heath warning,अगर आपको corona ho chuka ho इसके बावजूद सावधानियों की आवश्यकता है।
अपने वातावरण को शुद्ध एवं उपयोगी बनाएं
करोना कॉल ने जीवन को कई मायनों में पूर्ण परिभाषित कर दिया है। जिसमें प्रकृति का सम्मान इसका पोषण और इसके सानिध्य की आवश्यकता गहराई से अनुभव हुई है। करुणा की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी एक अहम मुद्दा बनी जिस में ऑक्सीजन के अभाव में कितने सारे लोग असमय कालकलवित हुए। ज्ञात हो कि पृथ्वी पर पेड़ पौधे ऑक्सीजन के सबसे बड़े स्रोत है और इनकी प्रचुरता स्वस्थ वातावरण का निर्माण करती है।
पेड़ पौधों की पत्तियों से ऑक्सीजन तैयार होती है जहां प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के अंतर्गत कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग होता है और ऑक्सीजन का विसर्जन। एक पेड़ प्रतिदिन औसतन 2721 किलोग्राम और वर्ष भर में 9931 65 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन करता है जबकि एक व्यक्ति औसतन प्रतिदिन 0.84 किलोग्राम ऑक्सीजन ग्रहण करता है। यह भी ज्ञात हो कि सामान्यतया पेड़ दिन में ऑक्सीजन और रात को कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं जिस कारण मान्यता रही कि रात को पेड़ों के नीचे नहीं सोना चाहिए कारण कि इन पर भूत प्रेत रहते हैं।
वास्तव में रात को कार्बन डाइऑक्साइड निसृत के कारण व्यक्ति घुटन से लेकर चक्कर अनुभव कर सकता है तथा नींद में दुस्वप्न का शिकार हो सकता है। जो भी हो स्वस्थ पर्यावरण के लिए वृक्षों का रोपण महत्वपूर्ण है और जब बात ऑक्सीजन के अतिरिक्त उत्पादन की हो तो कुछ विशेष पेड़ पौधों की चर्चा आवश्यक हो जाती है जो दिन-रात ऑक्सीजन छोड़ते हैं जिनका घर के अंदर एवं बाहर रोपण किया जा सकता है। प्रस्तुत है कुछ ऐसे ही उपयोगी बिच्छू का संक्षिप्त विवरण जिनके रोपण को घर के अंदर एवं आसपास प्रोत्साहित किया जा सकता है।
24 घंटे ऑक्सीजन देने वाले पौधे जो आपके फेफड़े को शुद्ध एवं मजबूत रखेगा।
ऑक्सीजन उत्सर्जन के संबंध में समुद्री पौधे सबसे प्रमुख है। समुंद्र का हिस्सा दो तिहाई होने से यह सबसे अधिक 70 से 80% ऑक्सीजन उत्पादन करता है धरती पर उगने वाले पौधों में बांस बहुत तेजी से बढ़ने वाले पेड़ हैं। जो अन्य पेड़ों की तुलना में 30% अधिक ऑक्सीजन निसरित करता है। माना जाता है कि बांस का पेड़ प्रतिवर्ष 80 टन कार्बन डाइऑक्साइड और सूचित करता है और 70 टन से अधिक ऑक्सीजन का उत्पादन करता है। यह प्राकृतिक रूप से विषम परिस्थितियों में भी तीव्रता से पनपता है और इसे किसी खाद व कीटनाशक की आवश्यकता नहीं पड़ती। अपनी विशेषताओं के कारण या हवा को ताजा रखता है।
