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हमारे अमुल्य खनिज "नमक"

सफेद नमक 
का इस्तेमाल करने के फायदे कम है और नुकसान ज्यादा ऐसा देखने को मिलता है। जबकि उसके तुलना मे सेंधा नमक जो कि रक्तचाप को नियंत्रित करने मे सहायक होता है और सफेद नमक रक्तचाप को अनियंत्रित कर देता है ।सेंधा नमक हमारे मानसिक तनाव को से हमारी सुरक्षा करता है जबकि सफेद नमक हमारे तनाव मे इजाफा करता है ।सेधा नमक जहाँ हमारे शारीरक दर्द ,थकान को दुर करता है वही सफेद नमक शारीरक थकान बढा देता है ।सेंधा नमक के सेवन से अस्थमा ,साइनस आदि बीमारियों मे राहत मिलता है।
       




अब देखने वाली बात ऐ है कि जो पदार्थ सीधे  प्राकृतिक रुप मे हमको मिलता है हम उसको कितना समझते है ।जब हम किसी वैद के पास जाते है या आजकल के आधुनिक डाक्टर के पास भी जाते है तो वह कही भी दर्द या सुजन या गैस की समस्या से ग्रसित हो तो वह सलाह देता है कि सेंधा नमक का इस्तेमाल करने को कहते है क्यों नही सफेद नमक प्रयोग करने को क्योंकि उनको पता है कि सेंधा नमक गुणो की खान है और जो कि हमे अपनी संस्कृति की जडो से जोडे रहता है ।हम कितने भी आधुनिक बन जाऐ परंतु सफेद नमक पर चढे हुऐ साइनाइड को पचाने की आधुनिकता नही आ सकती ।
       


 प्रकृति ने हमे बहुत सारे बेशकीमती खजाने सौपे जिसका सेवन करके हम खुद को स्वस्थ्य ,सौदर्ययुक्त, वुद्विमान ,बलवान रख सकते है परंतु नमक की सफेदी को देखकर स्वास्थ्य की गुणवत्ता से परिपूर्ण सेंधानमक और काले नमक को भुल जाते है। परंतु हमे अपने स्वास्थ्य को ध्यान मे रखते हुऐ प्राकृतिक सेंधा नमक को अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने मे उपयोग करना चाहिए ।

काला नमक

 आमतौर पर खाना पकाने में प्रयोग किया जाता है और यह भारतीय व्यंजनों में एक लोकप्रिय घटक है।


काला नमक में मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड और सोडियम सल्फेट, सोडियम बाइसल्फेट, सोडियम बाइसल्फाइट, सोडियम सल्फाइड, आयरन सल्फाइड और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी अशुद्धियाँ होती हैं।

परंपरागत रूप से, इसे त्रिफला, बबूल आदि औषधी जड़ी-बूटियों, बीजों और मसालों के साथ मिलाया जाता था और फिर उच्च तापमान पर गर्म किया जाता था।

आज, सोडियम क्लोराइड, सोडियम सल्फेट, सोडियम बाइसल्फेट और फेरिक सल्फेट के संयोजन से कई काले नमक कृत्रिम रूप से बनाए जाते हैं। फिर नमक को चारकोल के साथ मिलाया जाता है और अंतिम उत्पाद तैयार होने से पहले गरम किया जाता है।

काला नमक उत्तरी भारत में खास कर हरियाणा के हिसार जिले में इस तरह तैयार किया जाता है। नमक के क्रिस्टल काले दिखाई देते हैं और बारीक़ पीसने पर यह आमतौर पर बैंगनी रंग का होता हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, काला नमक अपने लघु और उष्ण गुणों के कारण लीवर में पित्त के उत्पादन को बढ़ाकर पाचन में सुधार करने में मदद करता है।

आयरन और मिनरल्स से भरपूर हिमालयन रॉक सॉल्ट यानी काला नमक सेहत के लिए बहुत अधिक लाभकारी होता है। काला नमक और भी कई नामों से जाना जाता है जैसे, रॉक सॉल्ट, पिंक सॉल्ट, ब्लैक सॉल्ट और हिमालयन सॉल्ट।

- काला नमक के सेवन से हमारे मस्तिष्क में नींद और खुशी से जुड़े हॉर्मोन्स का स्तर बढ़ता है। इसके सेवन से मेलाटोनिन हॉर्मोन का स्तर बढ़ता है, जो अच्छी और गहरी नींद लाने में सहायता करता है।

-साथ ही काला नमक सेराटोनिन हॉर्मोन को भी बढ़ाता है। यह हमें तनावमुक्त रखने का कार्य करता है। जब हम तनाव मुक्त रहते हैं और पूरी नींद लेते हैं तो ब्रेन और मेमोरी से जुड़े अधिकांश रोग हमसे दूर रहते हैं।

नोट :- ये जानकरी अलग-अलग रिसर्च पेपर्स से लिए गए हैं। साथ ही पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के जानकार व्यक्तियों के अनुभवों का भी यहां उपयोग किया गया है।


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