12 Tips for Using Throat Infection to Reduce Anxiety in hindi .्
व्यक्ति की जीवन शैली में बढ़ती गई छोटी छोटी लापरवाही या तथा गलत आदतें समय के साथ कई तरह के शारीरिक व मानसिक रोगों का कारण बनती है। यदि समय रहते जीवनशैली में वांछित सुधार नहीं किया गया तो 1 दिन ही गंभीर और असाध्य रोगों का रूप ले सकती हैं जिनके भयंकर दुष्परिणामों को आए दिन लोगों को भुगतना पड़ता है। यदि प्रारंभ में ही इनका समाधान किया समाधान किया होता तो इस स्थिति में हम नहीं आते यही जीवन के अन्य क्षेत्रों में बरती गई लापरवाही के संदर्भ में भी सत्य है।
जीवन की समस्याओं के बिगड़ने पर फिर यह व्यक्ति के पूरे समय ऊर्जा और ध्यान को नियंत्रित कर लेती है तथा गहन तनाव विषद और दुख का कारण बनती है
तब समझ आता है कि यदि समय रहते समस्या के निदान के लिए उपचार किए होते तो आज यह नोबत नहीं आती। जो भी हो समस्या के निपटारे की उपयुक्त विधि का पालन करते हुए से निपटा जा सकता है।
सबसे पहले को समस्याओं की पहचान की जाए और यह स्वीकार किया जाए कि उनका अस्तित्व है। विदेशी काटने पर ही इनके स्वरूप और विचार संभव होता है तो इनके समाधान की दिशा में आगे कदम बढ़ सकते हैं । समय रहते इस पर विचार करने से समाधान सरल हो जाता है और मिठाई आगे चलकर काल्पनिक दैत्य का भयावह रूप धारण कर लेती है जिनका समाज समाधान करने में व्यक्ति को भय लगता है।
pic by Google साहसपुवर्रवक सामना करने पर समस्या की विफलता सीमट जाती है जब इसका सीधा सामना किया जाता है इसकी आंखों से आंखें मिलाकर काम किया जाता है तो पता चलता है कि इसका सामना वास्तव में उतना जोखिग बड़ा नहीं था जितना कि वह कल्पना से प्रतीत हो रहा थ
। इससे बचने का दूर भागने की कवायद में अपना विकराल रूप धारण कर लेता है जिसका कोई वास्तविक ठोस आधार नहीं था।pic by Google
इस तरह हमारा जीवन आशा जनक सुख संतोष एवं प्रसन्नता से भरा नहीं है तो आत्मा और लोगन करते हुए ज्ञात कर सकते हैं इसके मूल में जो समस्याएं हैं जिनका सामना करने से हम बच रहे हैं जो हमारे भय व पलायन का पोषण पाकर विकराल मानसिक द्वंद्व है तथा अवसाद का कारण बनी हुई है। इनका एक-एक करके पूरे साहस एवं सूझबूझ के साथ सामना करते हुए इनकी तह तक जाते हुए इनका समुल्लास किया जा सकता है और एक सुखी जीवन का आधार तैयार किया जा सकता है।
एंग्जायटी (Anxiety) का ही विस्तार है दुःख, बुरा महसूस करना, दैनिक गतिविधियों में रुचि ना होना या खुशी ना रहना. हम इन सभी बातों से परिचित ही होते हैं लेकिन जब यही सारे लक्षण किसी व्यक्ति के जीवन में अधिक समय तक बने रहते हैं और उस व्यक्ति को बहुत अधिक प्रभावित करने लगते हैं, तो इसे आप एंग्जायटी कहते हैं.
