google.com, pub-1112571912339708, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Link: https://example.com; rel=canonical Health care tips, शुगर लेवल को कंट्रोल करने के घरेलु आहार

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Health care tips, शुगर लेवल को कंट्रोल करने के घरेलु आहार

 रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होनी चाहिए यदि नहीं है तो उसे बढ़ाना आवश्यक है इसके लिए लहसुन का सेवन करें इससे शरीर की अच्छी मात्रा में" एंटी ऑक्सीजन "प्राप्त होता हैं। इस मौसम में दूध में हल्दी डालकर भी सेवन करना चाहिए जिसस जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और रोगों से लड़ने में सहायता मिलती है। दूध में हल्दी डालकर पीने से गले में कफ की समस्या और खांसी जुकाम से लड़ने में मदद मिलती है। मधुमेह रोगियों को करेले की सब्जी भी बहुत अधिक फायदा करती है।

मधुमेह कारण और निवारण (Diabetes Causes and Prevention) 

 आज के तनाव भरे वातावरण में सुख सुविधाओं के होते हुए भी अधिकांश लोग किसी न किसी रूप के शिकार हैं। मधुमेह में से एक है जिसने सबसे ज्यादा लोगों को अपने जाल में फंसाया है मधुमेह से बचाव जरूरी है क्योंकि अनेक रोगों का इंजन है।

कारण 

मैं शरीर इंसुलिन हार्मोन की कमी के कारण भोजन के साथ ग्रहण की गई शक्कर का पर्याप्त पाचन नहीं कर पाता है। रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है इसलिए इस रोग में पेशाब के साथ चीनी भी आती है इस रोग के मुख्य कारण अधिक बैठे रहने की आदत यकृत की खराबी वंशानुगत मोटापा आदि हो सकता है।

