Things Everyone Knows About पीलिया खत्म करने के लिए क्या खाना चाहिए? That You Don't
ऐसे बहुत सारे घरेलू नुक्से के बारे में हमें पता ही नहीं होता जिनके बारे में हम नहीं जानते परंतु सब हमारे किचन में ही मौजूद होते हैं दैनिक उपयोग में आने वाली चीजों से आने दो साथ गैरों को की सरल चिकित्सा विधियों की समग्र मेडिकल स्टोर हमारा किचन ही है।
पांडु रोग (जॉन्डिस _पीलिया)
आयुर्वेद में लिखा है कि जब पित्त नलिका बंद होने के कारण रक्त में अधिक पित्त मिश्रण हो जाता है तो पांडुरोग (पीलिया) और अधिक पित्त के मिश्रण से कामला (कुंभ का मेला इसी का भी है तथा इससे भी ज्यादा मिश्रण से हलीमक हों जाता है क्योंकि पित्त-पीत भी नील भी। तीनों के वर्ण ( रंग) क्रमशः पांडू (ईषपीत)हरिद्भ,( अधिक पीत) और हरित,(पीत नील मिश्रित) हरा होता है। अत्यधिक शरीर को आराम देना श्रम ना करना, मानसिक उद्वेग आदि के कारण से पीलिया हो जाता है।
इस रोग में शरीर की त्वचा आंखों के कोए और मूत्र तक पीला हो जाता है। यहां तक कि रोगी जिस और जिस चीज को देखता है वह पीला ही दिखाई पड़ता है। यदि कपड़े पहने जाए तो उन पर भी पीलापन आ जाता है।
पीलिया के कारण शरीर में शिथिलता और दुर्बलता अधिक महसूस होती है। दाह ,अन्न में अरुचि आदि से जो विशेष से पीड़ित हो तो समझ लेना चाहिए कि उन्हें पीलिया हो गया।
पीलिया के कारण शरीर में शिथिलता और दुर्बलता अधिक महसूस होती है इसरो में जो 99 से 0 डिग्री तक बना रहता है नारी मंडोर छेड़ हो जाती है। पित्त के अधिक होने के कारण होता है।
इसमें अग्नि मंद हो जाती है। सिरदर्द स्मृति हीनता उत्साह नाश निद्रा में कमी पित्त का रक्त में मिलकर रक्त का विषाक्त बन जाना जिगर और पीलिया का वर्णन तथा कठोर हो जाना आदि लक्षण दिखाई देते हैं इसका इलाज है_
पिलिया मे मूली का सेवन
* मूली के पत्तों और टहनियों का रस 100 ग्राम लें और उसमें 25 ग्राम चीनी मिलाकर रोज सुबह सेवन करें सभी प्रकार के पीलिया में लाभकारी होता है।
क्योंकि मिल मूली के बीज में कैलशियम लव विटामिन ए विटामिन b12 विटामिन सी कोलईन फास्फोरस पाए जाते हैं पत्तों में प्रोटीन कैल्शियम ऑक्सलेट पोटैशियम स्टोशियम
एलमुनियम बेरियम करीन मैग्नीशियम पाए जाते हैं।
अम्ल पित्त में मोगली एवं मिश्री को चमार का खाने से लाभ होता है। पत्तों का भाग का सेवन करना बहुत ही कार्य होता है क्योंकि इसमें तमाम विटामिन तथा अन्य महत्त्व के पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। मूली इतनी गुणकारी साबित होती है पीलिया रोग में चलते-फिरते लोग भी मूली खाने की सलाह दे देते हैं अपनी और सभी गुणों के कारण आमतौर पर छीलकर मसाले नींबू के साथ फरक रूप में बिक्री की जाती है।
पीलिया रोग में गन्ने के रस का सेवन
गन्ने का रस लिवर से संबंधित पीलिया बीमारी के लिए फायदेमंद माना जाता है। यूनानी चिकित्सा के अनुसार, गन्ने के जूस के फायदे पीलिया से तुरंत आराम पाने में मदद कर सकते हैं । लिवर की कार्यप्रणाली में रूकावट आने पर पीलिया होता है। यह स्थिति तब बनती है, जब शरीर में बिलीरुबिन अधिक बढ़ जाता है। बिलीरुबिन एक पीला पिगमेंट होता है, जो लिवर में लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से बनता है। इस स्थिति पर काबू पाने के लिए रोजाना एक गिलास ताजा गन्ने का रस पीया जा सकता है। पीलिया रोग में गन्ने के रस का सेवन भी बहुत ही ज्यादा लाभदायक होता है।