पीपल की भारत का एक लोकप्रिय पेड़ है जिसके साथ लोगों को धार्मिक आध्यात्मिक भावनाएं जुड़ी रहती हैं यह उन दुर्लभ पैरों में से है जो दिन और रात दोनों समय ऑक्सीजन का उत्पादन करता है माना जाता है कि यह 22 घंटे से भी अधिक समय तक ऑक्सीजन देता है और पर्यावरण को शुद्ध करता है इसी तरह भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद भी अधिक ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों में शामिल है। यह सदाबहार पेड़ विश्व में सबसे विशाल पेड़ों के रूप में आता है और सैकड़ों वर्षों तक खड़ा रहता है। इसे कई औषधि गुणों से युक्त माना जाता है और यह भी कई धर्म की आस्था से जुड़ा वृक्ष है।
भीम जैसा औषधि पेड़ भी प्रकाश संश्लेषण की ऊंची दर रखता है वह अधिक ऑक्सीजन का उत्पादन करता है व प्रदूषण को भी कम करता है। जल एवं वायु के प्रदूषण के साथ गर्मी का सामना करने की इसकी क्षमता उल्लेखनीय मानी जाती है। यह एक शक्तिशाली प्राकृतिक कीटनाशक पेड़ भी है। मधुमेह अस्थमा रक्त विकार जैसे रोगों के उपचार में सहायक होने के साथ या रात को भी ऑक्सीजन छोड़ता है। हर के सामने या बरामदे में इसके बोनसाई पेड़ को लगाया जा सकता है इन पेड़ों के अतिरिक्त सागौन,सागवान, अशोक अर्जुन जामुन आदि वृक्ष भी पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन विसर्जित करते हैं। घर में उगाई जाने वाला तुलसी का लोकप्रिय पौधा भी रात को ऑक्सीजन छोड़ता है जिसकी कई प्रजातियां पाई जाती हैं।
अपनी औषधि एवं आध्यात्मिक विशेषताओं के साथ यह बहुत लाभदायक पौधा है सर्दी व गर्मी में इसे थोड़ा बचा कर रखना होता है। इसकी झाड़ियों पत्तियों से आने वाली खुशबू तनाव व उदीवाग्नता को शांत करता है इसके साथ विदेशों से आयातित एवं भारत में लोकप्रिय हो रहा एरो केरिया या क्रिसमस ट्री भी एक उपयोगी पौधा है जो 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ता है। घर के बाहर गेट पर या बरामदे में लगाने पर या स्थान की सुंदरता में चार चांद लगाता है। घर के सामने उगाए जाने वाले वृक्षों के साथ कुछ पौधे घर के अंदर भी कमरे में भी लगाए जा सकते हैं जो एक और घर की सुंदरता तो बढ़ाते हैं मन को भाते हैं और दूसरी ओर अपनी ऑक्सीजन विसर्जन में प्रदूषण और शोषण की क्षमता के कारण वातावरण को भी शुद्ध करते हैं।
इस श्रेणी में एलोवेरा को गमले में उगाया जा सकता है। घर के अंदर बाहर कहीं भी इसे उगाया जा सकता है इसमें पानी की मांग बहुत कम होती है इसको अधिक धूप भी नहीं चाहिए। अपनी चिकित्सकीय एवं सौंदर्य प्रसाधन की विशेषताओं के साथ एलोवेरा रात को ऑक्सीजन ही छोड़ता है। एरिका पाम एक लोकप्रिय पौधा है जिसके छोटे बच्चे पौधों को घर में स्थान की उपलब्धता के हिसाब से सजाया जा सकता है। यह घर की हानिकारक गैस व नमी को सूखता है तथा वायुमंडल को शुद्ध रखता है। एक कम सूर्य की रोशनी में पनपता है तथा तेज रोशनी में इसका बचाव करना होता है।
स्नेक प्लांट या नाग पौधा भी गमले में सजने वाला सुंदर पौधा है यह घर में निकलने वाले हानिकारक गैस और किरणों को सोखता है और ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है इसे भी किसी खास देखभाल की आवश्यकता नहीं होती। इसी तरह स्पाइडर प्लांट गमले में उगाया जा सकता है। आर्केट के पौधे भी रात को ऑक्सीजन छोड़ते हैं वह मस्तिष्क को घुटन से बचाते हैं तथा वातावरण को शुद्ध रखते हैं। जरबेरा भी ऑक्सीजन छोड़ने वाला पौधा है जिसे गमले में सजाया जा सकता है। इसके गुलाबी लाल पीले में सफेद रंग के फूल बहुत सुंदर लगते हैं।
