google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical health care tips in hindi मधुमेह का सर्वोत्तम उपचार क्या है? मधुमेह की आयुर्वेदिक चिकित्सा

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health care tips in hindi मधुमेह का सर्वोत्तम उपचार क्या है? मधुमेह की आयुर्वेदिक चिकित्सा

Health care tips in hindi मधुमेह का सर्वोत्तम उपचार क्या है? मधुमेह की आयुर्वेदिक चिकित्सा

मधुमेह रोग का हृदय रोगियों पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है। मधुमेह ग्रस्त मरीजों में एंजाइना और हृदय आघात होने तक मृत्यु तक होने की संभावना ज्यादा रहती है  और पून: आघात होने की संभावना रहती है। मधुमेह रोग जीवन पर्यंत रहने वाला जटिल घातक रोग है। इसके इसके कारण न्यूनाधिक लगभग सभी अन्य सभी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। ऐसे रोगियों को शरीर का भार बनाए रखने के लिए 3 से 5 किलोमीटर नियमित चलना चाहिए। शरीर में वसा की मात्रा 28% से कम होनी चाहिए। कमर की मां पुरुषों में 40 इंच और महिलाओं में 37 इन से अधिक नहीं होनी चाहिए। भोजन में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 300 मिलीग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

  रोगियों में यौन संबंधी विकार उत्पन्न होने लगते हैं यह समस्याएं पुरुषों के लिए बहुत ही गंभीर होती है इसी कारण स्त्री और पुरुषों में अधिकतर आपसी तालमेल नहीं रहता। इसी प्रकार स्त्रियों में मधुमेह के कारण यौन उदासीनता के लक्षण दिखाई देते हैं। अनियंत्रित मधुमेह के कारण कई प्रकार के जीवाणु और फफुंदियों के हमले भी तेज हो जाते हैं।

  बीएफ मधुमेह से ग्रस्त है और अधिक दिनों से हैं ऐसी स्थिति में कभी भी आपका गुर्दा खराब हो सकता है। यदि आप किडनी के मरीज हैं तो यह संभव नहीं किया ब्लड प्रेशर के भी मरीज होंगे। यदि आप खानपान एवं अपनी जीवनशैली में परिवर्तन नहीं कर सकते तो जीवन लीला समाप्त तक हो सकती है। वास्तव में मधुमेह रोग अकेला ही नहीं आता बल्कि अन्य अनेक रोगों के साथ आता है। अंत: से बचकर रहना ही बुद्धिमानी है।

   मधुमेह रोगियों के लिए आयुर्वेदिक लाभ क्या है,? मधुमेह के बारे में विस्तृत जानकारी आप लोगों को होती रहती है परंतु इस रोग से मुक्ति के उपाय क्या है? चीनी य मिठाई खाने से ही नहीं होता बल्किपैंक्रियाज का रोग है । पैंक्रियास इंसुलिन पैदा होता है मधुमेह की बीमारी को आहार से नियंत्रित करना चाहिए हमारे आहार में 7 प्रमुख घटक होते हैं-कार्बोहाइड्रेट ,प्रोटीन, वसा ,चर्बी ,विटामिन ,खनिज, लवण, रेसा और पानी।

 
   मधुमेह रोगियों को अपने रोक्को बयान धरण नियंत्रण करना चाहिए प्रतिदिन ऐसे रोग रोगियों को तीन से 5 किलोमीटर तक तेज स्पीड से चलना चाहिए इतनी तेज गति होनी चाहिए कि पूरे शरीर में पसीना आने लगी इससे प्रत्येक अंग की क्रियाशीलता बढ़ जाती है और इंसुलिन की आवश्यकता की पूर्ति हो जाती है। ह्रदय रोगियों पर भी बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है क्योंकि प्रयोगात्मक रूप से यह देखा गया है कि सामान्य स्वस्थ वयस्क मनुष्य को प्रतिदिन अपने वजन से 25 से 30 गुना कैलोरी ऊर्जा वाले आहार की आवश्यकता पड़ती है यही आवश्यकता मधुमेह रोगियों को भी पड़ती है।

