जैसे कि आप सभी लोग अभी अभी corona जैसी disaster से लौट कर आए है तो आप सभी लोगो को अपने स्वास्थ को किसीभी आने वाले खतरे से स्वधानी के लिए खुद को prepare करना नितांत आवश्यक है।
आप अपनी तंदुरुस्ती पर ध्यान देते हुए रख रहे हैं। एक स्वस्थ जीवन शैली का एक बड़ा पहलू इस बात पर कायम रहता है कि आप किस तरह के भोजन करते हैं, आप कितने शारीरिक रूप से सक्रिय हैं और यदि आप अच्छी नींद की रणनीति का पालन करते हैं।
मोदी नैचुरल्स लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक अक्षय मोदी का कहना है कि मधुमेह का निदान होने के बाद आमतौर पर लोग चीनी का सेवन कम कर देते हैं, कोलेस्ट्रॉल के कारण भोजन से परहेज करते हैं, और व्यायाम करते हैं और अधिक लाइक्स लेते हैं ।
हर तूफान जैसे अपने पीछे कई निशान छोड़ जाते हैं उसी कोरोना महामारी भी हमारी शरीरों में अपने निशान छोड़ गई है। कहने का तात्पर्य है कि हमारे शरीर में करोड़ों के कारण बहुत सारी बीमारियों से लड़ने की छमता हुआ है ।
कोरोना के निशान को पिछे छोड़ने के लिए सावधान होने के साथ ही सतर्क होने की भी जरूरत है। सावधानी से मतलब है की नजरबंद करके ना रहें पुरी तरह से सतर्क और सर्तकता से तात्पर्य है हेल्थ को हल्के में लेने की गलती न करें क्योंकि कोरोना का सबसे पहला शिकार कमजोर इम्युनिटी वाले लोग ही हो रहे थे ऐसे में इम्युनिटी को मजबूत बनाए रखना बहुत जरूरी है। इम्युनिटी को मजबूत बनाएं रखने के लिए पौष्टिक भोजन, विटामिन सी युक्त भोजन तो मददगार हैं ही साथ ही वर्कआउट को भी अपने डेली रूटीन का हिस्सा बनाएं।
योग की क्रियाएं किसी भी तरह का हो, ये हर तरह से आपके लिए फायदेमंद ही होता है। लेकिन कोरोना महामारी के बाद से लोग योग की तरफ खासतौर से आकर्षित हुए हैं क्योंकि इसके फायदे लंबे समय तक रहते हैं। तो आज हम कुछ ऐसे आसनों के बारे में जानेंगे जिसके रोज़ाना 30 मिनट के अभ्यास से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी ज्यादा होगी ही साथ ही इससे वेट और पेट को भी आसानी से कम किया जा सकता है
भस्त्रिका प्राणायाम
भस्त्रिका का मतलब होता है की सांसों को धावकानी की तरह जल्दी जल्दी अंडर बाहर छोड़े और ले । यह प्रक्रिया धीर धीरे प्रयास करने से ही होती है। अचानक करना भी नही चहिए।
विधि: पद्मासन या फिर सुखासन में बैठ जाएं। कमर, गर्दन, पीठ एवं रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए शरीर को बिल्कुल स्थिर रखें। इसके बाद बिना शरीर को हिलाए दोनों नासिका छिद्र से आवाज करते हुए श्वास भरें। फिर आवाज करते हुए ही श्वास को बाहर छोड़ें। अब तेज गति से आवाज लेते हुए सांस भरें और बाहर निकालें। यही क्रिया भस्त्रिका प्राणायाम कहलाती है। हमारे दोनों हाथ घुटने पर ज्ञान मुद्रा में रहेंगे और आंखें बंद रहेंगी। ध्यान रहे, श्वास लेते और छोड़ते वक्त हमारी लय ना टूटे।
लाभ व प्रभाव: इस प्राणायाम के अभ्यास से मोटापा दूर होता है। शरीर को प्राणवायु अधिक मात्र में मिलती है और कार्बन-डाई-ऑक्साइड शरीर से बाहर निकलती है। इस प्राणायाम से रक्त की सफाई होती है। शरीर के सभी अंगों तक रक्त का संचार भली-भांति होता है। जठराग्नि तेज हो जाती है। दमा, टीवी और सांसों के रोग दूर हो जाते हैं। फेफड़े को बल मिलता है, स्नायुमंडल सबल होता है। वात, पित्त और कफ के दोष दूर होते है। इससे पाचन संस्थान, लीवर और किडनी की मसाज होती है।
सावधानियां: उच्च रक्तचाप, हृदय रोगी, हर्निया, अल्सर, मिर्गी स्ट्रोक वाले और गर्भवती महिलाएं इसका अभ्यास ना करें।