लक्षण symptoms

अत्यधिक प्यास ,अत्यधिक भूख ,मूत्र बार-बार अनावश्यक गति से आना, जी के शरीर में संक्रामक रोगों से बचाव करने की शक्ति नहीं रहती। फोड़ा फुंसी खुजली आदि रोग शुरू हो जाते हैं घाव को भरने में काफी समय लगता है ज्यादा समय तक अजमेर पर नियंत्रण न रखने से रोगी का उपचार रक्तचाप हो जाता है नियमित योगाभ्यास से लाभ होता है रोगी को कम यार बिना शक्कर कम वसा और कम कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार देना चाहिए।
. ताजे आंवले के रस में शहद मिलाकर पीने से मधुमेह ठीक हो जाता है।
. माध्यमिक के रोगी को जब बहुत तीव्र इच्छा मीठा खाने की हो तो खजूर का सेवन करें।
. मधुमेह में करेला महा औषधि है रोज प्रातः करेले का रस पीने या दिन में तीन बार 15 ग्राम करेले के रस में 100 ग्राम पानी मिलाकर पीने से लाभ होता है । छाया में सुखा हुए करेले का चूर्ण 6 ग्राम दिन में एक बार खाने के बाद खाने से लाभ मिलता है।
. मधुमेह की बीमारी में नीम की कोपल खाने से चीनी की मात्रा कम होती है तथा खून साफ़ आता है।
. मेथी का दाना व सूखा करेला पीसकर बराबर मात्रा मेंचूर्ण बना ले प्रातः बिना कुछ खाए खाली पेट दो चम्मच पानी के साथ लेने से लाभ होता है।
. तीन पत्ती जामुन के लिए एक पत्ता मुंह में रखकर चलाएं प्रातः 1 किलोमीटर चलकर दूसरा पत्ता चलाएं 2 किलोमीटर चलने के बाद तीसरा पता चला है तो मधुमेह रोग में राहत मिलती है.
. मधुमेह के रोगियों के लिए जामुन अमृत समान ऐसे व्यक्तियों को जामुन का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। जामुन को पानी में धोकर ने थोड़ी से पानी में उबालें रख दे आधा घंटे बाद मसलकर कर छान लें ,दिन में तीन बार सरस को पीने से मजमा की रोगियों में शुगर की मात्रा कम न लगती।
. ढाई सौ ग्राम मेथी के बीजको पीस कर छान ले छह ग्राम पानी में डाल दे रात को भिगोए तो सुबह पी ले , सुबह भिगोए तो शाम को पी ले। स्वाद अच्छा ना लगे तो शहद डालकर पी ले। दो माह तक प्रयोग को करने से रोक बिल्कुल समाप्त हो जाएगा।
. मधुमेह रोगियों के लिए विजयसार की लकड़ी के गिलास में रखा पानी मिलाएं विजयसार का छूर्ण दी फायदा करता है। दिन में एक बार तीन ग्राम चूर्ण लेना चाहिए।
. हरण,बहेरा,आंवला, जामुन, गुठली ,करेला ,बीज मेथी दाना,
प्रत्येक 50 ग्राम तथा गुड मान 100 ग्राम एवं बेलपत्र कैर, दोनों 50 ग्राम तथा सबको कूट पीसकर चूर्ण बना लें प्रार्थना से के बाद वह रात को खाना खाने के बाद दो चम्मच पानी के साथ लेने से मधुमेह रोग से फायदा होता है।
. मेथी के दाने 25 दाने प्रातकाल खाने पर मधुमेह से बचा जा सकता है।
. बेल की सूखी पत्ती 50 ग्राम, घी 50 ग्राम, गुडसार 50 ग्राम, j जामुन की गुठली 50 ग्राम, करेली की पत्ती 50 ग्राम सबको कूट पीसकर चूर्ण बना लें एक चम्मच जल्द से दो बार ले। इससे मूत्र व रक्त की शुगर करा दूर होगी।
. सूखे आंवले और जामुन की गुठली को समान मात्रा में पीस लें प्रातः काल खाली पेट इस चूर्ण को पानी के साथ लेने से मधुमेह रोग दूर होता है।
. बेल पत्तों का रस निकालकर यदि शुगर के रोगी को प्रतिदिन औषधि के मात्रा में बराबर दिया जाए तो रोगी को लाभ मिलता है।
. मधुमेह की स्थिति में रेशा युक्त आहार एवं हरी साग सब्जियां अधिक मात्रा में लेनी चाहिए। यदि रोगी को मीठा खाने की इच्छा हो तो कृतिम शक्कर युक्त भोज्य पदार्थ ले सकते हैं भोजन में सलाद लेना हितकारी है। आंवला, टमाटर, अदरक, कच्ची हल्दी, यो मेथी पत्ता का सुख भी फायदेमंद है,। दूध एवं छाछ का सेवन भी उपयोगी है सुबह त्रिफला जल का सेवन करना उचित है। मधुमेह के रोगी चना ,जौ ,का सत्तू ,कुलथी दाल का पानी ,पालक का रस, नीम के कोमल पत्तों की भुजिया
अजवाइन का सेवन नियमित रूप से कर सकते हैं जामुन गुड सारी ओम विजयसार को औषधि के रूप में ग्रहण कर सकते हैं साथी मेथी अर्जन एवं कदंब की छाल नगर मोथा एवं पलाश का फूल ग्रहण करना लाभकारी है।
 इसके अतिरिक्त संयमित जीवन जीने से भी बहुत लाभ हो सकता है। योग ध्यान प्राणायाम या नियमित अभ्यास मधुमेह को नियंत्रित करने में कारगर साबित होता है इसके लिए सुबह नियमित रूप से मात्र 6 आसन प्राणायाम तथा कपालभाती, सुप्त, मत्स्येंद्रासन, शवासन नियमित रूप से करें।

मधुमेह की आयुर्वेदिक चिकित्सा (Ayurvedic Medicine for Diabetes)