फिडिल लीफ की चौड़ी पत्ती वाला पौधा जो वायु शोधक और नमी हटाने में सहायक रहता है। इसे कमरे में फंगस पैदा करने वाले नमक गर्म स्थल पर लगाया जा सकता है। यह कम रोशनी में भी खूब पनपता है। मनी प्लांट एक प्रचलित पौधा जो वातावरण को शुद्ध और ऑक्सिजन युक्त करता है।
जीवन में नकारात्मकता घने अंधेरे कोने की तरह होती है जिसकी कारण हमें आगे का रास्ता साफ नजर नहीं आता और इसी कारण हमारा चिंतन एवं हमारे दृष्टिकोण के नकारात्मक होने पर हम परेशान हो जाते हैं उदास हो जाते हैं निराश हो जाते हैं। जीवन में आगे रास्ते हो सकते हैं ,जीवन में कोई उम्मीद हो सकती है ,हम तब भी यह नहीं सोच पाते जबकि सकारात्मकता जीवन में उस प्रकार की तरह होती है जो हमें सब कुछ स्पष्ट तौर पर दिखाती है और साथ ही हमे वो राह भी दिखाती है जो हमारी दृष्टि से ओझल होती हैं।
सकारात्मकता के प्रकाश में व्यक्ति को जीने की उम्मीद मिलती है तथा उसके जीवन में रचनात्मकता नहीं रूप में उभरती है। सकारात्मकता के कारण व्यक्ति के उत्साह व उमंग में वृद्धि होती है और सकारात्मकता का बल होने पर जीवन में निडर हो कर आगे बढ़ता है और दूसरों को भी आगे बढ़ाता है। जीवन मे जब चारो तरफ नकारात्मकता व निराशा का वातावरण हो तब जीने को सिर्फ एक ही राह बस्ती है और वह है सकारात्मक सोच की। अगर जीवन में सकारात्मक सोच नहीं तो व्यक्ति आशा वह उम्मीद करना भी छोड़ देता है और नकारात्मकता व निराशा के आगे विवश होकर अपने घुटने टेक देता है फिर व्यक्ति वही करता है जो नकारात्मकता उसे करवाती है और नकारात्मकता का कार्य करने का ढंग सदैव विध्वंसक व विनाशकारी ही होता है।
यही कारण है कि जीवन में सोच के नकारात्मकता हावी हो जाने पर मनोरोग बढ़ने लगता है और इस सोच के कारण कई लोग आत्महत्या करने पर विवश हो जाते हैं क्योंकि नकारात्मकता का दंश व्यक्ति को इतना भी बस वह बेचैन कर देता है कि वह अपने जीवन से छुटकारा पाना चाहता है। दतिया सोचता है कि मर जाने के उपरांत शायद उसे मानसिक तनाव और बेचैनी से राहत मिलेगी हकीकत में ऐसा नहीं होता क्योंकि श्रीमद्भागवत गीता के अनुसार"व्यक्ति मरते समय जिस मानसिक अवस्था में होता है वही उसकी गति होती है इसीलिए जीवन में सकारात्मक चिंतन होना जरूरी है हमारे शुभचिंतक भी हमें सदैव सकारात्मक सोच रखने की सलाह देते हैं और नकारात्मक सोचने पर हमें टोकते है"
मनोवैज्ञानिकों का भी यही कहना है कि सकारात्मक सोच रखने वालों को नकारात्मक सोच रखने वालों की तुलना में सफलता मिलने की संभावना अधिक होती है।विद्वान पुरुष कटेग विनाशकारी व्यक्ति को हर अवसर में कठिनाई दिखती है तो वहीं एक आशावादी व्यक्ति को हर कठिनाई मे अवसर दिखता है । सकारात्मक सोच व्यक्ति के तन और मन दोनों को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाती। ऐसी सोच रखने से और न केवल अपने जीवन को संतुलित रखने में मदद मिलता है बल्कि इसके कारण हमारे प्रत्येक दिन के अनुभव ज्यादा सुखद बन जाता है।
