घरेलु उपचार नानी के नुस्खे अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी नहीं है कि हम रोज-रोज डॉक्टर के पास ही भागी उसके लिए हमारे घरेलू नुस्खे भी बहुत कारगर होते हैं। ऐसी हियर औषधियां है।
धृतकुमारिका (एलोवेरा) के औषधि गुण
अलसी के बीजों से स्वास्थ्य लाभ
खजूर और उससे स्वास्थ्य लाभ
हल्दी से स्वास्थ्य लाभ
सोयाबीन से स्वास्थ्य लाभ
घृतकुमारी एलोवेरा के औषधीय गुण (medicinal properties of aloe vera)
घृतकुमारी जिसे बोलचाल में dhikkumar या ऐलोवेरा
कहते हैं वास्तव में एक प्रकार का पौधा है इसमें मांसल कांटेदार पत्तियां होती हैं और लाल या पीले रंग के फूल होते हैं। इसे उगने के लिए समशीतोष्ण व सूखा क्षेत्र चाहिए। यह कैक्टस जैसा दिखता है इसलिए गलती से इसे इसी प्रजाति का माना जाता है लेकिन यह वास्तव में" कुमुदनी "व प्याज प्रजाति का एक सदस्य है।
भारत में सदियों से लोकप्रिय है और इससे कई नामों से जाना जाता है जैसे कोरफाड़ कुमारी आदि। के अधिकांश पौधों की बनावट मिलती-जुलती होती है इससे परिपक्वाता पाने में लगभग 3 से 4 साल लग जाते हैं। इस समय इस में फूल लगने शुरू हो जाते हैं किसके प्रायर 400 प्रकार है लेकिन इनमें से केवल 5 प्रकारों में ही चिकित्सीय औषधि गुण है अथवा लाभ देने वाले तत्व पाए जाते हैं यह पांच प्रकार के हैं। एलो बरबडेंसिस मिलर, हेलो एलो बेकर, एलो फेरॉक्स, एलो सेपोनेरिया ।
इनमें भी हम एलो बरबडेंसिस मिलर ही उपयोग में लाते हैं जो अकेले खाने योग्य व यह लोग की उपलब्ध किस्मों में सर्वाधिक पोषण शक्ति से भरपूर है। एलो बरबडेंसिस मिलर किस्म के ऐलो पत्तों से ही जेल निकलते हैं जिसमें पोषक मूल्य होते हैं।
एलोवेरा के पत्तों में 75 पोषक तत्व 200 अन्य घटक है इसमें 20 मीटर्स अट्ठारह खनिज जल एमिनो एसिड 12 और विटामिन शामिल है।
सदियों से एलोवेरा अलग-अलग समाजों के द्वारा उपयोग में लाई जाती है। प्राचीन ग्रीक रोमन बेबी लोनी नियम भारतीय चीनी सभी एलोवेरा को चिकित्सीय पौधे के रूप में उपयोग में लाते हैं।
एलोवेरा का ज्ञान कई प्राचीन संस्कृतियों कोठा इसमें पारस मिश्र ग्रीक अफ्रीका शामिल है। यह केवल कुछ ही नाम है हालांकि एलोवेरा के प्रयोग का अभिलेख विवरण सबसे पहले प्राचीन मिस्र में मिलता है। यहां तक कि सिकंदर ने अपनी युद्ध सना के लिए एलोवेरा प्राप्त करने के लिए तो काट रहा दीप को जीता
क्लियोपैट्रा के समय से लेकर महात्मा गांधी तक ने एलोवेरा जैसे प्रकृति का" खामोश उच्चारण भी कहा जाता है"के लाभ उठाएं सालों से एलोवेरा को पाटेड फिजीशियन ,वांड ऑफ हेवेन है वंडर प्लांट, स्वर्ग का आशीर्वाद वह जीवन का पौधा जैसे नामों से पुकारा जाता है।
