती रहनी चाहिए। जल कंपनी या नहीं पीने के आपातकाल हेतु खून मांस में इसी तरह शरीर के अन्य स्थानों एवं तंतु से जल सोख लिया जाता है। जिसके चलते आज जीभ मुंह तथा होंठ सूखने लगते हैं आंखें धसने लगते हैं त्वचा सिकुड़ने लगती है। रक्त प्रवाह कमजोर हो जाता है रोगी मर भी सकता है। जल के अभाव के कारण एनीमिया के रोगी में कमजोरी शरीर के तापमान का वर्णन तथा बॉडी फ्लूड के अम्ल क्षार असंतुलित होने के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। जीवनी शक्ति का भी होने लगता है। प्यास लगना मात्र संकेत देता है कि हमारा शरीर निर्जला करण की अवस्था से गुजर रहा है। अतः बिना प्याज के भी चल अवश्य पिएं जापान के वैज्ञानिकों ने खोज की है कि खाली पेट जल पीने से रक्त निर्माण की प्रक्रिया हीमोपोऐसिस तथा सीमा टॉप्सिस तेज हो जाती है। एनीमिया के रोगी को प्रतिदिन कम से कम 3 लीटर जल अवश्य पीना चाहिए।
पानी पीते ही खून में मिल जाता है तथा रक्त संचार द्वारा सारी कोशिकाओं ऊतकों यम तंतु में पहुंचकर उनके अंदर एवं बाहर के अणु परमाणु की धुलाई सफाई करता हुआ कूड़े कचरे को पेशाब पसीना पाखाना एवं प्रश्वास द्वारा बाहर निकाल देता है।
प्रातकाल खाली पेट जल पीने से जल्द शीघ्रता से खून में खुलकर रक्त की गाड़ी पल को कम करता है रक्त को पतला बनाता है जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना कम हो जाती है। प्रतिदिन प्रातः काल चक्र दोपहर के बाद के 2 घंटे बाद अल्पोषण पानी में नींबू निचोड़ कर पीने से आंतों में मल को सड़ने एवं गैस बनने की प्रक्रिया कब होती है। खून की कमी वाले रोगी अपने अंदर उत्थापक एवम ज्वर की अनुभूति करते हैं उस समय जल पीने से शीघ्र लाभ होता है। जल पीने से रक्त प्रवाह सतत तरल एवं सरल हो जाता है तथा उसमें संचित विष यूरिक एसिड आक्जेलिड ऐसी तथा अन्य जहरीले पदार्थ आसानी से बाहर निकल जाते हैं। जल पीने का श्रेष्ठतम समय खाली पेट अथवा खाने की एक घंटा पूर्व एवं एक घंटा बाद है। इसके अच्छे दिन में जब भी चाहे इच्छा , अनिच्छा जल पीए। कुल 12 से 14 गिलास जल पी सकते हैं हाल ही की खोजों से ज्ञात हुआ है कि रक्तदान की पूर्व 12 क्लास पानी पी लेने से कमजोरी का एहसास नहीं होता है जलपान जीवटता एवं शक्ति को बढ़ाता है।
प्रातकाल खाली पेट जल पीने के पश्चात 10-15 में खुली हवा में पहले फिर शंका होने पर शौच निवृत्त के लिए जाएं। 15 से 45 मिनट तक धीरे-धीरे खुली हो में सुबह मंद मंद सुहानी गुनगुनी धूपमें टहलना चाहिए टहलते वक्त गर्मियों में सूती वस्त्र पहने। ठंड के दिनों में 10 से 12:00 के मध्य धूप में नंगे बदन बैठकर सूर्य स्नान ले।
घरेलू नुस्खे से खून की कमी या रक्ताल्पता का इलाज:-
- शरीर में लौह तत्व बढ़ाने के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि भोजन से इसकी पूर्ति करें चाय काफी और अम्ल विरोधी दवाई उपयोग में ना लाएं। लौह तत्व की वृद्धि के लिए हरे मटर हरे चने अंडे मछली कलेजी दूध का प्रचुर उपयोग करना उत्तम है। जो लोग शाकाहारी है उन्हें भोजन में पालक सभी तरह की हरी सब्जियां ताल अंजीर बादाम काजू किशमिश खजूर आदि रक्तवर्धक पदार्थों का भरपूर उपयोग करना चाहिए। सेव टमाटर भोजन में शामिल करें।
- एक कप सेव के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर नित्य पीने से खून की कमी दूर होती है।
- टमाटर और सेब का रस प्रत्येक 200 मिलीलीटर मिश्रण करके रोज सुबह लेने से रक्ताल्पता में अत्यधिक लाभ होता है।
- विटामिन b12 फोलिक एसिड तथा विटामिन सी ग्रहण करने से हीमोग्लोबिन में वृद्धि होती है।
- आजा सलाद खाने और शहद से शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़कर एनीमिया का निवारण करता है।
- दूध मांस गुर्दे और कलेजी में प्रचुर मात्रा में वी१२ पाया जाता है.