हमारे रोजमर्रा की चुनौतियों के प्रति हमारी अस्थायी भावुक प्रतिक्रियाएं डिप्रेशन का कारण नहीं बन सकती हैं. इसी तरह जब हमारे किसी नजदीकी की मौत होती है और हम दुखी होते हैं तो उस भावना को भी हम डिप्रेशन नहीं कह सकते है. यदि हम लम्बे वक़्त तक उनकी मौत से उदास रहते हैं तो यह डिप्रेशन की समस्या को उत्पन्न कर सकती है. आपको बता दें कि एंग्जायटी कोई सामान्य स्थिति नहीं है जिसका कोई ज्ञात कारण हो. कुछ लोगों की डिप्रेसिव होने की सम्भावना ज़्यादा होती है और कुछ लोगों में क़म होती है. इसलिए, आइए इस लेख के माध्यम से हम एंग्जायटी के ट्रीटमेंट के विभिन्न तरीकों
पर एक नजर डालें ताकि लोग इसकी सहायता से अपनी परेशानी को समझ सकें और समय रहते इसका उपचार करा सकें.
गले में इंफेक्शन (Throat infection) बेहद ही आम समस्या है। ये कई कारणों जैसे कि बैक्टीरियल इंफेक्शन, वायरल इंफेक्शन और एलर्जी क कारण होता है। तो कई बार मौसम का बदल और फ्लू की वजह से भी गले में इंफेक्शन होता है। यह तीन तरीके से हो सकता है। जैसे कि मुंह के ठीक पीछे के क्षेत्र में। टोंसिलिटिस या कहें कि टॉन्सिल में और वॉइस बॉक्स में। लेकिन लोग अक्सर इसके उन्हीं लक्षणों पर ध्यान देते हैं जो कि गला से जुड़ा होता है। लेकिन कई लक्षण ऐसे भी होते हैं जो कि गले के अलावा शरीर के दूसरे अंगों में भी नजर आते हैं। आइए जानते है
pic by Google मानसिक रोगों का कारण बनती है। यदि समय रहते जीवनशैली में वांछित सुधार नहीं किया गया तो 1 दिन ही गंभीर और असाध्य रोगों का रूप ले सकती हैं जिनके भयंकर दुष्परिणामों को आए दिन लोगों को भुगतना पड़ता है। यदि प्रारंभ में ही इनका समाधान किया होता तो इस स्थिति में हम नहीं आते यही जीवन के अन्य क्षेत्रों में बरती गई लापरवाही के संदर्भ में भी सत्य है।
जीवन की समस्याओं के बिगड़ने पर फिर यह व्यक्ति के पूरे समय ऊर्जा और ध्यान को नियंत्रित कर लेती है तथा गहन तनाव विषद और दुख का कारण बनती है
तब समझ आता है कि यदि समय रहते समस्या के निदान के लिए उपचार किए होते तो आज यह नोबत नहीं आती। जो भी हो समस्या के निपटारे की उपयुक्त विधि का पालन करते हुए से निपटा जा सकता है।
सबसे पहले को समस्याओं की पहचान की जाए और यह स्वीकार किया जाए कि उनका अस्तित्व है। विदेशी काटने पर ही इनके स्वरूप और विचार संभव होता है तो इनके समाधान की दिशा में आगे कदम बढ़ सकते हैं । समय रहते इस पर विचार करने से समाधान सरल हो जाता है और मिठाई आगे चलकर काल्पनिक दैत्य का भयावह रूप धारण कर लेती है जिनका समाज समाधान करने में व्यक्ति को भय लगता है।
सहसपुर सामना करने पर समस्या की विफलता सीमेंट जाती है जब इसका सीधा सामना किया जाता है इसकी आंखों से आंखें मिलाकर काम किया जाता है तो पता चलता है कि इसका सामना वास्तव में उतना जोकिंग बड़ा नहीं था जितना कि वह कल्पना से प्रतीत हो रहा थ
। इससे बचने का दूर भागने की कवायद में अपना विकराल रूप धारण कर लेता है जिसका कोई वास्तविक ठोस आधार नहीं था।
इस तरह हमारा जीवन आशा जनक सुख संतोष एवं प्रसन्नता से भरा नहीं है तो आत्मा और लोगन करते हुए ज्ञात कर सकते हैं इसके मूल में जो समस्याएं हैं जिनका सामना करने से हम बच रहे हैं जो हमारे भय व पलायन का पोषण पाकर विकराल मानसिक द्वंद्व है तथा अवसाद का कारण बनी हुई है। इनका एक-एक करके पूरे साहस एवं सूझबूझ के साथ सामना करते हुए इनकी तह तक जाते हुए इनका समुल्लास किया जा सकता है और एक सुखी जीवन का आधार तैयार किया जा सकता है।
एंग्जायटी (Anxiety) का ही विस्तार है दुःख, बुरा महसूस करना, दैनिक गतिविधियों में रुचि ना होना या खुशी ना रहना. हम इन सभी बातों से परिचित ही होते हैं लेकिन जब यही सारे लक्षण किसी व्यक्ति के जीवन में अधिक समय तक बने रहते हैं और उस व्यक्ति को बहुत अधिक प्रभावित करने लगते हैं, तो इसे आप एंग्जायटी कहते हैं.