 मधुमेह रोग का हृदय रोगियों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है मधुमेह ग्रस्त मरीजों में एंजाइना और हृदय आघात होने पर मृत्यु तक संभावना ज्यादा रहती है और पुणे आभास होने की संभावना रहती है। मधुमेह रोग जीवन पर्यंत रहने वाला जटिल घातक रोग है। इसके कारण  लगभग सभी अंग देर सबेर क्षतिग्रस्त हो सकते हैं । इसमें हृदय रोग दूध का प्रमुख कारण है ऐसे रोगियों को शरीर का भार लगभग सामान्य बनाए रखने के लिए 3 से 5 किलोमीटर तेज गति से चलना चाहिए। शरीर में वसा की मात्रा 28% से कम होनी चाहिए। कमर की मां पुरुषों में 40 इंच और महिलाओं में 37 इंच से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। भोजन में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 300 किलोग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
 रोगियों में यौन संबंधी विकार भी उत्पन्न होने लगते हैं यह समस्याएं पुरुषों के लिए बहुत ही गंभीर होती है इसी प्रकार स्त्रियों में मधुमेह के कारण यौन उदासीनता के लक्षण विकसित होते है। अनियंत्रित मधुमेह के कारण कई प्रकार के जीवाणु और फफुंदीय के हमले भी तेज हो जाते हैं।
 यदि आप मधुमेह से ग्रस्त हैं और अधिक दिनों से हैं तो ऐसी स्थिति में कभी भी आप का गुर्दा खराब हो सकता है। यदि आप किडनी के मरीज हैं तो यह संभव नहीं किया ब्लड प्रेशर के मरीज ना हो। यदि आप खानपान एवं अपनी जीवनशैली में परिवर्तन नहीं करते तो जीवन लीला समाप्त हो सकती है। वास्तव में मधुमेह रोग अकेला ही नहीं आता बल्कि अन्य अनेक रोगों के साथ आता है अतः इस से बच कर रहना ही अच्छा है।
   मधुमेह रोगियों के लिए आयुर्वेदिक लाभ क्या है मधुमेह के बारे में विस्तृत जानकारी आप लोगों को होती रहती है ?परंतु इस रोग से मुक्ति के क्या उपाय हैं? चीनी है मिठाई खाने से ही नहीं होता बल्कि पैंक्रियाज का रोग है। पैंक्रियास से इंसुलिन पैदा होती है मधुमेह की बीमारी को आहार से नियंत्रित करना चाहिए। हमारे आहार के साथ प्रमुख घटक होते हैं कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन वसा चर्बी विटामिन खनिज लवण रेशा और पानी।
   इनमें से तीन घटक अंगों को पोषण देने वाले घटक है चौथे और पांचवें घटक शरीर को विभिन्न अजय रासायनिक क्रियाओं तथा अंतिम दो घटक रेशा निर्माण और पानी प्रवाही के रूप में काम आते हैं। मधुमेह रोगियों को अपने रोग को व्यायाम द्वारा नियंत्रण करना चाहिए प्रतिदिन ऐसे रोगियों को तीन से 5 किलोमीटर तेज स्पीड से चलना चाहिए। इतनी तेज गति से चलना चाहिए कि पूरे शरीर में पसीना आने लगे। इससे प्रत्येक अंग की क्रियाशीलता बढ़ जाती है और इंसुलिन की आवश्यकता की पूर्ति हो जाती है हृदय रोगियों को पर भी बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है क्योंकि प्रयोगात्मक रूप से यह देखा गया है कि सामान्य स्वस्थ वयस्क मनुष्य को प्रतिदिन अपने वजन से 25 से 30 गुना कैलोरी ऊर्जा वाले आहार की आवश्यकता पड़ती है। यही आवश्यकता मधुमेह रोगियों को भी पड़ती है।
  एक 60 किलोग्राम वजन वाले पुरुष को दैनिक आवश्यकता 
 60 गुने 35 बराबर ,2100 कै लोरी के लगभग आवश्यकता रहती है। परंतु यह मापदंड समय समय पर कार्य के अनुसार बदलता रहता है। किसान को मधुमेह रोग पराया नहीं के बराबर होता है । यदि अनुवांशिक हो तो कह सकते हैं अन्यथा नहीं होता इसका कारण यह है कि वह शारीरिक श्रम अधिक करता है। प्रत्येक व्यक्ति को 30 कैलोरी प्रति किग्रा के हिसाब से भोजन व्यक्त यानी 60 किलोग्राम वजन के व्यक्ति को अट्ठारह सौ कैलोरी वाला भोजन लेना चाहिए यदि व्यक्ति का वजन अधिक है तो 25 किलोग्राम कैलोरी प्रति किलोग्राम के हिसाब से लेना चाहिए। यदि उपर्युक्त दोनों विधियों से मधुमेह रोगियों को आराम नहीं मिले तो दवा द्वारा नियंत्रित करना चाहिए।
   वसंत कुसुमसार का रस तथा सत्य गिलोय प्रवाल पंचामृत रस, योगेंद्र रस, मुक्ता पिस्ति, त्रिफला गुग्गुल की पुड़िया बनाकर दिन में तीन बार दूध के साथ सेवन करें। परंतु यदि कीटोन की भी समस्या है तो सुख शेखर रस एवं बंगेश्वर रस को भी योग में मिला दे। साथी खाना खाने के बाद मधुमेह नाचनी पति एवं चित्रकदी वटी का भी प्रयोग किया जा सकता है।
   यदि डायबिटीज फूड की बीमारी भी है तो रसराज रस का भी प्रयोग करें जिससे रक्त संचालन की समस्या ना हो और चलने फिरने में कठिनाई ना हो।
   भोजन में जाओ और चने का आटा गेहूं के आटे में मिलाकर रोटी बनाकर सेवन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त कच्चे चने को भिगोकर भी सेवन करें दाल काजू मूंगफली चने से बनी चीजें सामान्य मात्रा में ली जा सकती है। कम शर्करा वाले फल से पपीता गाजर जामुन एक बार में 10 ग्राम तक खाए सकते हैं
इस प्रकार आहार में कुल 150 ग्राम से 180 ग्राम तक कार्बोहाइड्रेट 7 से 80 ग्राम प्रोटीन 70 से 80 ग्राम वसा चाहिए ताकि कुल कैलोरी  अट्ठारह सौ से ज्यादा ना हो। इसके अलावा मेथी ,करेला सोया का साख जामुन लहसुन एलोवेरा पत्ता गोभी दालचीनी, ग्रीन टी ,पालक, को कोकोया, फाइबर रुक सोयाबीन दलिया राजमा का सेवन कर सकते हैं

