भुलो और अत्यधिक उपभोक्तावादी होने का असर सिर्फ हमारे वर्तमान को ही नही प्रभावित करेगा बल्कि आनेवाली पीढियों के लिए अभिषाप से कम नही होगा ।प्रकृति के जिन संसाधनों को हम अपने दोनो हाथो से लुटा रहे उसी का उपभोग करने के लिए हमारी आगे की पीढियां तरसेगी ।हम इतने स्वार्थी न बने कि अपने ही बच्चों के दुश्मन भविष्य मे बन जाए इसीलिए प्रकृति से प्यार के साथ साथ उसके संसाधनों का भी संरक्षण और संवर्द्धन करे।
एनवायरनमेंट की सुरक्षा कैसे करे ?
पिछले दो दशकों में पर्यावरण ने नीति निमार्ताओ वैज्ञानिकों और विश्व के अनेक देशों में आम आदमी का ध्यान आकर्षित किया है। वे अकाल, सूखा, इंर्धन की कमी, जलाने की लकड़ी और चारा, वायु और जल प्रदूषण, रासायनिको और विकिरणो की भवायह समस्या, प्राकृतिक संसाधनों, वन्य जीवन का लुप्त होना एवं वनस्पति तथा जीव जंतुओं को खतरे जैसे मुद्दों के प्रति अधिक सतर्क होते जा रहे है। लोग आज वायु, जल, मृदा और पौधों जैसे प्राकृतिक पर्यावरणीय संसाधनों की रक्षा करने की आवश्यकता के प्रति सजग है तथा यह प्राकृतिक सम्पदा है जिस पर मनुष्य निर्भर करता है।
पर्यावरणीय मुद्दे महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके समाधान के बिना स्थिति बहुत भयावह होगी। यदि पर्यावरणीय समस्याओं को हल नहीं किया गया तो यह पृथ्वी भावी पीढ़ी के रहने योग्य नहीं रहेगी। आज लोगों की और इस ग्रह की आवश्यकता एकाकार हो गई है। इस सच्चाई से इन्कार नहीं किया जा सकता कि भविष्य को संभव बनाने के लिए पर्यावरण की रक्षा एवं बचाव अनिवार्य है। वास्तव में मनुष्य की आवश्यकताएं बढ़ गई है और उनके अनुरूप पर्यावरण में परिवर्तन किए जा रहे है।
पर्यावरणीय मुद्दे महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके समाधान के बिना स्थिति बहुत भयावह होगी। यदि पर्यावरणीय समस्याओं को हल नहीं किया गया तो यह पृथ्वी भावी पीढ़ी के रहने योग्य नहीं रहेगी। आज लोगों की और इस ग्रह की आवश्यकता एकाकार हो गई है। इस सच्चाई से इन्कार नहीं किया जा सकता कि भविष्य को संभव बनाने के लिए पर्यावरण की रक्षा एवं बचाव अनिवार्य है। वास्तव में मनुष्य की आवश्यकताएं बढ़ गई है और उनके अनुरूप पर्यावरण में परिवर्तन किए जा रहे है।
पर्यावरण प्रदूषण की रोक थाम के लिए भारत सरकार द्वारा चलाए गए अभियान
पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा लिए गए कुछ उपाय -- पर्यावरण को प्रदूषित करने वाली फैक्टरियों के विरूद्ध तेजी से न्याय दिलाने के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जा रहा है।
- सरकार बाजार में बिकने वाले उत्पादों के लिए सख्त नियम लागू कर रही है। इन मानको पर खरा उतरने वाले उत्पादों को उत्कृष्टता का प्रमाण पत्र जैसे आई. एस. आई मार्क दिया जाता है।
- तेल शोधक कारखानों को शीशा मुक्त पेट्रोल बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। भारतीय पेट्रोल में शीशा (लैड) की मात्रा अधिकतम होती है जो मोटर गाडियो के माध्यम से अधिकांश प्रदूषण फैलाता है।
- आठ रासायनिक कीटनाशको, जिनमें डीडीटी, बीएचसी, एल्ड्रिन और मेलाथियन शामिल है, को बाजार से हटा दिया गया है तथा इनके स्थान पर सुरक्षित जैविक कीटनाशकों को लाने की योजना है।
- इसका मुख्य कार्य 40 मिलियन टन फलाई ऐश को जो कि थमर्ल प्लांटो के निकट पहाड के रूप में पडी है। ईटो में तथा शहर के कूड़ा कर्कट को उर्जा में और सीवर के मल को उर्वरक में परिवर्तित करना है।
- (जन दायित्व बीमा) इसके अंतर्गत सभी कम्पनियों के लिए 48 घंटे में पब्लिक लायबिल्टी इन्श्योरेंस का भुगतान करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।6 : मोटर वाहनो द्वारा प्रदूषण फैलाने के विरूद्ध प्रदूषण विरोधी अभियान को सख्ती से लागू किया जा रहा है। निश्चित मापदण्डो का पालन न करने वाले वाहनों पर भारी जुर्माना भी हो सकता है।
- ऐसे होटलों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की गई है जो कानूनो की अनदेखी करते हुए समुद्री तट पर अतिक्रमण करते है।
- राष्ट्रीय नदी प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव है जो राष्ट्रीय स्तर पर जल प्रयोग एवं कूड़ा प्रबंधन के लिए नीति बनाएगा।
- ऊर्जा क्षेत्र प्रदूषण फैलाने का मुख्य कारक है इसलिए मुख्य ऊर्जा स्रोत को बढ़ाने के स्थान पर ग्रामीण स्तर पर विकेन्दित्र ऊर्जा निर्माण की योजना है।
- सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध करने का प्रस्ताव है। दिल्ली सरकार ने इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाई है एवं इसे लागू कर दिया है। संकट में पड़ जाएगा।
वैश्विक जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम फलस्वरूप कृषि तंत्र प्रभावित होकर हमें कई सुलभ खाध पदार्थों की सहज उपलब्धि से वंचित कर सकता है। अंगूर, संतरा, स्ट्रॉबेरी, लीची, चैरी आदि फल ख्वाब में परिवर्तित हो सकते हैं। इसी प्रकार घोंघे, यूनियों, छोटी मछलियां, प्रास बाइल्ड पेसिफिक सेलमान, स्कोलियो डोने जैसे कई जलचर तथा समुद्री खाद्य शैवाल मांसाहारियों के भोजन मीनू से बाहर हो सकते हैं। तापक्रम में वृद्धि के कारण वर्षा वनों में रहने वाले प्राणी तथा वनस्पति विलुप्त हो सकते हैं।
हमारी सांस्कृतिक ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुंच सकता है और हम पर्यटन के रूप में विकसित स्थलों से वंचित हो सकते हैं। वर्षों तक ठोस बर्फ के रूप में जमे पहाड़ों की ढलानों पर स्कीइंग खेल का आनंद बर्फ के अभाव में स्वप्न हो सकता है। हॉकी, बेसबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस, गोल्फ, आदि खेलों पर जंगलों में उपयुक्त लकड़ी का अभाव तथा खेल के मैदानों पर सुखे का दुष्प्रभाव देखने को मिल सकता है। विभिन्न खेलों में कार्यरत युवतियों की आजीविका छीनने से व्यभिचार और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है।
तापक्रम परिवर्तन के कारण अलग-थलग पड़े समुद्री जलचर अपनी सीमा लांघ सकते हैं तथा समुद्री सीमाओं को लांघकर अन्य जलचरों को हानी पहुंचा सकते हैं। वैश्विक तापक्रम वृद्धि के फलस्वरूप जंगली जीवों की प्रवृत्ति तथा व्यवहार में परिवर्तन होकर उनकी नस्लों की समाप्ति हो सकती हैं। प्रवजन पक्षी (माइग्रेट्री बर्ड्स) अपना रास्ता बदलकर भूख और प्यास से बदहाल हो सकतें हैं। चिड़ियों की आवाजों से हम वंचित हो सकते हैं। सांप, मेंढक तथा सरीसर्प प्रजाती के जीवों को जमीन के अंदर से निकल कर बाहर आने को बाध्य होना पड़ सकता है।
पिघलते ध्रुवों पर रहने वाले स्लोथ बीयर जैसे बर्फीले प्रदेश के जीवों को नई परिस्थितियों और पारिस्थितिकी से अनुकूलनता न होने के कारण अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ सकता है। बढ़ते तापमान के कारण उत्पन्न लू के थपेड़ों से जन-जीवन असामान्य रूप से परिवर्तित हो कर हमारे पूर्वजों की दूरदर्शिता की याद के रूप में गहरे कुओं व बावड़ियों, कुइयों आदि के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
विश्व स्वास्थ संगठन ने हाल ही में जारी अपनी रिर्पोट में वैश्विक जलवायु परिवर्तन के भावी परिदृश्य के रूप में बढ़ते तापमान के साथ बढ़ते प्रदूषण से बीमारियों विशेषतः हार्ट अटैक, मलेरिया, डेंगू, हैजा, एलर्जी तथा त्वचिय रोगों में वृद्धि के संकेत देकर विश्व की सरकारों को अपने स्वास्थ्य बजट में कम से कम 20 प्रतिशत वृद्धि करने की सलाह दी है।
विभिन्न देशों के विदेश मंत्रालयों तथा सैन्य मुख्यालयों दवारा जारी सूचनाओं में वैश्विक तापमान वृद्धि से विश्व के देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरे के मंडराने का संकेत दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ महासचिव (बान की मून) ने इसी वर्ष अपने प्रमुख भाषण में वैश्विक तापमान वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे ‘युद्ध’ से भी अधिक खतरनाक बताया है। वैश्विक जलवायु परिवर्तन के भविष्य दर्शन के क्रम में यह स्पष्ट है कि पर्यावरण के प्रमुख जीवी घटकों हेतु अजीवीय घटकों वायु, जल और मृदा हेतु प्रमुख जनक वनों को तुरंत प्रभाव से काटे जाने से संपूर्ण संवैधानिक शक्ति के साथ मानवीय हित के लिए रोका जाए, ताकि बदलती जलवायु पर थोड़ा ही सही अंकुश तो लगाया जा सके।
अन्यथा सूखते जल स्रोत, नमी मुक्ति सूखती धरती, घटती आक्सीजन के साथ घटते धरती के प्रमुख तत्व, बढ़ता प्रदूषण, बढ़ती व्याधियां, पिघलते ग्लेशियरों के कारण बिन बुलाए मेहमान की तरह प्रकट होती प्राकृतिक आपदाएं मानव सभ्यता को कब विलुप्त कर देंगी, पता नहीं चल पाएगा। आवश्यकता है वैश्विक स्तर पर पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ प्रस्फुटित संतुलन का एकनिष्ठ भाव निहित
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