आने वाले कोविड 19: कोविड संक्रमण ? किस किस को रहना है सावधान? ज्यादा खतरा किसे? करोना कॉल संक्रमण भय (fear of corona kal sankraman )
कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए सभी व्यक्तियों को इससे सुरक्षा एवं बचाव करनी चाहिए। जिन लोगों का परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ही कमजोर हो लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए उन्हें आसानी से ऐसे जगहों पर नहीं रहना चाहिए जहां पर भीड़भाड़ अधिक होता है अगर किसी कारणवश जाना भी पड़ जाए तो उन्हें पूरी सावधानी और सतर्कता के साथ जाना चाहिए। क्योंकि करो ना कॉल मी जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है कोविड-19 का संक्रमण तेजी से जकड़ लेता है। ऐसे में हमें और भी सावधानी बरतनी चाहिए करो ना कॉल में की गई थोड़ी सी भी लापरवाही आपके जीवन के लिए घातक हो सकती है इसलिए अपने जीवन और स्वास्थ्य को बचाने के लिए कोविड-19 के सुरक्षा पूरी सतर्कता सावधानी से पालन करें।
मधुमेह रोगियों को भी कोविड-19 के प्रकोप से बचने की अत्यधिक आवश्यकता है क्योंकि कोविड-19 ज्यादातर फेफड़ों पर असर करता है। मधुमेह रोगियों को अपने खानपान में विशेष सावधानी में सतर्कता रखने की आवश्यकता है ऐसे भोजन करें जिनको उनके स्वास्थ्य पर कोई भी पूरा प्रभाव ना हो । हालांकि भारत जैसे देश में टीकाकरण का कार्य बहुत ही सफलता एवं सुचारू पूर्वक हुआ है जिसके कारण कोविड-19 का प्रभाव उतना देखने को नहीं मिलेगा लेकिन फिर भी सावधानी और सतर्कता बरतना अनिवार्य है। सबसे पहले तो हमें अत्यधिक परेशान और घबराने की आवश्यकता है सावधानी की सुरक्षा का मूल मंत्र इसलिए करो ना कॉल से घबराए नहीं बल्कि सतर्क और सावधान में है और अपनी रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने के लिए अपनी दिनचर्या को सुचारू रूप से संचालित करें जिससे आपका शरीर को दिमाग दोनों संकलित रहेगा ।
ह्रदय संबंधित रोगों से ग्रसित लोगों
करो ना कॉल के दौरान नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करवाना चाहिए। अत्यधिक मात्रा में स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए क्योंकि ह्रदय रोगियों के लिए अत्यधिक मात्रा में लेने से ज्यादा परेशानी हो जाती है इसलिए किसी तरह की भ्रांति में ना पडकर आपको अपने स्वास्थ्य को सुचारू रूप से देखभाल के साथ नियमित और सैनिक जीवन यापन करें ।
सांस संबंधीबंधी रोगों के लिए कोविड-19 की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि स्वास्थ संबंधी परेशानी होने से हमारी रोगों से लड़ने की क्षमता थोड़ी कमजोर हो जाती है इसलिए हमें ज्यादा सावधान हो सतर्क रहने की जरूरत है। निमित्त स्वच्छता बना के रखना चाहिए और र भीड़-भाड़ वाले स्थान से थोड़ा बचकर रहना चाहिए क्योंकि मेरे वाला स्थान पर संक्रमण फैलने का तभी खतरा रहता है इसलिए प्रयास करना चाहिए कि भीड़भाड़ वाले स्थान पर या तो ना जा या तो फिर जाए तो पूरी सावधानी से जाए। मास्क का प्रयोग करें क्योंकि मास्क आपको संक्रमण से भी बचाएग और प्रदूषित वातावरण बचाएगा।
कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के प्रकोप से दुनिया थम गई है। इस दूर और व्यापक रूप से फैली बीमारी ने वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर मानव हानि की है, इसलिए इस महामारी की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) अन्य देशों के साथ मिलकर विभिन्न उपायों के माध्यम से इस महामारी पर काबू पाने का प्रयास कर रहा है।