- मेथी की सब्जी कच्ची खाने से आयरन मिलता है किशोरावस्था की लड़कियों में होने वाली खून की कमी में मेथी की पत्तियां उबालकर उपयोग में करने से बहुत ज्यादा लाभ होता है।
- मेथी के बीज अंकुरित का नियमित खाने से एनीमिया का निवारण होता है।
- सभी पत्तेदार सब्जियां और खासकर पालक में प्रचुर मात्रा में आयरन तत्व पाया जाता है इन से मिलने वाला आयरन श्रेष्ठ दर्जे का होता है। यह लव तत्व शरीर में जलन होने के बाद बड़ी तेजी से रक्त कण बनते हैं और रक्ताल्पता शीघ्र ही दूर हो जाती है। खून की कमी दूर करने में सोयाबीन का महत्वपूर्ण स्थान है इसमें आयरन होता है और सुरेश दर्जे का प्रोटीन भी होता है। लेकिन एनीमिया रोगी की पाचन शक्ति कमजोर होती है इसलिए सोयाबीन का दूध बनाकर पीना उचित रहता है।
- सावधानी बादाम 2 घंटे पानी में गला दे फिर उसका छिलका उतारकर उसका पेस्ट बनाकर रोज सुबह खाने से खून बनता है और एनीमिया रोग में लाभ होता है।
- आयरन की गोलियां सरकारी दबाव में फ्र दी जाती है परंतु उसको खाने के बजाय यदि हम गाजर पालक चुकंदर टमाटर आदि का जूस नियमित मात्रा में पिए तो हमारे शरीर में पर्याप्त मात्रा में आयरन की भरपाई हो जाएगी और हमें गोलियां खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
एनीमिया रोग के लिए प्राकृतिक एवं शुद्ध हवा
एनीमिया के उपचार में ताजी हवा का विशेष महत्व है। बंधवा में रहने से खून प्रदूषित हो जाता है खून में अनेक प्रकार के विकास सिंचित होने से तथा उनमें निरंतर अग्रसर होने से सर्दी पैदा होती है और गर्मी का निष्कासन भली बात नहीं होने से रात्रि में थकान क्रांति विश्रांति एवं क्लान्ति आने लगती है। शरीर रूपी राज भवन में प्रवेश के दो ही मार्ग है नाक से हवा स्थानों से भोजन एवं पानी प्रवेश करता है जब हम सांस लेते हैं हमारा खून ऑक्सीजन के संपर्क में आकर पुनर्जीवन प्राप्त करता है शुद्ध एवं ताजी हवा जब अंदर जाती है तो हमारा खून ताजा एवं शुद्ध होता है और प्रदूषित हवा से हमारा खून प्रदूषित होता है।
रक्ताल्पता के रोगी को जहां हवा का आवागमन भली-भांति होता हो चाहे घर हो या बाहर मैदान हो या जंगल अथवा कमरे की खिड़कियां खुली रहकर वायु स्नान का लाभ दिया जा सकता है। रक्ताल्पता के रोगी को मुंह ढक कर कभी नहीं सोना चाहिए हर व्यक्ति हर घंटे में 8 गैलन विषाक्त कार्बोलिक एसिड श्वास के द्वारा बाहर फेकता है। मुंह ढका होने पर वह जहरीला पदार्थ पुनः स्वास्थ्य के साथ अंदर जाकर खून को प्रदूषित कर देता है हवाई व स्नान के लिए हवाई को शीतल शुश्क ताजी और शुद्ध तथा धीरे-धीरे बढ़ती हुई होना चाहिए। ताजी ओम शीतल हवा के उद्दीपक प्रभाव से प्रस्तुत लाल रक्त कोशिकाएं जाग जाती हैं रक्ताल्पता के रोगी की सरस्वती एवं स्थिति को ध्यान में रखते हुए खुले बदन पर 5 से 55 मिनट तक धीरे-धीरे समय बढ़ाते हुए उन्मुक्त का स्पर्श कराना चाहिए। वायु स्नान से पाचन शक्ति बढ़ती है खुलकर भूख लगती है।
रक्त बनाने वाले आहार का सेवन करना चाहिए;-