पीपल वृक्ष के पत्तों से पीलिया में आयुर्वेद की दृष्टि से
पीपल वृक्ष के तीन चार पत्ते पानी में धोकर और साफ करके मिश्री या चीनी के साथ कल पट्टे में खूब कूटकर या सील पर बारीक पीसकर फिर ढाई सौ ग्राम पानी में घोलकर कपड़े में छावनी। पीपल के पत्तों का यह शरबत पीलिया से पीड़ितों को दिन में दो बार पिलाना जरूर चाहिए। 1 सप्ताह के अंदर पीलिया दूर हो जाता है।
कल वृक्ष को शोधन का विशेष गुण कहा जाता है जिससे आंख संबंधित सभी रोगों का दमन होता है इसी कारण यह आंतों में कीड़ों को मारकर मल के द्वारा निकाल बाहर करने में सक्षम है। अतिसार में पीपली का सूचना चूर्ण मधु के साथ चाटने से पुराना अतिसार भी नष्ट हो जाता है।श्लेष्मा बुखार में पीपली का चूर्ण मधु के साथ चाटने से कफ जान्य नष्ट हो जाता है ।
पीपल बात हर, श्वास हर, दीपन ,नियत कालिंक, प्रतिबंधक तथा गर्भाशय संकोचक है । इसका विशेष प्रभाव फेफड़ों तथा गर्भाशय पर होता है इसके सेवन से सी प्रधान तक का प्रधान रोग ठीक होते हैं। प्रसूति प्रक्रिया में विलंब होने पर पीपली का चूर्ण खिलाने से प्रसूति प्रक्रिया शीघ्र होती है। इसे गर्भधारण करने के 3 महीने के बाद थोड़ी मात्रा में नेत्र सेवन करने से शिशु विकास पर लाभ होता है। बच्चों को यह पीपली का शरबत आयु के अनुसार देना चाहिए।
पीलिया में संतरे का सेवन लाभकारी है
प्रातः बिना कुछ खाये दो संतरे रोज खाने आए एक गिलास संतरे का रस पीने से पांच-छह दिनों में ही पीलिया समाप्त हो जाता है।दरअसल संतरे में अनेकों गुण हैं। संतरा सर्दी-जुकाम से भी बचाता है और आपकी स्किन की देखभाल भी करता है। ये आपकी त्वचा को खूबसूरत बनाता है। संतरे में विटामिन सी भरपूर होता है। यही वजह है कि संतरा खाने से एम्युनिटी बढ़ती है और ये आपका वज़न भी काबू में रखता है।
संतरे के रस की तुलना में एक पूरा संतरा अधिक नुट्रिशयस और हेल्दी होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें फाइबर मौजूद होता है। फाइबर कॉन्स्टिपेशन को रोकने में बहुत उपयोगी होता है। अगर आप अपना वजन कम करना चाह रहे हैं तो भी जूस पीने से कई गुना अच्छा संतरे का फल खाना होता है। अगर आपको जूस पीना अच्छा लगता है तो कोशिश यही करें कि ताजा निचोड़ा हुआ संतरे का जूस ही पियें। पैकेज्ड ड्रिंकस में प्रिजर्वेटिव होते हैं।
फिटकरी का सेवन पीलिया रोग में
गुलाबी अथवा सफेद फिटकरी फूली हुई पीसकर एक 1/8 ग्राम से आधा ग्राम गाय की छाछ के साथ दिन में 3 बार पिलाने से पीलिया का रोग थोड़े ही दिनों में समाप्त हो जाता है।पोटेशियम एल्युमिनियम सल्फेट, बल्क पोटेशियम फिटकरी, एल्यूमिना सल्फेट और पोटाश, एल्युमिनस सल्फेट, फिटिकर, फिटकर, फिटकरी, फटिकरी, सुरराष्ट्रजा, कामाक्षी, तुवारी, सिथी, अंगडा, वेनमाली, फटकिरी, फटकारी, पेटीकरम, आदिखारम, शिनाक्रम, पट्टीकारामू, तवास , ट्रे फिटकी।