बुजुर्गों के लिए पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। दुनियाभर में अब तक इससे 12 करोड़ 95 लाख से भी अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 28 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञ यह पहले भी कह चुके हैं कि बुजुर्गों को कोरोना से संक्रमित होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और अब एक नए शोध में यह पाया गया है कि उनके कोरोना से दोबारा संक्रमित होने का खतरा भी ज्यादा है। शोध में सुझाव दिया गया है कि 65 साल से अधिक उम्र के जो लोग कोरोना से संक्रमित होकर ठीक हो चुके हैं, उन्हें भी वैक्सीन दी जानी चाहिए, क्योंकि प्राकृतिक इम्यूनिटी पर भरोसा नहीं किया जा सकता है
बच्चो के लिए बच्चों को इस समय सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब और महत्व समझाना बहुत जरूरी है। बेवजह लोगों के पास जाने न दें और लोगों से दूरी बनाकर रखने के लिए कहें। बच्चों को घर से बाहर खेलने न भेजें और फिलहाल दोस्तों से मिलना भी बंद कर दें।
कोरोना काल की विशेष व्यायाम
कोविड-19 के दौरान हमें अपनी दिनचर्या पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। सही समय पर सोना और सही समय पर जागना चाहिए और साथ ही नियमित में योगाभ्यास भी करना चाहिए जैसे अगर संभव हो तो हमें अनुलोम विलोम प्राणायाम नियमित 10 से 15 मिनट जरूर करना चाहिए। अनुलोम विलोम प्राणायाम से हमारी सांसों की गति पर विशेष ध्यान केंद्र किया जाता है।तमाम आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि इस अकेले प्राणायाम को करने से ही कई तरह के चमत्कारी परिणाम प्राप्त होते हैं. यदि इस प्राणायाम का अभ्यास रोजाना सुबह और शाम को 15 मिनट किया जाए तो ये शरीर के सभी नाड़ियों को शुद्ध करता है, साथ ही शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने में भी मदद करता है. अनुलोम-विलोम करने से दिमाग भी तरोताजा रहता है ।
बच्चों को घर पर ही गेम्स खिलाएं और दोस्तों से ऑनलाइल वीडियो कॉलिंग करवा दें। बच्चे को ठीक तरह से मास्क पहनने के लिए कहें।
यदि आपका बच्चा अपने दोस्तों से मिलने की कहता है तो उसे प्यार से समझाएं। एक ही बिल्डिंग या सोसायटी के बच्चों के साथ भी खेलने की परमिशन न दें। बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होती है इसलिए उन्हें घर पर रखना बहुत जरूरी है।
ऐसा ही एक उपाय, जिसे हमारे भारत जैसे घनी आबादी वाले देश ने चुना है, देश स्तर पर लॉकडाउन करके इसके प्रसार को रोकना है। इस बढ़ी हुई निवारक रणनीति ने कम से कम अविश्वसनीय रूप से इससे प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या को कम किया है क्योंकि शटडाउन के कारण संक्रमितों का संचरण कम हो गया है।
महामारी के बारे में जागरूकता दूसरी सबसे अच्छी बात है जिसे बहुत गंभीरता से लिया जा रहा है। सरकार और अन्य निकाय इस महामारी के बारे में समाचार और जानकारी को यथासंभव प्रचारित और प्रसारित कर रहे हैं ताकि लोगों के बीच इसकी जटिलता पैदा हो और निवारक उपायों का पूरी तरह से पालन किया जा सके।
विशेषज्ञों के उपायों का एक संकलित संस्करण लेकर आए हैं, जो हमें इस कठिन समय से आसानी से और सुरक्षित रूप से निकालने में मदद करते हैं।
अलगाव - सुरक्षित रहने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी सामाजिक जोखिम से बचना है
स्वच्छता - आवश्यकता के इस समय शरीर और परिवेश की स्वच्छता आवश्यक है
व्यक्तिगत स्वच्छता - हाथों को साफ करना और अपने चेहरे की त्वचा को बार-बार छूने से बचना एक प्रभावी उपाय है
दूरी बनाए रखना - न्यूनतम 1 मीटर की दूरी बनाए रखते हुए शारीरिक संपर्क से बचना आवश्यक है। इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए मास्क का उपयोग/छींकते या खांसते समय मुंह को ढंकना अनिवार्य है।
तो बस इन चार जरूरी कदमों का पालन करने से कोरोना से बचाव हो जाता है। क्योंकि आपकी सुरक्षा हमारे लिए महत्वपूर्ण है।
आहार का रखें विशेष ध्यान