लोहा फॉलिक एसिड एस्कोरबिक एसिड विटामिन b12 विटामिन सी का अवशोषण एवं सात्मय क्षमता बढ़ जाती जिससे खून की कमी दूर होती है। शुद्ध हवा में रहने से स्मरण शक्ति भी बढ़ती है परिणाम स्वरूप सुंदर स्वस्थ एवं सृजनशील विचारों का उदय होता है दिमाग को भरपूर ऑक्सीजन मिलता है जिससे नए नए विचारों का जन्म होता है जटिल समस्याओं का हल निकल जाता है। शुद्ध हवा में रहने से थायराइड एडिनल एवं अन्य अंतः स्रावी ग्रंथियों का स्राव बढ़ता है जिससे शरीर के सारे अवरोध सुंदर ढंग से कार्य करने लगते हैं। शुद्ध हवा में चित्रों द्वारा अक्सीजन तो मिलता ही है साथ ही इसका लाभ चमड़ी पर हवा के दबाव एवं प्रभाव के कारण ज्यादा होता है। शुद्ध हवा नंगे बदन या हल्की सूती मलमल का कपड़ा गमछा पहन कर लेना चाहिए। रक्ताल्पता के रोगी को विस्तार लेते समय सुखी हाथ से शरीर को रगड़ कर गर्म करना चाहिए। शरीर को रगड़ने से ठंड का एहसास कम हो जाता खून का दौरा तेज हो जाता तब खून बनने की प्रक्रिया भी बढ़ जाती है। शुद्ध हवा के समय ध्यान रखना चाहिए कि जब तक अच्छा लगे तभी तक रोगी को शुद्ध हवा में रहना चाहिए। ठंड लगने पर दुखदाई अनुभूति होने पर वायु से हट जाना चाहिए।
अशक्त दुर्बल रक्ताल्पता के रोगी को शुद्ध हवा अत्यंत सावधानी से लेनी चाहिए ।शुद्ध हवा के समय मस्तिष्क को भरपूर पोषण ऑक्सीजन प्राप्त होता है। सुधा के दौरान लंबी गहरी एवं धीरे-धीरे सांस लेते हुए दीर्घ स्वसन प्राणायाम भी किया जा सकता है। खुली ताजी हवा में नंगे बदन व्यायाम करना एवं गीत गाना भी लाभदायक है।
एनीमिया को गंभीरता से लेते हुए उस का प्राकृतिक उपचार आवश्यक है;-
एनीमिया वाले रोगियों को अपने स्वास्थ्य का पूरी तरह से ख्याल रखना चाहिए जिसमें सूर्य की किरणें भी उनकी रक्ताल्पता के रोग को दूर करने में बहुत उपयोगी सिद्ध होती हैं। नियमित सूचना लेने से लाल रक्त कणिकाओं की संख्या में वृद्धि हो जाती है सूर्य स्नान से खून बनाने वाले अंग यकृत प्लीहा छाती पर सनिया तथा अस्थि मज्जा उद्दीपक एवं प्रभावित होते हैं। वह पुनः सक्रिय होकर रक्त निर्माण की प्रक्रिया को बढ़ा देते हैं सुरेश नाम से इन अंगों की कार्य क्षमता बढ़ जाती है उगते सूर्य की किरणों में स्थित अल्ट्रावायलेट इंफ्रारड रेंज फॉर इन्फ्रा रेड से पावर सिस्टम सूर्य की किरणों में संजीवन चैतन्य होकर विषाक्त पदार्थों का विध्वंस करने में सक्षम हो जाता है।
समुंद्री झील नदी एवं तालाब के किनारे दो पर्सनल लेने से धूप स्नान की गुणवत्ता बढ़ जाती है क्योंकि पानी से परावर्तित शुरू होकर सूर्य की किरणें स्वास्थ्य के लिए ज्यादा प्रभाव कारी बन जाती है। तीव्र हानिकारक किरणों पानी सोख लेती है और उपयोगी किरणे स्वास्थ्य संरक्षण एवं स्वास्थ्य संवर्धन के लिए लौटा देता है। रक्ताल्पता की हुई रोगी जो तू बस नाम को बर्दाश्त नहीं कर पाते उन्हें मंद्रूप में हल्की मालिश दे। मालिश करने से सूर्य की टिप्पणी शरीर को प्रभावित नहीं कर पाती हैं धूप स्नान के बाद रोगी को आनंद उल्लास एवं आराम महसूस होता है। धूप स्नान के बाद थकान कमजोरी सिरदर्द आदि हो तो इसका अर्थ है कि रोगी ने शक्ति से अधिक अथवा अवैज्ञानिक रीति से सूर्य स्नान किया है। धूप स्नान के बाद शरीर को गीले टर्कीस रोते युक्त तौलिए से पोंछ लें। शरीर के गर्म रहते ही सांवर या सामान्य स्नान दें। रक्ताल्पता के रोगी प्राया अत्यधिक सख्त होते हैं और उनके शरीर को कंबल से ढक कर एक-एक अंग को सावधानी के साथ ठंडा घषर्ष स्नान दें। धूप स्नान का खास प्रभाव रक्त पर होता है खून की गुणवत्ता बदल जाती है।