। चीनी तली भुनी चीजें डेयरी उत्पादन चाय 

काफी आदि का सेवन कम करे।

 ।तंबाकू और शराब अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले पदार्थ जैसे आलू चावल केला और ब्रेड का सेवन कम करें।

Madhumeh Rog mein kalaunji ka Sevan (मधुमेह रोग में कलोंजी का सेवन) "मधुमेह रोग में कलौंजी का सेवन लाभप्रद होता है"

मधुमेह रोग में कलोंजी का सेवन करना रोगियों के लिए अति फायदेमंद होता है कलोंजी  मधुमेह को नियंत्रित और कम करने में सहायक होती हैं। एक कब काली चाय में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से मधुमेह रोग में आराम मिलता है।

 मधुमेह नाशक स्वादिष्ट फल जामुन( anti diabetic delicious fruit berries)

पहाड़ों से लेकर मैदानों तक जामुन का वृक्ष पाया जाता है। सदाबहार हरे पत्तों वाला विशाल वृक्ष है। यह सदाबहार हरे पत्तों वाला एक छायादार वृक्ष भी होता है जामुन में मार्च-अप्रैल में सफेद फूल आते हैं तथा मई-जून में निबोरी जैसे हरि फल आते हैं फल पहले हरे फिर लाल और पकने के पर काले हो जाते हैं जुलाई-अगस्त में जामुन के फल बाहर पर होते हैं।
 