विशेष: अभ्यास से पहले 2 गिलास जल अवश्य लें। शुरू-शुरू में आराम लेकर अभ्यास करें। ज्यादा लाभ उठाना हो तो इसे योग गुरु के सान्निध्य में ही करें।
कपालभाति प्राणायाम कपालभाती प्राणायाम को करने से माथे और चहरे पर गजब का तेज निखरता है।कपालभाति प्राणायाम एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है माथे को दबाने वाली तकनीक। इसका नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि इस विधि के नियमित अभ्यास से आपका मस्तक को और चहरे को तेज से भर देता है और बुद्धि तेज होती है।
हालाँकि इस विधि में न्यूनतम प्रयास की आवश्यकता होती है, वास्तव में, यह एक बहुत ही तकनीकी क्रिया है और इसके ढेर सारे लाभ हैं। यह एक 'शत' क्रिया तकनीक है जो आपके शरीर से जहरीली हवा को निकालती है, इस प्रक्रिया में इसे साफ करती है। सफाई से विभिन्न मानसिक और शारीरिक लाभ मिलते हैं। कपालभाती मुद्रा को करने के लिए योग मुद्रा में किसी शांत स्थान पर बैठकर करना उपयुक्त होता है। यह आपके अंगों की मदद से मुद्रा ग्रहण करने की तुलना में अधिक सांस लेने का व्यायाम है। यह ऋषि पतंजलि द्वारा योग सूत्र में वैदिक योग के आठ अंगों का हिस्सा है। कपालभाति का अभ्यास आपको मन, शरीर और आत्मा से स्वस्थ रखता है।
इसका प्रयोग करते समय ध्यान बस सांसों की गति पर रहे बहुत ही गति नही करणी बस स्वास को आंखे बन्द करके नाक से बाहर को निकलते रहना है और सुरु सुरु में आराम से करिए, एक मिनिट में 60 बार सांसों को बाहर निकालने का कार्य करे,start में 2 मिनिट करे फिर धीर धीरे प्रयास करने से 5 मिनिट तक एक बार में करे । फिर कुछ सेकंड के लिए रुके फिर दोबारा से प्रयास करे।
सावधानियां: उच्च रक्तचाप, हृदय रोगी, हर्निया, अल्सर, मिर्गी स्ट्रोक वाले और गर्भवती महिलाएं इसका अभ्यास ना करें।
अनुलोम विलोम प्राणायाम
अनुलोम का अर्थ होता है सीधा और विलोम का अर्थ है उल्टा। यहां पर सीधा का अर्थ है नासिका या नाक का दाहिना छिद्र और उल्टा का अर्थ है-नाक का बायां छिद्र। अर्थात में नाक के दाएं नाक से सांस खींचते हैं, तो बायीं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते है। इसी तरह यदि नाक के बाएं छिद्र से सांस खींचते है, तो नाक के दाहिने छिद्र से सांस को बाहर निकालते है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम को कुछ योगीगण 'नाड़ी शोधक प्राणायाम' भी कहते है। उनके अनुसार इसके नियमित अभ्यास से शरीर की समस्त नाड़ियों का शोधन होता है यानी वे स्वच्छ व निरोगी बनी रहती है। इस क्रिया को वृद्धावस्था में भी गठिया, जोड़ों का दर्द व सूजन आदि शिकायतें नहीं होतीं।
जिस अवस्था मे आपको सुविधा हो जैसे पद्मासन, सिद्धासन, स्वस्तिकासन अथवा सुखासन में बैठ जाएं। दाहिने हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नासिका के बाएं छिद्र से सांस को भरे और फिर बायीं नासिका को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें। तत्पश्चात दाहिनी नासिका से अंगूठे को हटा दें और दायीं नासिका से सांस को बाहर निकालें।
अब दायीं नासिका से ही सांस को भरे और दायीं नाक को बंद करके बायीं नासिका खोलकर सांस को 8 की गिनती में बाहर निकालें।
इस प्राणायाम को 5 से 15 मिनट तक कर सकते है
याद रहें इस प्राणायाम दाहिनी हाथ की अंगूठा और दाहिने हाथ की तर्जनी का प्रयोग होता है जिससे अपने दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नाक के छिद्र को और दाएं हाथ की तर्जनी से बाएं हाथ के छिद्र को बंद करते हैं जिसके उपरांत अनुलोम विलोम की प्रक्रिया शुरू होती है।
अनुलोम विलोम को करने के फायदे