आपके जीवन में लचीलापन आता है आपका जीवन बदलाव के लिए भी मानसिक रूप से तैयार रहता है और ढर्रे से के जीवन से अलग हटकर अपने जीवन में कुछ नया करता है। जोशी संतोष को सुकून देता है। बस जरूरत है तो अपने मन में आने वाले नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों को बदलने की और इसके लिए हम विचारों की प्रकृति को पहचानना आना चाहिए। क्योंकि जब आप अपने सकारात्मक विचारों को पहचान मे प्रवेश करने वाली नकारात्मक विचारों को चुनौती दे सकेंगे।
आयुर्वेद चिकित्सा कें अनगिनत लाभ है । आयुर्वेद चिकित्सा विधि सर्वांगीण है। आयुर्वेद चिकित्सा के उपरांत व्यक्ति की शारीरिक तथा मानसिक दोनों ही स्थितियों में सुधार होता है। व्यावहारिक रूप से आयुर्वेदिक औषधियों का कोई दुष्प्रभाव देखने को नहीं मिलता। आयुर्वेदिक औषधियों के अधिकांश घटक जड़ी बूटियों पेड़ पौधों फूलो फलो हद से प्राप्त किए जाते हैं हत्या चिकित्सा पद्धति के निकट है।
आयुर्वेद नकुल रोगों की चिकित्सा करता है बल्कि रोगों को रोकता भी है। तथा जीवन शैली में सरल परिवर्तनों के द्वारा रोगों को दूर रखने में उपाय सुझाया है। आयुर्वेद औषधियां स्वस्थ लोगों के लिए भी उपयोगी है। आयुर्वेद चिकित्सा अपेक्षाकृत सस्ती हुई क्योंकि आयुर्वेद चिकित्सा में सरलता से उपलब्ध जड़ी बूटियां काम में लाई जाती है।
आयुर्वेद स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक एवं प्राकृतिक दृष्टि कोण को अपनाते हैं। प्रतिदिन के आहार एवं समाधान साधारण बीमारियों में आयुर्वेदिक नुस्खे लाभप्रद है। प्राकृतिक तत्वों का कोई कु प्रभाव भी नहीं होता । उदाहरण के तौर पर मौसम बदलने पर खांसी ,जुकाम, एलर्जी इंफेक्शन आदि में एक कप पानी में एक टुकड़ा और काली मिर्च डालकर उबाल ले। इसे गरम-गरम छोटे-छोटे घूंट में आराम से पिए इससे आपको आराम मिलेगा एक चम्मच अदरक के रस में आंवले का रस एक छोटा चम्मच शहर थोड़ी पानी में मिलाकर पिए आपको आराम मिलेगा। भर्ती एसिडिटी होने पर प्रतिदिन एक लौंग चबाए सौंफ का पानी पिए।
तुलसी की पत्ती धोकर चबाए _यह सब करने से लाभ मिलता है खून की कमी होने पर फालसे का सेवन करें। जीरा पत्तेदार सब्जियां साबुत अनाज संतरे का रस दूध और मुनक्के आदि के सेवन से रक्त में रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ती है और खून की कमी भी पूरी होती है।
आयुर्वेद के शादी योग करने का भी अपना महत्व होता है जैसे अनुलोम विलोम प्राणायाम पूरे शरीर और मन के शुद्धिकरण के लिए सबसे अच्छा व सरल उपाय इससे तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है। तनाव से पैदा होने वाली फ्री रेडिकल्स काम करना पड़ता है जिससे हम तरोताजा अनुभव करते हैं आयुर्वेद में प्राथमिक चिकित्सा की भी बहुत से उपाय हैं जैसे बेहोश होने पर, मुंह में छाले होने, पर घाव या चोट लगने प,र कांटा चुनने पर ,दर्द होने पर इन सबके बीच प्राकृतिक घरेलू उपाय।