     जामुन का वैज्ञानिक नाम सिजिजुमिन कुमिनी है इससे एडजेनिया जांबो लाना भी कहते हैं । यह मिटियस कुल का पौधा है। लौंग भी जामुन कुल का वृक्ष है । जामुन को संस्कृत में जंबूल, असमिया में जमुआ जम्मू, बांग्ला में जाम, उड़िया में जाम कुक, गुजराती में जांबू, कन्नड़ में जंबूतेडेले, तमिल में न गई तथा साबल, मराठी में जामभूल, मलयालम में या वेल, कहते हैं। मध्य प्रदेश उत्तर पदेश में कट जामुन भी पाया जाता है। जिसके फल छोटे व बाकाठ होते हैं। जबकि जामुन के फल थोड़े लंबे बरस भरे होते हैं। जीने" फलेद "भी कहते हैं।
   जामुन का वृक्ष विशाल बताना दूधिया रंग का होता है। छाल काटने पर लाल रंग की होती है। जामुन के पत्ते आठ से 10 सेंटीमीटर तक लंबे चिकने और चमकदार होते हैं। जामुन में फूल छोटे दूधिया रंग के घुच्छो में होते हैं। फल पहले  हरे लाल फिर काले हो जाते हैं। फलों में एक गुठली होती है जामुन के फल का स्वाद खट्टा मीठा का कसैला होता है जामुन के फल खाने पर जीव का स्वाद कसैला व रंग जामुनी हो जाता है शुष्क क्षेत्रों को छोड़कर जामुन वृक्ष प्रायः सभी स्थानों पर तैयार हो जाता है पतझड़ बहुत कम समय के लिए होता है जामुन की कोपले बहुत ही मुलायम चिकनी होती हैं।
   जामुन की पत्तियां फल विस्ता छालों औषधि के काम आते हैं जामुन की छाल कंठ के रोग श्वास नली की सूजन, खांसी दमा  तथा फोड़े फुंसियों में लाभ पहुंचाती है। खून को साफ करने तथा गरारे करने में छाल का रस प्रयोग किया जाता है। छाल का रस बकरी के दूध के साथ सेवन करने से अतिसार रोग में फायदा होता है। जामुन की गुठली मधुमेह के रोग के लिए रामबाण औषधि है यद्यपि जामुन के फल का रस व सिर का भी मधुमेह को नियंत्रित करता है। 
धोबी जाति लाभप्रद पाया गया है इसे इंजेक्शन द्वारा लगाया जाता है सड़कों के किनारे छोटी पहाड़ियों में डालो बागों में जामुन के बीच पाए जाते हैं जून-जुलाई के पहली बरसात होते ही जामुन पक कर बाजारों में आने लगता है जामुन की लकड़ी इमारती काम में आती है लकड़ी कमजोर होती है इसलिए पुरखे जामुन के पेड़ पर चढ़ने से बच्चों को मना करते हैं जामुन का रस पेट के रोगों में रामबाण है इसका सिरक पेट के कीड़ों को नष्ट कर देता है आयुर्वेद में जामुन के अनेक औषधीय प्रयोग हैं
 बाजार में जामुन का रस बोतलों में मिलता है जामुन का अर्थ मशहूर है जामुन के वंश का एक अन्य वृक्ष लौंग है । लोंग का वैज्ञानिक नाम सीजीडियम अरोमामातिकुम हैं। लॉन्ग की कलियां को तोड़कर सुखा लिया जाता है। यही लॉन्ग कहलाती है जो दवा में और मसाले में प्रयोग की जाती। लॉन्ग अत्यंत सुगंधित उद्दीपक वायुसारी होती है। पेट के फूलने अपच उल्टी आदि लोगों को शांति प्रदान करती है। लौंग का तेल मशहूर है यह एंटीसेप्टिक होता है अर्थात टेल रोगाणु क अवरोधक है। लॉन्ग का तेल सर्दियों में दांत दर्द रोकने के प्रयोग में आता है

नोट 

उपर्युक्त चीजों का सेवन करने से आपको लाभ अवश्य मिलेगा परंतु यदि आपको कोई गंभीर समस्याएं एलर्जी की प्रॉब्लम हो तो आप डॉक्टर से नियमित संपर्क में रहने के उपरांत हिना घरेलू नुक्से का प्रयोग करें 

 घरेलू सुझाव के रूप में आपके सामने हमने यह लेख प्रस्तुत किया है आपको यह लेख कैसा लगा इसके बारे में जरूर अपनी राय दीजिएग ।

 

 
 

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