सदियों पूर्व से लोग जिस रूप में पहचानते थे और इसकी जो सीमित पहुंच थी आज एलोवेरा इससे काफी आगे बढ़ गया है अब लोग इसके उपयोग व लाभों के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं वे शक्तिशाली एलोवेरा दिन प्रतिदिन के जीवन में शक्ति से परिचित हो गए हैं। एलोवेरा बाहर से लगाने के साथ खाया भी जा सकता है विशेषज्ञों के अनुसार इसमें कैल्शियम फास्फोरस पोटैशियम लो सोडियम क्लोराइड मैग्निशियम तांबा जिंक जैसे आवश्यक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। एलोवेरा को मालिक व्हीलर बनावट इतनी सूक्ष्म है कि यह तत्व की ऊपरी परत में घुसते हुए अंतिम पद तक पहुंच जाता है। सबसे ऊपर की परत होती है एपिडेमिक फ्रीडम इक और नीचे की पर हाइपोडर्मिक कल आती है एलो में एक तत्व होता है जिसे लिगनेन कहते हैं यह इसे सेल्यूलर स्तर तक घुसने में मदद करता है। इसमें एक और तत्व होता है जिसे यूनियन कहते हैं यह प्राकृतिक क्लींजिंग की तरह काम करता है यह दोनों तो तो मिलकर काम करते हुए त्वचा के सलूशन स्तर तक पहुंचकर त्वचा की परतों की सतह पर जमा टॉक्सिंस खत्म कर देते हैं। अंत तक पूरी प्रणाली का टैक्सी निकाल देते हैं इससे त्वचा को पोषण मिलता है और त्वचा के लिए आवश्यक पोषण से इसकी पूर्ति करते हैं।
कहा जाता है कि एलोवेरा अंदर से बाहर की ओर काम करती है इसका मतलब यह है अंदर घुस कर सारे विषैले तत्वों को हटाकर या साफ कर इन्हें प्रणाली से नष्ट कर देती है आयुर्वेद के अनुसार धृतकुमारिक यकृत जने रोगों में रामबाण की तरह आरोग्य कारक होता है। शोधकर्ता आप जानते हैं कि 60% बीमारियां पाचन तंत्र से शुरू होती है इसीलिए अच्छे व अनुकूल स्वास्थ्य के लिए पुस्तकों का समुचित पाचन अवचूषण वह आत्मसात करण आवश्यक है
विषैले तत्व लाइनिंग में बाधा डाल देते हैं इससे पोस्ट को वह विटामिनों के अवशोषण के प्रभाव में कमी आती है इस कारण आप की प्रणाली में अवचुषित हुए बिना सीधे गुजर जाते हैं। एक तत्व है जो शरीर में संचित होते रहते हैं और शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं जब आपका शरीर भोजन से पोषण प्राप्त नहीं करता तो आपके शरीर में इसकी कमी उत्पन्न हो जाती है जिससे बीमारी पैदा होती है जब एलोवेरा का उपयोग किया जाता है तो यह पाचन तंत्र से विषैले तत्वों को निकालने में मदद करता है। इसमें उन्हें ढीला करने व समय समय से नष्ट करने की क्षमता है इससे पाचन क्रिया साफ हो जाती है वह हम जो खाते हैं शरीर उससे पूरा लाभ प्राप्त करने में सक्षम होता है तथ्य यह है कि पाचन प्रक्रिया में 20 जमा होने के कारण हमारा शरीर भोजन के स्रोतों से पोषण प्राप्त नहीं कर पाता शक्तिशाली पोषण का अतिरिक्त पूरक आहार व एलोवेरा लाभ देकर प्रणाली में संतुलन पैदा करता है
अलसी के बीजों से स्वास्थ्य लाभ (judge the health benefits of flax seeds)
प्रकृति के विभिन्न वस्तु में अलसी एक महत्वपूर्ण औषधीय है जिनका उपयोग कर स्वास्थ्य को बनाए रखने और रोगों को दूर करने में सहयोग मिलता है अलसी ऐसी ही उपयोगी वस्तु है आयुर्वेद तो अलसी के गुणों का महत्व बहुत पहले से अच्छी तरह समझता है अब तो आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी अलसी के गुण का प्रशंसक बन गया है।