हमारे रोजमर्रा की चुनौतियों के प्रति हमारी अस्थायी भावुक प्रतिक्रियाएं डिप्रेशन का कारण नहीं बन सकती हैं. इसी तरह जब हमारे किसी नजदीकी की मौत होती है और हम दुखी होते हैं तो उस भावना को भी हम डिप्रेशन नहीं कह सकते है. यदि हम लम्बे वक़्त तक उनकी मौत से उदास रहते हैं तो यह डिप्रेशन की समस्या को उत्पन्न कर सकती है. आपको बता दें कि एंग्जायटी कोई सामान्य स्थिति नहीं है जिसका कोई ज्ञात कारण हो. कुछ लोगों की डिप्रेसिव होने की सम्भावना ज़्यादा होती है और कुछ लोगों में क़म होती है. इसलिए, आइए इस लेख के माध्यम से हम एंग्जायटी के ट्रीटमेंट के विभिन्न तरीकों
पर एक नजर डालें ताकि लोग इसकी सहायता से अपनी परेशानी को समझ सकें और समय रहते इसका उपचार करा सकें.
गले में इंफेक्शन (Throat infection) बेहद ही आम समस्या है। ये कई कारणों जैसे कि बैक्टीरियल इंफेक्शन, वायरल इंफेक्शन और एलर्जी क कारण होता है। तो कई बार मौसम का बदल और फ्लू की वजह से भी गले में इंफेक्शन होता है। यह तीन तरीके से हो सकता है। जैसे कि मुंह के ठीक पीछे के क्षेत्र में। टोंसिलिटिस या कहें कि टॉन्सिल में और वॉइस बॉक्स में। लेकिन लोग अक्सर इसके उन्हीं लक्षणों पर ध्यान देते हैं जो कि गला से जुड़ा होता है। लेकिन कई लक्षण ऐसे भी होते हैं जो कि गले के अलावा शरीर के दूसरे अंगों में भी नजर आते हैं। आइए जानते है
Strep throat symptoms in hindi
1* miraculous use of turmeric in cough
हल्दी के विश्लेषण से ज्ञात हुआ है कि हल्दी में कार्बोहाइड्रेट 12% प्रोटीन 2.55% रेशा 2.5 प्रतिशत वर्साय परिषद लावणी प्रतिशत फास्फोरस 4% कैल्शियम 2 प्रतिशत मैग्नीशियम 2 प्रतिशत आयरन 2% कारक्युमिन 1% आर्द्रता 80% पाई जाती है। 100 ग्राम हल्दी 384 कैलोरी ऊर्जा प्रदान करती है। कुर क्यूमिन की उपस्थिति के कारण ही हल्दी औषधि गुण प्रदर्शित करती है।
आयुर्वेद हल्दी को औषधि मानता हल्दी का उपयोग दर्द निवारण हो गले में सूजन गले की खराश सर्दी होने पर विशेष लाभकारी मानी जाती है। खराश होने पर या सूजन होने पर गले में इंफेक्शन होने पर गर्म दूध में काली मिर्च शक्कर के साथ एक छोटा चम्मच कच्ची हल्दी पाउडर मिलाकर लेने से लाभ पहुंचता है।
गले में खराश या सूजन होने पर एक गिलास पानी में एक चम्मच हल्दी डालकर गर्म करके गुनगुने पानी से गरारा करने से गले के इन्फेक्शन और गले के सूजन से आराम मिलता है। रात में सोते समय अगर हल्दी में एक गिलास दूध के साथ दिया जाए तो हमारा रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ता है और गले का इन्फेक्शन भी समाप्त होता है।
2*use of black pepper batase for throat infection in hindi
सर्दी जुकाम के कारण नदी गला बैठ गया हो तो रात में सोते समय चार पांच कालीमिर्च बतासे के साथ चला कर सो जाएं इससे खराश के कारण बैठे हुए गले में तुरंत राहत मिलता है और सर्दी जुकाम भी ठीक हो जाता है। इसके प्रयोग से गले मैं तत्काल आराम मिलता है और सर्दी जुकाम से भी राहत मिलती है। क्योंकि गर्म वस्तुओं के सेवन के पश्चात ठंडी वस्तुओं का सेवन करने से अक्सर गला बैठ जाता है या गले में इंफेक्शन हो जाता है ऐसे में यह उपाय बहुत ही कारगर सिद्ध होता है।