पुदीने का सेवन पीलिया रोग में
यह पौधा एक छोटा गुच्छे जो नबी वाली भूमि पर पाया जाता है इसकी ताना और शाखाएं चौपहल होती हैं। इसके पुष्प सफेद और नींद वर्ल्ड की मंजूरी होती है। इसका स्वाद थोड़ा तीखा और सुगंधित होता है। बिना की तासीर ठंडी होती है गर्मी के दिनों में से हर घर में उपयोग किया जाता है इसकी हरी पत्तियां सुखाकर रख ली जाती है ताकि बरसात में होने वाले कीटाणु नाशक रोगों में पत्तियों का प्रयोग किया जा सके। पुदीने का रस निकालकर प्रातः काल चीनी मिलाकर पीना पीलिया में अधिक लाभ देता है 1 हफ्ते तक इसका सेवन करने से जरूर लाभ मिलता है परंतु मधुमेह रोगी चीनी मिलाकर इसका सेवन ना करें वह इसको सादा ही सुबह-सुबह पी ले।
पीलिया रोग में काली मिर्च का प्रयोग
इसका उपयोग कंठ रोग यकृत ,रोग स्नायु रोग ,अर्श, प्लीहा विकार, शीत रोग ,कटिशुल, पक्षाघात गुर्जर संधि सूत्र मूत्र विकारों में लाभकारी होता है। पीलिया जर्नी मिर्च का चूर्ण मधु याद रित के साथ सेवन के कारण अधिक लाभकारी है। एक गिलास में एक चुटकी पिसी कालीमिर्च मिलाकर एक हफ्ते तक सेवन करें पीलिया रोग जाता रहेगा।
- एक गिलास पानी में एक चम्मच ग्लूकोस डालकर दिन में 3 बार पीने से पीलिया रोग में बहुत लाभ मिलता है।
- अनार का रस 50 ग्राम लोहे के किसी बर्तन में करके रात के समय रखते प्रातः काल उसमें थोड़ी सी मिश्री डालकर पी लें एक हफ्ते में ही पीलिया का रोग समाप्त हो जाता है।
- मूली के पत्तों को कुछ कर उसका रस मिला लें और उसे पकाएं जब रस में उबाल आ जाए तो रस को छान लें और 50 ग्राम रस में 20 ग्राम लाल शक्कर मिलाकर पीलिया के रोगी को पिलाएं एक हफ्ते तक रोज सुबह और शाम रस पिलाने से पीलिया करो जल्द से जल्द ठीक हो जाता है।
- संतरे का कच्चा रस ,कच्चे नारियल का पानी, जौ का पानी मीठा अनार का रस मूली के पत्तों का रस फटे दूध का पानी दही का तोड़ तथा काली मिर्च और नमक मिलाकर पतला छाछ पीना भी लाभकारी होता है। यदि दूध पीना हो तो उसने बराबर का पानी मिलाकर उसमें कुछ दाने शौक के डालकर अथवा एक दो दाने छोटी पीपल डालकर या 1 ग्राम सोंठ का चूर्ण मिलाकर लोहे की कढ़ाई में गर्म किया हुआ पीना बहुत अच्छा होता है।
- बादाम की गिरी 8 दाने छोटी इलायची 5 तथा छुहारे दो सबको एक मिट्टी के बर्तन में रखकर ऊपर तक जल भर दे दूसरे दिन प्रातः काल बादाम की गिरी तथा छोटी इलायची का छिलका उतार दें तथा छुहारे की गुठली भी निकाल दे उसके बाद इन तीनों चीजों को किसी खरल में डालकर कूट-कूट ले। फिर इसमें 50 ग्राम मिश्री तथा 50 ग्राम ताजा मक्खन मिलाकर पीलिया के रोगी को खिलाएं आठ 10 दिनों में ही पीलिया रोग जड़ से समाप्त हो जाएगा।
- कड़वी तोरई के बीजों की गिरी को एक डोडा भी डाल के साथ पीसकर 2-3 बूंदें नाक में टप काने से नाक था मुंह के पीले रंग का पानी बहने लगता है उसके बाद सिर में दर्द होता था गले की नशे फूल जाती है तीसरे पहर जोर होता है चौथे पहर भी यह कष्ट रहता है किंतु फिर यह एकदम समाप्त हो जाता और पीलिया भी जड़ से चला जाता है।