अलसी के रासायनिक विश्लेषण से ज्ञात हुआ है कि इसमें ओमेगा-3 फेटी अम्ल भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो कोलेस्ट्रॉल को घोर लेता है घुलनशील फाइबर और मैग्नीशियम लवण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं अलसी में लिगनेंस नामक रसायन भी पाया जाता है। कई प्रकार के एक्सीडेंट भी पाए जाते हैं अलसी में कार्बोहाइड्रेट बहुत कम मात्रा में पाया जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार अलसी में औषधि गुण पाए जाते हैं इस कारण अलसी में उपस्थित विशेष तत्त्व है जिन्हें विशेष गुण होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार अलसी वाट विकारों को दूर करने में सहायक होती है अलसी के तेल में चूने का पानी मिलाकर जले हुए स्थान पर लगाने से जलन नहीं होती अलसी के तेल का सेवन कब्ज मोटापा मानसिक कमजोरी को दूर करने में सहायक होता है।
अलसी के बीजों को कूटकर पानी मिलाकर पका लें फिर गांठ पर लगाने से गांड जल्दी फूट जाती है और सूजन भी दूर हो जाती है अलसी के बीजों का कड़ा खांसी में लाभप्रद होता है अलसी का सेवन बड़े हुए प्रोटेस्टेट को कम करने प्रोस्टेट कैंसर से मूत्र मार्ग संबंधी विकारों को कम और समाप्त करने में सहायक होता है। इतना ही नहीं अलसी के बीजों का सेवन पेट दर्द कब्ज पेट में गैस बनने से होने वाले दर्द जी मचला ने में लाभप्रद होता है अलसी का सेवन मांस पेशियों में होने वाले दर्द को कम करने में सहायक होता है।
अलसी में उपस्थित मैग्निशियम शरीर के अंगों के संचालन को सुचारू रूप से नियंत्रित करता है विशेषकर नारी और हृदय की मांसपेशियों की क्रियाशीलता का संचालन नियंत्रित करता है।
अलसी में उपस्थित घुलनशील फाइबर आंतों के लिए लाभदायक होता है फाइबर पाचन क्रिया को सुचारू रूप से नियंत्रित करता है घुलनशील फाइबर अतिरिक कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है।
मोटापा नहीं बढ़ता अलसी में उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में हार्मोन को नियंत्रित करता है यह कोशिकाओं को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है अलसी ग्लूटेन फ्री होता है इसका आशय यह है कि जिन लोगों में गेहूं या इससे निर्मित उत्पादों के सेवन से एलर्जी हो जाती है वह अलसी का सेवन कर एलर्जी से बच सकते हैं।
अलसी अलसी के तेल का उपयोग करने की सलाह दी जाती है क्योंकि अलसी के प्राप्त होने का 3 फैटी अम्ल रक्त धमनियों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ने नहीं देता। बुरे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है साथ ही साथ अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ाता है इससे हृदय रोगों में होने की संभावना कम हो जाती है अतः अलसी के तेल का उपयोग बहुत ही लाभकारी है।
खजूर और उससे स्वास्थ्य लाभ (Dates and its health benefits)
पृथ्वी पर भौगोलिक परिस्थितियां विन विन होती है इन भौगोलिक भिन्नता के कारण पृथ्वी में भिन्नता जाती है उनकी पूर्ति भिन्न प्रकार से होती है। पृथ्वी पर प्रत्येक वस्तु समान मात्रा में हर जगह उपलब्ध नहीं होती जल एक ऐसा तत्व पाए है जो जीवन के लिए आवश्यक है। जल कहीं बहुतायत तो कहीं बहुत कम मात्रा में पाया जाता है जल की बहुतायत से हरियाली अधिक होती है जब जल की कमी बहुत होती है तो वही बड़े पेड़ पौधे भिन्न प्रकार के होते हैं पेड़ों पर पत्तियां नहीं होती कांटे होते हैं पेड़ बहुत धीमी गति से बढ़ते हैं पेड़ बहुत दिनों तक जीवित रहते हैं इनके फल विभिन्न प्रकार के होते हैं ऐसी जगह को रेगिस्तान कहते हैं जहां पेड़ पौधे अधिक होते हरियाली भरा क्षेत्र कहलाता है
