google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical simple home remedies, दिन भर स्फूर्ति और एक्टिव रहने के लिए observe kare ye hints

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simple home remedies, दिन भर स्फूर्ति और एक्टिव रहने के लिए observe kare ye hints

 भूमिका (introduction)Simple home remedies, दिन भर स्फूर्ति और एक्टिव रहने के लिए follow kare ye tips 

प्रकृति अपार संपदा ओं का भंडार है इन संपदा  का उपयोग मनुष्य शरीर को सुदृढ़ बनाने में अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने में रोगों के उपचार में किया गया है और आज भी करते आ रहे हैं। संपदा का प्रभाव स्थाई और लाभकारी होता है इस कारण इन संपदा का उपयोग किया जा रहा है आयुर्वेद में शहद की प्रकृति भी एक संपदा के स्वरूप में है।

शहद की वैज्ञानिकता (Scientificity of Honey) 

शहद के रासायनिक विश्लेषण से ज्ञात हुआ है कि शहद में Carbohydrates, proteins, fats, minerals, and vitamins are found.Carbohydrates Glucose Petrolatum ,Glucose, Maltose, Dexa Tranes Vitamins, magnesium ,iron copper, phosphorus ,silicon ,iodine ,sulfur, are found in इनकी उपस्थिति से स्पष्ट है कि शहद पूर्ण आहार है इस शरीर को शक्ति स्फूर्ति ताजगी प्रदान करते हैं।
शहद के रासायनिक विश्लेषण से यह ज्ञात होता है कि शहद के नियमित सेवन से शरीर को शक्ति स्फूर्ति ताजगी मिलती है इतना ही नहीं रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है शायद उत्तम पौष्टिक आहार है इसका सेवन आपको करना चाहिए 

आयुर्वेद में शहद (Honey in Ayurveda)

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में शहद क विशेष महत्व है। साहब एक प्रमाणिक गुणों से भरपूर औषधि है। आयुर्वेद के प्राचीनतम ग्रंथ चरक संहिता में शहद के गुण को बतलाया गया है शरीर को स्वस्थ और कांतिमय बनाने में शहद का विशेष योगदान है। शरीर को स्वस्थ और रोगों से मुक्त रखने में विशेष भूमिका है सहद रोगों से रक्षा करता है इतना ही नहीं लोगों को समाप्त होगी भी करता है आयुर्वेद में सेहत का विशेष उपयोग किया गया है।
शहद के सेवन से मोटापा भी नहीं बढ़ता है।शहद के आयुर्वेदिक गुणों की बात करें तो यह कई बीमारियों के इलाज में देखा जाता है। यही कारण है कि प्राचीन काल से ही शहद को एक चमत्कारिक औषधि माना जाता है। आज के समय में मुख्य रुप से लोग त्वचा में निखार लाते हैं, पाचन ठीक रखते हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं, वजन कम करने आदि के लिए शहद का उपयोग करते हैं। इसके अलावा शहद जहां एक आहार है वहीं दूसरी ओर औषधि गुणों को भी प्रदर्शित करता है । इस कारण सेहत की उपयोगिता और महत्व बढ़ जाता है और  शहद के कारण घाव को भरने में या चोट से जल्दी आराम मिलता है।

Aahar ke roop mein shehad ka Sevan (Consumption of honey as a diet)

वैज्ञानिकों का मानना है कि शहद के नियमित सेवन से शरीर को शक्ति स्फूर्ति और ताजगी मिलती है। इतना ही नहीं रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ता है। शहद उत्तम पौष्टिक आहार इसका सेवन सबको करना चाहिए।
जहां एक और पौष्टिक आहार है वहीं दूसरी और औषधीय गुणों को प्रदर्शित करता है। इसी कारण सेहत की उपयोगिता और बढ़ जाती है। धूप में भागदौड़ से काम की अधिकता से जब थकावट महसूस हो तब नींबू के रस में शहद मिलाकर पीने से थकावट समाप्त हो जाती है और ताजगी आ जाती है जिससे काम करने की शक्ति आ जाती है।
मौसम परिवर्तन में सर्दी जुकाम खांसी होना स्वाभाविक है यदि जुकाम खांसी पर शुरू से ध्यान ना दिया जाए तो बहुत ही कष्टकारी होता है। परिणाम में अन्य रोग उत्पन्न हो जाते हैं तभी कहावत है कि" लड़ाई का घर हसीं रूप का घर खांसी"खांसी होने पर सितोपलादि चूर्ण को शहद के साथ सुबह दोपहर शाम लेने से लाभ मिलता है।