काली मिर्च में कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिससे कई रोगों को दूर रखा जा सकता है। साथ ही कई रोगों के इलाज में मदद मिल सकती है। इसमें मुख्य रूप से एंटी-फ्लैटुलेंस, ड्यूरेटिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी, डाइजेस्टिव, मैमोरी इनहेंसर और पेन रिविलर गुण पाए जाते हैं। ये सभी गुण विभिन्न समस्याओं के इलाज में मदद कर सकते हैं।
3*Use of Mulethi for Throat Infection in Hindi
जब कभी मौसम बदलता है या किसी तरह का खाने में बदतर ही जू हो जाती है तो अक्सर गला बैठ जाता है या फिर गले में इंफेक्शन हो जाता है। अगर हम बाहर खाना खाने जाते हैं और तेल मसाला भी अधिक हो जाता है तो गले में इंफेक्शन हो जाता है जिसके कारण हमारे गले में खराश हो जाती है और बहुत ही ज्यादा बेचैनी सी महसूस होने लगती है ऐसे में बहुत सारे घरेलू नुस्खे कारगर सिद्ध हो सकते हैं। जैसे 1 ग्राम मुलेठी के चूर्ण को मुंह में रखकर कुछ देर तक चबाते और मुंह ही रख कर उसको सो जाए प्रातः उठते ही गला एकदम साफ मिलेगा।
बहुत से लोग मुलेठी को गले की खराश का इलाज मानते हैं। एक छोटे से अध्ययन ने उन लोगों को भर्ती किया जिनके पास सर्जरी से पहले श्वास नली में श्वास नली डाली गई थी। इसे हटाने के बाद, श्वास नली पोस्टऑपरेटिव गले में खराश पैदा कर सकती है। शोधकर्ताओं ने दिखाया कि सर्जरी से पहले 1-15 मिनट के लिए मुलेठी के घोल से गरारे करना पोस्टऑपरेटिव की घटनाओं और गंभीरता को कम करने में केटामाइन गार्गल जितना ही प्रभावी था। इसी तरह के एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि मुलेत्हू की उच्च सांद्रता वाले समाधान पोस्टऑपरेटिव को बेहतर बनाने में कम केंद्रित समाधानों की तुलना में अधिक प्रभावी थे।
मुलेठी के जून को पान के पत्ते मेरा कंडा दो से चबाकर चूस तरह से गला खोलने के साथ-साथ गले का दर्द आदि भी चला जाता है।
3*use of gooseberry for throat infection in hindi
सूखा आंवला गुलाटी को अलग-अलग पीसकर बारीक छोड़ो सा वाला ले और फिर उन्हें मिलाकर रख लें इससे एक चम्मच और दिन में दो बार खाली पेट लेने से गले के इन्फेक्शन और खांसी में तुरंत आराम मिलता है।खाली पेट में आंवला खाने के कई फायदे हैं। आंवले में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, फ्लैवोनोइड्स और ऐन्थो साइनिन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। कच्चा आंवला खाने से आपका इम्यूनिटी सिस्टम और पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। खाली पेट में कच्चा आंवला खाने से आपकी आंखों की रोशनी और बालों में चमक आती है। इसके अलावा कब्ज और दस्त से भी आराम मिलता है। इसका कई तरह से सेवन किया जा सकता है।
4*throat infection use of basil in hindi