खजूर रेगिस्तान का फल है खजूर मीठा शीतल तुरंत शक्ति देने वाला पौष्टिक फल है खजूर स्वास्थ्यवर्धक फल है खजूर छोटे बेलन जैसा होता है इसमें गुठली होती है खजूर के सेवन से प्यास पाचन, तंत्र यकृत, मस्तिष्क ,हृदय को सही रखने में विशेष गुण है। रक्त बनाने में भी खजूर सहायता करता है खजूर का सेवन स्वास्थ्यवर्धक होता है खजूर के रासायनिक विश्लेषण से ज्ञात होता है कि इसमें कार्बोहाइड्रेट 50% प्रोटीन 15 % are se 14.5% Lavan 20% potasium 4% magnesium 4% iron 5% Phosphorus do pratishat calsium 5% vitamin 0.5% paye jaate Hain
आयुर्वेद कैंसर खजूर वात पित्त कफ नाशक होता है तीनों में समन्वय बनाए रखता है जिससे रोग उत्पन्न नहीं होते खजूर के नियमित और समुचित मात्रा में सेवन करने से पाचन क्रिया सुचारु रुप से चलती है स्वास्थ्य अच्छा रहता है। खजूर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है इससे खजूर मीठा होता है साथ ही शरीर को शक्ति प्रदान करता है उर्जा मिलने से सारी क्रियाएं सुचारु रुप से संपादित होती हैं।
खजूर में उपस्थित आयरन रक्त की मात्रा बढ़ाने में सहायक होता है। रक्तचाप में भी खजूर का सेवन लाभदायक होता है।
खजूर में उपस्थित पोटैशियम से रक्त संचार मांस पेशियों की गतिविधियां रक्तचाप नियंत्रित रहता है खजूर में उपस्थित कैल्शियम फास्फोरस दांतों और हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। खजूर में विद्यमान प्रोटीन और विटामिन शरीर के विकास में सहायक होते हैं शारीरिक विकास होने पर शरीर से स्वास्थ हो जाता है। खजूर तेरे से पाचन क्रिया को सुचारू रूप से संचालित करते हैं खजूर आंतों के हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर देने के साथ स्वस्थ आते को जन्म देती है जो स्वास्थ्यवर्धक होते हैं और आंतों को सक्रियता बढ़ जाती है।
खजूर सीधे मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करता है यकृत रोगों में भी खजूर लाभदायक होता है। खजूर सबकी पहुंच वाला लाभकारी स्वास्थ्यवर्धक फल
हल्दी से स्वास्थ्य लाभ (health benefits of turmeric)
प्रकृति में अपार संपदा है इसलिए प्रकृति को असीमित भंडार कहते हैं। प्रकृति में विभिन्न मौसम होते हैं इन मासूमों को विभिन्न आवश्यकताएं होती है इसमें पूर्ति करती है विभिन्न सम्पदा में विभिन्न गुण पाए जाते हैं संपादावो गुड बहुत ही उपयोगी और महत्वपूर्ण होते हैं। हल्दी ऐसी ही संपदा है हल्दी में औषधि गुण विद्यमान है हल्दी का उपयोग स्वास्थ्य को अच्छा बनाने के लिए किया जाता रहा है।