  6० किलोग्राम वजन वाले पुरुष की दैनिक आवश्यकतादैनिक आवश्यकता 6०गुणे ३५ बराबर २१०० कैलोरी के लगभग रहती है। परंतु यह मापदंड समय समय पर कार्य के अनुसार बदलता रहता है इसीलिए किसी किसान को मधुमेह रोग पराया नहीं के बराबर होता है। इसका कारण यह है कि वह शारीरिक संबंध करता है प्रत्येक व्यक्ति को 30 कैलोरी प्रति ग्राम के हिसाब से भोजन यानी 60 किलोग्राम वजन के व्यक्ति को अट्ठारह सौ कैलोरी वाला भोजन लेना चाहिए। यदि व्यक्ति का वजन अधिक है तो 25 कैलोरी प्रति ग्राम के हिसाब से लेना चाहिए। यदि उपरोक्त दोनों विधियों से मधुमेह रोगियों को आराम नहीं मिले तो उन्हें दवा द्वारा नियंत्रित करना चाहिए।

  वसंतकुमार रस तथा सतगिलोय प्रवाल और प्रवाल पंचामृत रस योगेंद्र रस मुक्ता पिष्टी त्रिफला गूगल की पुड़िया बनाकर दिन में तीन बार दूध के साथ सेवन करना चाहिए। परंतु यदि कोटोन की भी समस्या है तो सुख सेखर रस एवं  बंगेश्वर रस को भी योग में मिला दे। साथी खाना खाने के बाद मधुमेह नाशिनी पट्टी एवं चित्रकादि वटी का भी प्रयोग किया जा सकता है।

  यदि डायबिटीज फूड की समस्या भी है तो रसराज का भी प्रयोग करें जिससे कि रक्त संचालन की समस्या ना हो और चलने फिरने में कठिनाई न हो।
   भोजन में जाओ और चने का आटा गेहूं के आटे में मिलाकर रोटी बनाकर सेवन करना चाहिए इससे अतिरिक्त कच्चे चने को भिगोकर भी सेवन करना चाहिए। दाल काजू मूंगफली चने से बनी चीजें सामान्य मात्रा में ली जा सकती है। कम शर्करा वाले फल सी पपीता गाजर जामुन एक बार में 10 ग्राम तक खाए जा सकते हैं। इस प्रकार आकार में कुल 150 से 180 ग्राम तक कार्बोहाइड्रेट 7 से 80 ग्राम प्रोटीन 70 से 80 ग्राम वसा चाहिए ताकि कुल कैलोरी अट्ठारह सौ से ज्यादा ना हो। इसके अतिरिक्त में ठीक करेला सोया का साग जामुन लहसुन एलोवेरा पत्ता गोभी दालचीनी ग्रीन टी पालक को खोया फाइबर युक्त सोयाबीन दलिया राजमा का सेवन कर सकते हैं। चीनी तली भुनी चीजें डेयरी उत्पाद चाय काफी तंबाकू और शराब अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले पदार्थ जैसे आलू चावल केला और ब्रेड का सेवन कम करें।

  मधुमेह नाशक जामुन का भी प्रयोग मधुमेह को नियंत्रित करने में उपयोगी

जामुन का वैज्ञानिक नाम सीजीजून कुमिनी है इसे इस एइजेनियों जाम बोलोना भी कहते हैं । यह मिटियस कुल का पौधा है। लॉन्ग भी जामुन कुल का वृक्ष है। जामुन को संस्कृत में जामुन असमिया में जामुन व जम्मू, बांग्ला में जाम, उड़िया में जाम कुक, गुजराती में जाम्बु, कन्नड़ में जम्मूतेदेले, मलयालम में यह यावेल कहते हैं। मध्य प्रदेश उत्तर पदेश में कट जामुन भी पाया जाता है। जबकि जामुन के फल थोड़े लंबे और रस भरे होते हैं जिन्हें" फलेदे" जी कहते हैं। जामुन का बीज विशाल तना दूधिया रंग का होता है। छल काटने पर लाल रंग की होती है जामुन के पत्ते आठ से 10 सेंटीमीटर तक लंबे चिकनी व चमकदार होते हैं। फल पहले हरिलाल वह फिर काले हो जाते हैं। वैसे फलों का रंग जामुनी कहा जाता है फलों में गुठली होती है जामुन के पल का साथ खट्टा मीठा कसैला होता है। शुष्क क्षेत्रों को छोड़कर जामुन वृक्ष सभी स्थानों पर तैयार हो जाता है
फतेहगढ़ बहुत कम समय के लिए होता है जामुन की गुठली बहुत मुलायम और चिकनी होती है।