तुलसी में बहुत सारे औषधि गुण पाए जाते हैं जिसके कारण तुलसी को लगाना बहुत शुभ माना जाता है यह 24 घंटे ऑक्सीजन प्रदान करने वाला व्यक्ति जो औषधीय गुणों से भरपूर है।सर्दियों के मौसम में सबसे ज्यादा समस्या सर्दी जुखाम की होती है, लेकिन अगर आप सुबह के वक्त गुनगुना तुलसी का पानी पीते हैं तो इससे आपका गला और पेट दोनों साफ रहता है, जिससे सर्दी और जुखाम की समस्या नहीं होती है, जबकि शरीर में दिनभर एनर्जी भी बनी रहती है। ऐसे में सर्दी के मौसम में तुलसी का पानी पीने की सलाह दी जाती है। तुलसी धनतेरस के साथ अदरक का रस मिलाकर चाटने से सर्दी जुकाम दूर हो जाता है। इसको दिन भर में 2 बार लिया जा सकता है जिससे सर्दी जुकाम में तुरंत राहत मिलती है।
यदि तुलसी का काढ़ा बनाकर पीने से भी भी गले के इन्फेक्शन में और सूजन भी तुरंत राहत मिलती है इसको बनाने के लिए 7-8 तुलसी के पत्ते 5-6लौंग डालकर पानी में उबालकर थोड़ा सा गुड़ मिलाकर पीने से गले की खराश और सर्दी जुखाम में तुरंत राहत मिलती है।
5*use of honey for throat infection in hindi
शहद में भी बहुत सारी चमत्कारिक औषधि एम पाई जाती है जिसका प्रयोग करके तमाम रोगों से छुटकारा पा सकते हैं शहद में ढेर सारी औषधि गुण पाए जाते हैं।
10 ग्राम शहद में 2 ग्राम मुलेठी 2 ग्राम आंवला मिलाकर सुबह-शाम खाने से खांसी बलगम जुखाम गले के इन्फेक्शन आदि में तुरंत राहत मिलता है। शहद का नियमित प्रयोग करने से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है और हमारा स्वास्थ्य भी उत्तम रहता है और हमें गले को सर्दी जुकाम का इंफेक्शन भी नहीं होता।
6 * Use of pomegranate for cold and throat infection in Hindi
मीठी अनार के छिलके को सुखा कर छांव में सुखाएं उसको उसका पाउडर बना लें फिर 20 ग्राम अनार के पाउडर को सेंधा नमक के साथ नमक का भी बारीक पाउडर बना लें उसके साथ मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें दिन में दो-दो गोली चूसने से गले के इन्फेक्शन और सर्दी जुकाम में राहत मिलता है। परंतु जब इन गोलियों का प्रयोग करें उस समय चावल खटाई ठंडी वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए नहीं तो यह नुस्खा कारगर नहीं होगा। थोड़े से अनार के छिलकों को दूध में उबालकर पीने से गले के इन्फेक्शन और काली खांसी में तुरंत राहत मिलता है। परंतु सारे वस्तुओं का उपयोग एक सीमित मात्रा में करना चाहिए अत्यधिक किसी भी वस्तु का प्रयोग करने से वह फायदा के बजाय नुकसान में बदल जाता है।
7*Use of grapes for throat infection and dry cough in Hindi
बादाम की गिरी यानी कि बादाम खड़ा लेकर उसमें मुलेठी और मुनक्का बीज निकालकर मुनक्के का सब 10-10 ग्राम प्रभारी करके चने के बराबर गोलियां बनाकर इस को सुरक्षित रखने और जब गले में इंफेक्शन या खराश हो जाए या किसी तरह के गले में प्रॉब्लम हो जाए तो दो दो गोलियां सुबह शाम डालकर चूसने से गाले के इंफेक्शन और सूखी खांसी में तत्काल लाभ मिलता है।
8*use of banana for throat infection and dry cough in hindi
आपने सुना होगा कि खांसी हो तो केला नहीं खाना चाहिए परंतु क्या आप जानते हैं कि केले में औषधीय गुण भी है जो खांसी जुकाम जैसे रोगों में भी बहुत कारगर सिद्ध होता है। आप सोचेंगे कि यह कैसा मजाक है कि खांसी और जुकाम में केले का प्रयोग परंतु यह शत प्रतिशत सही है कि आप भी के प्रयोग को खांसी के उपयोग के लिए कर सकते हैं और यह बहुत ही कारगर नुस्खा है।