भारत में हल्दी का उपयोग वैदिक काल से होता आ रहा है प्रत्येक मांगलिक कार्य हल्दी के उपयोग के बिना संभव नहीं होता इतना ही नहीं हल्दी की उपयोगिता औषधीय गुणों के कारण भी हैं। हल्दी का उपयोग दैनिक जीवन में दाल साग सब्जी में किया जाता है। हल्दी का वानस्पतिक नाम कुरकुमा लोमायल है। इसकी आकृति अदरक जैसी होती है इस कारण हल्दी का अनुवांशिक नाम जिंजी वेरिया सी यर है। हल्दी पीले रंग की गांठ होती है हल्दी की गांठ जड़े हैं जो पृथ्वी के अंदर पाई जाती हैं हल्दी का पौधा 3 फीट लंबा होता है इसका फल भी पीले रंग का होता है। हल्दी का उत्पादन गर्म और आर्द्रता पूर्ण वातावरण में होता है। असम मेघालय त्रिपुरा मिजोरम अरुणाचल प्रदेश नागालैंड सिक्किम उड़ीसा आंध्र प्रदेश तमिलनाडु में मुख्य रूप से उगाई जाती है। हल्दी के विश्लेषण से ज्ञात हुआ है कि हल्दी में कार्बोहाइड्रेट 12% प्रोटीन 2.5%
वासा 1% लावण% (फास्फोरस 4% कैल्शियम 2% मैग्नीशियम 2% लौह 2%) करक्यूमिन 1% आर्द्रता 80% पाई जाती है। 100 ग्राम हल्दी 384 कैलोरी ऊर्जा प्रदान करती है कुर क्यूमिन की उपस्थिति कारण है हल्दी औषधीय गुण प्रदर्शित करती है।
आयुर्वेद तो हल्दी को औषधि मानता है हल्दी का उपयोग दर्द निवारण और सूजन को कम करने में क्या जाता है सर्दी होने पर गर्म दूध में काली मिर्च शक्कर के साथ एक छोटा चम्मच कच्ची हल्दी पाउडर मिलाकर लेने से लाभ पहुंचता है। पेट में दर्द होने पर कच्ची हल्दी के रस का सेवन करने से लाभ मिलता है अजीर्ण मंदाग्नि रोग में भी हल्दी सेवन लाभकारी होता है। हल्दी के सेवन से उपापचाय की गति बढ़ जाती है। जिससे पाचन क्रिया सरल हो जाती है। मधुमेह रोगी की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है हल्दी को आंवले के साथ खाली पेट लेने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है हल्दी के सेवन से रक्त का जमुना समाप्त हो जाता है रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। करक्यूमिन की उपस्थिति से पेल्टनम को एकत्रित नहीं होने देती
रक्त संचार नियमित रूप से चलता है हृदय रोग नहीं हो पाता शराब से लगातार सेवन से एक कृत्य खराब होने की संभावना बढ़ जाती है हल्दी पाउडर को घ के साथ लेने से आकृति की कोशिकाओं को जीवन मिल जाता है चोट लगने पर विशेषकर अंदरूनी या मांस पेशियों के चोटिल होने पर दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।
हल्दी पाउडर का उपयोग मोटापे को दूर करने में भी किया जाता है सुबह एक गिलास गर्म पानी में एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर लेने से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम हो जाती है जिससे मोटापा कम हो जाता है त्रिचूर के एमाल कैंसर अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने पाया है कि करक्यूमिन के कारण कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम हो जाती है।
केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिक हल्दी में उपस्थित करक्यूमिन के कारण वसा कोशिकाओं की संख्या व कार को नियंत्रित करते हैं साथी कोलेस्ट्रोल को बाहर करने की प्रक्रिया को बढ़ाते हैं इससे हल्दी मोटापा कम करने में सहायक होती है। वैज्ञानिकों ने करक्यूमिन में कुछ बदलाव कर ऐसा मॉलिक्यूल तैयार किया जो शरीर में अच्छी तरह सूचित हो कर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है।