रक्ताल्पता के रोग को नियंत्रण करने में शाक सब्जियों का विशेष महत्व होता है;-
ताजा हरी सब्जियों का संपूर्ण आहार का 30% खाना चाहिए। साग सब्जियों को प्रकृति की फार्मेसी माना जाता है। सब्जियां क्षारधर्मी होती हैं । सब्जियों का सूप ,जूस, कच्ची अवस्था में खाना, सर्वोत्तम औषधि है । इनमें रोग के कीटाणुओं को दूर करने वाले तत्व रक्त को शुद्ध करने वाले गुण सूक्ष्म तत्वों की मरम्मत व विकास हेतु प्राकृतिक लवण तत्व शर्करा साधारण विटामिन ए बी सी अधिक मात्रा में प्रोटीन फुजला कैल्शियम आयोडीन लोहा फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इनमें शरीर की कार्यक्षमता बढ़ाने शरीर को पुष्ट बनाने परिपाक शक्ति को सही रखने रक्त कणिकाओं के उत्पादन शरीर शोधन हड्डी व दांत को बनाने हृदय व स्नायु तंत्र की रक्षा करने बेरी बेरी छह रोग आदि के निवारण निरोगी व दीर्घ जीवन में सहायता करते हैं।
पहले से कटोरी सब्जी में विटामिन सी का ऑक्सीकरण हो जाता है। सब्जी के छोटे-छोटे टुकड़े काटने की जगह बड़े बड़े टुकड़े काटे उन्हें तभी काटे जब उसे पकाना हो और तभी पकाएं जब खाना हो क्योंकि पकाने के बाद उसको रख देने से विटामिन नष्ट हो जाता है। अकाली के लिए उसमें कम से कम पानी डालें जिससे ना पानी फेंकना पड़े न उसे जला ना पड़े सब्जी को बहुत देर तक न पकाए पत्ते ही आंख से उतार दे। जिन सब्जियों में छिलका उतारने की आवश्यकता नहीं उन्हें छिलके सहित बनाएं। छिलका उतारना आवश्यक और तुम मोटा व गहराई मिला उतारे हल्का छीलकर बनाएं। छिलके के ठीक नीचे विटामिन होते हैं छिलके सहित या कम छिलके उतारने से कब्ज नहीं होती। प्राकृतिक रेशा कोलेस्ट्रोल और रक्त ग्लूकोज को संगीत बनाए रखने में सहायक सिद्ध होता है।
साग सब्जी हमेशा ताजी अवस्था में ही लेनी चाहिए। खेतों में जिस समय सब्जी तोड़ी जाती है उसी समय से उसका विटामिन मूल्य घटने लगता है। बासी और सूखी सब्जियां खाने से पेट में वायु पैदा हो जाती है। सब्जी खरीद कर घर में रख देने से विटामिन की कुछ न कुछ बर्बादी होती है। सब्जी प्रतिदिन जितनी आवश्यकता हो उससे अधिक नहीं खरीदनी चाहिए सब्जी घर लाने पर यदि नहीं बनानी हो तो उसे ठंडी जगह पर रखनी चाहिए।
यथेष्ट मात्रा में साग सब्जी खाने से आंतों को मल त्याग करने की उत्तेजना प्राप्त होती है हरे पत्तेदार सब्जियां रासायनिक कर्मशाला है। पत्तों के भीतर जो हर एकड़ है वह सूर्य की किरणों के सहारे उन्हें खाद्य में परिणित करते हैं। पेड़ों के पत्ते एक संपूर्ण खाद्य होते हैं पत्तेदार सब्जियों में क्लोरोफिल जो रक्त कण हीमग्लोबिन का हार है अधिक पाया जाता है इसके सेवन से रक्त में तेजी आती है। इनमें लोहा विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। गाजर पालक प्याज पत्ता गोभी लौकी ,खीरा, टमाटर, लहसुन, मूली ,आंवला, ककड़ी, चुकंदर अदरक ,नींबू ,करेला आदि को कच्चा खाया जा सकता है या रस निकालकर किया जा सकता है निम्नलिखित शब्दों द्वारा रोगों की चिकित्सा करके स्वास्थ्य लाभ और रक्ताल्पता की कमी से निजात पाई जा सकती है।
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