सर्वप्रथम आप हमें अपने शरीर की भाषा को समझना चाहिए कि उसे कब क्या चाहिए। बीमार होने पर भोजन से प्राप्त चीजों को लेने का सही तरीका व मात्रा का ज्ञान होना चाहिए। ठीक न होने पर चिकित्सक के पास अवश्य जाएं हमारा प्रतिदिन का हरसूद एवं सुपाच्य हो सोने जाने का समय निश्चित हो।
संतुलित खान-पान और पौष्टिक आहार से कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर से करेगा बचाओ (Balanced diet and nutritious diet will save from the third wave of corona infection )
*करोना कॉलcorona काल से बचाव के लिए गिलोय की पत्तियां रामबाण है। गिलोय की पत्तियां आसानी से सड़कों पर मिल जाती हूं इनकी डंडी तोड़कर उनके पत्तियों का रस निकालकर सेवन करने से डेंगू चिकनगुनिया करो ना आदि में फायदा करता है।
*रोगियों को प्रतिदिन अनार का जूस पीना चाहिए जो कि शरीर में ताकत बढ़ाता है और शरीर को स्वस्थ रखता है।
*कोरोना काल में पपीते का सेवन करना चाहिए क्योंकि पपीता को खाने से शरीर में रक्त की मात्रा अच्छी रहती हैं।
*इंसान को खूब पानी पीना चाहिए जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है शरीर में नमी बनी रहती है।
*कोरोना बचने के लिए एलोवेरा पपीता और दूध का भी सेवन करना चाहिए।
*बाहर के खाने से बचना चाहिए और शरीर को पूरी तरह से ढक कर रखना चाहिए चेहरे पर मास्क पहनना चाहिए हाथ को समय-समय पर धोना चाहिए।
*पपीता अनार एलोवेरा गेहूं और ज्वार के रस का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है।
*प्रतिदिन कम से कम 15 से 20 मिनट योग करना चाहिए और टहलना चाहिए।
Korona काल में जीवन प्रबंधन(Life management in the Corona era)
करुणा काल में जीवन की दुश्वारियां कई गुना बढ़ा दी है। एक और जहां हमारे सम्मुख इस अदृश्यं मायावी रोग से निपटने की चुनौती है। तो वहीं दूसरी ओर लॉकडाउन से लेकर आइसोलेशन की स्थिति में घर की चारदीवारी में सिमटा जीवन जले पर नमक छिड़कने की तरह बीच-बीच में अपनों से बिछड़ने का गम लिए हुए है। यह स्थिति विकट चुनौतीपूर्ण तथा भयावह है। ऐसे विकट पलों में जब चारों और हताशा निराशा संस्थाएं एवं अवसाद तथा पीड़ा के भाव घनीभूत हो तो जीवन में सार्थकता एवं सकारात्मकता के भाव कैसे भरें। इस पर विचार करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
जैसे जल की छोटी-छोटी धाराएं मिलकर आगे बड़ी नदी का रूप ले लेती है वैसे ही इन विकट पलों में जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को बटोर कर एक बड़ी प्रसन्नता का आधार तैयार किया जा सकता है और प्रस्तुत जीवन की चुनौतियों से पार हुआ जा सकता है। जीवन प्रबंधन के सरल सूत्रों की समझ व अभ्यास इस उद्देश्य की पूर्ति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। शारीरिक स्तर पर आहार-विहार का संयम सुखी एवं प्रसन्न ने जीवन का पहला आधार है। समय पर सोने व जागने के साथ एक कसी दिनचर्या के आधार पर ही यह संभव होता है।