- टमाटर का रस एक गिलास रोज पीना पीलिया को जड़ से समाप्त कर देता है।
- आधा कब प्याज के रस में गुड़ और हल्दी मिलाकर सुबह-शाम पीने से पीलिया में लाभ होता है।
- गाजर पीलिया की प्राकृतिक औषधीय कच्ची गाजर यूं ही खाई जाए या गाजर का रस पिएं दोनों तरह से एक जैसा लाभ होता है।
- छोटी प्याज को छीलकर उनको चौकोर काटकर शिर्के या नींबू के रस में डाल दें ऊपर से नमक पिसी काली मिर्च भी डाले रोज सुबह और शाम एक प्याज खाने से भी रोग समाप्त हो जाता है।
- प्रातः काल इमली का पानी पीना भी लाभकारी होता है और जब तक पीलिया जड़ से समाप्त न हो जाए इसका सेवन करते रहें।
- खरबूजा की पीलिया को समाप्त करता है यह तृप्ति कारक मूत्र बलवर्धक कब्ज को दूर करने वाले तथा शीत वर्धक उन्माद का विनाशक है। इसमें पसीना आता है पेशाब साफ करता है पेट की गर्मी और खराबी को दूर करता है यकृत संबंधी रोग को दूर करता है।
- लहसुन की चार कलियां छीलकर और पीसकर आधा कब गर्म दूध में मिलाकर पिए ऊपर से थोड़ा दूध और पीले यदि चाहे तो ऐसा करने से तीन-चार दिन में ही पीलिया समाप्त हो जाता है।
- लड़की की धीमी आंच में दबाकर बूंद और उसका भुट्टा से बना ले फिर उसका रस निचोड़ कर थोड़ी सी मिश्री मिलाकर पिए यकृत रोग और पीलिया के लिए सर्वोत्तम।
- रोज एक बार एक चम्मच शहद को एक गिलास पानी में डालकर पीने से पीलिया जड़ से समाप्त हो जाता है।
- एक मुट्ठी चने की दाल दो गिलास पानी में भिगो दें फिर दाल को निकालकर सम्मान गुड़ मिलाकर 3 दिन तक खाएं यदि प्यास लगे तो दाल का ही पानी पिए एक हफ्ते ही पीलिया दूर हो जाएगा।
- हर एक प्रकार के पीलिया रोग में छोटी हरड़ के चूर्ण को घी में मिलाकर खाना खिलाने से लाभ होता है।
- 6 ग्राम गिलोय के चूर्ण में शहद मिलाकर चाटने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
- बड़ी हरड़ काला नमक पीसकर और संभाग मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
- साबुत हल्दी को सील पर किस कर काढ़ा बनाएं उसके बाद लोग दी तथा काले को घी के साथ किसी कलीदार बर्तन में धीमी आग में पकाएं जब मात्र हल्दी रह जाए तब उतारने और प्रातः काल एक-एक चम्मच का सेवन करें पीलिया बहुत जल्दी समाप्त हो जाएगा।
- चार पांच वर्ष पुराना गुड़ तथा बड़ी हरड़ का चूर्ण संभाग लेकर गुनगुने पानी के साथ खाने से पीलिया एकली तथा दल्ली वृद्धि में जल्द ही लाभ मिलता है
उपरोक्त बताई गई जानकारियां आयुर्वेद के आधार पर बताई जा रही है जो हमने पढ़ा और जाना है परंतु किसी भी तरह के नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार चिकित्सक से परामर्श अवश्य कर ले। बदलते मौसम और रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसी बीमारियां हैं जो हमें परेशान करती है जैसे सर्दी खांसी और जुकाम कबजा पास लेकिन इस तरह की छोटी-छोटी बीमारियों से परेशान होने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि हमारे घर में ही कई ऐसी चीजें होती हैं जिनके द्वारा आसानी से इस तरह की परेशानियों से निजात पा सकते हैं
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