शहद के औषधीय गुण (Medicinal medicinal of honey)

शहद स्वसन तंत्र अस्थमा, स्नायु तंत्र की दुर्बलता को समाप्त करता है। स्वश्न तंत्र संबंधी विकारों को दूर करने में शहद का सेवन उपयोगी है। शहद रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है जिससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
जल जाने पर जले हुए भाग पर शहद लगाने से जलने में आराम मिलता है साथी फफोले भी नहीं पड़ते। टूटी हड्डियों को जोड़ने में सहायता करता है झूला कच्ची हल्दी को शहद में मिलाकर टूटी हड्डियां मौच पर लेप कर दे। तीन-चार घंटे तक लगा रहने दे फिर हटा दे सूजन कम हो जाती है दर्द कम हो जाता है लाभ मिलता है। रोज रात्रि में 10 ग्राम शहद नियमित लेने से ब्रोंकाइटिस निमोनिया टाइफाइड रोगों में कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। साथ ही रक्त की मात्रा भी बढ़ती है इससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है इसके साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
रक्त विकार  के लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि शहद प्राकृतिक और शुद्ध हो कृतिम और अशुद्ध शहद हानि प्रद होता है। शुद्ध शहद की पहचान कई प्रकार से की जाती है जो इस प्रकार है
,*शहद को पानी भरे कांच के गिलास में डालने पर बूंद बने तो असली यदि फैल जाए तो अ शुद्ध।
*यदि शहद पानी में देर से घुलता है तो अशुद्ध और शीघ्र भूल जाए तो शुद्ध।
*आंख में शहद लगाया यदि शहद आंख में लगे तो शुद्ध अथवा अशद्ध।
*शहद की बूंदे कपड़े पर कपड़ा सूती होना चाहिए उस पर कुछ बूंदे शहद की डालें उस कपड़े से शहद उठ जाए तो शायद शुद्ध है और अगर धब्बा पड़ जाए तो शायद अशुद्ध है।

शहद का सेवन कैसे करें (How to consume honey)

*खाली पेट गुनगुने पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से 1 माह में मोटापा कम होना शुरू हो जाता है ।
*नियमित सेवन करने से अच्छा परिणाम होता है परंतु याद रहे शहद की अत्यधिक मात्रा लेने से पेट दर्द होने की संभावना बनी रहती है अतः हानि प्रद है।
*शहद को आप पर गर्व नहीं करना चाहिए शहद और घी का सेवन एक साथ नहीं करना चाहिए।
*शहद की मात्रा का सेवन उम्र के अनुसार करना चाहिए बच्चों के लिए 4 से 5 ग्राम किशोरों के लिए सात से आठ ग्राम युवकों के लिए 12 से 15 ग्राम वृद्धों के लिए 20 से 25 ग्राम सेवन करना चाहिए।

Conclusion

उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि शहद सर्वोत्तम आहार है। साथ औषधी भी अनियमित समुचित मात्रा में सेवन करने पर ही भी लाभ मिलता है रक्त की मात्रा बढ़ाने में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में शारीरिक बल बढ़ाने में सहद  सेवन करना आवश्यक होता है। शरीर को बल स्कूटी भी मिलती है स्वास्थ्य अच्छा रहता है अच्छा स्वास्थ्य जीवन में उमंग उल्लास उत्साह प्रफुलता आनंद सुख प्रदान करता है जिससे कठिन परिश्रम करने की इच्छा होती है यश और कीर्ति फैलती है रोगी होने पर जीवन अभिशाप बन जाता है और किसी काम में मन नहीं लगता इसलिए संयमित और नियमित जीवन रहना अति आवश्यक है इसके लिए हमें अपनी दिनचर्या के साथ-साथ खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए नियमित एक्सरसाइज करना चाहिए और पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए।

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