सूर्योदय से पूर्व उठने का अपना सुख है जिससे कोई भी अनुभव कर सकता है लेकिन यार रात को समय पर सेंड के आधार पर ही सुनिश्चित हो पाता है। इसके साथ नित्य व्यायाम के साथ तैयार होता है सबल शरीर सुखी जीवन का ठोस आधार तैयार करता है। पौष्टिक योग मनभावन आहार स्वम मन को तृप्त एवं प्रफुल्लित रखता है। जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता हालांकि स्वाद के फेर में असयमित आहार से बचना उचित होता है जो अन्यथा तन मन की सुख शांति पर भारी पड़ता है।
गहरी नींद का टॉनिक अपना महत्व रखता है जिसके बाद प्रत्येक व्यक्ति तरोताजा एवं प्रसन्न अनुभव करता है। वही आधी अधूरी नींद व्यक्ति को चिड़चिड़ा एवं तलाव ग्रस्त बनाती है। किसके साथ प्रकृति की गोद में विचरण जीवन की प्रसन्नता को बहू गुरित करता है। इसको अपनी स्थिति के अनुरूप घर के अंदर या बाहर यथासंभव दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
मानसिक स्तर पर मन की सक्रियता और श्रेष्ठ चिंतन प्रसन्न जीवन का संबल आधार बनाते हैं। इसके कर्तव्य पालन सर्वोपरि है अपने रोजमर्रा के कार्य एवं कर्तव्यों का निर्वहन व्यक्ति को निश्चित एवं प्रसन्न रखता है। जबकि अपने परिवार समाज या कार्यक्षेत्र के क्रियाकलापों में लापरवाही या काम चोरी गहरी और चेतन में एक बोझ बनकर जीवन की प्रसन्नता का हरण करते हैं। जिनमें कि हमें सचेत रहने की आवश्यकता है। अपने कर्तव्य पालन के साथ रोज कुछ सार्थक एवं रचनात्मक कार्य प्रसंता के लिए करनी चाहिए।
प्रतिदिन कुछ नए कौशल का विकास करने से व्यक्तित्व का निखार आत्मविश्वास के साथ एक गहरी संतुष्टि देता है। इस प्रक्रिया में अपने जुनून का अनुसरण या अपनी पसंद के काम का जीवन की सार्थकता एवं आनंद से गहरा संबंध रहता है। इसके विपरीत बेकार की तरह किसी कार्य को किया जाना बोझिल बनता है। प्रतिदिन अपने जीवन को समझने के लिए नियोजित समय सार्थक परिणाम लाता है जिसके साथ जीवन की गहरी समझ विकसित होती है।
मोबाइल के वर्तमान युग में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग जीवन की सुख शांति पर डाका डालने वाला एक बड़ा माध्यम बना हुआ है। जबकि इसका संयमित एवं सृजनात्मक उपयोग अपार प्रसन्नता का आधार बन सकता है। वास्तव में मोबाइल एक जिन की तरह है जिसका वरदान या अभिशाप इसके उपयोग या दुरुपयोग पर निर्भर करता है। इसी तरह सोशल मीडिया में समाचार के ओवरडोज से बचना जरूरी होता है, आजकल क्योंकि आजकल मीडिया में नकारात्मक एवं भ्रामक चर्चा अधिक रहती है जो अनावश्यक तनाव व चिंता का कारण बनती है।
इसके साथ छोटी-छोटी चीजों का आनंद लेना सीखिए। अच्छे गीत एवं संगीत मन को प्रफुल्लित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रेरक सत वाक्यों को याद रखें जो जीवन के संघर्ष के बीच आशा उत्साह भरने वाले होते और हर पल की साथी साबित होते हैं। व्यवहार में बानी