  जामुन की पत्तियां फल बीज छाल औषधि के काम आती है। जामुन की छाल कंठ के रोग श्वास नली की सूजन सीतम्म पेचिश तथा फोड़े फुंसियों में लाभ पहुंचाती। खून को साफ करने तथा गरारे करने से छाल का प्रयोग किया जाता है। छलकत बकरी के दूध के साथ सेवन करने से अतिसार रोग में फायदा होता है।

  उनकी गुठली मधुमेह के रोग के लिए रामबाण औषधि है। यद्यपि जामुन के फल का रस व सिरका भी मधुमेह को नियंत्रित करता है किंतु बीज अति लाभप्रद पाया जाता है। इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है। सड़कों के किनारे छोटी पहाड़ियों मैदानी भागों में जामुन के बृक्ष पाए जाते हैं। जून-जुलाई में पहली बरसात होते हैं जामुन एक बार पक्का सड़कों पर और बाजारों में बिकने लगते हैं। जामुन का रस पेट के रोगों में रामबाण है इसका सिरका पेट के कीड़ों को नष्ट कर देता है। आयुर्वेद में जामुन के अनेक औषधीय प्रयोग है। जामुन का अर्क मशहूर है जामुन के वंश का एक अन्य वृक्ष लौंग है।

   मधुमेह नाशक कलौजी

मधुमेह रोग में कलौंजी का सेवन करना लाभप्रद होता है कनौजी मधुमेह को नियंत्रित और कम करने में सहायक होती है एक अब काली चाय में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीने से मधुमेह रोगियों के लिए बहुत आराम मिलता है। कलोंजी का सेवन करने से पाचन क्रिया सुचारू रूप से चलती है पाचन क्रिया के सही होने के कारण स्वास्थ्य अच्छा रहता है रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है जिससे रोग उत्पन्न ही नहीं है। सदियों से कलौंजी का उपयोग भदोही के लिए होता रहा है क्योंकि यह मधुमेह रोगियों के लिए बहुत ही लाभप्रद माना जाता है।

   हल्दी में मधुमेह रोगियों की औषधीय गुण

मधुमेह रोगी की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है इसीलिए हल्दी का सेवन उनके लिए बहुत अधिक लाभप्रद है। हल्दी को अली के साथ खाली पेट लेने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। हल्दी के सेवन से रक्त का जमना समाप्त हो जाता है रक्त का प्रभाव बढ़ जाता है। कुर क्यूमिन की उपस्थिति के कारण पेंटोनिक को एकत्रित नहीं होने देती रक्त संचार नियमित रूप से चलता है हृदय रोग नहीं होने पाता। आयुर्वेद तो हल्दी की औषधि को मधुमेह के लिए बहुत ही उत्तम बताता है इसका सेवन नियमित करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि हो जाती है और मधुमेह से लड़ने में सहायता मिलती है।

  conclusion 

उपरोक् विवरण से स्पष्ट है किआयुर्वेदिक औषधि का उपयोग करना शरीर की विकास और स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी है ध्यान रहे अधिकता हानि होती है उत्तर नियमित समुचित मात्रा में सभी औषधियों का सेवन करना अच्छा होता है अच्छा स्वास्थ्य जीवन में उमंग उत्साह स्फूर्ति प्रदान करता है। कठिन परिश्रम करने की प्रेरणा भी मिलती जीवन में रंगीली आती है रोगी होने पर जीवन नीरस हो जाता है और जीवन अभिशाप बन जाता है।

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