किसी भी निर्धारित उपचार के अभाव में, COVID-19 के खिलाफ टीका और चिकित्सीय सिफारिशें उपलब्ध होने के कारण, अधिकांश देशों की सरकारें और कई अधिकृत अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन, ब्रिटिश डायटेटिक एसोसिएशन और यूडी फूड एंड एडमिनिस्ट्रेशन अधिकतम पर जोर दे रहे हैं। कच्ची सब्जियों और फलों, मेवों और बीजों का उपयोग; दालें और साबुत अनाज; असंतृप्त तेल; सोडा, नमक, चीनी और ट्रांस वसा का सेवन सीमित करें; और जंक और मीठा खाना बंद कर दें। भोजन के अलावा, दिशानिर्देश शारीरिक व्यायाम, ध्यान और पर्याप्त नींद और सूर्य के प्रकाश के अच्छे संपर्क की भी सलाह देते हैं।
ये सिफारिशें और दिशा-निर्देश पहले से ही भारत की प्राचीन उपचार प्रणाली, यानी आयुर्वेद का हिस्सा रहे हैं, जो बताता है कि जीवन चार स्तंभों पर खड़ा है, आहार (आहार), विहार (जीवन शैली), आचार ( बाहरी के साथ व्यक्ति का आचरण )। वर्ल्ड) और विचार (मानसिक स्वास्थ्य). इसके अनुसार भोजन एक औषधि की तरह है जो जीवन के तत्वों, भोजन और शरीर के बीच संबंध स्थापित करके व्यक्ति को स्वस्थ कर सकता है। व्यक्तियों के स्वभाव, शारीरिक और भावनात्मक अवस्थाओं को उनके भोजन विकल्पों, मात्राओं और जीवन शैली द्वारा निर्धारित और नियंत्रित किया जा सकता है। यह सर्वविदित है कि जीन, पर्यावरण, भोजन और भावनात्मक कारकों के बीच घनिष्ठ संबंध है जो मूड, भोजन और जीवन शैली के रोगों के द्विदिशीय दुष्चक्र को जन्म देता है। आयुर्वेद स्वस्थ, शांतिपूर्ण जीवन जीने और कोविड-19 सहित विभिन्न बीमारियों से लड़ने के लिए स्वस्थ जीवन शैली, ध्यान, प्राणायाम, पर्याप्त नींद और सात्विक भोजन के हस्तक्षेप की सिफारिश करता है।
कैसा हो भोजन कोविड 19 के दौरान
आयुर्वेद मानता है कि उचित भोजन चयन और आहार कार्यक्रम शांत दिमाग के साथ समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं। भगवद् गीता और योग शास्त्रों ने भोजन को उनके गुणों के आधार पर तीन प्रकारों में विभाजित किया है (जिन्हें गुण कहा जाता है)। वे सत्व (सतोगुण), राजस (रजोगुण) और तमसा (तमोगुण) हैं। सत्व का अर्थ है अच्छाई, जबकि राजस का अर्थ है आक्रामक/सक्रिय, और "सर्वश्रेष्ठ" से "बुरे" की ओर आदेशित। तमसा का अर्थ है निष्क्रिय। एक सात्विक आहार का मतलब उन खाद्य पदार्थों और खाने की आदतों को शामिल करना है जो प्राकृतिक, महत्वपूर्ण और ऊर्जा युक्त हैं और शांति, शुद्धता प्रदान करते हैं और दीर्घायु, बुद्धि, शक्ति, स्वास्थ्य और आनंद को बढ़ावा देते हैं। सात्विक खाद्य पदार्थों के उदाहरण फल, सब्जियां, अंकुरित अनाज, अनाज,नट और बीज, कम वसा वाले दूध और दुग्ध उत्पादों, शुद्ध फलों के रस, और पका हुआ भोजन जो खाना पकाने के 3-4 घंटों के भीतर खाया जाता है, आदि।
कम मसाले वाले आहार खाए व मसालेदार, गर्म या तीखे, खट्टे और नमकीन स्वाद के साथ कम तले भुने आहार का सेवन करना चाहिए । Covid-19 की समस्या उसको नहीं होती जिसकी इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत रहता है और ज्यादा तेल मसाले वाली और ज्यादा चीनी ज्यादा नमक चीजों को खाने से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और हम रोगों से लड़ने में अक्षम हो जाते हैं। इसलिए कोई भी ऐसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए जिसमें ज्यादा मिठास और ज्यादा नमक हो जैसे चॉकलेट टॉफी जी बिस्किट केक इन सब का प्रयोग कम मात्रा में करना चाहिए। स्वास्थ्य वर्धक चीजों का अत्यधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए जैसे अंकुरित अनाज, दलिया, , सोयाबीन , मूंगफली मोटे अनाज आदि का सेवन करना चाहिए ज्यादा उपयुक्त तो यह है कि हम घर के बने हुए भोजन का प्रयोग करें और पानी गुनगुना ही पिए जिससे हमारी पाचन शक्ति मजबूत होगी और खाने को पचाने में मदद मिलेगी।