धूप से निकलने वाली सूर्य की पराबैंगनी किरणों से बचने के लिए सनस्क्रीन लोशन लगाते हैं इस मौसम में उपस्थित रसायनों से नए खतरे उत्पन्न हो रहे हैं वैज्ञानिकों ने इन खतरों से बचने के लिए डीएनए से सनस्क्रीन लोशन बनाने का तरीका खोजा है अमेरिका की डिजिटल यूनिवर्सिटी ने शोधकर्ता जाए जर्मन ने कहा कि पराबैंगनी किरणें डीएनए को छतिग्रस्त करने में सक्षम होती है जो त्वचा के लिए सही नहीं होता है इससे बचने के लिए त्वचा का डीएनए की पढ़ाई होती है सूर्य की पराबैंगनी किरणें बाहर लगे डीएनए लोशन को प्रभावित कर देती है और त्वचा पर कोई दुष्परिणाम नहीं होता अमेरिका के फेमस चिल्ड्रंस हॉस्पिटल के सर्जन नेमर्स वेस्टमोरलैंड ने कहा कि गंभीर न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर पारंपरिक इलाज के प्रति प्रतिरोधी हो जाता है यह शोध कैंसर कोशिकाओं को समाप्त करने में सहायक है न्यूरोब्लास्टोमा तंत्रिका कोशिकाओं से प्रारंभ होने वाला कैंसर है हल्दी में पाए जाने वाला कार्यक्रम इन न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर को समाप्त करने में सहायक है वैज्ञानिकों ने बतलाया कि नैनो कणों को कार्यक्रम इनके साथ मिलाकर कई गुना प्रभावी होता है।
हल्दी का उपयोग मुख्य मसाले के रूप में किया जाता है हल्दी में एंटी बैक्टीरियल एंटी फंगल एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं हल्दी प्राकृतिक एंटीबायोटिक है शिकागो स्थित लोयला विश्वविद्यालय के मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं के अनुसार हल्दी लू यूकमियार क्त कैंसर में भी लाभकारी है। प्रोफेशन नागभूषण के अनुसार हल्दी सिगरेट के दोहे के दुष्प्रभाव से रक्षा करती है।
हल्दी एलजेहिमर नामक रोग से रक्षा करती है। इस रोग में मस्तिष्क कार्य नहीं करता कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार हल्दी की उपस्थिति विटाए माइड लाइट को समाप्त कर देती है। इससे एलजेहिमर रोग नहीं हो पाता है। मसूड़ों के फूलों का मुंह के छाले होने पर हल्दी का पेस्ट लगाने से लाभ मिलता है। फोड़े फुंसी खुजली होने पर हल्दी को गाय के मूत्र के साथ लेने से लाभ मिलता है। हल्दी पटवा की पत्ती प्याज गरम सरसों के तेल से मिलाकर लगाने से लाभ पहुंचता है। दाद खाज खुजली होने पर हल्दी को नीम के गुर्द के साथ पेस्ट बनाकर लगाने से लाभ मिलता है। हल्दी पाउडर में नींबू का रस और नमक मिलाकर गर्म कर लें इससे घाव कटे निशान मोर्च जोड़ों के दर्द में लगाने से लाभ पहुंचता है।
त्वचा को साफ करने चमक आकर्षण उत्पन्न करने के लिए सदियों से उबटन का उपयोग किया जाता रहा है त्वचा कोमल आकर्षक चमक वाली बनाने में हल्दी सहायक है। इस गुड को ध्यान में रखते हुए हल्दी में वर-वधू पर हल्दी लगाने का कार्यक्रम होता है जो आज भी प्रचलित है।
उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि हल्दी औषधि गुण वाली उपयोगी है हल्दी स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी सहायक है अच्छा स्वास्थ्य जीवन में उमंग उत्साह उल्लास स्फूर्ति प्रदान करता है रोगी होने पर जीवन नीरस हो जाता है जीवन जीना अभिशाप बन जाता है।
सोयाबीन के स्वास्थ्य लाभ( health benefits of soybeans)।
सोयाबीन के रासायनिक विश्लेषण से ज्ञात हुआ है कि सुबह सोयाबीन में सर्वाधिक प्रोटीन 7% लवण 15% सोडियम 3% पोटैशियम 3% आयरन 6% 12% आइसोफ्लेव इन 2% विटामिन ए बी 1% पाए जाते हैं सोयाबीन पौष्टिकता से भरपूर है तभी स्वास्थ्य रक्षक है।
पौष्टिकता के आधार से सोयाबीन दैनिक जीवन में बहुत उपयोगी है सोयाबीन खाद्य पदार्थ के रूप में उपयोग कर लाभ प्राप्त करते हैं सूखे सोयाबीन को क्यों हुआ चने के साथ एक अनुपात 6 की मात्रा में मिलाकर पीस लें जो आटा प्राप्त होगा वह स्वादिष्ट पौष्टिक स्वस्थ वर्धक होगा।
सोयाबीन को 6 से 8 घंटे पानी में भिगोए तत्पश्चात एक बात सयाबीन 6 भाग पानी के साथ ग्राइंडर में पीस लें इस स्लारी को 10 मिनट उबालकर कपड़े से छान लें। सोयाबीन दूध प्राप्त हो गया स्वादिष्ट और पौष्टिक होगा स्वादानुसार चीनी सुगंध मिलाकर सेवन करने से लाभ प्राप्त होता है। इस दूध से पनीर भी बना सकते हैं सोया पनीर सामान्य पनीर से अच्छा होता है। सोयाबीन के आटे में उड़द और मूंग की दाल का आटा मिलाकर पापड़ बनाए जाते हैं जो स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होते हैं।
100 ग्राम सोयाबीन 100 ग्राम मूंग की दाल 100 ग्राम उड़द की दाल 100 ग्राम चना की दाल को पानी में 8 से 10 घंटे भिगो दें फिर साफ कर ग्राइंडर से पीस लें इसमें हरी मिर्च अदरक हींग कसा हुआ कुम्हड़ा स्वाद अनुसार मिलाएं बड़ी बनाकर धूप में सुखा लें वाडियो का उपयोग सब्जी बनाने में किया जाता है।
सोयाबीन प्रोटीन का उत्तम स्रोत है। सोयाबीन में उपस्थित रहे से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को कम करते हैं सोयाबीन में उपस्थित लवण मांस पेशियों की क्रियाशीलता को बनाए रखते हैं साथी रक्तचाप को भी नियंत्रित करते हैं। आयरन की उपस्थिति रक्त निर्माण में सहायक होती है सोयाबीन में पाए जाने वाले पदार्थ आइसोफ्लेव इन महिलाओं से संबंधित रोगों को रक्त कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है। सोयाबीन में उपस्थित प्रोटीन शरीर के विकास वृद्धि में सहायक होती है सोयाबीन में बसा नहीं होती अतः लाभप्रद है।
उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि सोयाबीन का उपयोग करना शरीर के विकास और स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी है ध्यान रहे अधिकता हनीप्रीत होती है अतः नियमित समुचित मात्रा में सेवन करना ही लाभप्रद होता है अच्छा स्वास्थ्य जीवन में उमंग उल्लास उत्साह स्फूर्ति प्रधान करता है। कठिन परिश्रम करने की प्रेरणा भी मिलती है जीवन में रंगीली आती हैं रोगी होने पर जीवन नीरस हो जाता है तब जीवन अभिशाप बन जाता है।
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