अनुलोम विलोम प्राणायाम को करने से डिप्रेशन की समस्या नहीं होती है, दिमाग एकाग्र रहता है और हमारे दिमाग में ऊर्जा का संचार होता है जिससे हमारा दिमाग तीव्र होता है और मन एकाग्र होता है, चकवारा मन एकाग्र रहता है तो हम हर तरह की समस्याओं को सकारात्मक ढंग से सोच विचार कर सकते हैं। अनुलोम विलोम करने से मधुमेह रोगियों को भी बहुत अधिक लाभ मिलता हैअनुलोम विलोम के फायदे में शरीर को डिटॉक्स करना भी शामिल है। कई बार खान-पान में बरती गई लापरवाही शरीर में विषाक्तता का कारण बन जाती है। शरीर की इस विषाक्तता को दूर करने या डिटॉक्स रखने के लिए अनुलोम विलोम प्राणायाम किया जा सकता है। रिसर्च के अनुसार, प्राणायाम न सिर्फ शरीर को डिटॉक्स करता है, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है
साथ ही इसके नियमित अभ्यास से सिस्टोलिक रक्तचाप (SBP) और डायस्टोलिक रक्तचाप (DBP) को कम कर सकता है
अनुलोम विलोम प्राणायाम गठिया रोग के लिए भी बहुत ही रामबाण प्राणायाम है इसको करने से गठिया रोग में भी आराम मिलता है। वैज्ञानिक रिसर्च में पाया गया है कि गठिया रोग की सूजन में सुबह-सुबह प्राणायाम करने से राहत मिलती है। गठिया रोग में एक मसाज थेरेपी की तरह काम करता है। खेत की सूजन की कम हो जाती है धीरे-धीरे नियमित अभ्यास स अनुलोम विलोम प्राणायाम heart संबंधित समस्याओं में भी समाधान करता है । इसके धीरे-धीरे नियमित अभ्यास से हर्ट के ब्लॉकेज तक खुल जाते हैं। हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों के लिए भी अनुलोम विलोम प्राणायाम रामगढ़ का प्रयोग करता है परंतु इस को सामान्य गति में करना चाहिए।
माइग्रेन की समस्या के लिए भी अनुलोम विलोम प्राणायाम एक चमत्कारिक औषधि है इसको करने से नियमित माइग्रेन की समस्या डिप्रेशन और अवसाद आदि की समस्या से निजात मिलती है। वैज्ञानिकों की माने तो जितनी विश्वास संबंधित प्रणब होते हैं वह अवसादी बहुत ज्यादा लाभकारी होते हैं।
वजन कम करने में तो मधुमिलन प्राणायाम बहुत ही ज्यादा सहायक सिद्ध होता है। भक्ति भजन भजन को अनुलोम विलोम प्राणायाम बहुत ही आसानी से कम करने में मददगार साबित होता है।
कब्ज की समस्या में भी अनुलोम विलोम प्राणायाम बहुत ही लाभकारी होता है। हेल्थ एक्सपर्ट कमाने दो अनुलोम विलोम प्राणायाम यदि सुबह खाली पेट किया जाए तो इससे शरीर में होने वाली कब से निजात मिलती है। अनुलोम विलोम प्राणायाम बॉडी को डिटॉक्स भी करता है इससे संचार सुचारू रूप से शरीर में दौड़ता है।
अनुलोम विलोम प्राणायाम को करने, नियमित अभ्यास करने से शरीर में और त्वचा में चमक बनी रहती है और एक तेज सा नजर आता है। तृषा सारे डिटॉक्स गूगल जाते हैं तो रक्त का संचार शुद्ध हो जाता है जिससे हमारे शरीर में स्वस्थ ब्लड का संचार होता है और हमारा चेहरा और शरीर चमकने लगता है।
इन प्राणायाम के साथ साथ आपको अपने खान पान का भी विशेष ध्यान रखना होगा क्योंकि प्राणायम तभी आपके जीवन में तभी सकारात्मक परीणाम देंगे जब आप गुणवक्ता युक्त भोजन का सेवन करेंगे
क्योंकि संतुलित आहार पर ही किसी भी मनुष्य का शरीर स्वस्थ रहने पर निर्भर करता हैं. इसलिए हर व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए सही खाना यानी कि प्रोटीन विटामिन कार्बोहाइड्रेट आईरन युक्त भोजन करना आवश्यक हैं
आजकल हर व्यक्ति का जीवन बहुत ही भागदौड़ से भरा हुआ हैं हर कोई अपने काम के चक्कर में अच्छे से खाना नहीं खा पाता हैं
जिसकी वजह से शरीर में कई तरह की बीमारियां होने लगती हैं खाना का टाइम टेबल बिगड़ने की वजह से Health पर भी कई तरह के असर पड़ने लगता हैं.
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