एक तामसिक आहार, अज्ञान की विधा, वह है जिसमें अधिक पका हुआ, बासी, तेज़, दोबारा गरम किया हुआ, माइक्रोवेव किया हुआ, या जमा हुआ भोजन शामिल होता है; मृत भोजन जैसे मांस, मछली, मुर्गी पालन, अंडे; शराब, सिगरेट और व्यसन की दवाएं। तामसिक भोजन पचने में कठिन होता है और जड़ता, नीरसता और नींद लाने वाला होता है। ये सभी मोटापा, मधुमेह, हृदय और यकृत रोग का एक महत्वपूर्ण कारण हैं ।
प्रसंस्कृत और जंक फूड के रूप में उपलब्ध राजसिक और तामसिक खाद्य पदार्थ उच्च अनुपात में कार्बोहाइड्रेट, चीनी और ट्रांस-वसा से भरे होते हैं। उच्च फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप (एचएफसीएस) और टेबल चीनी का संयोजन अपने बेहतर शेल्फ-जीवन, अधिक स्वादिष्टता और प्रतिस्पर्धी मूल्य के कारण स्वीटनर के रूप में खाद्य उद्योगों की प्राथमिक पसंद बन गया है। इसके परिणामस्वरूप समग्र स्वीटनर सेवन में 30% की अतिरिक्त वृद्धि हुई और हार्मोन इंसुलिन और लेप्टिन को विनियमित करने में असमर्थता और घ्रेलिन के उत्पादन को बाधित करने के लिए, सभी कारक जो हमारे मस्तिष्क में तृप्ति केंद्र को प्रभावित करने के लिए जाने जाते हैं, रक्त शर्करा के स्तर और भूख को नियंत्रित करते हैं। फास्ट फूड और तले हुए खाद्य पदार्थ जैसे फ्रेंच फ्राइज़, डोनट्स, केक, पाई क्रस्ट, बिस्कुट, फ्रोजन पिज्जा, कुकीज़, पटाखे, और स्टिक मार्जरीन को हाइड्रोजनीकृत या कृत्रिम ट्रांस-वसा (या ट्रांस-फैटी एसिड) का उपयोग करके बनाया जाता है जो उनकी खाद्य प्रसंस्करण आवश्यकताओं को पूरा करता है, उपयोग में आसान, सस्ता और वाणिज्यिक फ्रायर में कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है। ज्यादा चीनी, ज्यादा वसा और मांस प्रोटीन आहार ब्लड शुगर के स्तर के नियमन में व्यवधान पैदा करते हैं,जिगर में वसा का निर्माण, उच्च यूरिक एसिड सांद्रता, गुर्दे की कार्यक्षमता में कमी और धमनियों के मोटे होने और वसा के जमाव में वृद्धि।
ज्यादा से ज्यादा प्रकृति के संरक्षण में रहने का प्रयास करें
करुणा काल में जीवन को कई मायने में पूर्ण परिभाषित कर दिया। जिस्म प्रकृति का सम्मान इसका पोषण और इसके सानिध्य की आवश्यकता गहराई से अनुभव हुई। करुणा की दूसरी लहर ने ऑक्सीजन की कमी एक मुद्दा बनी जिसके अभाव में कितने सारे लोगों ने अपने दम तोड़े थे। ज्ञात हो कि पृथ्वी पर पेड़ पौधे ऑक्सीजन के सबसे बड़े स्रोत है और इनकी प्रचुरता स्वस्थ वातावरण का निर्माण करती है।
पेड़ पौधों की पत्तियों में ऑक्सीजन तैयार होता है जहां प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के अंतर्गत कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग होता है और ऑक्सीजन का विसर्जन। एक पेड़ प्रतिदिन औसतन 2721 किलोग्राम और वर्ष भर में 993165
किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन करता है जबकि एक व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 0.84 किलोग्राम ऑक्सीजन ग्रहण करता है। यह भी ज्ञात हो कि यह भी ज्ञात हो कि सामान्यतया फिर दिन में आपसे जनों रात को कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।
कहने का तात्पर्य यह है कि जीवन को अत्यधिक अत्याधुनिक बनाने से अच्छा है हम प्रकृति के संरक्षण में रहे क्योंकि प्रकृति ही वह डॉक्टर है जो हमारे हर समस्या को बखूबी समझती है क्योंकि प्रकृति से बड़ा वैद हमने आज तक नहीं देखा। प्रकृति कोई भेदभाव नहीं करती ना ही कोई फिश मांगती है परंतु आपकी सारी समस्याओं का निदान बड़े ही आराम से और आसानी से करती है इसलिए प्रकृति की जितनी अधिक सानिध्य ता रहेगी उतना हमारा स्वास्थ्य उत्तम सुरक्षित रहेगा। महंगे उपचार के बजाय हम अगर कुछ पौधे अपने आसपास लगा दे तो हमारा ह्रदय ,फेफड़ा, गुर्दा, सभी स्वस्थ और मजबूत रहेंगे।
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