का सदुपयोग करें प्रपंच से बचे क्योंकि वानी का दुरुपयोग मन की शांति को भंग करता है तथा दूसरों के मन में भ्रांति एवं मालीनता पैदा कर वातावरण को दूषित करता है इसकी जगह सबके प्रति सद्भाव रखना एवं अपनी क्षमता पर जरूरतमंदों की मदद करना भी एक अनुकरणीय सूत्र रहता है।
दूसरों से तुलना करने से भी बचें इसके लिए आवश्यक हो जाता है कि अपने लक्ष्य पर सदा केंद्रित रहे ।अच्छे लोगों की संगति करें दूसरों के प्रति कृतज्ञता का भाव रखें अपनी अंतर वाणी का अनुसरण करें तथा लोग क्या सोच रहे हैं इसकी अधिक परवाह न करें। अपने कर्तव्य पथ पर अटैक रहे और जो सही प्रतीत हो उसका अनुसरण करें। दूसरों से इतना ही लगा रखे कि बिछड़ने पर अनावश्यक पीड़ा वेदना ना हो।
अपना खर्च बुद्धिमत्ता पूर्वक करें और फालतू खर्च से बचें अर्थात अर्थ संयम एवं मितव्ययिता का अभ्यास करें। तनाव का प्रबंधन करना सीखें तथा समय का सिस्टम उपयोग करें। शारीरिक व मानसिक विकास के साथ अपने आध्यात्मिक विकास के लिए भी सचेत रहें इसके लिए नित्य अपने कुछ समय दें और अपनी आदतों पर छोटी-छोटी विजय प्राप्त करें। ध्यान के लिए कुछ समय अवश्य निकालें।
साधना स्वाध्याय संयम एवं सेवा को जीवन का अंग बनाकर मन को साधे। प्रतिदिन कुछ सार्थक करें तथा एक उद्देश्य पूर्ण जीवन जीए। चारों ओर की समस्याओं के समाधान में अपने ईमानदार प्रयास के साथ योगदान दें लेकिन हर चीज को स्वयं के ऊपर ना लें और इस प्रक्रिया में जो अपने बस में ना हो उसे भगवान पर छोड़ दें और सबके हित की प्रार्थना करते हुए उज्जवल भविष्य के प्रति आश्वस्त रहें।
इसके साथ सरल सुविधा भोगी जीवन के बजाय अनुशासित एवं श्रम शील जीवन का वर्णन करें।
इसके साथ-साथ यह भी जरूरी है कि हम अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकले अपने भाई को पहचाने तथा एक-एक कर इन पर विजय पाए। अच्छा काम तुरंत करें गलत काम 24 घंटे के लिए टाल दें। यह अभ्यास आवाज नेतृत्व से जुड़े पश्चाताप से बचाएगा। इसके साथ बर्तमान में जीवन जी अपनी कमियों अधूरे पर व अ पूर्णता को स्वीकार करें। समय श्रेष्ठ चिकित्सक है। इस तथ्य को समझते हुए जीवन के आसाद एवं लाइलाज पहलुओं को समय पर छोड़ दें। यदि कुछ समझ में ना आए तो शांत रहें।
दृस्थाभाव का भाव से जीवन को देखने और समझने का प्रयास करें। इस तरह जीवन को हर स्तर पर छोटे-छोटे प्रयासों के साथ करते हुए हर पल का सदुपयोग करते हुए आप संतुष्टि एवं प्रसन्नता के छोटे-छोटे अवसरों को व टूटते हुए जीवन में सकारात्मकता एवं आशा का संचार किया जा सकता है और जीवन को प्रस्तुत चुनौती को धैर्य पूर्वक पार किया जा सकता है।
Note
उपर्युक्त लेख अलग-अलग स्थानों से अध्ययन के पश्चात आपके सामने प्रस्तुत किया गया है आपको यह लेखकैसा लगा । अपने अपने विचार अवश्य प्रस्तुत करें और किसी भी गंभीर बीमारी के परिणाम घटक होते हैं नजरंदाज नहीं किया जा सकता । सही समय और सही डॉक्टर से विचार विमर्श करके उपचार लेना चाहिए।
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