केले के छिलकों को छांव में सुखाकर या सुखा हुआ छिलका किसी ग्रॉसरी स्टोर से ले ले। छिलके को हल्का सा तवे पर गर्म करके मिक्सी में बारीक पीस लें इतना बारी को चुर्ण रूप में हो जाए। अब उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह शाम चाटने से पुरानी से पुरानी खांसी या गले का इन्फेक्शन में तुरंत राहत मिलती है यह आजमाया हुआ नुस्खा है आप भी आजमाएं इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है और ना ही कोई इससे हानि होगी आपको।
9*मुलेठी काला खट्टा और गोंद बाबुल प्रत्येक 10 ग्राम लेकर को पीसकर कपड़े से छान लें. इसमें अदरक के रस में दो-तीन घंटे गोलघर बराबर मात्रा में गोलियां बना लें और एक एक गोली चूसते रहें खांसी में तुरंत आराम मिलता है। 1015 तुलसी के पत्ते और 8-10 काली मिर्च की चाय बनाकर पीने से खांसी जुकाम और बुखार भी ठीक हो जाता है गले के इन्फेक्शन और काली खांसी में भी रामबाण इलाज है ।
10*आंवले के छिलकों को सुखाकर चूर्ण बना लें और इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर किसी डिब्बे में भरकर रखते. एक एक चम्मच सुबह-शाम खाने से पुरानी से पुरानी खांसी और गले के इन्फेक्शन में तुरंत राहत मिलता है. अदरक का रस और शहद 10 ग्राम मिलाकर बराबर मात्रा में चाटने से काली खांसी गले के इन्फेक्शन और सर्दी जुकाम बुखार आदि ने तुरंत राहत मिलता है.
11*फिटकरी भी खांसी और गले के इन्फेक्शन के लिए अचूक इलाज है फिटकरी बुनकर बारीक पेस्ट बना लें एक चम्मच चीनी मिलाकर एक चुटकी फिटकरी मिलाकर दिन में दो बार खाने से पुरानी से पुरानी खांसी सर्दी जुकाम बुखार आदि तुरंत राहत मिलता है।
12*पके हुए केले के छिलकों को छांव में सुखाकर आग पर अच्छी तरह से जलाकर उसकी राख बना ले फिर उसक बारीक पीसकर किसी एयर टाइट कंटेनर में रखकर रात को सोते समय एक चम्मच पके हुए केले के छिलके के पाउडर को शहद में मिलाकर चवनप्राश की तरह चाटने से दमा खांसी श्वास गले के इन्फेक्शन आदि में तुरंत राहत मिलता है परंतु इसका इस्तेमाल करते समय धूम्रपान और चिकनाई युक्त भोजन का प्रयोग बिल्कुल ना करें संभव हो तो चावल का भी प्रयोग ना करें चावल यदि खाना हो तो थोड़ा सा गरम खा सकते हैं ठंडा चावल बिल्कुल भी ना खाएं।
निष्कर्ष
उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि गले के इन्फेक्शन और खांसी जुकाम बुखार आदि प्रयोग की जाने वाली घरेलू दवा का प्रयोग आप बेझिझक कर सकते हैं इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है और ना ही कोई इसकी एक्सपायरी डेट है ध्यान रहे अधिकतर हनी पद होती है अतः नियमित समुचित मात्रा में सेवन करना ही लाभप्रद होता है अच्छा स्वास्थ्य जीवन में हर तरह के सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत होता है इसलिए अपने स्वास्थ्य का अच्छे से स्वास्थ्यवर्धक ख्याल रखें। ्
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